Update 27 A.
” फिर भी एक जगह है जहां से असली रमाकांत के हस्ताक्षर का नमूना पाया जा सकता है ।”
वो मुझे एक टक देखता रहा ।
” वो ट्रस्ट आज भी बरकरार है जिसका माहवारी का चैक आप हर महीना हजम कर रहे हैं । ट्रस्ट के रिकॉर्ड में असली रमाकांत का कोई न कोई डाॅक्यूमेंट जरूर होगा जिस पर उसके हस्ताक्षर होंगे । एक जालसाज आदमी की पोल खोलने के लिए वे बड़ी खुशी से अपने पुराने से पुराना रिकॉर्ड टटोलने के लिए तैयार हो जाएंगे ।”
दोनों मियां बीवी के मुंह से बोल न फुटा ।
” जानकी देवी ! आपने बहुत भारी गलती की जो आपने हिमाचल से दिल्ली लौटने का लालच किया । आप वहीं रहती तो किसी को कभी भनक भी नहीं पड़ती कि आपका पति मर चुका है और उसकी जगह आपका यह यार ले चुका है । अपने असली पति की मौत के इतने सालों बाद आपने यही सावधानी बहुत काफी समझी कि आप दिल्ली की जगह गाजियाबाद आकर रही । लेकिन ये आप लोगों का दुर्भाग्य कि गाजियाबाद में वहां आकर रही जहां आपके ठीक बगल में ही श्वेता दी और जीजू का फ्लैट था । अमर मेरे दोस्त होने के नाते मेरे साथ श्वेता दी के फ्लैट कई बार आ चुका था इसलिए वो आप लोगों से भली भांति परिचित था । न आप गाजियाबाद आते न आप को अमर से मुलाकात होती और न ही ब्लैकमेलिंग का खेल शुरू होता और न ही आपको अमर के खून से आपको अपने हाथ रंगने पड़ते ।”
कमरे में कुछ देर तक सन्नाटा छाया रहा ।
” अमर की बदकिस्मती कि उसे प्यार भी हुआ तो वीणा से… जानकी देवी की बहन की ही बेटी से । काश ! वीणा दिल्ली आई ही नहीं होती । वीणा के ही एल्बम में उसने जानकी देवी और उनके हसबैंड की तस्वीर देखी । तस्वीर पर नजर पड़ते ही उसने जानकी देवी को पहचान लिया होगा और जिस तरह से मैं तस्वीर देखकर जानकी देवी के हसबैंड पर कन्फ्यूज हुआ वैसा ही वो भी हुआ होगा । उसे किसी तरह से आप के ट्रस्ट वाली कमाई का जरिया पता चला होगा । उसे पता चला होगा कि चालीस हजार रूपए आप लोग पच्चीस सालों से लगातार ट्रस्ट के माध्यम से लुट रहे हैं और जिस हालत में उसकी प्रेमिका वीणा – जानकी देवी की भांजी – जिन्दगी गुजर बसर कर रही है , उससे उसके मन में जानकी देवी के प्रति गुस्से की भावना जागृत हुई होगी और फिर यहीं से उसने आप को ब्लैकमेलिंग करना शुरू किया होगा । पिछले छः महीने से आपके एकाउंट से निकाला हुआ पैसा गवाह है कि आप लोग उसके ब्लैकमेलिंग के शिकार थे । अमर के मौत के एक दिन पहले दस लाख रूपए आपके एकाउंट से निकालना भी इसी संदर्भ में होगा । उसके ब्लैकमेलिंग की वजह से आप का हाथ टाइट रहता होगा । आप को देर सबेर ताव आना ही था , आपको महसूस होना ही था कि ब्लैकमेलिंग के उस जाल से पीछा छुड़ाना आपके लिए निहायत जरूरी था । अमर के मौत से आप ब्लैकमेलिंग के फंदे से निकल सकते थे । आपका भविष्य सुरक्षित हो सकता था , क्योंकि तस्वीर की वजह से वही एक शख्स था जो आपकी असलियत से वाकिफ था ।”
” कौन कहता है कि मेरी माली हालात खराब थी ।”
” मैं कहता हूं । आप के इंडियन बैंक का एकाउंट कहता है । जोड़ जोड़ कर जो पैसे आपने फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में दस लाख रूपए जमा किए थे वो भी निकाल लिए । ये सभी पैसे आपने ब्लैकमेलिंग के चलते ही निकाले हैं ।”
” चलो अब ये भी बता दो कि अमर का खून मैंने कैसे किया ?” – वो जहरीली मुस्कान करते हुए बोला ।
” अमर की मौत से एक दिन पहले आप ने अपने एकाउंट से दस लाख रूपए निकाले थे । ये शायद ब्लैकमेलिंग की आखिरी डील होगी । अमर को आपने अपने फ्लैट में बुलाया इस आखिरी डील के लिए । डील होगी कि अमर आपको तस्वीर सौंप देगा बदले में आप उसे दस लाख रूपए देंगे । अमर दस लाख के लालच में आप के फ्लैट में आया । आप ने उससे तस्वीर मांगी होगी लेकिन वो तस्वीर लेकर आया ही नहीं था… शायद अपनी सेफ्टी के लिए । उसे लगा कि जब तक तस्वीर उसके पास है तब तक आप उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकते । कितना गलत सोच था उसका । और आप ने तभी उसका खून कर दिया ।”
” जब तस्वीर मुझे मिला ही नहीं तो फिर क्यों मैंने खून कर दिया ” – वो अपने पैंट में हाथ डालते हुए बोला ।
” आप ने उसे रिवाल्वर से डराया धमकाया होगा । कुछ तो जरूर हुआ होगा । वो अपनी जान बचाने के लिए सच बोल दिया होगा कि तस्वीर एक जापानी एनटिक नक्काशीदार मूठ वाली खंजर में छुपाकर रखा गया है । ऐसे खंजर के बारे में सुनकर आपको श्वेता दी की खंजर की याद आई होगी । और जानकारी हासिल करने के बाद आपने उसे शुट कर दिया । लेकिन यहां बदकिस्मती आप की रही कि वो खंजर श्वेता दी की नहीं बल्कि उसके खुद की थी । इसीलिए तो आप ने श्वेता दी के दिल्ली से यहां वापस आने पर उनकी खंजर चुराया । श्वेता दी की खंजर चुराने का आप के सिवा और किसी के पास कोई कारण था ही नहीं ।”
” लेकिन अमर की लाश तुम्हारी बहन और जीजा के फ्लैट से बरामद हुई है ।”
” क्या मुश्किल है जीजू के फ्लैट की चाबी का डुप्लीकेट हासिल करना आपके लिए । आखिर बगल में ही तो है और फिर उनके फ्लैट में आप लोगों का आना-जाना भी तो लगा ही रहता है । आपने अपने फ्लैट में अमर का खून किया और लाश जीजू के फ्लैट में रख दिया ।”
” बढ़िया !” – वह बोला -” बहुत बढ़िया ! स्टोरी काफी अच्छी है मगर विश्वास कौन करेगा ?”
” एक बार ब्लैकमेलिंग का चक्कर पुलिस को पता चला कि बाकी बातें वो आप दोनों से खुद ही निकाल लेगी । आप शायद पुलिस के टार्चर के आगे कुछ ठहर भी जाओ लेकिन जानकी देवी जी आधे घंटे तक नहीं टिकेगी । आखिर उमर भी तो हो गई है ना ।”
” पुलिस को कौन बताएगा ?”
” मैं बताऊंगा ।”
” पुलिस से तुम्हारी मुलाकात होगी तो न बताओगे ।”
” कौन कहता है ?”
” मैं कहता हूं ” – उसने पैंट के जेब से अपना दांया हाथ बाहर निकाला -” यह रिवाल्वर कहती है ।”
मैं हड़बड़ाया । मैंने देखा जानकी देवी जरा भी विचलित नहीं लग रही थी । बल्कि वह आंखों ही आंखों में उसे शाबाशी दे रही थी ।
” रमाकांत जी ” – मैंने धीरे से कहा -” कम से कम इतना तो कबूल कर लीजिए कि मैंने जो कहा सच कहा ।”
” बातों में वक्त जाया मत करो “- जानकी देवी बड़ी सख्ती से रमाकांत जी से बोली -” जो करना है जल्दी करो ।”
” मरने से पहले इसके सवालों का जरा जबाव तो दे दूं नहीं तो नरक में भी सोचता ही रह जाएगा ” – उसने मुझे कहर भरी निगाहों से देखते हुए कहा -” बहुत होशियार हो तुम । बधाई । अमर का खून मैंने ही किया था । वो कमीना छः महीने से मुझे चुस रहा था । उस तस्वीर के चलते । वो समझ गया था कि मैं असल रमाकांत नहीं हूं लेकिन मुझे ये नहीं पता था कि वो जानकी की ही बहन की बेटी का प्रेमी था । जरूर हरामजादे ने वही से तस्वीर पायी होगी । वो तस्वीर सामने आ जाने से हमारी माहवारी बंद हो जाती और हम एक एक पैसे के मोहताज हो जाते । भले ही वो एकमात्र तस्वीर थी लेकिन जब बात उठती तो बहुत दुर तक जा सकती थी । हम दोनों का भेद खुल सकता था और फ्राड के केस में बची खुची जिंदगी जेल में काटनी पड़ती । ये मै किसी भी कीमत पर गवारा नहीं करता । मैंने दस लाख के बदले तुम्हारे उस कमीने दोस्त अमर से उस तस्वीर का सौदा किया लेकिन वो हरामजादा खाली हाथ ही चला आया । जब मैंने उसे तस्वीर के बारे में पूछा तो कहने लगा कि कल दे दुंगा । छः महीने से तो ब्लैकमेलिंग किया ही उपर से उस दिन तस्वीर भी नहीं लाया । मेरा दिमाग गुस्से से भनभना गया । मैंने उसे गोली मारी जो उसके सर के बालों को छुते हुए दिवाल में घुस गई । जब जान पर बन आई तब जाकर वो डरा और बताया कि तस्वीर जापानी एनटिक नक्काशीदार मूठ वाली खंजर में रखा हुआ है । ऐसा खंजर मैंने श्वेता के पास देखा था तो मुझे लगा कि वो जब यहां आया होगा तो उस खंजर में छुपा दिया होगा । मैंने जरा भी देरी नहीं की और उसे शुट कर दिया । वैसे वो तस्वीर लाया भी होता तो भी मैं उसे छोड़ता नहीं । उसे मार ही देता । वो मेरा राज जान गया था , उसे मरना ही था । वो इतने दिनों तक इसलिए बचा रहा क्योंकि मुझे वो तस्वीर चाहिए था । ”
” फिर ! फिर क्या किया आपने ?”
” गोली लगते ही वो मर गया । मैंने श्वेता के फ्लैट की डुप्लीकेट चाबी पहले से ही बनवा रखा था । उसके लाश को श्वेता के फ्लैट में बाथरूम में रखकर पहले की तरह दरवाजा बंद किया और अपने फ्लैट में आ गया ।”
” लेकिन जीजू का फ्लैट ही क्यों चुना ?”
” तो और कहां रखता ? अपने घर में ? राजीव के घर में इसलिए रखा कि वो तुम्हारे साथ उसके घर पहले भी कई बार आ चुका है । पुलिस की जांच को भटकाने के लिए ।”
” गोली की आवाज शायद इसीलिए सुनाई नहीं दी क्योंकि साइलेंसर लगा हुआ था ” – मैंने रिवाल्वर में साइलेंसर लगा हुआ देख कहा ।
” बिल्कुल सही कहा ।”
” पुलिस को खबर आपने ही किया था ?”
” हां ।”
” क्यों ?”
” पुलिस का ध्यान दुसरी तरफ लगाने के लिए । जब देखा कि राजीव के फ्लैट में एक लड़की और उसके थोड़ी देर बाद तुम जा रहे हो तो पुलिस को बगल के पी सी ओ से एक गुमनाम काॅल कर दिया , ताकि पुलिस की तहकीकात तुम दोनों पर केन्द्रित हो जाए ।”
” मनीष जैन को क्यों मारा ?”
” अरे ! ये बातों में तुम्हें फंसा रहा है “- जानकी देवी जोर से बोली -” खतम करो इसे ।”
उसने मेरी तरफ रिवाल्वर ताना । मैंने अपनी आंखें बंद कर ली ।

Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.