Sagar – An Erotic Incest Story – Update 18

Sagar - An Erotic Incest Story
Reading Mode

Update 18.

शाम को चार बजे मैं उठा और अपने कमरे से बाहर निकला ।

बाहर निकलते ही मैंने छत पर एक साइड में रीतु को फोन पर बातें करते हुए पाया ।

उसने निगाह उठा कर मेरी तरफ देखा और फिर जानबूझ कर स्वर ऊंचा करते हुए बोली – ” मैं तुझे फिर फोन करती हूं , महेश , अभी मेरे भैय्याया आ गये हैं ।”

उसके भैय्याया कहने से ही मैं समझ गया कि फोन पर कोई महेश नहीं था ।

मैं उसके सामने जा खड़ा हुआ ।

उसने बड़ी अदा से मुझे देखा ।

” महेश ।” – मैं उसे घुरता हुआ बोला ।

” यस भैयया ।” – वो पलक झपकते बोली ।

” कौन है ये महेश ?”

” मेरा ब्वायफ़्रेंड है ।”

” वो तो सुरेश है ना ।”

” वो प्रीलंच ब्वायफ़्रेंड है । ये पोस्टलंच ब्वायफ़्रेंड है ।”

” क्या मतलब ?”

” भुल गए… मेरी कालेज… वो लड़की मधुमिता… लड़कियों का ब्वायफ़्रेंड…घर से निकलते समय…घर आते समय ।

” ऐसे टोटल कितने हैं ?”

” ज्यादा नहीं है । आपकी बहनजियों से कम है ।”

” लिस्ट में मेरा नम्बर कौन सा है ?”

” आप का लिस्ट में क्या काम ?”

” क्यों नहीं काम ?”

” आप ब्वायफ़्रेंड कैसे हो सकते हो ? आप तो भैय्या हैं ।”

” भैय्या ब्वायफ़्रेंड नहीं हो सकता ?”

” नहीं हो सकता । ब्वायफ़्रेंड तो खास होता है , भैय्या तो खडुस , हमेशा अपना हुकुम चलाने वाला , बात बात में नुक्ता चीनी निकालने वाला और वाइफोकल्स लगाता है ।”

” मैं तुझे ऐसा दिखाई देता हूं ?”

” अभी नहीं ।”

” यानी देर सबेर तो वैसा बन के रहूंगा ।”

वो हंसी ।

” भीतर आ , तेरे से एक बात करनी है ।”

मैं अपने कमरे में प्रवेश किया और बिस्तर पर बैठ गया ‌।

मेरे पीछे पीछे वो भी वहां पहुंच गई ।

” बैठ ।”

उसकी भवें उठी ।

” अरे बिस्तर पर , कुर्सी पर , कहीं भी बैठ मेरी मां ।”

वो मेरे सामने बिस्तर पर बैठ गई ।

” बोल बेटा ।”

मेरी हंसी छुट गई ।

वो भी हंसने लगी ।

फिर हम दोनों संजीदा हुए ।

” रीतु ” – मैं बोला -” अमर..मेरा दोस्त जिसका मर्डर हो गया था , उसको तु जानती ही हैं – मैं चाहता हूं कि तु पुरी बात सुन और फिर मुझे कोई सजेशन दे ।”

” वो तो ठीक है लेकिन पहले ये बताओ कि मेरी पाकेट मनी कहा है ।”

” अरे ! ले लेना । पहले सेनसियर हो के मेरी बात सुन ।

” सुन रही हूं ।”

मैंने एक सिगरेट सुलगा लिया और धीरे धीरे तफसील से तमाम वाकयात वयान किया ।

आखिरकार मै खामोश हुआ और प्रश्नसूचक निगाहों से उसकी तरफ देखा ।

” एक सिगरेट मुझे दीजिए ।” – वो बोली ।

” क्या ?”

” सोचने के लिए ।”

” तु सिगरेट पियेगी ?”

” खाऊंगी । आप दीजिए तो सही ।”

मैंने भुनभुनाते हुए अपना क्लासिक का पैकेट और लाइटर उस के सामने फेंका ।

उसने पैकेट से एक सिगरेट निकाला , लेकिन लाइटर की तरफ हाथ न लगाया । उसने सिगरेट को होंठों के करीब ले जाकर – लेकिन होंठों से लगाकर नहीं – नथुनों से धुआं निकालने का अभियान किया ।

” तो राजीव जीजू का अनुष्का नाम की औरत से अफेयर है । बेचारी श्वेता दी का फिर क्या होगा ? वो तो बेचारी टुट ही जाएंगी ।”

” मैंने अभी तो सारी बातें बताई । राजीव जीजू का अनुष्का के साथ मोहब्बत सिर्फ जिस्मानी है और इसके चलते उन दोनों की शादी पर कोई असर नहीं पड़ेगा । तु दिमाग केन्द्रित कर क़ातिल ढुढने में ।”

” आप की सारी स्टोरी सुनने के बाद क़ातिल होने का शक पांच लोगों पर जाता है ।”

” कौन कौन ?”

” पहला शक अनुष्का पर जाता है । दुसरा उसके पति कुलभूषण खन्ना पर । और तिसरा जीजू पर ।”

” और बाकी दो ?”

” चौथा आप पर ।”

” क्या बक रही है ?”

” हम केस से सम्बंधित यदि हर किसी को शामिल करें तो उसमें आप भी आते हैं । और आप को यदि बाद कर दिया जाय तो सिर्फ चार बचते हैं ।”

” चौथा कौन ?”

” आप शायद उस गुमनाम व्यक्ति को भुल गए हैं जिसने पुलिस को पब्लिक बुथ से वारदात की सूचना दी थी ।”

” ओके । तो हमारे पास चार सस्पेक्ट है । अब तु बारी बारी से उनके बारे में डिस्कसन कर ।”

” सबसे पहले अनुष्का के बारे में बात करते हैं ।”

” बोल ।”

” मर्डर पुलिस के डाक्टर के अनुसार सुबह दस बजे से लेकर साढ़े ग्यारह बजे के बीच में हुआ है । ठीक ।”

” हां ।”

” और अनुष्का मर्डर के वक्त मौका ए वारदात पर मौजूद थी । खुद उसी के बयान के अनुसार वो वहां अधिक देर तक रूकी थी । इसलिए उसके पास मर्डर करने का भरपूर मौका था ।”

” बिल्कुल सही लेकिन खुन करने का मकसद क्या था ?”

” यही चीज तो इसके पक्ष में जा रही है । लेकिन मर्डर विपन तक इसकी पहूंच तो शर्तिया थी । इसके हसबैंड के पास वही रिवाल्वर है जिस तरह की रिवाल्वर से अमर का खून हुआ था ।”

” ३६ कैलिवर का रिवाल्वर । और उनके रिवाल्वर से कारतूस भी कम पाया गया था ।”

” इसका मतलब यह हुआ कि अनुष्का के पास वारदात को अंजाम देने के लिए मौका भी था और मर्डर करने के लिए हथियार भी । लेकिन मर्डर करने का कारण , वजह अभी क्लियर नहीं है ।”

” हूं । अब उसके पति कुलभूषण खन्ना की बारे में बोल ।”

” कुलभूषण खन्ना के पास मर्डर करने के लिए वजह भी है और हथियार भी उपलब्ध है ।”

” क्या वजह है ?”

” वो अपनी बीवी से बहुत प्यार करता है । जब उसे अपनी बीवी की बेवफ़ाई के बारे में पता चला तो वो अपना आपा खो दिया और उसकी जासूसी करते करते जीजू के फ्लेट में पहूंच गया । वहां उसने अपनी बीवी को अमर के बाहों में देखा और गुस्से में अमर पर गोली चला दी ।”

” लेकिन अमर पर क्यों ? अनुष्का की आशनाई तो जीजू के साथ थी । अगर उसे मारना होता तो जीजू को मारता । अमर को क्यों ?”

” क्यों अनुष्का की आशनाई जब जीजू से हो सकती है तो अमर से क्यों नहीं । क्या अमर भगवान राम था , क्या वो लड़कियों के मामले में कोई महात्मा था । ये तो आप मुझसे बेहतर जानते होंगे ।”

” लेकिन ये बात अभी सामने कहां आई है कि अनुष्का का सम्बन्ध अमर से भी था । और मान लिया उन दोनों के बीच आपस में एक गहरा सम्बन्ध था लेकिन आशनाई करने के लिए उन्हें जीजू का ही घर मिला था । वे और भी कहीं मिल सकते थे । जीजू के घर ही क्यों ?”

” ये तो सभी को पता है कि श्वेता दी कई दिनों से यहां अपने मायके में है और जीजू दिन के वक्त अपने आफिस में होते हैं । और आपने ही कहा था कि फ्लेट की एक चाबी अनुष्का के पास भी रहती है । और यहां दिल्ली से गाजियाबाद जाने में ट्रेन से समय ही कितना लगता है ।”

” लेकिन उस दिन अनुष्का की डेट जीजू के साथ थी । और उसी लिए जीजू ने उस दिन आफिस से छुट्टी लेकर घर आ गए थे । अगर अनुष्का की डेट उस दिन पहले से ही फिक्स थी तो भला वो क्यों कर अजय के साथ उसी फ्लेट में जाएगी ।”

” कुछ न कुछ तो है जो अभी दिखाई नहीं दे रहा है लेकिन भले ही अभी कुलभूषण खन्ना के क़ातिल होने की वजह नहीं दिख रही हो पर हथियार तो उसके पास भी है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिस समय कतल हुआ था उस वक्त के लिए उसके पास कोई एलीबाई , कोई गवाह नहीं है । वो कहता है कि उस वक्त वो अपने घर पर था लेकिन कौन जानता है कि वो अपने घर पर ही था या वहां से दुर गाजियाबाद में ।

” ओके । अब जीजू के बारे में बता ?”

” जीजू के पास भी कत्ल करने का मौका हासिल था ।”

” कैसे ?”

” जीजू ने पुलिस को दिए बयान में कहा कि वो उस वक्त दिल्ली से अपने घर बाइ कार लौट रहे थे । उन्हें वहां से अपने घर तक आते-आते अढ़ाई घंटे लग गए । ”

” हां ।”

” कौन कहता है ?”

” क्या मतलब ?”

” ये तो जीजू कह रहे हैं न । हो सकता है कि वो बहुत पहले ही आ गये हों ।”

” और ?”

” और उन्होंने अनुष्का को अमर की बाहों में देखा और गुस्से में अमर का खून कर दिया ।”

” लेकिन हथियार… हथियार कहां से आया ?”

” हथियार कौन सी बड़ी बात है । कहीं से जुगाड़ कर लिया होगा ।”

” ओके । अब वो चौथा खबरी ?”

” जिस ने पुलिस को सूचना दी थी क्या वो मर्द था ?”

” हां ।”

” उसे कैसे पता कि इग्जेक्ट जीजू के ही फ्लेट में खून हुआ है ? आप सबसे पहले तो ये बताओ कि उस आदमी ने पुलिस को क्या कहा था ?”

” मतलब ?”

” मतलब ये कि उसने पुलिस को पब्लिक बुथ से क्या कहा था ? कि उसने जीजू के फ्लेट में किसी गोली चलने की आवाज सुनी है या किसी का खून होते हुए देखा है या किसी झगड़े या मारपीट का अंदेशा हुआ है ?”

” ये तो मुझे नहीं पता ।” मैंने निराश होकर कहा ।

” तो ये भी तो हो सकता है कि उस गुमनाम खबरी ने ही अमर का खून किया हो और चूंकि उसने खून किया है तो उसे बखूबी पता होगा कि उसने खून कब किया है और किसी खास समय का इंतजार किया और फिर उसने पुलिस को फोन करके बताया ।”

” किस खास समय का ?”

” उस खास समय का जब फ्लेट के अन्दर अनुष्का मौजूद पाई जाय या उस खास समय का जब आप फ्लेट के अन्दर पाए जाय ।”

मेरी आंखें चौड़ी हो गई ।

” तुम्हारे कहने का मतलब है कि उसने पहले अमर का खून किया फिर अनुष्का या फिर मुझे उस खून के इल्ज़ाम में फंसाने के लिए पुलिस को इन्फोर्मे किया ।

नेक्स्ट रात तक ।

Please complete the required fields.




Comments

Leave a Reply