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UPDATE 70

मोनिका: उफ्फ मार डाला

ये सुन कर मनीष ने मज़े लेने के लिए पुछा: क्या हुआ, क्यों चिल्ला रही हो.

मोनिका: कुछ नहीं पैर की नस खीच गयी.

मनीष: लाइट जलाऊ

मोनिका: नहीं नहीं सो जाओ कुछ देर में ठीक हो जाएगी.

तब तक मैंने एक झटका और मारा और अपना पूरा लंड मोनिका की चूत में उतार दिया.

मोनिका: हाय रे उफ्फ मर गयी रे

मनीष (मुस्कुराते हुए): क्या हुआ क्या ज्यादा दर्द हो रहा है.

तभी मैंने तेजी से धक्के लगाने शुरू कर दिए और बेड थोडा थोडा हिलने लगा. ये इशारा मनीष के लिए काफी था उसने फ़ौरन लाइट ऑन कर दी. लाइट की दूधिया रौशनी में मोनिका का संगमर जैसा बदन चमक उठा. मोनिका घबरा गयी और अपने को ढकने के लिए उसने चादर की तरफ हाथ बढ़ाया ही था की मनीष ने चादर उठा कर नीचे फेंक दिया. मुझ पर इसका कोई असर नहीं हुआ और मैं पहले की तरह ही मोनिका की चूत में अपना लंड पेलता रहा. अब मनीष बोला: ये क्या हो रहा है.

मोनू: तेरी बहन की चुदाई और क्या

और मोनिका को घबराता देख कर हम दोनों हसने लगे. अब मोनिका समझ गयी की ये दोनों मिले हुए है पर उसे इससे कोई दिक्कत नहीं थी क्योंकि अब उसे अपने घर में भी अपने लिए एक लंड मिल गया था. अब मनीष ने आगे बढ़ कर उसके होठो पर अपने होठ रख दिए. मोनिका ने भी उसके होठ चूसना शुरू कर दिया.

मनीष बोला चल अब मेरी बहन का छेद मेरे लिए खाली कर दे. मैंने अपना लंड मोनिका की चूत से बाहर निकाला और उसके गांड के छेद पर रख कर एक धक्का लगाया.

मोनिका के रस से सराबोर मेरा लंड मोनिका की गांड में थोडा सा घुस गया. मोनिका को बहुत दर्द हुआ क्योंकि वो चुदवा तो चुकी थी पर उसने कभी गांड नहीं मरवाई थी पर उसका मुह तो मनीष के होठो से बंद था तो वो चीख नहीं पाई.

मनीष का लंड बहुत देर से खड़ा खड़ा दर्द करने लगा था उसने उसे मोनिका की चूत में घुसा दिया.

अब मनीष आगे से धक्के लगाने लगा और मैं पीछे से. मोनिका को पहले तो थोडा दर्द हुआ फिर उसको जन्नत का मज़ा आने लगा. उसकी जो सहेलिया महा चुदक्कड है उन्होंने भी आज तक दोनों छेदों में एक साथ लंड नहीं लिया था. बस सपना ही देखा था की काश कभी ऐसा मौका मिले और आज मोनिका के दोनों भाई उसे दोनों तरफ से रगड़ रगद कर चोद रहे थे.

मनीष: कैसा लग रहा है बेहेना

मोनिका: मज़ा आ रहा है बहुत मज़ा आ रहा है.

मोनू: अब तो जिंदगी भर ऐसा ही मज़ा आयेगा मेरी जान. कल जब रश्मि भी हमारे साथ शामिल होगी तो ये मज़ा दुगुना हो जाएगा.

उधर दीदी कामिनी आंटी के घर में ड्राइंग रूम में बैठी टीवी देख रही थी. रिशू कनखियों से दीदी को ताड रहा था और दीदी भी उसे देख कर मुस्कुरा रही थी. रिक्की अपने कमरे में पढाई कर रही थी. तभी कामिनी आंटी ने कहा, रश्मि तुम मेरे साथ ही सोना. चलो मेरे कमरे में.

दीदी: आंटी अभी नींद नहीं आ रही. आप चलो, मैं थोड़ी देर में आती हूँ.

कामिनी: जल्दी आना. सोने से पहले तुमसे बहुत सी बातें भी तो करनी है. आंटी ने मुस्कुराते हुए कहा और चली गयी.

आंटी के जाते ही रिशू ने दीदी को पकड़ लिया और अपने होठ दीदी के नरम होठो पर रख दिए. पर दीदी ने उसे मना किया.

रश्मि: अभी नहीं. सुनो जब आंटी सो जाएगी तो मैं तुम्हारे कमरे में आ जाऊंगी. दरवाजा खुला रखना.

रिशू: ठीक है मेरी जान. मैं तुम्हारा इंतज़ार करूंगा. पर जाते जाते एक चुम्मा तो देती जाओ.

इतना कह कर रिशू ने दीदी को फिर से पकड़ लिया और किस करने लगा और चून्चिया दबाने लगा. ऐसे ही १० मिनट तक वो दीदी के बदन से खेलता रहा फिर दीदी आंटी के कमरे में चली गयी.

कमरे में आंटी बेड पर नंगी लेटी थी जिसे देख कर दीदी चौंक उठी, वो मुस्कुरा कर बोली- आंटी.. लगता है कि आपको बहुत गर्मी लग रही है.

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