CHAPTER 1
दाम्पत्य:-
जैसे-जैसे मिसेज़ टीना शर्मा अपने मुलायम होंठों
से अपने पति के मुंह में कराह रही थी,
उनके पति उनकी कमसिन कमर से उनकी पैन्टी को नीचे सरकाये जाते थे।
दोपहर से ही आफिस में मिसेज शर्मा के बदन में कामोत्तेजना अंगड़ाइयाँ ले रही थी।
आफिस के जवां-मर्दो के तने हुये लन्डों पर नजर जाती
और चूत में एक सनसनी सी पैदा कर दी थी।
मिसेज शर्मा की उम्र कुछ चौंतीस साल होगी –
पर जवानी की कामोत्तेजना में कुछ कमी नहीं आयी थी।
जवानी में कईं आशिक थे उनके
– पर एक मिस्टर शर्मा ही, जो उनके अब पति थे,
उनके सुलगते अन्गारों से खेल सके थे।
दोनों सैक्स के बड़े मजे लेते थे और
इस कला में निपुण थे।
दोनो का शिव और शक्ति सा तालमेल था।
“बच्चे सो तो रहें हैं ना ?” मिसेज शर्मा अपनी लम्बी
उंगलियां पति के तनते हुए लन्ड पर फेरती हुई बोलीं।
मिस्टर शर्मा एक हाथ से उसके स्तनों को पुचकारते हुए बोले
“बेफ़िक्र रहो जानेमन ।
जय का कल मैच है, वो तो कबका सो गया।”
टीना जी ने जवाब में उनके तने हुए लन्ड को प्यार से
ऊपर-नीचे खींच कर उसकी फूलती लाल
सुपारी को अंगूठे से दबाया, “और सोनिया ?”
“सोनिया को छोड़ो, वो तो हमेशा लाईट ऑन कर के सोती है।
इस वक्त तो मुझे सिर्फ़ तेरी गर्मा-गर्म चूत से मतलब है।” |
टीना जी ने जाँघों को फैलाते हुए अपनी चूत का द्वार
अपने पति के दूसरे हाथ के लिए खोल दिया।
मिस्टर शर्मा के हाथों का स्पर्श टीना की टपकती चूत पर पड़ा
तो उसके मुंह से एक उन्मत्त कराह निकल पड़ी।
“म्माअह! मजा आ रहा है !”
कहते हुए टीना जी ने अपनी फड़कती हुई चूत
को पति की उंगलियों पर मसलना शुरू कर दिया।
ओह दीपक। और न तड़पा,
बस चोद डाल मुझे! मेरी चूत गीली हुई जाती है।” यकीनन ।
जैसे ही मिस्टर शर्मा ने पत्नी की चूत में टोह ली,
मादक गरम द्रवों ने उसकी उंगलियों को भिगो दिया।
शोख चूत फुदक कर उंगलियों को गुदगुदाने लगीं।
“क़सम से जानेमन! बिलकुल सुलग रही है तेरी चूत !”
मिस्टर शर्मा तने हुए लन्ड को पत्नी की फड़कती
मांद में घुसाते हुए बोले।
“कस के चोदो मुझे।
चोदो अपने मोटे लन्ड से!” ।
टीना जी ने पीठ के बल लेटते हुए अपनी टांगों को और फैलाया
और उन्मत्त होकर पति के तगड़े पुरुषांग को धधकती योनि में डाला।
पत्नी की प्रबल उत्तेजना ने बारूद में चिंगारी का काम किया।
मिस्टर शर्मा अपने भारी- भरकम लन्ड को
पत्नी की प्यासी मुलायम चूत में लगे ढकेलने।
पति के मजबूत धक्कों को झेलने के लिएय टीना जी ने
अपनी सुडौल टांगें और ऊंची उठा दीं।
मिस्टर शर्मा की गाँड पर अपनी ऐड़ियां टेक कर
वे उनकी टक्कर से टक्कर मिला रही थीं।
जैसे मिस्टर शर्मा अपने लौड़े को टीना जी की चूत के भीतर सरकाते,
वो चूत की मांसपेशियों को लौड़े पर जकड़ता हुआ महसूस कर रहे थे।
उन्होंने वज्र सा लन्ड टीना जी की दहकती मान्द
में इतना गहरा घोंप डाल था,
कि टट्टे टीना जी की गुलाबी गाँड से टकरा रहे थे।
“आऽह! माँ क़सम, बड़ी गर्मा रही हो !”
मिस्टर शर्मा अपने लन्ड पर जकड़ती
मंसलता के अनुभव से सिसक उठे।
“चोद! साले चोद डाल मुझे !”
टीना जी चूत के चोचले को पति के
माँसल लन्ड से रगड़ती हुई कराह पड़ीं। |
मिस्टर दीपक दोनो बाजुओं के बल
अपने मजबूत बदन को झुलाते हुए कभी लन्ड
को पत्नी की चूसती चूत से बहर निकालते
और फिर वापस मादक जकड़न मे ठूस देते।
पत्नी की सुलगती कामग्नि में उनका पौरुष
लगतार कोयला झोंक रहा था।
“ऊऽह! साली चोद दूंगा! मार कस के चूत !”
टीना जी की आतुर चूतड़ में अपने चर्बीदार
लन्ड को ठोंसते हुए मिस्टर शर्मा हुंकारे।
मिस्टर शर्मा के हर वहशी ठेले का टीना जी
बिस्तर से उचक-उचक कर जवाब देतीं
और जब लन्ड भीतर घुसता तो कराह उठतीं।
“ऊन्घऽ! ओहहहह! चोद दे! बस ऐसे ही!
और कस के! ओहहह” टीना जी आगोश में चीखीं।
शर्मा दम्पत्ति अपनी प्रबल कामक्रीड़ा में पूरी तरह लीन था।
देह की सुलगती प्यास की तृप्ति में
दोनो अब सारी दुनिया से अनजान हो चुके थे।

