#129
भैया- एक न एक दिन ये होना ही था पर चाची ये करेंगी सोचा नहीं था , मैने और चाची ने चाचा को उस रात के अँधेरे में दफना दिया और ये बात फैला दी की वो गायब हो गया है . मैने चाचा की गाड़ी को भी ठिकाने लगा दिया. मैं महावीर से मिलने गया पर वो खंडहर में नहीं था , बहुत दिनों बाद मैं उन कमरों में गया जो अब महावीर की अयाशियो के गवाह बन चुके थे. जंगल की ख़ामोशी में मेरा सकून यही बसता था महावीर ने मेरी दोस्ती को छल लिया था . इतनी हताशा मुझे कभी नहीं हुई थी .
और जब हमारी मुलाकात हुई तो हालात अचानक से नाजुक हो गए. राय साहब अपने भाई के गायब होने से परेशान हो गए थे , वो हर हाल में चाचा की तलाश करना चाहते थे , उन्हें महावीर और चाचा की दुश्मनी का मालूम हुआ तो उन्होंने सोच लिया की चाचा के गायब होने में महावीर का हाथ है वो बस एक सुराग की तलाश में थे की कब शक यकीन में बदले और वो महावीर को मार दे.
एक दिन हमारी मुलाकात हुई मेरे सामने मेरे अजीज की जगह एक धूर्त मक्कार महावीर खड़ा था जो मेरे घर की औरतो के बारे में बदनीयती रखता था . उसे अपने किये की जरा भी शर्म नहीं थी
अभी- महावीर तुझसे ये उम्मीद नहीं थी . तेरी हवस की आग में तू मेरे घर की औरतो को झुलसाना चाहता है .
महावीर- औरत और मर्द का एक ही रिश्ता होता है अभी, और क्या फर्क पड़ जायेगा दुनिया की लुगाई के मजे तो ले ही रहे है , अपने घर के हुस्न को चख लिया तो क्या होगा. उस पर सबसे पहला हक़ हमारा ही होना चाहिए न , मैं तो कहता हूँ हम एक सौदा कर लेते है तू मुझे चाची और नंदिनी को चोदने दे बदले में तू मेरे घर की औरतो को चोद लेना .
महावीर के मुह से ये सुनकर मुझे खुद पर बहुत अफ़सोस हुआ ये क्या बोल गया था . महावीर ने ही मुझे बताया की उसे सोने की खान मिल गयी है वो वहां से सोना लाकर तालाब में छिपा रहा है मौका मिलने पर उसे कहीं महफूज़ कर देगा. पर वो ये नहीं जानता था की वो सोना हमारा ही है . उसकी तमाम अर्नगल बातो से मेरा खून खौल रहा था और एक कमजोर लम्हे में मेरा हाथ उठ गया उस पर. महावीर हक्का-बक्का रह गया , उसके अहंकार पर लगी थी वो चोट.
महावीर- अभी, तो तू ये चाहता है
अभी- महावीर, इस से पहले की देर हो जाये लौट जा और फिर दुबारा इस तरफ मत मुड़ना
महावीर- गलती की तूने अभी
अभी- इस से पहले की गलती हो जाये तू चला जा महावीर
महावीर- अगर तूने सोच ही लिया है तो फिर अब कदम पीछे हटाने का सवाल ही नहीं, इस जंगल ने हमारी दोस्ती देखि है दुश्मनी भी देखने का मौका मिलना चाहिए न इसे.
अभी- मैं फिर कहता हूँ लौट जा.
महावीर- अब तो कोई एक ही लौटेगा
महावीर ने मुझ पर वार किया. मैं भी खुद को ज्यादा देर तक नहीं रोक सका और वो शुरू हो गया जो नहीं होता तो हालात ये ना होते. जल्दी ही महावीर पर मैं भारी पड़ने लगा तो उसने रूप बदल लिया . मैंने कभी नहीं सोचा था की इस बीमारी का ये इस्तेमाल करेगा. उसके सामने मेरा टिकना मुश्किल हो रहा था . उसके वार लगतार मुझे घायल कर रहे थे . जंगल की धरा मेरे रक्त से अपनी प्यास बुझाने लगी थी . पर तभी न जाने कहाँ से नंदिनी आ गयी . वो महावीर पर झपटी पर महावीर के आदमखोर रूप पर खून सवार था उसने नंदिनी को काट लिया. मेरे लिए बर्दाश्त करना आसान नहीं था पर ये सच था , गुस्से से मैंने महावीर को धर लिया. उस वक्त मैं इतना मजबूत नहीं था की आदमखोर की शक्ति के आगे भारी पडू, और मुझे जरुरत भी नहीं पड़ी थी , अचानक ही जंगल गोलियों की आवाजो से गूँज उठा .और जब हमने चलाने वाले को देखा तो हम सब हैरान रह गए. आदमखोर की खाल से रक्त की मोटी मोटी धारा बह रही थी .
धरती पर गिरते ही महावीर अपने असली रूप में आ गया . मौत कितनी भयावह हो सकती है ये मुझसे पूछो कबीर, एक रात पहले ही मुझे मालूम हुआ की मेरी माँ की जान चाचा की वजह से गयी, फिर अपने हाथो से मैंने चाचा की लाश को दफनाया और अब एक और जिसे मैं इतना करीब से जानता था मेरी आँखों के सामने दम तोड़ रहा था . उसने मरते हुए मुझसे बस एक बात कही थी ………..
मैं- उसे गोली किसने मारी थी .
भैया- अंजू, अंजू थी वो .
मैं अब समझ गया था की वो क्यों ये लाकेट पहनती थी क्यों वो शहर चली गयी थी उस वक्त और क्यों उसने ये लाकेट मुझे दिया था .
भैया- इस जंगल ने सबके राज छिपाए थे ये महावीर का राज भी छिपा सकता था पर मैं नहीं चाहता था , मैं चाहता था की उसकी लाश का अंतिम संस्कार होना चाहिए . ये जानते हुए भी की ये एक भूल होगी उसके परिणाम जानते हुए भी मैंने उसकी लाश को गायब नहीं किया.
मैं- क्या कहा था उसने मरने से पहले
भैया- तु जानता है , तू समझ गया होगा की मैं क्यों तुझसे ज्यादा सूरजभान को वरीयता देता था .
मैंने अपना माथा पीट लिया . मेरे सामने जो इन्सान खड़ा था अपने सीने में न जाने क्या क्या लिए बैठा था .
भैया- उसके बाद मैंने खंडहर से मुह मोड़ लिया. जंगल में वैध से साथ भटकता रहा ताकि नंदिनी के लिए इलाज तलाश कर सकू, वैध ने काफी हद तक नंदिनी की मदद कर भी दी थी , वैध की पुडिया से वो चांदनी रात में भी कंट्रोल कर पाती थी खुद पर. पर किसी ने वैध को मार दिया.और बात बिगड़ गयी हालात ऐसे हुए की एक ही पुडिया बची थी और नंदिनी ने वो तुमसे देने को कहा. हमने निर्णय लिया की अगर वो रूप बदलती भी है तो मैं उसे खंडहर में ले आऊंगा इतने सालो बाद मैंने उस जगह पर कदम रखा और तभी तुम भी वहां पहुँच गए.
मैं- भाभी ने कारीगर को भी तो काटा था वो फिर आदमखोर क्यों नहीं बना
भैया- दरअसल ये अलग अलग लोगो पर अलग असर करता है , मेरा अनुमान है की कारीगर उस वक्त खूब नशे में था तो जहर और शराब के मिश्रण से वो आदमखोर बनने की जगह सड गया . वो न ठीक से मर पाया न जिन्दा रहा . जब थोड़ी बहुत सुध आई तो वो भटकते हुए गाँव में पहुंचा जहाँ हमने मुठभेड़ में मार दिया उसे. मेरे ख्याल से सब कुछ जान गए हो तुम
मैं-मैंने क्या जाना , मैंने तो कुछ सुना ही नहीं
मैंने इतना कहा और भैया से लिपट गया .

