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“अब्दुल अफ़ग़ानिस्तान का रहने वाला है.वाहा हो रहे गृह-युद्ध ने उसके पिता की जान ले ली तो उसके चाचा ने उसे,उसकी बीमार मा & बेहन के साथ देल्ही ले जाने का फ़ैसला किया.उनके जाने से ठीक 1 दिन पहले 1 हवाई हमले मे अब्दुल की आँखो के सामने उसकी बहन की मौत हुई.”,कामिनी ने लंड से सर उठा के गर्दन घुमा के शत्रुजीत को देखा,वो उसकी गंद को मसल्ते हुए 1 उंगली उसकी चूत मे अंदर-बाहर कर रहा था.

“..अब्दुल को अपनी बेहन से बहुत प्यार था & इस बात का उसपे गहरा सदमा पहुँचा.उसका चाचा उसे & अपनी भाभी को किसी तरह देल्ही तो ले आया मगर उसे वापस किसी काम से आफ्गानिस्तान लौटना पड़ा.उसके बाद से उसके चाचा की आज तक कोई खबर नही है…”,कामिनी ने वापस अपने होंठ उसके लंड पे कस दिए,”..आअहह..”,शत्रुजीत ने आह भरी,”..यहा 1 हॉस्पिटल मे इलाज करने पे पता चला की उसकी मा को कॅन्सर है.11 साल के अब्दुल की कुच्छ समझ मे नही आ रहा था की वो इन मुश्किलो का सामना कैसे करे.इसी समय किसी रिपोर्टर को उसके बारे मे पता चला & उसने उसकी कहानी अख़बार मे छाप दी…”,शत्रुजीत ने उसकी गंद की फांको को अपने हाथो मे मसल्ते हुए उसकी चूत पे अपनी जीभ चलाना शुरू कर दिया,”..आअनंह..ऊओईय्यीए…”,कामिनी उसके लंड को मसल्ते हुए,आहे भरती हुई अपनी कमर बेचैनी से हिलाने लगी.

थोड़ी देर चूत को चाटने के बाद शत्रुजीत ने अपनी ज़ुबान उसकी चूत से अलग की,”..पिताजी उस वक़्त देल्ही मे ही थे.कहानी सुनते ही वो फ़ौरन अब्दुल से मिले & उसकी मा के इलाज का पूरा खर्चा उठाया,मगर वो बच नही सकी.इसके बाद अब्दुल दुनिया मे अकेला रह गया..”,शत्रुजीत बोलते हुए उसके चूत के दाने को उंगली से रगड़ रहा था,”..पिताजी ने बहुत कोशिश की मगर उसके चाचा या किसी & रिश्तेदार का कोई पता नही चला.”,कामिनी अब पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी.उसने उठाते हुए शत्रुजीत की पकड़ से अपनी कमर को खींचा & आगे सरक के अपने हाथ से पकड़ उसके लंड को अपनी चूत मे ले,उसकी ओर पीठ किए बैठ कर उच्छल-2 कर उसे चोदने लगी.

“..पिताजी को उस से बहुत लगाव हो गया था & फिर वो उसे यहा ले आए.हम सब ने उसे अपने परिवार का हिस्सा बना लिया.मेरी ज़िंदगी मे भी छ्होटे भाई की कमी पूरी हो गयी.वो पिताजी को भी अब्बू बुलाता था & मुझे भी भाई ही कहता है.अगर खुद के बाद मुझे किसी पे भरोसा है कामिनी तो वो अब्दुल ही है.”,वो उसकी गंद को सहला रहा था,”..मगर शायद उसने लड़ाई के दौरान इंसान का जो घिनोना रूप देखा है,जो खून-ख़राबा देखा है…उसने उसकी आँखो & उसकी शख्सियत मे 1 ठंडा पन भर दिया है..शायद वही है जो लोगो की घबराहट का सबब बन जाता है.”,कामिनी अब बहुत तेज़ी से उच्छल रही थी,शत्रुजीत उठा & पीछे से अपनी प्रेमिका को जाकड़ उसकी बड़ी,मोटी चूचियो को हाथो मे भर उसकी कसी चूत का लुत्फ़ उठाने लगा.

सवेरे कामिनी की नींद खुली तो उसने देखा की षत्रुजीत सिंग अभी तक वही उसके बगल मे सो रहा था.उसने घड़ी देखी,अभी थोड़ा वक़्त था & वो 1 बार और इस तगड़े लंड का लुत्फ़ उठा सकती थी.शत्रुजीत उसकी दाई तरफ लेटा था,कामिनी ने करवट लेकर अपनी बाई टांग उसके उपर चढ़ा दी & बाए हाथ से उसके लंड को हिलाते हुए उसके चेहरे को चूमने लगी. शत्रुजीत की आँख खुली तो उसने मुस्कुराते हुए करवट ली & कामिनी से लिपट गया.उसका दाया हाथ उसकी बाई जाँघ की लंबाई पे घूम रहा था & उसका मुँह कामिनी की छातियो से चिपका हुआ था.कामिनी करवट ले अपनी पीठ के बल हो गयी तो शत्रुजीत उसका इशारा समझ गया,उसने फ़ौरन उसकी फैली टाँगो के बीच उसकी चूत मे अपना लंड घुसा दिया,”..य्याहह..!”

कामिनी उसे जकड़े हुए आहे भरते हुए चुदने लगी,तभी शत्रुजीत का मोबाइल बजा.उसने वैसे ही उसे चोद्ते हुए फोन उठा के नंबर देखा,”हां,बेटा…क्या?!!..मैं फ़ौरन नीचे आता हू.”,उसने फोन किनारे रख कामिनी की चुदाई जारी रखी,”क्या…हू..आ..जे..ईत्त्त. ..आनह…उउउन्न्ह…?”

“कुच्छ नही…अभी तुम बस अपने मज़े पे ध्यान दो..”,शत्रुजीत ने धक्के लगते हुए अपने होंठ उसकी चूची पे कस दिए तो कामिनी ने भी आँखे बंद कर ली & नशे के समंदर मे गोते लगाने लगी.

नत्थू राम मिल गया था.पोलीस ने उसे पंचमहल के बाहर शत्रुजीत के फार्महाउस मे पाया था.जैसे ही अब्दुल पाशा को ये बात पता चली उसने तुरंत शत्रुजीत को फोन कर दिया था.इस वक़्त न्यूज़ चॅनेल्स & अख़बार वालो की भीड़ त्रिवेणी ग्रूप के दफ़्तर & शत्रुजीत के घर के बाहर खड़ी थी.उन्हे पता नही था की शत्रुजीत कामिनी के साथ होटेल ऑर्किड से निकल कर सीधा उसके कोर्ट के चेंबर मे चला गया था,जयंत पुराणिक & पाशा भी वाहा मौजूद थे.

“समझ मे नही आता,वो फार्महाउस कैसे पहुँच गया!”,पाशा कमरे मे चहल कदमी कर रहा था.

“बेटा,केर्टेकर से बात हुई तेरी.”

“हां,भाई.उसे कुच्छ नही पता.वो तो अपने परिवार के साथ आउटहाउस मे सो रहा था,जब सुबह कोई 4 बजे पोलीस वाहा पहुँची.उसने उसी वक़्त मुझे फोन किया.तब तक पोलीस अंदर घुस के नत्थू राम को ढूंड चुकी थी.”

“केर्टेकर ने देखा था उन्हे नत्थू राम को घर से निकलते?”,पुराणिक 1 कुर्सी पे बैठे काफ़ी गहरी सोच मे डूबे थे.

“हां,अंकल.पोलीस ने उसे फार्महाउस की लॉबी का गेट खोलने को कहा,फिर वो उनके साथ अंदर गया तो 1 बंद कमरे को भी उसी ने चाभी से खोला वही नत्थू राम बैठा मिला.उसके बाद से केर्टेकर पोलीस हिरासत मे है.”

“नत्थू राम का कहना है कि कुच्छ नकाब पोश गुन्दो ने उसे उसके घर & बाज़ार के बीच पड़ने वाली 1 सुनसान गली से उठाया & फार्महाउस पे ले गये.उसने किसी की शक्ल तो नही देखी पर वो बार-2 शत्रुजीत का नाम ले रहे थे.”,सभी मर्द कामिनी की बात सुन रहे थे.

“..ये गुत्थी तो हम बाद मे सुलझायेंगे.फिलहाल मैने आंटिसिपेटरी बैल की अर्ज़ी दाखिल करा दी है,मुझे यकीन है मुकुल थोड़ी देर मे बैल मंज़ूरी के काग़ज़ ले के आता ही होगा.”

“कामिनी,वो ग़रीब केर्टेकर बेवजह मुसीबत मे फँसा हुआ है,उसे भी बाहर निकालो प्लीज़.”

“देखो,शत्रुजीत.हमे पक्का यकीन नही की वो केर्टेकर बिल्कुल बेगुनाह है & तुम्हे बैल मिल गयी तो फिर पोलीस उसे कभी नही छ्चोड़ेगी.अभी उनका शक़ सबसे ज़्यादा उसी के उपर होगा,क्यूकी वो वाहा मौजूद था जब गुमशुदा बरामद हुआ.आख़िर उन्हे भी तो ये केस सुलझाना है.”

“मॅ’म,ज़मानत मंज़ूर हो गयी,लेकिन 12 बजे कोर्ट मे पेशी है.”,मुकुल चेंबर मे दाखिल हुआ.

“ओके,मुकुल.पेशी से तो हम निबट लेंगे लेकिन सवाल ये है की आख़िर नत्थू राम वाहा पहुँचा कैसे?”

“उस से भी बड़ा सवाल ये है कामिनी,की उसे वाहा पहुचने वाला कौन है?”,पुराणिक अभी भी वैसे ही बैठे थे.

इस सवाल का जवाब था जगबीर ठुकराल के पास,जोकि इस वक़्त शैतानी मुस्कुराहट लिए अपने बड़े टीवी स्क्रीन पे न्यूज़ देख रहा था.उसका प्लान शुरू हो चुका था,शत्रुजीत अब उसके रास्ते से हटने ही वाला था.उसने 1 लड़की को इशारा किया तो वो फोन लेकर आई & सोफे पे उस से सॅट के बैठ गयी,ठुकराल ने भी अपनी बाई बाँह के घेरे मे उसे ले लिया,”माधो?”

“जी,हुज़ूर.”

“बहुत बढ़िया काम किया है तुमने.”,लड़की उसके सीने के बालो मे उंगलिया घुमा रही थी.

“शुक्रिया,हुज़ूर.”

“अब आज आगे का प्लान भी इसी तरह बढ़ाना है.”

“बिल्कुल हुज़ूर.मैं नज़र रखे हुए हू,जैसे ही मौका मिलेगा हम दूसरी सीढ़ी भी पार कर लेंगे.”,लड़की का हाथ ठुकराल के पाजामे मे घुस चुका था.

“बहुत अच्छे,माधो.अपना ख़याल रखना.”

“आप बेफ़िक्रा रहें हुज़ूर.”,ठुकराल ने फोन रख दिया,”अभी नही,डार्लिंग.”,उसने लड़की का हाथ अपने अंडरवेर से निकाला,”..आज बहुत काम है.”,वो तैय्यार होने चला गया.

“मिलर्ड!गुमशुदा की बरामदगी शत्रुजीत सिंग के फार्महाउस से हुई है,नत्थू राम भी कह रहा है कि उसे अगवा करने वाले इनका नाम ले रहे थे,इस मामले की तह तक जाने के लिए पोलीस को इनसे पुच्छ-ताछ करनी होगी & इसके लिए मैं आपसे दरखास्त करता हू की शत्रुजीत सिंग को पोलीस हिरासत मे लेने की इजाज़त दी जाए.”,सरकारी वकील ने अपनी दलील पेश की.

“मिलर्ड!केवल बरामदगी & कुच्छ अंजान लोगो के नाम लेने से ये कहा से साबित हो जाता है की मेरे मुवक्किल ही दोषी हैं.नत्थू राम ने ये तो नही कहा की खुद शत्रुजीत सिंग ने उसे अगवा किया था,उसने अगवा करने वालो के मुँह से उनका नाम सुना था.कोई मेरे क्लाइंट को फँसाने की कोशिश कर रहा है वरना आप ही बताएँ सर,क्या कोई मुजरिम इतनी बड़ी ग़लती कर सकता है की हर जगह अपना नाम का प्रचार करता चले.फिर भी,मैने अपने क्लाइंट की अग्रिम ज़मानत ले ली है,ये हैं उसके काग़ज़ात.थॅंक यू,सर.”,उसने काग़ज़ात कोर्ट पीयान को थमा दिए.

“मिलर्ड!मुलज़िम नत्थू राम को धमकाता आ रहा था-..”

“ऑब्जेक्षन!मिलर्ड..”,कामिनी बोली,”..वकील साहब मेरे मुवक्किल पे बेबुनियाद इल्ज़ाम लगा रहे हैं.नत्थू राम ने 1 बार भी अपने किसी बयान मे ये नही कहा है की उसे शत्रुजीत सिंग ने धमकाया है.”

“ऑब्जेक्षन सस्टेंड.”

“मैं माफी चाहता हू,मिलर्ड.मुलज़िम ने नत्थू राम पे घर बेचने के लिए दबाव डाला था.नत्थू राम के इनकार से बौखला कर उसे डरने की गरज से उसने ऐसा किया है.”

“मिलर्ड!जब मेरे मुवक्किल ने आज तक उसे कभी भी धमकी तक नही दी फिर वो अचानक उसे अगवा क्यू कराएगा जब की वो बड़ी आसानी से क़ानून के सहारे उसके मकान का क़ब्ज़ा पा सकता था.”,अपनी-2 दलीलें पेश करने के बाद दोनो वकील जड्ज के फैल्से का इंतेज़ार करने लगे.

“मुझे शत्रुजीत सिंग की अग्रिम ज़मानत की अर्ज़ी खारिज करने की कोई मज़बूत वजह नज़र नही आती,इस लिए अभी पोलीस उन्हे हिरासत मे नही ले सकती,लेकिन अदालत उन्हे ये हिदायत देती है की वो पोलीस की करवाई मे पूरा सहयोग दे.पोलीस उनसे कभी ही पुच्छ-ताछ कर सकती है,मगर इसके लिए पोलीस को उन्हे कम से कम 2 घंटे पहले इत्तिला देनी होगी.इस केस की अगली सुनवाई तक मिस्टर.सिंग बिना अदालत की इजाज़त के शहर के बाहर नही जाएँगे.केर्टेकर को पोलीसNहिरासत मे रख सकती है.”,जड्ज के फ़ैसले को सुन सब कोर्ट से बाहर आए जहा रिपोर्टर्स & तमाशबीनो का हुजूम उमड़ा हुआ था.उनके सवालो को नज़रअंदाज़ करते हुए शत्रुजीत & बाकी लोग अपनी गाडियो मे चढ़ कर वाहा से निकल लिए.

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