मोड़… जिंदगी के – Update 10 | Thriller Story

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मोड़… जिंदगी के – Update 10

#10 The Artist…..

अमर ने उस चाकू नुमा लोहे के टुकड़े को उस आदमी की पीठ से लगा कर कहा

“चुपचाप दरवाजा खोल कर अंदर चलो”

वो आदमी शांति से दरवाजा खोल कर अंदर आता है, अमर उसके साथ में अंदर दाखिल होता है और अंदर आते ही उस आदमी से उसका हथियार देने को कहता है। कमरे में एक छोटा सा बल्ब जल रहा होता है और बहुत ही धीमी रोशनी होती है। दोनो मुश्किल से ही एक दूसरे का चेहरा अच्छे से देख पा रहे होते हैं।

वो आदमी चुपचाप से अपना खंजर और एक पिस्तौल अमर के हवाले देता है, और अमर के कहने पर कमरे के एक कोने में खड़ा हो जाता है।

अमर: कौन हो तुम, और मुझे क्यों मारना चाहते हो?

वो आदमी थोड़ा आश्चर्य से: क्या मतलब, तुम मुझे नही जानते

अमर: मैं किसी को नही जानता, मेरी यादाश्त चली गई है।

वो आदमी: चल मुझे ना बना, मैं तेरी रग रग से वाकिफ हूं। तू कुछ भी कर सकता है, एक्टिंग भी।

अमर: मैं सच कह रहा हूं, मुझे सच में कुछ याद नही, प्लीज मुझे बता दो मैं कौन हूं?

वो आदमी थोड़ा सोचते हुए: तू एक आर्टिस्ट हैं।

अमर: हैं? मतलब क्या? और आर्टिस्ट को जान से कौन मरना चाहता है।

वो आदमी: तू सच में मुझे नही पहचानता??

अमर: कितनी बार बोलूं एक ही बात। मुझे कुछ भी याद नही, सिवाय मेरे एक्सीडेंट के।

वो आदमी: हम्म्म। फिर तो कोई समस्या नही है, बेकार में तेरे पीछे पड़ा था। 

अमर: मतलब?

वो आदमी: सुन, तेरा नाम कुमार है जैसा हम जानते है, असली नाम नही मालूम, तू खुद को एक आर्टिस्ट कहता था, पास असल में तू एक कॉन्ट्रैक्ट किलर है।

अमर: क्या? और तुझे कैसे पता ये सब?

वो आदमी: मैं और तू दोनो सिंडिकेट के लिए काम करते हैं, तू कुमार, में रघु। तू सबसे बेस्ट है पूरे सिंडिकेट में, तेरे काम करने का तरीका ऐसा है कि आज तक तेरा नाम कहीं भी पुलिस रिकॉर्ड के नही है। तू मर्डर को ऐसा बना देता था कि वो या तो एक्सीडेंट लगे या सुसाइड, कई बार तो प्राकृतिक मौत भी बना देता था तू। तेरा रेट सबसे ज्यादा है सिंडिकेट में। और सबसे ज्यादा डिमांड भी तेरा ही होता है।

अमर: ऐसा है तो फिर मेरी जान के पीछे क्यों पड़े हो?

रघु: क्योंकि तुमने सिंडिकेट का नियम तोड़ने की कोशिश की है।

अमर: क्या मतलब?

रघु: सिंडिकेट का नियम है कि कोई भी हत्या आपसी रंजिश के चलते नही होगी, बिना कॉन्ट्रैक्ट के कोई भी हत्या की सोच भी नही सकता, खुद का कोई मैटर है तो सिंडिकेट में ग्राहक बन कर आना होता है।

अमर: तो मैंने किसकी हत्या कर दी?

रघु: की नही, पर करने जा रहे थे। यहां तुम उसी काम के लिए आए थे, पर यादाश्त के चक्कर में भूल गए लगता है। मुझे लगा हॉस्पिटल वगैरा सब तुम्हारे प्लान का हिस्सा है।

अमर: पर यहां मैं किसकी हत्या करने आया था? एक मिनट।

अमर अपना पर्स निकाल कर रघु को मोनिका की फोटो दिखाया है।

अमर: इसी पहचानते हो?

रघु: मोनिका… इसी के चक्कर में तो तू बदल गया यार, इतना की वो कुमार जो कभी नियम से परे जा कर कोई काम नहीं किया आज सिंडिकेट के सबसे बड़े नियम को तोड़ने चला था।

अमर: पूरी बात बताओ।

रघु: तू सिंडिकेट का सबसे काबिल हत्यारा है, और लोग तुम्हारे से काम करवाने के मुंह मांगे रेट देते हैं। ये सब करीब 6 या 7 महीने पहले शुरू हुआ था। जब तुझे एक कॉन्ट्रैक्ट मिला था इसी तरफ का, उस काम के आने के बाद ही तेरी मुलाकात इस मोनिका से हुई, तुम दोनो एक दूसरे के काफी नजदीक आ गए। इतना की दोनो शादी करना चाहते थे। ऐसे तो तेरी जिंदगी में कई माशूकाएं थी, पर ये कुछ अलग ही थी, इससे मिलने के बाद तूने काम भी कम कर दिया, और अभी पिछले महीने किसी को ये बोला की तुझे अपना कोई काम करना है इसीलिए अभी कुछ दिन तू सिंडिकेट का काम नहीं करेगा अब, और शायद बाद में सिंडिकेट भी छोड़ देगा। बस इसी कारण मुझे तेरे पीछे लगाया गया। वैसे भी मेरा और तेरा ही सबसे ज्यादा साथ था। अपुन दोनो सबसे अच्छा दोस्त था, कई काम एक साथ किया था अपुन। 

अमर: इसी तरफ किसका काम था, और किसकी हत्या की थी मैने।

रघु: भाई सिंडिकेट में सेक्रेसी के चलते किसका काम है और किसकी हत्या होनी है ये बातें बस सिंडिकेट के ऊपर के सदस्यों, काम लेने वालों और काम देने वालों को ही पता होती हैं।

अमर: पर तुझे ही क्यों चुना इस काम के लिए? मतलब मुझे मारने के लिए।

रघु: मुझसे ज्यादा कोई नही जानता तेरे को, इसीलिए बस।

अमर: तुझे पता यहां किस काम आ आया था मैं? और यहां आया ये कैसे पता?

रघु: सही से तो नही पता लेकिन अपना काम ही क्या है आखिर? उसी लिए से होगा तू। तेरी मोबाइल की लोकेशन ट्रेस हुई थी, बल्कि सिंडिकेट वाले सबकी करतें है, पर एक्सीडेंट के बाद वो गायब है। बस वही ढूंढते हुए आया इधर।

अमर: ये मोनिका और मेरी मुलाकात कैसे हुई पता है तुमको?

रघु: ज्यादा नही पता, लेकिन इतना पता है कि वो तेरे काम के बारे में जानती थी पहले से, अब कैसे तो उसके 2 ही कारण हो सकते हैं, या तो वो खुद किसी का कॉन्ट्रैक्ट ले कर आई हो, या फिर उसे किसी ने बताया हो इस बारे में।और दूसरी बात के चांस कम ही हैं। क्योंकि कॉन्ट्रैक्ट देने वाला भी हमारे सर्विलांस में रहता है कुछ समय तक।

अमर: फिर तुमने अनामिका को मारने की कोशिश क्यों की?

रघु: अनामिका? अच्छा वो जो उस दिन तुम्हारे साथ थी। मैं तो तुझे ही मार रहा था, उसको नही, वो बस साथ में थी तेरे तो हमारे काम में ये सब तो चलते रहता है, वो क्या बोलते हैं उसको अंग्रेजी में… कोलेट्रल डैमेज।

अमर: तो अब आगे क्या??

रघु: देख तू मेरा भाई है, अगर जो तू वादा कर की आगे ऐसा कुछ नही करेगा और अपनी जिंदगी बदल देगा, यादाश्त वापस आने पर भी, तो ये तेरा मेरा सीक्रेट, वहां जा कर मैं बोल दूंगा की तुझे मार दिया।

अमर कुछ सोच कर; मैं वादा करता हूं, मुझे भी अच्छी जिंदगी ही जीनी है, ऐसी गुनाहों वाली नही।

रघु: ठीक है, लेकिन तू यहीं रहना, बाहर तुझे कोई और देख लिया तो मेरी जान भी संकट में आ जाएगी, और सिंडिकेट वाले किसी को भी नही छोड़ते।

अमर:  अच्छा, फिर मैं चलता हूं।

रघु: मेरा हथियार तो दे।

अमर: ताकि तू मुझे पीछे से मार सके?

रघु: बस क्या भाई?? ऐसा कुछ नही है।

अमर: रुक यहीं तू।

इतना बोल कर अमर घर से बाहर निकलता है और दरवाजा बाहर से बंद कर देता, पास में एक कचरे वाले ड्रम में सारे हथियार डाल कर आगे बढ़ जाता है। इसके दिमाग में विचारों की आंधियां चल रही होती हैं।

“क्या मैं एक हत्यारा हूं, और अगर जो हत्यारा हूं तो क्या यहां मैं किसी के हत्या के इरादे से आया था? क्या मोनिका के कहने पर?? क्या मैं अनामिका की हत्या करने आया था?? क्या उसके मां बाप और उसके पति अमर का एक्सीडेंट भी तो….

यही सब सोचते हुए अमर उर्फ कुमार का सर घूमने लगता है और वो बेहोश हो कर गिर जाता है….

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