कमसिन कन्या – Update 2
पहली बार किसी लड़की के नितम्ब खुले देख रहा था, वो भी इतनी नजदीक से और उनको प्यार करने और चूमने का अवसर भी, मैंने कभी स्वप्न में भी सोचा नहीं था, कोमल जवान कली थी, अभी जवानी का रंग चढ़ ही रहा था, बिलकुल नादान सी, लेकिन शरीर ऐसा भरा हुआ और नशीला बनाया था भगवान ने, मैं देखता रह गया, सुडौल विकसित नितम्ब, गोरे और इतने चिकने, भूरी लालिमा के साथ नितम्बो के बीच की दरार जो उसकी योनी तक जा रही थी, मुझसे रहा नहीं गया, मैं जीभ और होठों से नितम्बो की पहाड़ियों को चूम चाट रहा था, वासना ने मुझे निष्फिक्र बना दिया था, शायद कोमल को कुछ आभास हुआ और उसने मेरी ओर करवट ली, अब उसका जोबन ऊपर की तरफ उठा हुआ, सलवार नाभी से नीचे, नाड़ा खुला, नीन्द में श्वास लेती , वक्ष ऊपर नीचे श्वास के साथ, मैं उसके चहरे को देख रहा था, कमर कटाव के साथ, वक्ष विकसित और कुर्ती के ऊपरी हिस्से से वक्ष का मांसल भाग बाहर निकल पड़ने को तैयार, अब सलवार को नीचे खींच पाना आसान था, बहुत धीर से नितम्ब के किनारे सलवार को पकड़ कर खींचा और सलवार जैसे कोई निकलना ही चाहती हो ऐसे निकल पडी, घुटनों तक सलवार को नीचे किया, सामने कोई अप्सरा नींद में बेफिक्र सो रही थी, मैं उसकी योनी देखा कर जैसे होश खो बैठा, आज पहली बार लड़की की योनी देखी वो भी एक कली की, बहुत हलके मुलायम बाल योनी पर, सुनहरे, अभी आने ही शुरू हुए थे ऐसा लगा, योनी के दोनों भाग फूले हुए, मीठे मालपुए की तरह, …..
एक खूबसूरत कमसिन कन्या जिसपर नई नई जवानी का खुमार चढ़ ही रहा था, इस प्रकार बेसुध सोई हुई अर्धनग्न, अपने बहुमूल्य खजाने को अनजाने में दिखाती हुई, उसे पता भी नहीं था वो क्या कर रही है, स्तनों का उन्नत उभार, कटीली कमर, योनी के दोनों ओर के फूले हुए पट, योनीद्वार के किनारे के सुनहरे बाल, मोटी गोरी झांघों का योनीद्वार के पास मिलकर बनता हुआ त्रिकोण और उसपर मासूमियत भरा उसका चेहरा गहरी नींद में बेखबर. यह दृश्य मुझे पागल बना रहा था. पाठकों, क्या कभी आपने जवान होती हरे भरे शरीर वाली कमसिन कली को अर्धनग्न देखा है और वो भी बेसुध बेखबर ? दोस्तों आपने भी जाना होगा की चोरी चोरी छुप के होनेवाली मस्ती का आनंद कुछ और ही होता है, कोई देख लेगा ऐसा एक रोमांच, शरीर में एक झुरझुरी, भय और आनंद का मिश्रण.खुले सेक्स में वो मजा कभी नहीं. मैंने कोमल की योनी के पास मुँह ले गया और स्वास ली, एक नशीली सुगंध, कोमल के शरीर की मोहक सुगंध उसके योनी के पसीने और रात को की गयी मूत्र परत से निकलती सुंगंध मिलकर एक अजीब समाँ बन रहा था,रहा नहीं गया, मैं धीरे से योनी पट को चूम रहा था, मन हो रहा था के योनी को हाथों से फैलाकर योनी छिद्र में अपनी जीभ डाल कर चूम लूं चाट लूं और उसे बाँहों में भर कर प्यार करूँ……….
जांघों को धीरे से फैलाया की कोमल की नींद ना खुल जाये, हसीन दृश्य, अपनी जीभ को योनी पंखुड़ियों से सटाकर उन्हें चूमा नमकीन स्वाद मादक कर रहा था. तभी याद आया रात इस लड़की ने मुझे सताया है और बदले की भावना आ आगई, अपने आप को कण्ट्रोल करता हुआ मैं रसोई में गया और फ्रिज से चोकलेट क्रीम लेकर आया, कोमल वैसे ही सो रही थी, दोनों पैरों को और थोडा फैलाया और एक घुटने के नीचे तकिया लगाया, योनी द्वार अब साफ़ दिख रहा था, योनी के दोनों ओर के दरवाज़ों को बहुत सावधानी से फैला कर चोकलेट क्रीम उड़ेल दी उसके त्रिकोण पर ओर चद्दर से ढक कर वापस अपने कमरे में आ गया, दिमाग से खुमार उतर नहीं रहा था. यह तो अच्छा हुआ कोमल की नींद नहीं खुली वरना क्या होता पता नहीं. मैं सांस रोके सोच रहा था क्या होता है, बार बार उसके कमरे में झांक आता था, कुछ देर बाद झाँका तो देखा वो उठ कर गद्दे पर बैठी हुई थी, उसके हाथों में चोकलेट क्रीम लगी थी और बार बार झुक कर अपनी योनी को देख रही थी और हाथों को योनी के ऊपर रगड़ कर क्रीम हटा रही थी, उसने योनी के दोनों ओर के पाटों को फैलाया, अन्दर की लाल दीवार दिख रही थी जिसपर भूरे रंग का चोकलेट क्रीम लसा पड़ा था, उसके चेहरे पर अजीब से भाव थे, मुझे दया आने लगी, कोमल ने अपनी कुर्ती के कोने से योनी के अन्दर की पुत्तियों और बाहर मालपुए से फूले हुए पाटों को साफ़ किया और कमरे से बाहर की तरफ आने लगी, मैं भागा…. और
आप सोचें की एक कुंवारी कमसिन कन्या जो अभी खिलती हुई कली ही है और एक लड़का जिसने अभी उम्र के बिस्वे साल में ही प्रवेश किया है, सेक्स के बारे में कितने उत्सुक और अधीर होंगे, यह मैंने बाद में जाना की कोमल भी सेक्स की रंगीन दुनिया के लिए सोचती थी और कमसिन कन्याएँ जितना सोचती हैं और अधरी होती हैं उतना और किसी उम्र में शायद ही होती होंगी और इस आनंद को प्राप्त करने के लिए नए प्रयोग करने से भी संकोच नहीं करती… कोमल बाथरूम में गयी और सलवार उतार कर अपने योनी स्थान को धोने लगी, बाथ का दरवाज़ा आधा खुला छोड़ दिया था, शायद उसने सोचा नहीं इतनी सुबह कोई होगा और मैं पीछे से देख रहा होऊँगा. अद्भुत दृश्य…
बनाने वाले ने गज़ब के नितम्ब और जांघें दी थी, गोल, भरे भरे मांसल,गोरे, बिलकुल जैसे सांचे में ढले हुए, मै उसकी योनी नहीं देख पा रहा था, पानी की धार योनी को साफ़ करती हुई जांघों के बीच से पैरों पर होती हुए नीचे गिर रही थी, उसकी कुर्ती गीली हो गयी थी, मैं दरवाजे के पीछे छुप कर देख ही रहा था की वो अचानक ही मुड़ी और मुझे देख स्तब्ध हो गयी, यही हाल मेरा था, उसने सलवार नहीं पहनी थी, सामने से अर्ध नग्न, योनी जांघें और पैर पानी से गीले, योनी पर के हलके सुनहरे बाल योनी से चिपके हुए, स्तन उन्नत और कुर्ती को फाड़ बाहर आने को तैयार, स्तन का ऊपरी हिस्सा गोरा चिकना आकर्षित कर रहा था, लेकिन हम दोनों को काटो तो खून नहीं ऐसी हालत थी….. कोमल ने हड़बड़ा कर अपनी सलवार खूंटी से खींची और बिना पहने ही अपने कमरे की ओर भागी, मैं देखता रह गया, एक जवान नंगी कन्या के नितंबों को, हिलते और मचलते हुए . मेरा मन बेचैन, रहा नहीं गया, मैं कमरे के तरफ आया, कोमल ने सलवार पेहेन ली थी, बाहर निकलते हुए बोली यह तुमने किया ?
मैंने अनजान बनते हुए पुछा, क्या किया ?
“ज्यादा चालाक मत बनो तुमने मुझे चोकलेट क्रीम से पूरी तरह लस दिया, और इस तरह ?”
“तो किस तरह , तुम ने भी रात को क्या किया”
“पर मैंने तुम्हारे मुहं में लगाया और तुमने…….” और बोलते बोलत वो रुक गयी
“और मैंने क्या, तुम्हें जो अच्छा लगा वहां तुमने लगाया, मुझे जो अच्छा लगा वहां मैंने लगाया “
कोमल की तो आवाज ही बंद होगई सुनकर, “तुम गंदे हो ” उसने कहा,
“तुमने कपडे ख़राब कर दिए मेरे, मेरी सलवार पर दाग लग गए, कैसे छूटेंगे “
” और मेरे पैंट पर जो दाग लगे वो क्या” मैंने कहा,
“झूठ, मैंने वहां नहीं लगाया ” कोमल बोल पड़ी
“तुमने लगाया, यह देख” मैंने अपना अन्दर्वेअर लाकर दिखाया जिसमें रात वीर्य पोंछा था, सूख कर दाग हो गए थे,
“यह चोकलेट थोड़ी है, यह क्या है, मैंने ऐसा कुछ नहीं किया ” और कोमल मेरे अन्दर्वेअर को देख शर्मा गयी, उसे समझ में नहीं आ रहा था की मैं क्या बोल रहा हूँ,
” यह तुम्हारी वजह से है, तुम्हारे कारण यह निकला” मैंने कहा,
“निकला ?” उसने अनजाने में पुछा,
” मेरा रस “
” तुम्हारा रस मतलब ?” वो वाकई अनजान थी,
“तुम गुस्सा नहीं हो तो मैं बताऊँगा तुमने क्या किया मेरे साथ ” मैं अब उससे कुछ खुल गया था और मुझे अपने पर काबू नहीं था, मैं चाहता था की बात को उस ओर मोड़ कर उसकी प्रतिक्रिया देंखूं,
“बोलो” उसने कहा
“गुस्सा नहीं होना, यह देख क्या किया ” कहकर मैंने अपने अपने लिंग पर हाथ रक्खा जो अब फिर से फुफकार रहा था और पैंट के एक तरफ के किनारे को ऊपर कर लिंग की चमड़ी को पूरा पीछे खींच भरपूर लाल सुपाड़े की झलक उसे दिखाई, लिंग था मोटा और लाल, उसकी आँखें पथरा सी गयीं, एकटक निहारने लगी,
“आआअ, उईई, यह क्या है….आआआआ..शी शी शी शी……..ओह हो यह क्या है ….” कोमल का चेहरा आश्चर्य से भरा था, आँखें सुपाड़े पर अटकी थी,
और आवाज़ भारी हो गयी जैसे गले में रुंध गयी हो, लिंग फडफडा रहा था, शिष्न बिंदु पर रस की बूँद दिख रही थी, उसने मुझे देखा,
“देख क्या किया, यही रस है, तुमने ऐसा किया ” कहकर मैंने सिस्न चमड़ी को आगे पीछे किया, रस की बूँद स्पष्ट थी, सिस्न चिकना और गीला हो गया, कोमल देखे जा रही थी लिंग का रूप, उससे रहा नहीं गया और अनायास वो सिस्न पर फूँक मारने लगी, साथ ही अजीब सी आवाज़ भी कर थी, आह ऊह्ह … उसने कहा “मैंने तो रात को इसे छुआ भी नहीं फिर यह ऐसा रस सा क्या निकल रहा है ” …….. कोमल के नजरें मादक थी, लग रहा था वो सिस्न को हाथ में लेने के लिए बेताब थी, गुस्सा होना तो दूर वो तो अचरज से मरी जा रही थी जैसे कोई बच्चा नए खिलौने के लिए व्याकुल हो, मैं कुछ कहता इससे पहले ही कोमल ने हाथ आगे बढ़ा कर सिस्न को पकड़ लिया और अपने हाथों से चमड़ी को आगे पीछे करने लगी और साथ ही फूँक मार रही थी, लिंग से जैसे लावा ही फूट पड़ेगा ऐसा लगा, मैं किसी और ही दुनिया में था, विश्वास नहीं हो रहा था की कोमल ने मेरे लिंग को थाम रक्खा था और उसे सहला रही थी, ” क्या चीज़ है …. आह्ह्ह्ह ये ऐसा क्यों हो गया, इतना लाल और लगता है रो रहा है, ….” कोमल बोल रही थी, उसने मुझे देखा, आँखों में जैसे गुलाबी नशा…..”तुमने इसे छोड़ दिया और चोकलेट नहीं खिलाई इसलिए रो रहा है…” मैं बोला और कोमल को कंधे पकड़ कर खड़ा किया, अब उसके होंठ मेरे सामने थे, मैंने धीरे से उनको चूमा, और हाथ कमर के पीछे बाँध उसे आगोश में भर लिया, उसके स्तन मेरे सीने से दब रहे थे, उसने भी मेरे कमर में हाथ डाल मझे अपने से सटा लिया, मैं समझ गया वो लाल मस्त लिंग को देख कर गरम हो गयी थी और सब कुछ भूल कर वासना में बह गयी थी, कोमल की हालत मदहोश जैसी हो गयी, वो मेरे हाथों पर गिर पडी, धीरे से उसे पलंग पर लेटाया……….सिस्न उसके हाथों में पकड़ा कर कुर्ती के ऊपर से उसके उरोजों को सहलाने लगा, धीरे धीरे स्तनों को सहला रहा था, दबा रहा था, मेरा हर काम उसकी कामाग्नी बढ़ा रहा था, उसके मुहं से अजीब सी आवाजें निकल रही थी, मेरे सिस्न को छोड़ने को तैयार ही नहीं, उसे खींच रही थी , दबा रही थी….सिस्न रस से लसपस था, मैंने कुर्ती के ऊपर के बटन खोले बहुत सावधानी से की उसको किसी प्रकार का डर ना लगे…..
सिस्न रस से लसपस था, मैंने कुर्ती के ऊपर के बटन खोले बहुत सावधानी से की उसको किसी प्रकार का डर ना लगे………दुधिया उरोजों की उठान, कोमल की सांसें तेज चल रही थी, मेरे लिंग के साथ बहुत मजे से खेल रही थी, उसे खींचना, पकड़ कर मचोड़ देना और पूरे लाल सुपाड़े को निकाल कर उसपर फूंक मारना, हैरानी और प्यार से देखना, मैं भी व्याकुल था, कुर्ती के बाकी बटन खोल उरोजों को आजाद किया, मस्त बिलकुल विकसित, बहुत ही गुदाज, दूधिया चमकते उरोजों के जोड़े, गुलाबी घुन्डियाँ और ऐरोला, इस उम्र की लड़कियों का अगर शरीर विकसित हो तो अत्यंत गुदाज और वासनामयी हो जाता है, कोमल अच्छे परिवार से थी, खानपान अच्छा था, इस उम्र में खाती पीती लड़कियों के शरीर में एक प्रकार का भारीपन आजाता है और नितम्ब और कूल्हे भर जातें हैं, वक्ष विकसित हो शान से अपनी उठान दिखाते हैं, अपने वजन से भी झुकते नहीं, चोली हर समय टाईट हो जाती है, झांघें बड़ी और मांसल हो जाती हैं, योनी पट फूल उठते हैं और योनी द्वार को ढक लेते हैं जैसे किसी कीमती चीज़ का बचाव कर रहें हो, योनी पर हलके बाल आ जाते हैं, योनी श्राव शुरू हो जाता है, चेहरा भर जाता है और एक मादकता हर समय चेहरे पर रहती है, आँखें चंचल हो जाती हैं, पसीने में एक नशीली खुशबु हो जाती है, कोई रूप और शरीर की प्रसंशा करता रहे ऐसी तमन्ना इस उम्र में हरसमय होती है, किसी अच्छे लगने वाले का हल्का स्पर्श भी शरीर में जैसे बिजली भर देता है और खुमारी छा जाती है, कोमल की उम्र भी वही थी……
..मैंने सोचा भी नहीं इतनी जल्दी कोमल अपने आप को समर्पित कर देगी, लेकिन यह उस उम्र का तकाजा ही है और इस उम्र में लड़कियों के लिए अपने आप को कामवासना से बचाना बहुत मुश्किल है अगर उन्हें कोई फ़साने की कोशिस करे तो… कुछ साल के बाद यानी अगर लडकी २० -२१ की हो जाती है तो थोडा मुश्किल है लेकिन कमसिन उम्र में बहुत जल्दी ही प्रभावित हो जाती हैं… कोमल के साथ यही हुआ… मैं उसके स्तनों को मसल रहा था, वो मेरे लिंग को सहला रही थी, लग रहा था लिंग से रस की धार छूट पड़ेगी, मैं हाथ नीचे सरकाकर उसकी योनी के पास लाया और उसके त्रिकोण को सहलाने लगा, मैं धीरे करना चाहता था, जल्दबाजी में कोमल डर जाती, कमसिन लड़किया जितनी जल्दी समर्पण करती हैं उतनी ही डरती भी हैं और जरा सा उतावलापन दिखाने से डर कर दूर भाग जाती हैं, उन्हें प्यार और धैर्य से नजदीक लाना होता है, उसके बाद वो आँख बंद कर आपपर भरोसा करती हैं… हम दोनों आनंद विभोर थे, दिमाग में माँ-पिताजी के वापस लौटने आने का भी भय था, मैंने कोमल के कान में कुछ प्यार भरी बातें कही और उसे अपनी योनी को दिखाने के लिए राजी किया,

