Sagar – An Erotic Incest Story – Update 18A

Sagar - An Erotic Incest Story
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Update 18. A.

” हां ।” – रीतु ने विश्वास के साथ कहा ।

” लेकिन कौन ? और यदि वो मुझे या अनुष्का को फंसाना चाहता था तो क्यों ? इससे उसको क्या हासिल होता ?”

” ये तो अभी तहकीकात की विषय है । अच्छा ! एक बात बताओ ? जीजू के फ्लेट का पुलिस ने फिंगरप्रिंट तो लिया होगा ?”

” हां । वहां कुल सात लोगों का फिंगर कहो या फुट प्रिंट मिला है । जिनमें जीजू , श्वेता दी , अमर , अनुष्का और मेरा मिल चुका है लेकिन बाकी के दो का मिलान अभी तक नहीं हो पाया है ।”

” जिन दो लोगों का मिलान अभी तक नहीं हो पाया है उनमें एक तो वो खबरी भी हो सकता है ।”

” हो सकता है ।”

” अमर की मोबाइल कहां है ?”

मैं चौंका । मैं तो अमर के मोबाइल के बारे में भुल ही गया था ‌।

” ये तो मेरे दिमाग से ही उतर गया था । मैंने इसके बारे में पुलिस से पूछा ही नहीं ।”- मैंने खेद पूर्वक कहा ।

” कोई बात नहीं । इस बार पुछ लेना और अमर की मम्मी से भी ।”

” अच्छा एक बात बता आगरा में संजय जी के उपर जो हमला हुआ था , क्या उसका भी अमर के कत्ल से कुछ सम्बन्ध हो सकता है ?”

” मुझे वहां की सारी बातें फिर से बताओ ।”

मैंने आगरा में रिसेप्शन में हुई सारी बातें बताई लेकिन श्वेता दी और मेरे बीच हुई सेक्स को छुपा लिया ।

” तुझे क्या लगता है संजय जी के उपर हमला का इस केस से कोई सम्बन्ध है ?”

” आप को लगता है कि वहां किसी ने संजय जी पर गोली चलाई और उन्हें जान से मारने का प्रयत्न किया ।”

” हां ।”

” लेकिन मुझे तो कुछ और ही लग रहा है ।”

” क्या ?”

” मुझे तो लगता है कि वहां संजय जी पर नहीं बल्कि आप पर गोली चलाई गई है । उस गोली का शिकार संजय जी नहीं बल्कि आप होने वाले थे ‌।”

मैं सकपकाया…. फिर हड़बड़ाया ।

” क्या बोल रही है ?”

” जब गोली चलाई गई तब स्टेज पर संजय जी के ठीक आगे आप खड़ थे । मतलब संजय जी आप के ओट में खड़े थे । आप ने संजय जी के चश्मे के प्रतिबिंब से अपनी तरफ तनी हुई रिवाल्वर देखी । आप ने कुद कर ये निष्कर्ष निकाला कि कोई संजय जी को मारना चाहता है लेकिन वो गोली उन्हें कैसे लगती । वो तो आप की कवर में थे । यदि आप संजय जी को लिए जमीन पर नहीं गिरते तो गोली आपने लगनी थी ना कि संजय जी को ।”

मैं भौंचक्का आंखें फाड़े चुपचाप उसे देखता रहा । मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि किसी ने मुझे आगरा में मारने की कोशिश की थी ।

मैं प्रशंसा भरी नजरों से उसे देखा ।

” तब तो इसका मतलब यही लग रहा है कि दोनों घटनाएं आपस में जुड़ी हुई है ” – मैंने कहा ।

” हो सकता है और नहीं भी हो सकता है ।”

मैं कुछ देर तक सोचता रहा ।

” भाई ” – रीतु चिन्तित भरे स्वर से बोली -” कहीं आप ने कुछ ऐसी वैसी हरकत तो नहीं न कर दी जिससे कोई आप के जान का प्यासा हो गया हो ।”

” अरे नहीं नहीं । मैंने कोई भी ऐसी वैसी हरकत नहीं की हैं । ”

” तो फिर ये सब क्या है ? क्यों कोई आप के जान के पीछे पड़ा है ?”

” यही तो समझ में नहीं आ रहा है । जरूर कोई किसी के मुगालते में मेरे पीछे पड़ गया है । मैं एक काम करता हूं परसो रविवार है , उस दिन श्वेता दी और जीजू यहां शिफ्ट होने वाले हैं , मैं उस दिन वही चला जाता हूं और पुलिस से भी मिल लुंगा और उनसे ये सारी बातें डिसकस कर लुंगा ।”

” हूं , ये सही रहेगा और आप एक काम और करना ।”

” क्या ?”

” एक बार अपने बुद्धि से श्वेता दी के फ्लेट की छानबीन भी कर लेना । वैसे तो पुलिस पहले छानबीन कर चुकी है लेकिन आप एक बार खुद बड़ी बारीकी से जांच लेना । हो सकता है आप को कुछ ऐसा दिख जाए जो पुलिस को न दिखी हो और यदि दिखी भी हो तो उन्हें वो महत्वपूर्ण जैसी ना लगी हो । वो कहते है न कि मुजरिम कितना भी होशियार क्यों न हो मगर अपने जुर्म की निशानी कहीं ना कहीं छोड़ ही जाता है ।”

” एक महिना के आसपास हो गया , क्या इतने दिनों तक कुछ निशानी या क्लू बची भी होंगी । इतने दिनों में तो कितनों बार बाथरूम ही नहीं बल्कि पुरे घर की साफ-सफाई हो गई होगी ।”

” फिर भी आप देखना जरूर ।”

” जरूर देखूंगा “- मैंने कहा -” अमर का कत्ल ३६ कैलिवर के रिवाल्वर से हुआ है । तु कहती है कि काजल के डैड के पास भी रिवाल्वर है । क्या तुने वो रिवाल्वर देखी है ? क्या वो ३६ कैलिवर की रिवाल्वर है ?”

” काजल के डैड के पास रिवाल्वर तो है लेकिन वो कौन सी रिवाल्वर है , ये मुझे नहीं पता । मुझे रिवाल्वर की किसी भी क्वालिटी के बारे जानकारी नहीं है ।”

मैं कुछ नहीं बोला ।

” क्या आप को काजल के डैड पर शक है ?”

” नहीं । मैं बस जानकारी के लिए पुछ रहा था – मैंने कहा -” लेकिन दिल्ली जैसे शहर में गन का लाइसेंस मिलना बड़ी मुश्किल काम है , जबकि यहां हम देख रहे हैं कि जो तो गन लिए घुम रहा है ।

” गन होना बड़ी बात तो है ही , लेकिन उसे हैंडल करना भी बड़ी बात है । इतना भी आसान नहीं है कि हर कोई गन से टारगेट कर सके । जिस तरह से अमर के सीने में बिल्कुल दिल के करीब गोली मारी गई थी और जैसा कि आगरा में हुआ था उससे तो यही लगता है कि वो आदमी बहुत अच्छी तरह से गन हैंडल करता है । ”

” हां । बिल्कुल परफेक्ट निशाना साधा था , वो तो किस्मत अच्छी थी कि मैंने चश्मे में देख लिया ।”

” भाई मुझे बहुत डर लग रहा है । आप प्लीज सावधानी से रहिएगा ।” – वो भावुक होकर बोली ‌।

” अरे क्यों चिंता करती है , कुछ नहीं होगा मुझे । मुझे मरना होता तो मैं उसी दिन मर गया होता । मेरा ग्रहण खतम हो गया है और अब से उस मादरचोद का ग्रहण शुरू होने वाला है । ” – मैंने शुष्क लहजे में कहा ।

” आप पुलिस प्रोटेक्शन क्यों नहीं ले लेते ।”

” पुलिस जिस तिस को प्रोटेक्शन थोड़ी न दे देती है । और क्या कहेंगे पुलिस से ? अभी हमने जो भी डिस्कसन किया है वो तो हमारी इमेजिनेशन है । और वैसे भी तुझे इतना भी डरने की जरूरत नहीं है । कोई धोखे से कुछ कर दे तो बात अलग है । वैसे यु नो….आयम मार्शल आर्ट्स एंड ब्लेक बेल्ट होल्डर । पांच सात से तो ऐसे ही निपट लुंगा ।”

वो कुछ बोली नहीं , सिर्फ आगे बढ़कर मेरी गले लग गई । मैंने भी उसे अपने बाहों में कस लिया । थोड़ी देर हम ऐसे ही पड़े रहे फिर वो मुझसे अलग हो गई और बोली – ” तो अब आप क्या करोगे ?”

” करूंगा ना । कुछ ना कुछ तो जरूर करूंगा । पहले इंस्पेक्टर कोठारी से मिलता हूं फिर बाद की प्लानिंग करेंगे ।”

” फिर भी क्या सोचे हो ?”

” सभी की जन्म कुंडली निकालूंगा , फिर देखते हैं ।”

वो कुछ नहीं बोली ।

अचानक मुझे कुछ याद आया ।

” चाची की मोबाइल भी चोरी हो गई है ।”

” क्या ? कब ?”- वो चौंकते हुए बोली ।

” जिस दिन उर्वशी की शादी थी । ”

” और उसी दिन सुबह अजय का खून हुआ था “- वो अचरज भरे स्वर में बोली ।

” हां । ”

” क्या इसका भी ताल्लुक इस केस से है ?” – वो प्रश्न सूचक दृष्टि डालते हुए बोली ।

” कह नहीं सकता । हो सकता है कि ये एक इत्तफाक हो । लेकिन अभी जैसी परिस्थितियां हैं उसमें किसी भी बात को नजरंदाज नहीं किया जा सकता ।”

मैंने कुछ देर तक सोचा फिर बोला -” जिस दिन अमर का कतल और रात में उर्वशी का शादी होना था , उस दिन यहां की कंडीशन कैसी थी । मतलब हमारे घर में । चाची के घर में ।”

” जहां तक मुझे याद है आप सुबह दस बजे डैड की कार लेकर यहां से श्वेता दी के घर जाने के लिए निकल गये थे । और आपसे पहले ही डैड आफिस के लिए निकल गये थे। मैं उस दिन कालेज नहीं गई थी , दिन भर घर पर ही थी । आपके निकलने के आधे घंटे बाद चाची और श्वेता दी आ गई थी । फिर माॅम , चाची , श्वेता दी और मैं गप शप करने लगे । ”

” कैसी गप शप ?”

” खास कुछ नहीं , औरतों वाली बात । फिर करीब आधे घंटे बाद ही चाची चली गई । ”

” क्यों ?”

” बोली तबीयत थोड़ी ठीक नहीं है ।”

” हूं , फिर ?”

” फिर चाची के जाने के पौन घंटे बाद श्वेता दी भी चली गई । बोली ब्यूटी पार्लर जाना है । क्योंकि उस दिन उनकी सहेली उर्वशी की शादी जो थी ।”

” और चाचा , राहुल ?”

” राहुल तो अपने स्कूल में था और चाचा ड्यूटी पर ।”

” चल ठीक है ” – मैंने घड़ी में टाईम देखते हुए कहा -” मेरा क्लब जाने का टाइम हो गया है , निकलता हूं अब ।”

” दो मिनट रुक जाओ मैं चाय बना देती हूं ।”

मैंने हां में सर हिलाया । वो नीचे चली गई । उसके जाने के बाद बाथरूम में जाकर हाथ मुंह धोया फिर नीचे हाल में जाकर सोफे पर बैठ गया । माॅम अभी अपने कमरे से बाहर नहीं निकली थी ।

चाय पीकर अपनी बाइक से क्लब निकल गया ।

शाम को साढ़े सात बजे जब मैं घर आया तब सभी मतलब डैड , माॅम और रीतु को हाल में बैठे गहन मुद्रा में विचार विमर्श करते हुए पाया ।

” क्या बात है ? सभी इतने गम्भीर क्यों बैठे हैं ?”- मैंने डैड की तरफ देखते हुए कहा ।

” तुमने दिन में रीतु से जो बातें की थी , उन्हीं को लेकर चर्चा हो रही है ।” – डैड ने चिन्तित हो कर कहा ।

” भाई ” – रीतु बोली – ” मैंने सारी बातें माॅम डैड को बता दी है ।”

” तुमने हमें ये सब पहले क्यों नहीं बताया ?” – डैड ने कहा ।

” आप सभी को सारी बातें तो पता ही थी । अमर के मर्डर केस के बारे में आप सब जानते ही हैं । और आगरा में जो हुआ था , वो भी मैंने माॅम को बताया था ” – मैंने माॅम की तरफ देखते हुए कहा -” क्यों माॅम बताया था न ?”

” हां बताया था ” – माॅम ने कहा -” लेकिन ये थोड़ी न बताया था कि वहां तुझे मारने की कोशिश की गई थी ।”

” अरे माॅम , मुझे भी कहां पता था कि वहां मुझे मारने के लिए कोशिश की गई थी। रीतु से बात करने से पहले मैं भी यही समझता था कि वहां संजय जी को मारने के लिए गोली चलाई गई थी ।”

” भाई सही बोल रहे हैं माॅम ” – रीतु ने कहा – ” मैंने बताया तो था आप लोगों को सारी बातें जो भाई और मेरे बीच में हुई थी ।”

” है कौन वो जो तुम्हारे पीछे पड़ा है ।” – डैड ने कहा ।

” मैं ” – रीतु ने कहा – ” चाय बना के ले आती हूं ।”

रीतु किचन चली गई ।

मैं , डैड और माॅम के साथ – जो बातें दिन में रीतु के साथ हुई थी – वही सब बातें होने लगी ।

रीतु के आने के बाद भी वही सब चर्चा होती रही ।

डिनर का समय हो गया था । हमने एक साथ डिनर किया ।

मैंने डिनर के वक्त सबको समझाया कि ये सारी बातें हमारे बीच में ही रहनी चाहिए । कोई भी किसी को इसके बारे में किसी को नहीं बतायेगा । सभी ने मेरी राय से सहमति जताई ।

डिनर के पश्चात सभी अपने अपने कमरे में चले गए । मैं भी अपने रूम में जाकर कपड़े वगैरह चेंज कर के बिस्तर पर लेट गया ।

रीतु के बातों ने मुझे झकझोर के रख दिया था ।

कौन है वो जो मुझे मारना चाहता है ?

कौन है वो जो मुझे अमर के कतल में फंसाना चाहता है ?

आखिर मैंने ऐसा किया क्या है ?

कौन है जो मेरा इतना बड़ा दुश्मन बना बैठा है ?

अमर ने क्या किया था कि उसे जान से हाथ धोना पड़ा ।

अगर हमने कुछ ग़लत भी किया था तो वो सिर्फ और सिर्फ सेक्स ।

लेकिन सेक्स भी किया तो किसी को दबाव देकर नहीं बल्कि उन युवतियों के रजामंदी से । कभी सपने में भी जबरदस्ती का ख्याल नहीं आया ।

क्या अमर का अनुष्का के साथ सच में रिलेशनशिप था ‌।

लेकिन यदि अमर की रिलेशनशिप अनुष्का के साथ थी भी तो फिर मैं टारगेट क्यों ।

सिर्फ एक युवती थी जिसके साथ मैंने और अजय ने एकसाथ सेक्सुअल रिलेशनशिप बनाया था लेकिन वो भी कई साल पहले । शायद चार साल हो गए होंगे । लेकिन हमने कोई जबरदस्ती तो नहीं की थी बल्कि उसी की इच्छा थी कि थ्रीसम करने की ।

तो फिर आखिर में अजय और मेरा कौन ऐसा काॅमन शख्स है जो हमें दुश्मन समझता है ।

कौन है वो चौथा आदमी जिसने पुलिस को अमर के खून होने की सूचना दी ।

कौन है वो खबरी ।

मैंने काजल को कहा था कि रात में चैटिंग करेंगे लेकिन इन परिस्थितियों में में खुद ही टेंशन से भरा हुआ था । मैंने काजल को एक मैसेज कर दिया ।

और मैं घंटों सोचते सोचते समय गुजार दिया ।

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