Sagar – An Erotic Incest Story – Update 25B

Sagar - An Erotic Incest Story
Reading Mode

Update 25. B.

” तुम सोच रहे होगे कि मैं अमर को कैसे जानती हूं ” – वो बोली ।

मैं सोफे पर बैठा अचरज से उसे देखे जा रहा था ।

वो अपनी चाय की कप टेबल पर रख कर खड़ी हुई और धीरे धीरे चलते हुए थोड़ी दुरी पर खिड़की के पास खड़ी हो गई । वो खिड़की की कपाट खोलकर बाहर आसमान की ओर उपर देखने लगी ।

मैं चुपचाप बैठे उसके बोलने की प्रतीक्षा कर रहा था ।

” हम छः महीने से रिलेशनशिप में थे । वो तुम्हारे और अपने मां की अक्सर चर्चा किया करता था । जब श्रेया ने तुम्हारा नाम लिया तभी मैं समझ गई थी कि तुम अमर के दोस्त सागर हो ।”

” लेकिन अमर ने तुम्हारे बारे में हमसे कभी जिक्र नहीं किया ।”

” मैंने ही मना किया था ।”

” लेकिन क्यों ?”

” अपने किस्मत पे एतबार नहीं था ।”

” मैं समझा नहीं ।”

” श्रेया बोली थी कि तुम मेरी बहन को जानते हो ?” – वो पलट कर मुझे देखते हुए बोली ।

उसने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया ।

” एकाध बार मिला था ।”

” कैसी है ?”

” तुम्हें नहीं पता ?”

” जब से अमेठी छोड़कर गई तब से नहीं ।”

” मतलब इतने सालों से तुम दोनों मिली नहीं ?”

मुझे बहुत आश्चर्य हुआ ।

” मिलना तो दूर बात तक नहीं हुई ।”

” कोई फोन वगैरह भी नहीं ?”

” मुश्किल से तो दो वक्त के अनाज का जुगाड होता था तो भला फोन कहां से आता ” – वो फिकी मुस्कान करती हुई बोली ।

” अनुष्का एक करोड़पति की पत्नी बन चुकी है । मजे में है ।”

” चलो अच्छा है , कम से कम उसकी लाइफ तो सेट हुई ” – वो वापस खिड़की की तरफ पलटते हुए बोली -” अमर के क़ातिल का पता चला ?”

” अभी तक तो नहीं । उसी सिलसिले में तो तुम से बातें करना चाहता था ।”

” मुझे अखबार के जरिए पता चला था । मुझे तो अभी भी विश्वास नहीं हो रहा है कि वो अब इस दुनिया में नहीं है ।”

” तुम्हें किसी पर शक है ?”

” हमने अपने रिलेशन को सभी से छुपा कर रखा था । मैं किस पर शक करूंगी ?”

” जिस वक्त अमर का खून हुआ था उसी समय तुम्हारी बहन अनुष्का मौका-ए-वारदात पर पाई गई थी ।”

” क्या ?” – वो चौंक कर फिर पलटी ।

मैंने उसे अमर के केस से संबंधित सभी चीजें बताई ।

उसके हाव भाव से यही लगता था कि वो इन सारी बातों से अनजान हैं ।

” एंटरटेनमेंट के धंधे में कैसे आ गई ?”

” अनुष्का के जाने के बाद मैं अकेली पड़ गई । मैं ज्यादा पढ़ी लिखी भी तो नहीं थी कि कहीं काम करके दो वक्त की रोटी जुगाड कर सकूं । अनुष्का पढ़ने में तेज थी तो वो छोटे छोटे बच्चों को कोचिंग , ट्यूशन करके दो पैसे कमा लेती थी जिससे किसी भी तरह हो जिंदगी कट ही जा रही थी । लेकिन उसके जाने के बाद मैं क्या करती ? थोड़ी बहुत डांस जानती थी तो शादी ब्याहों में शो करने वाले एक ग्रुप में बतौर डांसर शामिल हो गई । फिर जो सफर वहां से शुरू हुई तो आकर गोल्डन नाईट क्लब में खतम हुई ।”

” क्या अमर से मुलाकात गोल्डन क्लब में हुई थी ?

” नहीं । उससे पहली बार मुलाकात इतफाकन हुईं थी । मेरी एक्सीडेंट हो गई थी । एक कार वाले ने धक्का दे दिया था । उसी ने मुझे हाॅस्पिटल पहुंचाया और इलाज भी करवाया था । फिर वो मुझे देखने हाॅस्पिटल रोज आने लगा । इसी तरह मिलते-जुलते हमारी भावनाएं कब उबलने लगी पता ही नहीं चला ।”

मुझे ताज्जुब हो रहा था कि इतनी बड़ी बात अमर ने मुझसे छुपाई थी ।

” तुमने अमर को अपने रिलेशनशिप के बारे में हमें बताने के लिए इसलिए मना किया था न कि हम तुम्हारे जाॅब को पसन्द नहीं करेंगे । तुम्हें अच्छी लड़की नहीं समझेंगे ?”

” जो काम मैं कर रही हूं उसे सभ्य समाज में अच्छा नहीं माना जाता । है तो ये बदनाम धंधा ही न । हमारी सोसायटी में कैबरे डांसर और काॅल गर्ल मे उन्नीस बीस का ही तो फर्क माना जाता है न ।”

” लेकिन आखिर में तुम दोनों को अपनी शादी के बारे में बताना तो पड़ता ही ?”

” मेरी एक साल की एग्रीमेंट अक्टूबर में खतम हो रही थी । उससे पहले मैं जाॅब नहीं छोड़ सकती थी । जाॅब छोड़ते ही हम बता देते ।”

मैं कुछ देर तक चुपचाप उसे निहारता रहा ।

” मैंने सुना है तुम्हारी एक मौसी भी है ?”

” लगता है अनुष्का ने एकाध मुलाकात में बहुत ही कुछ बता दिया तुम्हें ” – वो कटाक्ष करते हुए बोली ।

मैं चुप रहा ।

” हां । एक मौसी है लेकिन हमें तो उसका चेहरा भी याद नहीं है ।”

” मैंने ये भी सुना है वो भी किसी करोड़पति से ब्याही गई थी ।”

” उनके बारे में जो भी हमने सुना था वो मां से ही सुना था । वो मां से बड़ी थी । अनुष्का की तरह उन्होंने भी शादी के बाद फिर कभी अपने मायके में कदम नहीं रखा । मां बोलती थी कि उसने प्रेम विवाह किया था और उसका पति अपने माता-पिता का एकलौता पुत्र था ।”

” तुम्हारे परिवार की आर्थिक स्थिति कैसी थी ?”

” जब तक मां बाप जिंदा थे किसी तरह की दिक्कत नहीं थी । पिता जी एक मील में काम करते थे लेकिन इतना पैसा कमा ही लेते थे कि चारों का गुजारा अच्छे से हो जाता था । जब दोनों की मृत्यु हुई उस वक्त मैं दस साल की और अनुष्का चौदह साल की थी । अनुष्का ने दसवीं कक्षा पास कर ली थी लेकिन मां बाप के मरने के बाद हमारी पढ़ाई बंद हो गई । कोई कमाने वाला नहीं था । मां बाप सम्पत्ति के नाम पर एक छोटा सा टाली का घर और थोड़ी गहने ही छोड़ गए थे , इससे हम क्या कर सकते थे ?”

” उसी गहने को बेचकर अनुष्का दिल्ली चली गई ?”

” हां । उसे पढ़ने का बहुत शौक था । उसकी महत्त्वाकांक्षाएं बहुत बड़ी थी । वो मुझसे छुपा कर गहने बेची थी और दिल्ली चली गई । उसने कहा था कि पढ़ाई पुरी करके जाॅब मिलते ही मुझे बुला लेगी । लेकिन एक बार क्या वो निकली कि फिर…..।”

मुझे अनुष्का पर सच में बहुत गुस्सा आ रहा था ।

” तुम्हारे मौसाजी और मौसी की कोई फोटो है क्या ?”

” एक फोटो थी लेकिन वो मिल नहीं रही है ?”

” ओह ।”

” वैसे एक हमारी फेमिली फोटो है लेकिन उसमें मौसाजी नहीं है “- बोलकर वो अपने कमरे में चली गई ।

थोड़ी देर बाद वो एक पुरानी सी फोटो जो गंदी भी हो गई थी ले आई ।

पांच लोगों का एक फेमिली ग्रुप फोटो था । दोनों बहनें बहुत छोटी थी । वे अपने माता-पिता के गोद में बैठी हुई थी और एक उनकी मौसी थी ।

मौसी की पिक्चर देखते ही मुझे लगा कि इसे मैंने कहीं देखा है । थोड़ी देर देखकर मैंने फोटो उसे वापस कर दिया । वो फोटो लेकर अपने कमरे की तरफ जाने लगी कि मैंने पूछा –
” यहां अकेली रहती हो ?”

” नहीं । एक लड़की के साथ रहती हूं , वो भी मेरे साथ ही काम करती है ” – वो जाते जाते बोली ।

मेरे दिमाग में बार बार उसके मौसी की तसबीर आ रही थी । इसे मैंने कहीं देखा तो जरूर है ।

वो कमरे से बाहर आई तो मैं भी खड़ा हो गया ।

” जाने से पहले एक बात पुछना चाहता हूं ?”

” क्या ?”

” अब क्या करोगी ? जाॅब करती रहोगी या छोड़ दोगी ?”

वो फिर से खिड़की के पास चली गई और बाहर की ओर देखने लगी । बहुत देर तक वो वैसे ही खड़ी रही । मुझे लगा वो जबाव नहीं देना चाहती है इसलिए मैं दरवाजे की तरफ बढ़ा ।

दरवाजे पे खड़े होकर उसकी और निगाह डाली। वहां से उसकी शक्ल दिखाई दे रही थी । उसकी आंखें बंद थी और आंखो से दो बूंद आंसू छलक कर गालों पे पड़े हुए थे ।

मैं दरवाजे पर खड़ा हो गया ।

” मां बाप ने बचपन में ही साथ छोड़ दिया ” – वो बहुत ही धीमी आवाज में बोल रही थी -” बड़ी बहन ने अपनी मंदबुद्धि बहन को गांव में अकेली छोड़ दिया । छः महीने में पहली बार अमर के रूप में खुशियां मेरी दामन में आई थी लेकिन उसने भी साथ छोड़ दिया । अब ये डांस वाली नौकरी ही तो आखिरी सहारा है……इसे छोड़ कहां जाउंगी ।”

उसकी बातें सुनकर मेरा मन दुःख और वेदना से भर गया । मेरी आंखें बोझिल हो गई ।

मैं उसके पास गया और उसे पकड़ कर अपनी ओर घुमाया ।

वो सिर झुकाए चुपचाप खड़ी रही । मैंने उसके आंसुओं को अपने हथेली से पोंछा ।

” तुम एक बहादुर लड़की हो वीणा । जिस तरह से विपरीत परिस्थितियों में तुमने अपने को संभाला है उससे मेरे दिल में तुम्हारे प्रति बहुत इज्जत है । मैं तुम्हें दिल से नमन करता हूं । तुम्हारे दिन भी पलटेंगे…. और बहुत जल्द पलटेंगे….मेरा पूरा विश्वास है ।”

मैं वहां से भारी मन और दिल में टिश लिए विदा हुआ ।

Please complete the required fields.




Comments

Leave a Reply