Sagar – An Erotic Incest Story – Update 23

Sagar - An Erotic Incest Story
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Update 23.

मैं निद्रा के आगोश में समाये हसीं सपनों में खोया हुआ था । उसे हसीं सपना कहना शायद गलत होगा । वो एक कामुक और उत्तेजक सपना कहना उचित होगा । एक औरत , मेनका को भी मात कर देने वाली… नंगी औरत… मेरे नंगे बदन मेरे जांघों पर चढ़ कर अपने कुल्हों को उपर नीचे किए जा रही थी । उसके कुल्हों के साथ साथ मेरी कमर भी दुगुनी रफ्तार से संगीत की धुन छेड़े जा रही थी । उसके पपीते की तरह बड़ी बड़ी गोलाईया पेंडुलम की तरह हिल रही थी । उसके हाथ मेरे सीने पर और नजरें मेरी आंखों में थी । मैं उन निगाहों से नजरें मिलाये वासना से लिप्त चरम सुख प्राप्त करने के कगार पर ही था कि मेरी नींद टुट गई ।

नजरें खुली तो माॅम को अपने बिस्तर पर बगल में लेटे हुए पाया । उन्हें देखकर मैं चौंक गया । मेरे चौंकने का कारण माॅम को मेरे बिस्तर पर मेरे बगल में लेटना नहीं था । बचपन में ही नहीं बल्कि हाल फिलहाल तक वो मेरे बिस्तर पर कई बार मेरे साथ लेट चुकी थी । चौंकने का मेन कारण था कि जो सपना मैं देख रहा था , उसकी मेनका मेरी माॅम ही थी । और वो अभी मेरे आंखों के सामने थी ।

वो मेरी ओर मुख किए करवट के बल लेटी हुई थी । इस वक्त वो नाइटी में थी । वो अपने एक हाथ से मेरे सर के बालों को सहलाये जा रही थी और दूसरी हाथ उनकी गोद में थी । लेकिन उनकी नजरें मेरे सर से ऊपर कहीं और थी , शायद वो किसी सोच में डुबी हुई थी । मैंने दिवाल पर टंगी घड़ी की तरफ देखा । सुबह के छः बजे थे । ठंडी ठंडी हवा आ रही थी । हवा में नमी थी ।

मैंने सिर्फ एक ढीला पायजामा पहना हुआ था । उपर से नंगा बदन ही था । मैंने करवट ली और उनके बाहों के उपर अपनी बांह रख दी जिससे उनकी तन्द्रा भंग हुई ।

वो मेरे सर के बालों को सहलाते हुए बोली -” नींद खुल गई ?”

” हां ” – मैं बिस्तर पर पड़े पड़े अपने हाथों को उनकी मांशल बाहों से आगे बढ़ा कर उनकी पीठ सहलाते हुए बोला – ” क्या बात है आज वर्षा सुबह सुबह कैसे आ गई ।”

” बदमाश । अपनी मम्मी का नाम लेता है ?” – वो मुस्कराते हुए मेरे सिर पर एक चपात लगाते हुए बोली ।

मैं उन्हें कस कर जकड़ते हुए कहा -” एक बार दरवाजे से बाहर नजर डालो ?”

” क्या है ?” – बोलकर वो वो दरवाजे के बाहर की तरफ नजरें दौड़ाई ।

हल्की हल्की बूंदा-बांदी शुरू हो गई थी ।

” ओह । बारिश शुरू हो गई । मैं समझी तु मेरा नाम ले रहा है ।”

” हा हा… ” – मैंने हंसते हुए कहा -“कुछ दिन वेट करो । नाती पोते सब तुम्हें नाम से ही पुकारेगे ।

” तो फिर मैं क्या करूं । मेरे मां बाप ने नाम ही ऐसा रख दिया है ” – वो मुस्कुराते हुए बोली ।

” डैड उठ गये है ?”

” नहीं ।’

” उठने के बाद तुम्हें ना पाकर कहीं परेशान न हों जायं ।”

” होने दो । वैसे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है ।”

” सच माॅम ।‌ क्या किस्मत पाई है दोनों भाइयों ने । दोनों की बीवियां इतनी खूबसूरत और वो दोनों बिल्कुल अन रोमांटिक , एक दम निरस । एक के नाक पर हमेशा मक्खी बैठी हुई रहती है तो दुसरे को देश दुनिया तो छोड़ो अपने बीवी-बच्चों से भी कोई मतलब नहीं है । न उधो का लेना न माधो को देना ।”

” अब वे है ही ऐसे । लोगों का स्वभाव थोड़ी ना बदलता है ।”

तभी वो मेरे सीने के बालों को सहलाते हुए बोली -” वो सब छोड़ । कल पुलिस वालों ने क्या कहा ?” कल तु थका हुआ था इसलिए मैने पूछा नहीं ।”

मेरी तरफ करवट होने से उनकी बड़ी बड़ी गोलाईयां मेरे भुजाओं से सट गई थी । इस सुखद स्पर्श के कारण मेरा कामरेड फिर से इन्कलाब जिंदाबाद करने लगा ।

” तुम्हें ये सब सुझा लेकिन उन दोनों को देखो । उन दोनो मैन ऑफ द हाऊस को याद भी नहीं है ” – मैं भी उन्हें अपने बाहों में लेते हुए कहा ।

इसके बाद मैंने सारी बातें बताई जो थाने में हुई थी ।

” उन्होंने प्रोटेक्शन के लिए पुलिस देने को कहा था ?”- वो उत्साहित होकर बोली ।

” हां ।”

” तो फिर लिया क्यों नहीं ।”

” क्या फायदा ? दो चार दिन हमारे साथ साथ रहेंगे फिर वापस चले जायेंगे ” – मैंने माॅम की पीठ को नाइटी के ऊपर से सहलाते हुए कहा -” वैसे एक कारण और भी था पुलिसियों को नहीं रखने के लिए ।”

” क्या ?”

” मेरी सेफ्टी करने के चक्कर में वो दिन रात मेरे इर्द-गिर्द ही रहते । जहां जहां मैं जाता वहां वहां वो भी साथ होते । और इन सब के चक्कर में मेरा सेफ्टी हो या नहीं हो मेरी गर्लफ्रेंड का राज खुल जाता और वो बेवजह बदनाम हो जाती ।”

” किसकी बात कह रहा है , वो ज्योत्सना ।”

मैंने उस दिन माॅम के मोबाइल में उनकी खास सहेली ज्योत्सना का नाम ह्वाट्सएप किया था । और ये सच भी था कि हमारे बीच सेक्सुअल सम्बन्ध थे ।

” हां । वो भी ” – मैंने कहा ।

” वो भी का क्या मतलब । कोई और भी है ?” – वो चौंकते हुए बोली ।

” हां । ज्यादा नहीं । चार पांच तो होगी ही ।”

” बदमाश । तु बहुत बिगड़ गया है ” – वो मेरे सिर पर जोरदार चपत लगाते हुए बोली – ” वो ज्योत्सना मुझ से भी दो साल बड़ी है । उसमें तुने ऐसा क्या देख लिया ?”

” अरे माॅम वो तो हमारी उमर के छोरीयो से भी ज्यादा अच्छी है । काफी एक्सपिरियंस और… और क्या कहूं ?

” साली कमीनी । मेरे बेटे को ही फंसा लिया । उसे डर नहीं लगा ? पति है , बच्चे हैं । अगर उन्हें मालूम पड़ गया तो ?” – वो गुस्से से बोली ।

” कभी नहीं पता चलता । ये सब कोई घर वालों को जना कर करता है क्या ? ये चुपके चुपके होता है । उन्होंने तुम्हें कहा क्या ? जब कि आप उनकी बेस्ट फ्रेंड हो । वो तो मैंने तुम्हें बता दिया नहीं तो ..”

” फिर भी ?”

” क्या फिर भी । बहुत कुछ होता है , आप को पता भी नहीं । सबकी नीड होती है। बहुतों की जरूरते होती है जो उन्हें अपने हसबैंड से नहीं मिलती है । और वैसे भी उनकी उमर ही क्या हुई है ।”

” वो तुझसे उम्र में बहुत ही बड़ी है । तुझे कोई अपनी उमर की लड़की नहीं मिलती जो अपने से लगभग दुगनी औरतों के पीछे पड़ा है ।”

” ये तो हर किसी के पसन्द नापसंद पर निर्भर करता है । ये दिल दा मामला है । इसमें दिल का , मेरे दिल का , मेरे दिल का क्या कसूर ” – मैंने मजाक करते हुए कहा ।

” अपनी काली करतूतों को तर्क देकर सही साबित करता है और मसखरी करते रहता है । वो गन्दी गन्दी नाइटी भी उसी के लिए लाया था न ” – वो चिढ़ते हुए बोली ।

” आपको वो गन्दी लगती है ?”

” और नहीं तो क्या । कितनी छोटी छोटी है । पहनना और ना पहनना बराबर है ।”

” अब मैं क्या बोलूं । आज कल औरतें यही सब पसंद करती है ।”

” छी । उनमें से एक तो इतनी छोटी है कि क्या बोलूं । क्या ये ज्योत्सना ने लाने को कहा था ?”

” नहीं । मैंने अपनी मर्जी से लिया था ।”

” तेरी इन्हीं हरकतों से…जरूर.. जरूर तेरी इन्हीं हरकतों से किसी औरत का पति तेरे जान के पीछे पड़ा होगा ।”

” तब तो डैड और चाचू भी पीछे पड़े होंगे ?”

” क्या मतलब ?”

” उनकी बीवियों के भी पीछे पड़ा हुआ हूं न ।”

पहले तो उन्हें कुछ समझ नहीं आया फिर जब समझी तो मुझे मारने के लिए झपटी तब तक मैं बिस्तर से कुद कर बाथरूम में भाग गया ।

” तु बाथरूम से बाहर निकल फिर तुझे बताती हूं ” – वो जोर से चिल्लाते हुए बोली ।

फिर करीब दो घंटे तक बाथरूम और एक्सरसाइज में लगाया । मौसम ने भी अचानक से करवट ले ली थी । हल्की हल्की बूंदाबांदी हो रही थी । आज आन्टी तीर्थ यात्रा पर जाने वाली थी । उनकी ट्रेन दोपहर में थी । उनकी रिजर्वेशन ए.सी. थ्री टायर में हुई थी और उन्हें ट्रेन में बैठाने मुझे ही जाना था । जीजू को भी आज ही मुम्बई रवाना होना था । उनकी ट्रेन रात को बारह बजे थी ।

मैं तैयार हो कर नीचे हाल में आया । डैड सोफे पर बैठे हुए थे और नाश्ते का इंतजार कर रहे थे । रीतु अभी अपने कमरे में ही थी । मैं जाकर डैड के बगल में सोफे पर बैठ गया । थोड़ी ही देर में माॅम ने नाश्ता लगाया । हमने चुपचाप नाश्ता किया । माॅम नोर्मल ही थी । जैसे कि उन्होंने कहा था कि बाथरूम से निकल तुझे बताती हूं… वैसा कुछ भी नहीं हुआ । उनके चेहरे से पता नहीं चला कि वो मुझसे नाराज़ हैं या नहीं । नाश्ते के बाद डैड अपने आफिस चले गए और मैं रीतु के कमरे में ।

वो पढ़ रही थी । मैं बिना आवाज किए बाहर आ गया ।

मैं जब तक उसे देख नहीं लेता हूं मुझे चैन नहीं आती है । वो मेरी दिल की धड़कन है । उसकी बातें , उसका चुलबुला पन , उसकी शरारतें….जब सोचता हूं कि वो पराये घर चली जायेगी तो तो… मेरी आंखों से आंसू निकलते लगता है । मैं उसके बिना अपनी जिंदगी मुक्कमल नहीं पाता ।

ग्यारह बजे मैं आन्टी के घर पहुंचा । बूंदाबांदी अभी भी हो रही थी ।आन्टी अपने कमरे में सफर पर निकलने के लिए तैयारी कर रही थी । श्वेता दी उनकी पैकिंग में हेल्प कर रही थी । जीजू उपर अपने रूम में थे ।

कुछ देर बाद मैं अपनी बाइक वही छोड़ कर एक कैब बुक किया और आन्टी को लेकर स्टेशन पहुंचा । उन्हें ट्रेन में बिठाया । ट्रेन खुलने के पहले उन्होंने अपने कमरे की चाबी मुझे सौंपी और सम्भाल कर रखने को कहा ।

स्टेशन से बस पकड़ कर वापस आन्टी के घर पहुंचा । वहां से अपनी बाइक ली और वापस घर आने लगा । श्वेता दी ने मुझे रोकना चाहा लेकिन मैं रूका नहीं ।

बुंदाबांदी तेज बारिश में बदल गई थी । मैं जल्दी से घर पहुंचना चाहता था कि बाइक ने धोखा दे दिया । बाइक अचानक से बंद हो गई । मैं बाइक को हाथों से ठेलते हुए घर की ओर जाने लगा । बारिश जोरों से होने लगी थी । मैं पूरी तरह पानी से लथपथ हो गया था । मैं ज्योंहि चाचा के घर से गुजरा कि चाची दरवाजे पे खड़ी दिख गई ।

उन्होंने मुझे जोर से आवाज देते हुए कहा -” अरे सागर पानी में क्यों भींग रहे हो जल्दी से भीतर आओ ।”

बारिश मुसलाधार शुरू हो गई थी । मैंने भी उनकी बात मानते हुए बाइक उनके घर के बाहर खड़ी करके अन्दर चला गया ।

” तुम दरवाजे पर क्या कर रही थी चाची ” – मैं उनके ड्राइंगरुम की तरफ बढ़ते हुए कहा ।

” बारिश देखकर दरवाजा बंद करने गई थी । लेकिन तुम्हारे बाइक का क्या हुआ ?” – वो दरवाजा बंद करके मेरे पीछे आते हुए बोली ।

” बाइक लगता है खराब हो गई है ।”

” जब तुम देख रहे थे कि बारिश आने वाली है तो बाइक ले जाने की क्या जरूरत थी ।”

“अमर की मम्मी को स्टेशन छोड़ने जाना था । इसलिए घर से बाहर निकलना पड़ा ।”

फिर मैंने उन्हें सारी बातें बताई ।

” तुम तो पुरा भीग चुके हो । कपड़े उतार दो नहीं तो तबियत खराब हो जायेगी ।”

वो ठीक बोल रही थी ।

मैंने अपनी पैंट शर्ट और बनियान उतार दी । अब मैं सिर्फ जांघिया पहने हुए था । चाची ने एक नजर मेरे गठिले शरीर को देखा । फिर वो एक गमछा लाई और मुझे दे कर बोली – ” इसे भी उतार दे और इसको पहन ले । मैं इसे पंखे के नीचे रख देती हूं जल्दी सुख जायेगा ।”

मैंने गमछा लपेट कर अपनी जांघिया भी निकाल दी । जब मैंने उन्हें अपनी जांघिया दी तो उन्हें मेरी नंगे सीने को घुरते हुए पाया । वो जांघिया लेकर मेरे सारी कपड़े उठाई और कमरे में पंखे के नीचे रख दिया ।

मैं गमछा पहने सोफे पर बैठ गया । जब वो अपने रूम से बाहर ड्राइंगरुम में आई तो मैंने देखा उनकी साड़ी भी उपर से भीगी हुई थी । शायद दरवाजा बंद करते समय भीग गई थी ।

” चाची , आप की साड़ी भी तो भीग गई है , आप भी चेंज कर लो ।”

वो अपनी साड़ी देखते हुए बोली -” ओह । दरवाजा बंद करते समय भीग गई है ।”

बोलकर वो मेरे सामने ही अपनी साड़ी उतार दी । मैं चौंक पड़ा । क्योंकि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था ।

वो सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी । ब्लाउज देखकर स्पष्ट समझ में आ रहा था कि वो ब्रा नहीं पहनी हुई है । उनकी मदमस्त बड़ी बड़ी चूचियां ब्लाउज में कहर ढा रही थी । ब्लाउज के ऊपर के एक बटन खुली हुई थी जिससे दोनों गोलाईयों के बीच बड़ी सी क्लीवेज किसी का भी ईमान भंग कर सकता था । मेरा लन्ड ठनठना गया । मेरी नज़र उनके पेट पर गयी । काफी गोरी रंगत की थोड़ी चर्बीयूक्त और थोड़ी फुली हुई सी थी । पेटिकोट नाभि से नीचे बंधी हुई थी । उनकी नाभि एक रूपए के सिक्के की तरह बड़ी और काफी गहरी थी । पेटिकोट में उनका पिछवाड़ा भी बड़ा नजर आ रहा था । इस रूप में गजब की सेक्सी लग रही थी ।

वो साड़ी उतार कर बाथरूम चली गई और उसे वहीं छोड़ कर वापस आई ।

” चाय बनाऊं ? पियेगा ?”

” हूं “- मैंने उनकी ब्लाउज में कैद बड़ी बड़ी चूचियों को देख कर कहा ।

वो किचन में चली गई । उन्होंने साड़ी पहनने की कोई जहमत नहीं उठाई । मैं उनके इस रूप को देखकर गरम होने लगा । थोड़ी देर बाद वो दो छोटे छोटे ग्लास में चाय लेकर आई और एक मुझे देकर बगल में सोफे पर बैठ गई ।

” चाचा ड्युटी गए हैं ना ?”

” हां ” – वो चाय की चुस्की लेते हुए बोली ।

” और राहुल ?”

” वो पढ़ने गया है ।”

” कब तक लौटेगा ?”

” दो अढ़ाई घंटे बाद । और उनके बारे में तो जानता ही है छः बजे तक आयेंगे ।”

कहीं चाची इशारा तो नहीं कर रही है कि अभी कोई भी नहीं है , मजा लुट लो । वैसे भी कुछ दिनों से मेरा के. एल. पी. डी. ही हो रहा था । मुझे सेक्स की बहुत तलब हो रही थी ।

चाची पहले कभी मेरे सामने सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में नहीं आई थी। मैं सोच ही रहा था कि मुझे छींक आ गई ।

” तुझे तो लगता है जुकाम आ गई है ” – वो चाय पी कर खाली गिलास को सामने पड़ी टेबल पर रखते हुए कही ।

” पता नहीं , शायद ।”

” रूक , मैं वीक्स लाती हूं । थोड़ा माथे पर रगड़ ले , आराम मिलेगा ” – बोलकर वो वीक्स लाने चली गई ।

थोड़ी देर में वो आई और सोफे के किनारे बैठ गई फिर बोली ।

” तु अपना सिर मेरे पांवों पर रख के लेट जा , मैं लगा देती हूं ।”

मैंने अपनी चाय खत्म की और बिना हिल हुज्जत के उनके जांघों के ऊपर सिर रखकर पीठ के बल लेट गया ।

वो वीक्स मेरे ललाट पर लगा कर धीरे धीरे रगड़ने लगी । मैं तो उनके मांशल जांघों का स्पर्श पाकर ही एक नई दुनिया में पहुंच गया । मैंने अपने पांवों को फोल्ड करके रखा हुआ था । लेकिन फिर भी उस पतले गमछे में मेरा लिंग सर उठा कर अपने अस्तित्व का स्पष्ट प्रमाण देने लगा। जहां मेरा लिंग था , उस जगह पर गमछा अपनी औसतन ऊंचाई से काफी ऊपर उठ गया था । मैंने अपनी नजरें उनके चेहरे पर डाली तो उन्हें मेरे लिंग की तरफ देखते हुए पाया ।

मैं औरतों के मामले में बेहाया तो पहले से ही था । इसलिए मैंने भी अपनी पांवों को हिला डुला कर अपने मोटे तगड़े लिंग को गमछे के अन्दर से हल्का सा बाहर निकाल दिया ।

उनकी ललाट पर वीक्स लगाने की गति एकाएक धीमी हो गई । मैंने उनकी तरफ चुपके से देखा । वो मेरा लन्ड देख रही थी । और उनकी सांसों की गति बढ़ गई थी जिससे उनकी छाती उपर नीचे हो रही थी ।

मैंने अचानक से करवट ली और उनके पेट की तरफ मुंह करके लेट गया । लेकिन इसके बावजूद भी मेरा लन्ड गमछे से बाहर ही उनको अपनी दर्शन कराता रहा ।

मैंने अपनी होंठों को उनके नंगे पेट पर रख दिया और हल्के हल्के रगड़ने लगा । मेरे करवट बदलने से उनकी हथेली मेरे ललाट पर से हट कर मेरी छाती पर आ गई । वो जैसे सुध बुध खोई मेरी नंगी छाती पर अपनी उंगलियों को फिराने लगी । थोड़ी देर बाद मैने आर पार लड़ाई करने की सोची और अपने जीभ उनके गदराए हुए पेट से लगा दिया । उनके शरीर ने झटका खाया और उनकी उंगली फिसल कर मेरे सीने के मध्य बालों पर आ गई जिसे वो अपनी कोमल कोमल उंगलियों से हल्के हल्के सहलाने लगी ।

मैं उनकी गोरी पेट को चाटने लगा । चाटते चाटते नीचे की ओर बढ़ा । उनकी सेक्सी नाभि मेरे आंखों के सामने थी । मैंने अपनी जीभ उनके नाभि में ढुका दिया । वो उत्तेजित हो कर उछल सी पड़ी । मैं उनकी नाभि में बदस्तूर जीभ पेलता रहा । और साथ में अपने एक हाथ से उनकी मोटी मोटी जांघों को पेटिकोट के उपर से सहलाने लगा । काफी गुदाज जांघें थी ।

वो मेरे सीने के बालों को सहलाते हुए मेरी निप्पल को कुरेदने लगी । मैंने बहुत देर तक उनकी नाभि के साथ छेड़छाड़ किया । वो जरा भी प्रतिवाद नहीं की । मैं काम वासना से भर गया । मेरा लन्ड पुरे शबाब के साथ गमछे से बाहर सर उठाए खड़ा था । उनकी उंगली मेरे सीने से होते हुए नीचे मेरी नाभि के नीचे आ पहुंची । उनकी उंगलियां मेरी झांटों के उपरी सतह तक आ पहुंची ।

मुझसे अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था । मैंने अपनी उंगली उनके पेटीकोट के नाड़े पर रखी और एक झटके में खोल दिया । पेटिकोट ढीला हो गया था । मैंने हाथों से पकड़ कर पेटीकोट को नीचे घिसका दिया जिससे उनकी नाभि के नीचे पेडू के अगल बगल बड़ी बड़ी झांट साफ दिखाई देने लगी । मैं उनकी नरम , कोमल झांटों को अपने एक हाथ की उंगलियों से सहलाने लगा । और दूसरी हाथ को कमर और जांघों के बीच ढुका कर उनके नरम नरम मांशल कमर और जांघों को दबोचने लगा ।

वो चुपचाप निशब्द पड़ी रही ।

मैंने उनकी झांटों को सहलाते हुए धीरे से कहा – ” चाची , एक देवर भाभी वाला चुटकुला सुनोगी ?”

वो कुछ नहीं बोली । चुपचाप मेरे नाभि और झांटों के बीच वाले भाग को सहलाते रही ।

मैंने उन्हें कुछ भी नहीं जबाव देते हुए भी चुटकुला सुनाया ।

” तीन छोटे-छोटे बच्चे सड़क पर खेल रहे थे । उनके क़रीब दो नयी नकोर कारें खड़ी थी । एक मारूति सुजुकी और एक लैंडओवर थी । एक बच्चा बोला , मैं चाहता हूं , मैं बड़ा होऊं तो मेरे जिस्म पर चांदी के बाल उगे , तोड़ कर बेचूं तो ये मारूति सुजुकी मेरी हो । दूसरा बच्चा बोला , मैं चाहता हूं मैं बड़ा होऊं तो मेरे जिस्म पर सोने के बाल उगे , तोड़ कर बेचूं तो वो लैंडओवर मेरी हो । तीसरा बच्चा चुप रहा । दोनों ने इसरार करके पूछा , क्यों बे तु चांदी के बाल चाहता है या सोने के । तीसरा बच्चा बोला , मैं बालों जैसा बाल चाहता हूं , लेकिन सारे जिस्म पर नहीं , बस एक खास जगह पर चाहता हूं । ऐसे बाल मेरी बड़ी बहन के है और ये दोनों गाडियां उसकी है ।”

सुनकर भी कुछ नहीं बोली बल्कि मेरी झांटों को अपने उंगलियों से जोर जोर से सहलाने लगी ।

मैंने भी उनकी झांटों को अपने होंठों से दबाया और खिंचने लगा । वो उत्तेजित हो कर थोड़ा नीचे सरक गई जिससे उनकी पेटिकोट और भी नीचे की ओर सरक गई । मैंने पेटीकोट को दोनों हाथों से पकड़ कर उनके जांघों तक सरका दिया । उनकी झांटों से भरी चुत मेरी आंखों के सामने नंगी हो गई । काफी फुली हुई चुत थी । चुत की दरारें बड़ी थी और वो उनके काम रस से लबालब भरी हुई थी ।

मैं थोड़ा नीचे की ओर सरका और अपनी खुरदरी जीभ से रस से भरी हुई लम्बी दरार को उपर से नीचे तक चाट लिया ।

वो उत्तेजित हो कर मेरे आठ इंच के मोटे तगड़े लन्ड को अपने हाथों से दबोच ली ।

मैंने उनकी चुत पर अपना चेहरा रगड़ने लगा । और जीभ को चुत के अंदर धकेलने लगा । उनकी चुत खुब जोशो खरोश के साथ पानी बहाये जा रही थी । मेरा पूरा मुंह उनके चुत के पानी से सराबोर हो गया था ।

वो मेरे लन्ड को पकड़ कर मूठियाने लगी । मुझे लगा कहीं मैं बिना कुछ किए झड़ ना जाऊं ।

मैं जल्दी से बिस्तर से उठ खड़ा हो गया लेकिन मेरा लन्ड गमछे से बाहर उन्हें अपनी दर्शन कराता रहा । वो सोफे पर अधलेटी सी अवस्था में थी । उनकी पेटिकोट जांघों पर सिमट गई थी जिससे उनकी झांटों भरी रसदार चुत नंगी दिख रही थी ।

मैंने उनकी आंखों में देखा । वो मुझे प्रश्न भरी निगाहों से देख रही थी ।

” मैं बाथरूम से आता हूं ” – मैंने अपनी चढ़ती सांसों को काबू करते हुए बोला ।

वो कुछ नहीं बोली ।

मैं बाथरूम करने के बाद बाहर निकला तो ड्राइंगरुम खाली था ।

मैं उनके कमरे में गया ।

कमरा पुरी तरह से अन्धकार में डुबा हुआ था । खिड़कियां बंद थी । उन पर पर्दे लगे हुए थे । कोई भी लाईट जल नहीं रही थी । थोड़ी बहुत जो प्रकाश आ भी रही थी वो दरवाजे के थ्रू आ रही थी । मैं उनके पलंग के पास गया ।

अंधेरा होने के बावजूद भी स्पष्ट दिखाई दे रहा था । वो सर से पांव तक एकदम नंगी बिस्तर पर पीठ के बल लेटी हुई थी । वो अपने दोनों पांव फोल्ड किये हुए थी । और अपने दाहिने हाथ को अपने ललाट पर रखी हुई थी । उनकी बड़ी बड़ी चूचियां जो एक हाथ में समा नहीं पाए , उनकी सांसों की गति के साथ उपर नीचे हो रही थी । जांघें काफी मोटी मोटी और सेक्सी थी । गले में मंगलसूत्र के अलावा कुछ भी नहीं था । हाथों में चुड़ियां और पांवों में पाजेब । मैं मंत्रमुग्ध उनकी सेक्सी काया निवस्त्र निहारता रहा ।

मैंने अपना पहना हुआ एकमात्र गमछा निकाल दिया । और पूर्ण नग्न हो कर उनके बगल में लेट गया । वो मेरी तरफ करवट ली और मुझसे चिपक गई । उन्होंने अपने एक हाथ से मेरे लन्ड पर कब्जा किया और दूसरी हाथ को मेरे बड़े बड़े चूतड़ों पर रखा ।

मैंने भी अपनी एक हाथ से उनकी चूचियों को पकड़ा और दूसरी हाथ के उंगलियों को उनके चुत में डाल दिया ।

और हमारे होंठ और जीभ एक दूसरे के अन्दर प्रवेश करने के लिए युद्ध करने पर उतारू हो गए ।

उसके बाद…….. दो घंटों के दौरान सब कुछ हुआ । एक दुसरे के गुप्तांगों को चूसना , चाटना , और वो सब करना जिसके करने से बच्चे पैदा होते हैं । चार बार उन्होंने अपनी पानी निकाली तो दो बार मैंने । वो सन्तुष्ट हो कर गहरी नींद में सो गई । मैं भी उनके बगल में अपनी आंखें बंद करके लेट गया ।

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