पापी परिवार की पापी वासना – Update 7 | Incest Story

पापी परिवार की पापी वासना – Dirty Incest Sex Story
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7 गंगा स्नान

सोनिया ने कनखियों से देखा कि

 भैया अभी भी बाथरूम में खड़े सीन का लुफ्त उठा रहें हैं। 

सोनिया जैसे अन्जान बन कर उसकी तरफ़ होकर खड़ी हो गयी 

और साबुन को जाँघों के बीच पेड़ पर मलने लगी। 

झाग चूत से टपक कर जाँघों को लसलसा बना रहा था।

जय ने देखा कि उसके पसन्दीदा अंग, जो बहन की चूचियाँ थीं, 

उनपर वो साबुन मल रही थी।

“जय मादरचोद! काश तेरी किस्मत मे होता

 बहिन पर साबुन मलना!” जय ने मन में सोचा। 

इस नजारे का असर अब सीधा उसके लन्ड पर होने लगा था। 

उसका दायाँ हाथ खुद-ब-खुद तेजी से

 तनते हुए लन्ड को अपनी मुट्ठी में ले चुका था। |

कनखियो से सोनिया ने भैया की उंगलियों को लन्ड को जकड़ कर

 उसे आगे- पिछे हिलाते हुए देखा। 

“भोसड़- चोद लगा मुठ मारने !” 

साबुन के झाग से से उत्तेजित उसकी चूत में इस खयाल ने एक करन्ट दौड़ा दिया। 

अपने नंगे जिस्म का भाई पर ये असर देख वो रोमंचित हो गयी थी

 और वासना के हॉरमॉन उसके जवान खून को खौला रहे थे।

अब वो भी भाई के सामने हस्तमैथुन करना चाहती थी। 

भाई जय की मुट्ठी में कूदते लंड पर नजरें गाड़े 

सोनिया ने साबुन से सनी एक उंगली से अपनी गर्माई चूत के झोलों को खोला।

 सोनिया ने शॉवर की धार को अपनी चूत पर डाला जैसे

 कोई तांत्रिक योनि को दूध से नहला रहा हो। 

सोनिया ने दीवार के सहारे पिछे हाथ टेक कर जाँघों को 

और फैलाया ताकि पानी की धार ठीक उसकी चूत पर बरसने लगे । 

“ऊऊह्ह्ह !” 

सोनिया मजे से कराही। 

बहन सोनिया को बेधड़क मस्ती से कराहते सुन जय की मुठ्ठी 

डबल स्पीड से खून से उबलते लन्ड पर चलने लगी थी। 

चूत का फड़कता चोचला और 

उसके नीचे चूत की मादक गहराइयाँ उसे दिख रहीं थीं।

“रंडी की चूत बड़ी गरम और तंग होगी !” 

जय के लन्ड पर फैली नसें अब धड़क रहीं थीं और

 लन्ड खुद-ब-खुद फुदक रहा था – मालूम होता था 

कि टट्टों में वीर्य अब खौल रहा है।

 बस अब कभी भी सरसराता हुआ उडेल सकता था।

सोनिया ने भाई के लन्ड को निहार कर अपनी 

टपकती चूत में एक पतली उंगली डाली।

 बाथरूम में उनकी मुलाकात के बाद अब वो लन्ड कितना बड़ा हो गया था!

 वाकई तेल पिलाये लट्ठ सा सख्त था। 

पिछली रात डैडी के लन्ड से कोई कम नहीं। 

भैया को यूं ताबड़तोड़ मुठ मारते देख सोनिया की चूत का चोचला अब फड़कने लगा था।

 चोचले पर उंगलियाँ फेरते उसने देखा कि

 जय अपनी मुट्ठी से और तेजी से लन्ड को रगड़ने लगा।

सोनिया इस पाप भरे सुख की अनुभूति में पूरी तरह डूब चुकी थी। 

अब बस वो चाहती थी कि भाई-बहन एक साथ ही चरम आनन्द को पायें।

 जब भाई के लन्ड से मलाई की धार फूटे, 

ठीक उसी के साथ सोनिया की चूत मे भी मस्ती का करन्ट दौड़े। 

अब शरम को पूरी तरह त्याग कर के

 वो शॉवर बंद कर ठीद उसके सामने खड़ी हो गयी।

बहन के बेहया रंडीपने से जय के हाथ की

 हरकत में पल भर की रुकावट भी नहीं हुई।

 वॉशबेसिन के सहारे उसने अपने मुस्टंड लन्ड को दनादन दुहना जारी रखा।

 बहन सोनिया की मासुमियत की शराब को उसकी

 सैक्सोत्तेजना ने और भी नशीली बना दिया था। 

इस शराब का सुरूर जय की आँखों पर चढ़ रहा था।

 उसकी सुडौल चूचियों पर निप्पल काले मीठे जामुनों की तरह लगते थे। 

पानी की अन्गिनत बून्दै गोरी-गोरी चूचियों की मरमरी

 चमड़ी पर ओस की तरह चमचमा रही थीं। 

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