UPDATE – 62
रश्मि दीदी ने मरी हुई सी आवाज में अपनी
हार्दिक इच्छा का खुलासा कर दिया और
मनीष संग हम दोनों ने उनको कस कर जकड़ लिया
और ताबड़तोड़ धक्के लगाने चालू कर दिए.
हम दोनों ने उनकी गुलाबी चूत को अपने
भयंकर धक्कों से सुर्ख लाल कर दिया था.
और अचानक मनीष चीखने लगा और तेज़ी
से शॉट्स लगाता हुआ रश्मि दीदी की चूत में
अन्दर गहरे उतरते हुए उससे चिपक गया.
अपने लंड पर मनीष का गर्म वीर्य महसूस होते ही
उत्तेजना के चरम पर पहुँचते हुए मैंने भी फव्वारा छोड़ दिया
और खूब माल निकालते हुए रश्मि दीदी की दो लंडों से भरी हुई चूत से चिपक गया..
हम करीब 5 मिनट तक लंडों को रश्मि दीदी की
चूत में डाले हुए बूंद-2 झड़ते रहे.. मेरे ख्याल
से किसी भी हालत में आधा कप तो हम दोनों
ने निकाला ही होगा रश्मि दीदी की चूत में..
यह तो गजब हो गया..
हम दोनों ने न सिर्फ दीदी की चूत मारी, गांड भी छेदी,
फिर दो-2 लंडों को पहले गांड में घुसेड़ा,
फिर भी मन नहीं भरा तो चूत में भी दो-2
लौड़ों को ठूंस कर चुदाई की…
आज तो रश्मि दीदी रिशू की चुदाई को भी भूल
गयी होगी. मैंने खुद नहीं सोचा था की दीदी और
हम इतना आगे बढ़ जायेंगे.
ऐसा तो मैंने ब्लू फिल्म में भी नहीं देखा था.
आधे घंटे हम वैसे ही पड़े रहे पर मनीष
का अभी मन नहीं भरा था. वो उठा और
जाकर किचेन से शहद ले आया और रश्मि
दीदी की चूत में भर दिया और गांड पर भी लगा दिया
और चाटने लगा. दीदी पहले तो कुछ बोली नहीं

पर १० मिनट बाद वो भी अब अपनी मस्ती में आ गई थी मे
रे लौड़े पर जीभ फेरने लगी. उनकी चूत फिर से लंड मांगने लगी थी.
आह.. दीदी उफ़.. तुम्हारे ये मखमली होंठ आह..
मेरे लौड़े को पागल बना रहे हैं.. और तुम्हारी
जवानी मुझे पागल बना रही है आह..
मेरे मुह से बेसाख्ता निकल गया.
दीदी: बेहेन्चोद अपनी बेहेन को चोद डाला
और दीदी दीदी करता है. खबरदार अगर
चुदाई के वक़्त मुझे दीदी कहा तो.
दीदी के मुह से गाली सुनकर न जाने क्यों
मुझे बहुत अच्छा लगा. मैंने कहा वाह दीदी
मज़ा आ गया तुम्हारे मुह से ऐसी बात सुनके
रश्मि: मोनू .. मुझे पता चल चुका है की
जो मज़ा नंगेपन में है.. वो शराफ़ात में नहीं..
उफ़.. तेरा ये गर्म लौड़ा मुझे चूसने में बहुत मज़ा आ रहा है.
तुम्हारी ये बहन अब पूरी तरह तुम दोनों की है..
आ जाओ नोंच डालो मेरे जिस्म को..
कर दो मुझे अपने इस लौड़े से ठंडी..
आह.. अब मेरा जिस्म जलने लगा है.
दीदी सीधी होकर बाँहें फैलाए बिस्तर पर लेट गई.
मनीष दीदी के पास लेट गया और उनके एक
निप्पल को दबाने लगा.. उसके होंठों को चूसने लगा.
मैंने दीदी के पैर मोड़े और टाँगों के बीच लेट गया
और उनकी पाव रोटी जैसी फूली हुई चूत पर धीरे
से अपनी जीभ रख दी और मैं अपनी जीभ से उ
सकी चूत की मालिश करने लगा.
अब हम तीनो एक-दूसरे को चूमने और चाटने में बिज़ी हो गए थे.

