Paap Punya – Update 58 | (Incest + Adultery) Story

Paap Punya - Incest Adultery Sex Story by Rashili Chut
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UPDATE – 58

रश्मि दीदी को इतना मजा आने लगा कि वो

 मस्ती में कराहती हुई और जोरों से मेरा लंड चूसने लगी.

 अचानक उन्होंने उत्तेजनावश मेरा लंड छोड़ दिया

और मनीष का लंड चूसने लगी.

मनीष का लंड दीदी के गुलाबी होठो के बीच

 किसी मोटे बैगन सा नजर आ रहा था.

जैसे मनीष की जीभ दीदी की चूत में गहरी होने लगी

वैसे ही रश्मि दीदी ने हम दोनों के लंड इकट्ठे

मुह के अन्दर लेने की कोशिश करने लगी

लेकिन दोनो भाइयों के लंड दीदी के छोटे

से मुंह में नहीं समा पा रहे थे.

आखिर थक कर रश्मि दीदी ने शारे से बताया कि

अब उन्हें चूत में लंड डलवाना है और

 मनीष बिस्तर से उतर कर लंड पकड़ कर नीचे खड़ा हो गया

 और हम दोनों ने मिलकर अपनी बहन को कमर के बल लेटा दिया.

अब मनीष उनकी दिलकश चूत को सहलाने लगा

और मैं शानदार चूचियाँ.

 रश्मि दीदी से सहन नहीं हुआ और

 वह मनीष का तना हुआ लंड पकड़ कर अपनी चूत से रगड़ने लगी.

 मनीष आनन्द के अतिरेक से फटा जा रहा था

और उसने लंड को दीदी की गुलाबी चूत के

मुंह पर रख कर निशाना लगा लिया.

मुझे ये देखते हुए इस समय अलौकिक आनन्द की

अनुभूति हो रही थी. सच अपनी बहन को चुदते देखने का

 सुख खुद चोदने से कम नहीं है

जिन्होंने देखा है वो लोग जानते ही है…

इसबार जरा धीरे-2 अन्दर घुसाना..

तेरा लंड बड़ा मोटा है. अपनी बहन का थोडा

ख्याल रखना भैया. दीदी ने मुस्कुरा कर मनीष से कहा.

मनीष ने मुस्कराहट के साथ अपने लंड के सुपारे

को रश्मि दीदी की चूत के मुंह से भिड़ा कर

अन्दर डालना शुरू किया. रश्मि दीदी खुद

भी पागल हुई जा रही थी और मोटे सुपारे को

अपनी भट्टी जैसी चूत के अन्दर पाकर दीदी ने

मनीष को कसकर पकड़ लिया और उसके होंठ चूसने लगी.

मनीष भी दीदी के होठ चूसने लगा.

मैं इस समय अपने मौसेरे भाई से चूत चुदाती हुई

मेरी छिनाल दीदी के मुंह को चोदने में लगा था.

 मैं बीच बीच में उनके चूतड़ सहलाता हुआ उनकी चूत के

 दाने को सहला रहा था और मेरे हाथ से रगड़ खाता

 मनीष का लंड मेरी बहन की चूत का बाजा बजा रहा था.

मनीष अचानक उतावला हो उठा और उसने

झटके के साथ रश्मि दीदी की चूत से अपना

 सुपाड़ा बाहर निकाल कर पूरा का पूरा अन्दर घुसेड़ दिया

‘आआआ.. मर गई. आई.. तूने मेरी चूत फाड़ दी.

 ओए.. आआ.. हाँ ऐसे ठीक है.. थोडा धीरे मारो.

 ऊऊऊओ.. हाँ.. ऐसे.’ चूत पर हुए अचानक

हमले से मेरी बहन रोआंसी सी हो आई,

लेकिन मनीष ने खुद को सँभालते हुए धीरे ध

क्कों के साथ चुदाई जारी रखते हुए स्थिति को संभाल लिया

अब वो बिना जल्दी किए धीरे-2 मेरी दीदी की नर्म-गुलाबी

 चूत को चोदने लगा और मेरी रश्मि दीदी वासना के

 सुख सागर में गोते लगाने लगी, उनके मुख से तेज

 सिसकारियाँ निकलने लगी और उनकी मुख-मुद्रा

 बता रही थी कि उसके सुख की कोई सीमा नहीं थी

‘ओ ओ ओ.. आआआ.. आआआ.. आ आ आ आआ..

 सीई..आआआ.. स्स्स्सीई..’ रश्मि दीदी के मुख से

वास्तविक ख़ुशी भरी सिसकारियाँ निकलने लगी

बैंगन जैसा मोटा और लोहे की राड जैसा सख्त मनीष

 का लंड दीदी की अँधेरी सुरंग की गहराइयों को नापने लगा

जो खुद भी अपनी जीभ से उसे गर्मजोशी से जवाब दे रही थी.

 वासना से कामांध होकर दोनों एक दूसरे को बुरी तरह चाटने लगे.

इस दौरान चुदाई की स्पीड हर धक्के के साथ बढ़ती जा रही थी

 और दीदी के गले से निकलने वाली आवाज हर

धक्के के साथ तेज होती जा रही थी.

‘ओए.. आआ.. हाँ. ऐसे.. और.. ऊऊऊऊ..

ओओ.. ओओ.. आआ.. और जोर से.. चलो चोदो जोर से.

और थोडा जोर से.. ओओ.. ओओ.. हाँ ऐसे. हाय

कितना मजा आया इस बार..

 हाय ऐसे ही चोदो ना फिर से..

अपनी पूरी जीभ डाल दो मेरे मुंह में.’

 मेरी बहन ने बिना किसी शर्मो-हया के

मनीष की जीभ को चूसना शुरू कर दिया.

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