Reading Mode

CHAPTER – 2

 अचरज में बेटी

मिस्टर शर्मा का अनुमान बिल्कुल गलत था कि बच्चे सो रहे हैं। 

सोनिया तो दरअसल जाग रही थी। 

अट्ठारह साल की सोनिया परिवार में नन्ही गुड़िया सी थी।

 भुरे बाल, कमसिन बदन, और मम्मे 

तो ऐसे परिपक्व कि स्त्रियों को भी ईर्ष्या हो जाए। 

सोनिया किताब से कफ़ी बोर हो चली थी और 

बोरियत मिटाने के लिए मटके से पानी पीने को उठी।

देर रात कहीं बाहर वाले जाग न जाएं,

 इसलिए बैठक में दबे पाँव पहुँची। 

पहुँचते ही कुछ फुसफुसाने की आवाजें उसके कान में पड़ीं। 

आवाज उस्के मम्मी – डैडी के बेडरूम से आ रही थी – 

जैसे कोई दर्द में कराह रहा हो। 

चिंता के मारे किशोरी सोनिया आवाज़ों की तरफ़ चली।

 पास आने पर उसे प्रतीत हुआ कि कोई दबे स्वर में बोलता हुआ कराह रहा था।

 सोनिया के चंचल मन में कौतुहूल जाग चुका थ। 

वो दरवाजे के पास कान लगा कर सुनने लगी।

“दीपक बाप क़सम ऊउहहह। चोद दे मुझे ! कस के! ऊउगह !” 

आवाज उसकी माँ की थी और 

जाहिर हो चुक था कि मामला क्या है।

 सोनिया साँस रोक कर सुनती रही।

अचानक उसके पिता की मर्दानी आवाज कमरे से सुनाई मे आई। 

“दे मार अपनी चूत ! ला उसे 

गाढ़े गरम लन्ड के तेल से लबालब कर दूं।” ।

सोनिया क दिल धकधक कर रहा था 

मगर पिता के वाहियात बोलों से उसकी चूत मारे उत्तेजन के नम हो चली थी। 

इन शब्दों के माने वो बखूबी जानती थी 

पर उनमें भरी प्रबल कमोत्तेजना सीधे उसकी चूत पर असर दिखा रही थी। 

अपने ही मम्मी-डैडी के बीच इस अश्लील वार्तालाप से 

उसकी नब्ज़ धौंकनी की तरह चल रही थी। 

अब वो अपनी आँखों से देखे बगैर नई रह सकती थी।

चाभी के छेद से उसने जो नजारा देख , 

उससे वो दन्ग रह गयी। 

उसका हलक सूख गया और 

दिल उछल कर गले में आ गया।

 मुँह फाड़े वो अपने माँ-बाप के बीच संभोग का पाश्विक दृश्य देख रही थी –

 एक्दम निर्विघ्न नजारा। 

दोनो नंगे पड़े थे –

 माँ पीठ के बल बिस्तर के ठीक बीच में टांगें ऊपर को 

पूरी चौड़ी कर तलुओं से बाप की कमर को जकड़े हुई थी।

 बाप अपने हथौड़े से लन्ड को माँ की टांगों के बीच गाड़े हुए था। 

अपने बाप के तने हुए लन्ड को माँ की फैली हुई चूत की 

मुलायम पंखुड़ीयों पर अंदर बाहर मसलते देख कर

 उसके जैसे होश उड़ गए।

 माँ की चूत के द्रवों से लथपथ वो फड़कता लन्ड 

रेल इंजन के पिस्टन की तरह अपनी ही 

लय में अंदर-बाहर चल रहा था। |

वैसे तो सोनिया अपने बाप के लन्ड को देख चुकी थी 

ava-addams-002-4

पर इस समय वो फूल-तन कर विशालकाय आकार ले चुका था 

जिसे देख कर उसकी चूत मे सिरहन सी पैदा हो जाती थी।

 साँप सी लचीली थिरकन थी

 उस लन्ड में जो उसे सम्मोहित करे लेती थी।

 वो उसकी माँ की चूत से बाहर उभरता, 

फूली लाल सुपारी की एक झलक दिखती, 

और तुरन्त वापस माँ की उछलती चूत मे समा जाता। 

सोनिया हैरान थी कि इतना विशाल को कैसे माँ की चूत मे घुस पा रहा था। 

इस नजारे ने सोनिया के मन में उथलपुथल मचा दी थी – रोमांचित भी थी। | 

सोनिया सैक्स – जीवन में सक्रिय तो नहीं थी 

पर ऐसी अनाड़ी भी नहीं। 

पिछली गर्मियों की छुट्टियों में राजेश, 

जो कि उसके ही स्कूल में था, से उसकी मुलाकात हुई थी।

 राजेश अट्ठारह साल का छरहरा जवान था और 

सोनिया का उससे काँटा भिड़ गया था। 

Please complete the required fields.