तेरे प्यार मे… – Update 26 | FrankanstienTheKount

तेरे प्यार मे …. – Adultery Story by FrankanstienTheKount
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#26

मुझे फ़िक्र थी तो उस कारीगर की जिसकी कोई चर्चा नहीं थी. सुबह मैं लंगड़ाते हुए ही गाँव का चक्कर लगा आया पर सब वैसा ही था जैसा की रोज होता था . जांघ की चोट के दर्द के बावजूद मैं उस स्थान पर गया जहाँ उस रात वो घटना हुई थी . बैलो के शरीर में जो कुछ बचा था उसे जानवरों ने फफेड लिया था टूटी गाडी चीख कर कह रही थी की उस रात कुछ तो हुआ था यहाँ पर क्या हुआ था ये मुझे याद नहीं आ रहा था.

कोई तो मिले. कोई तो बताये की ये साला मामला क्या था. गाँव में इस से पहले तो ये सब कभी नहीं हुआ था . क्या हुआ जो कभी दो चार साल में किसी के पशु को जंगली जानवरों ने हमला कर दिया हो पर इंसानों के साथ बहुत कम ऐसी वारदाते हुई थी और अब रुक ही नहीं रही थी .

वापिस आकर मैं चाची के पास बैठ गया .

चाची- घायल है फिर भी चैन नहीं है तुमको

मैं- हाथ पैर जुड़ न जाये इसलिए थोडा टहलने गया था बस वैसे भी इतनी गहरी चोटे नहीं है. और फिर तुम हो न पास मेरे . तुम जब अपने लबो का रस मुझे पिलाओगी तो फिर मैं देखना कैसे ठीक हो जाऊंगा.

चाची ने मेरी बात सुनकर इधर उधर देखा और बोली- ये सब बाते तभी करना जब हम दोनों अकेले हो . दीवारों के भी कान होते है .

मैं- हाँ पर बोलो न रस पिलाओगी न

चाची- हाँ बाबा हाँ

मैं- और निचे के होंठो का

मेरी बात सुनकर चाची का चेहरा शर्म से लाल हो गया .

चाची- धत बेशर्म

मैं- बोलो न तुम्हे मेरी कसम

चाची- तुझे जो भी पीना है पी लेना बस

मैं- ऐसे नहीं वैसे बोलो जैसे मैं सुनना चाहता हूँ

चाची- मौका लगते ही मेरी चूत का रस पी लेना

जब चाची ने ऐसा कहा तो उनके होंठो की कंपकंपाहट ने बता दिया की टांगो के बीच में कुछ गीला हो चला है .

मैं- चाची आपको क्या लगता है गाँव वालो पर कौन हमले कर रहा है

चाची- अभिमानु ने दिन रात एक कर दिया है उसे पकड़ने को . जब से तुम पर हमला हुआ है वो एक पल को भी चैन नहीं लिया है . राय साहब ने भी रातो को गश्त बढ़ा दी है . गाँव में अफवाहे अलग ही है .

मैं- गाँव वाले तो चुतिया है

चाची- पर हम लोग तो नहीं है न गाँव को आग लग जाये हमें फर्क नहीं पड़ता पर तुमको आंच भी आई तो हमें बहुत फर्क पड़ेगा.

मैं- कोई सुराग भी तो नहीं लग रहा है . ऊपर से पिताजी ने सख्त कहा है की रात को बाहर नहीं निकलना तुम ही बताओ मैं क्या करू

चाची- तुम्हे कुछ करने की जरुरत नहीं है अभिमानु और जेठ जी देख लेंगे इस मामले को . आज तक गाँव की हर समस्या को जेठ जी ने सुलझाया है इसे भी सुलझा लेंगे. एक वो न लायक मंगू कहाँ रह गया , उस से कहा था की दो मुर्गे ले आना

मैं- आ जायेगा थोड़ी बहुत देर में उलझ गया होगा किसी काम से .

काम से मुझे याद आया खेतो का .

मैं- चाची अब खेतो पर मैं अकेला ही रहूँगा . इन हालातो में मजदुर वहां रुकना नहीं चाहते जो की जायज भी है

चाची- भाड़ में गयी खेती तुझे अकेले जाने दूंगी तूने सोचा भी कैसे.

मैं- नुकसान बहुत होगा.

चाची- तो फिर मैं भी तेरे साथ ही चलूंगी

मैं- यहाँ तुम्हे आराम है

चाची- वहां भी आराम ही रहेगा. वैसे भी जेठ जी ने तुम्हारी जिम्मेदारी मुझे दी हुई है. जब तुम ठीक हो जाओगे तो फिर हम चलेंगे वहां

तभी मंगू आ गया.

चाची- कहाँ रह गया था रे तू

मंगू- मुर्गा पकड़ा. काटा साफ़ किया समय तो लगे ही .

चाची- हाँ समय की कीमत तू ही जाने है बस .

चाची मुर्गा लेकर अन्दर चली गयी . रह गए हम दोनों

मंगू- भाई, तू ये सब मत कर. मैं जानता हूँ तेरे दिल में गाँव वालो के लिए फ़िक्र है पर इन मादरचोदो के लिए अपनी जान को दांव पर लगाना कहाँ की बहादुरी है . मैं वैध के दरवाजे पर ही बैठा रहा अन्दर आने की हिम्मत ही न हुई मेरी . तुझे कुछ हो गया तो मेरा क्या होगा.

मैं- कुछ नहीं होगा मंगू सब ठीक है

मंगू- पर ऐसा क्या है जो रातो को ही निकलना जरुरी है

मैं- मुझे भी नहीं मालूम पर जब मालूम होगा तो सब से पहले तुझे बताऊंगा. सुन रात को खाना साथ ही खायेंगे

मंगू- नहीं भाई, घर पर भी एक मुर्गा दे आया हूँ

मैं- मौज है फिर तो .

तभी मैंने सामने से भाभी को आते देखा

भाभी- क्या खुराफात कर रहे हो दोनों

मंगू- कुछ नहीं भाभी सा , बस ऐसे ही बाते चल रही थी .

भाभी- अगर मुझे मालूम हुआ की घर से बाहर रात को जाने की कोई भी योजना है तो दोनों की खाल उधेड़ दूंगी.

मैं- भाभी आप जब चाहे चेक कर लेना यही सोता हुआ मिलूँगा आपको

भाभी- बेहतर रहेगा. चाची कहाँ है

मैं – अन्दर है

भाभी के जाने के बाद मैं मंगू से मुखातिब हुआ और उसके आगे कारीगर का जिक्र किया .

मंगू- भाई, उसका कोई पक्का ठिकाना नहीं है , परिवार है या नहीं कोई नहीं जानता हलवाई के पास काफी समय से काम कर रहा था और एक नुम्बर का दारुबाज है . चला गया होगा कहीं दारू के चक्कर में .

मैं- वो चाहे जैसा भी हो वो अपने घर काम करने आया था उसकी सुरक्षा अपनी जिमेदारी थी मेरे भाई .

मंगू- थी तो सही पर अब कहाँ तलाश करे उसकी .

मैंने मंगू की पीठ पर धौल जमाई तो वो कराह उठा .

मैं- क्या हुआ

मंगू- कुछ नहीं बड़े भैया के साथ अखाड़े गया था . उन्होंने उठा कर पटक दिया तो दर्द सा हो रहा है . भैया इतनी कसरत कर कर के कतई पहाड़ हो रखे है .

मैं- हाँ यार, मुझे भी ऐसे लगा था पहले तो मैं कई बार उनको पछाड़ देता था पर अब तो वो काबू में ही नहीं आ रहे.

मंगू- मैंने तो सोच लिया है बड़े भैया का आशीर्वाद लेकर दुगुनी कसरत करूँगा.

मैं- भैया में और अपने में फर्क है मेरे दोस्त. भैया सेठ व्यापारी आदमी है अपन है किसान . अपन तो खेती में ही टूट लेते है तू बता भैया कब जाते है खेतो में .

मंगू- बात तो सही है पर ताकत तो बढ़ानी ही है

मैं- सो तो है

फिर मंगू वापिस चला गया . करने को कुछ खास था नहीं तो खाना खाने के बाद मैंने बिस्तर पकड़ लिया . बेशक मैं चाची की लेना चाहता था पर चाची चाहती थी की थोडा ठीक होने के बाद ही किया जाये. चाची के गर्म बदन को बाँहों में लिए मैं गहरी नींद में सोया पड़ा की जानवरों की आवाजो से मेरी नींद उचट गयी . कानो में सियारों के रोने की आवाज आ रही थी .

“गाँव में सियार ” मैंने अपने आप से कहा और बिस्तर से उठ कर बाहर आया . मैंने दरवाजा बंद किया और लालटेन को रोशन किया. रौशनी की उस लहर में मेरी नींद से भरी आँखों ने गली के बीचो बीच जो देखा बस देखता ही रह गया ……………….

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