Update 12 A.
नाश्ता करने के पश्चात माॅम को बाय बोला और आन्टी ( अजय की मां ) के घर चला गया । उनका घर पैदल मेरे घर से पन्द्रह मिनट की दूरी पर था । अजय के पापा की ऊंची पोस्ट पर सरकारी नौकरी थी । उन्होंने पैसे काफी कमाये थे । उनके नौकरी के दौरान ही मरने के बाद पी. एफ. और ग्रेच्युटी की काफी अच्छी रकम मिली थी ।L.I.C. से भी insurance की मोटी रकम मिली थी जिसे उन्होंने बैंक में जमा करा दिया था । उनके खर्चे पैंशन के पैसों से बखूबी हो जाता था। उनका मकान दो तल्ला था दोनों तल्ले में दो रूम , एक हाल , किचन , बाथरूम था । दोनों तल्ला सेम पेटर्न में बना हुआ था । आन्टी नीचे ग्राउंड फ्लोर पर रहती थी । पहले एक रूम में आन्टी और दुसरे रूम में अजय रहता था लेकिन अमर के देहांत के बाद पुरे घर में वो अकेली रह गई थी ।
जब मैं उनके घर पहुंचा तब उनका मेन दरवाजा खुला हुआ मिला । मैं घर में प्रवेश किया और उनके रुम के पास गया । वो बिस्तर पर पलंग के सिरहाने पीठ टिकाए गुमसुम बैठी सामने दिवाल पर देख रही थी । मैंने उनकी नजरों का पिछा किया । दिवाल पर उनके पति और अमर की बड़ी फोटो लटकी हुई थी जिस पर फुलों का हार लगा हुआ था । उनकी नजरें अमर के फोटो पर टीकी हुई थी । उनके आंखों से आंसू छलक कर गालों को भिगो रहे थे । वो तील तील कर मर रही थी ।
मेरे गले की घंटी बजी । मन व्याकुल हुआ । ह्रदय विचलित हो उठा । मैं उनके रुम के दरवाजे से सटे दिवाल से टेक लगाये खड़ा हो गया । आंखों से झर झर आंसू बहने लगे । मैं बहुत ज्यादा भावुक हो गया था । मुझसे उनका गम देखा नहीं जा रहा था । मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं । कैसे उनको दिलासा दूं । क्या बोलूं । उनका जवान लड़का हमेशा के लिए उनका साथ छोड़ चुका था । क्या बीत रही होगी उनके दिल पर । क्या सोच रही होगी… अपने बेटे की बचपन की यादें… उसकी शरारतें…उसका नटखटापन…उसका रोना….या उसका हंसना…या उसका रूठना मनाना….या उसका प्यार ।
एक जवान बच्चे की मौत मां बाप के लिए श्राप होती है । उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी त्रासदी होती है । बच्चा तो चला जाता है लेकिन अपने पिछे मां बाप को जीवन भर के लिए आंसू और गम दे जाता है । वो जिंदा लाश की तरह हो जाते हैं । ये आंसू और गम उनके अंतिम पड़ाव तक साथ चलते रहते हैं ।
आंटी ने अपने पति की मौत के सदमे को अपने बेटे के प्यार में भुलने की कोशिश की होगी । मगर अपने बेटे अमर की मौत के बाद और कौन है जिसके लिए वो अमर को भुलाने की कोशिश करेंगी । एक ही तो लड़का था । और दूसरा कोई भी तो नहीं है ।
भगवान यदि मुझसे सिर्फ एक बर मांगने को कहे तो शर्तिया मैं यही मांगूंगा कि हे प्रभु किसी भी मां बाप के जिन्दा रहते उसके औलाद की मौत ना हो । और अगर हो भी तो औलाद के जन्मने के साल भर के अन्दर हो ।
मैंने कहीं पढ़ा था कि भगवान राम जब रावण का बध किये थे और रावण जमीन से गिरा पड़ा था तब उन्होंने अपने छोटे भाई लक्ष्मण को रावण से कुछ ज्ञान लेने के लिए उनके पास भेजा था । लक्ष्मण जमीन पर पड़े रावण के के पास गया और उनके सिर के बगल खड़ा हो गया । रावण कुछ नहीं बोला । तब श्री राम ने लक्ष्मण को समझाया कि रावण ब्राह्मण होने के साथ-साथ एक बहुत बड़ा ज्ञानी और विद्वान भी है । और यदि किसी से कुछ ज्ञान प्राप्त करना हो तो उनके चरणों के पास बैठना चाहिए । लक्ष्मण दुबारा रावण के पास गए और उनके पांवों के पास खड़े हो गए । तब रावण ने लक्ष्मण को एक बात बताई थी कि अगर तुमने कुछ करने का संकल्प ले रखा है तो उसे तत्काल कर लेना चाहिए । उसे बाद के लिए टालना नहीं चाहिए । रावण ने कहा…. मेरी तीन इच्छाएं थी जिसे मैं करना चाहता था लेकिन दुर्भाग्यवश नहीं कर पाया । १. स्वर्ग के लिए सीढ़ी बनाना ( सभी लोगों को स्वर्ग भेजना ) । २. समुद्र के खारे पानी को दुध में बदल देना ( कोई भी भुखा प्यासा नहीं रहे । दुध को सम्पूर्ण भोजन माना जाता है ।) और ३. मां बाप से पहले उसके पुत्र का देहांत ना हो ।
मैंने अपने आंसुओं को पोंछा और बड़ी मुश्किल से चेहरे पर मुस्कान लिए आंटी के पास गया । उन्हें अपने गले लगा कर हर तरह से दिलासा देने की कोशिश की । उनके दिमाग को अमर की यादों से निकालने की कोशिश की ।
कुछ देर बाद वो थोड़ी नार्मल हुई । उनके घर की जरूरत की चीजें मार्केट से ले आया । अब वो पहले से बेहतर थी । फिर मैंने उन्हें उपर वाला फ्लोर श्वेता दी और राजीव जीजू को रेंट पर देने की सलाह दी । और उन्हें ये भी बताया कि उनलोगो के आने से आपका अकेलापन भी दुर होगा । वो जरा सा भी आपत्ति नहीं की । सिर्फ यही कहा -” बेटा जो तुम्हें अच्छा लगता है वो करो । और श्वेता जैसी तुम्हारी बहन है उसी तरह मेरी बेटी भी है । उससे मुझे कोई भी किराया नहीं चाहिए ।”
कुछ देर वहीं बैठा रहा । उनसे बातें की । फिर मैं युनिवर्सिटी चला गया । वहां पता चला कि कुछ बड़ी कम्पनियां काउन्सलिंग के लिए आईं हुई है । मतलब आज यहां अधिक समय लगने वाला है । मैंने रीतु को फोन किया और उससे कहा कि वो कालेज की छुट्टी के बाद काजल को साथ में ही अपने घर लेते हुए आना और उसके लिए मैंने आगरा से जो पेठा लाया है वो उसे दे देना ।
काउंसलिंग शेष होते-होते शाम के छः बज गए । अब घर जाने में कोई फायदा नहीं था इसलिए वहीं से पैराडाइज क्लब चला गया । मैं अभी क्लब के अन्दर प्रवेश किया ही था कि स्टाफ ने मुझे कहा ‘ आपको कुलभूषण खन्ना याद कर रहे हैं ‘ ।
‘ क्या बात हो सकती है ‘ सोचते हुए मैं उनके आफिस की तरफ चला गया ।

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