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UPDATE – 52

अब मेरे मुह से निकल गया. ५ बार किया तुमने.

सुबह भी तो ३ बार किया था. कैसे?

रिशू: अबे दवाई खाई थी मैंने.

आखिर मेरे यार की बहन है,

पहली चुदाई धमाकेदार होनी ही चाहिए थी.

अब सो जा और मुझे भी सोने दे. बहुत थक गया हूँ.

अगले दिन भी रिशू ने दीदी को खूब चोदा

और उसके बाद जब भी उसे मौका मिलता वो

 दीदी को अपने घर ले जाकर या मेरे घर आकर चोदता था.

 जब घर पर कोई नहीं होता तो दीदी खुद उसे फ़ोन

करके बुला लेती थी और घंटो चुद्वाती थी.

 रिशू जब भी दीदी को चोदता मुझे पूरी चुदाई डिटेल

 में जरूर बताता पर दीदी मेरे सामने शरीफ बनी रहती थी.

मैंने कामिनी आंटी को एक दो बार चोदने का प्लान बनाया

पर कुछ हो पाता उससे पहले की रिशू के पापा

अपनी फॅमिली को भी अपने साथ दिल्ली ले गए.

मेरे अरमान दिल में ही रह गए पर मुझे लगा की

चलो रिशू अब दीदी को नहीं चोद पायेगा.

एक दिन रिशू का फ़ोन आया.

दीदी कहीं बहार गयी थी तो वो मुझसे बात करने लगा.

 उसने मुझे बताया की वो दो-तीन दिन के लिए रक्षाबंधन पर आ रहा है.

उसने मुझे बोला की ३ दिन वो अपने घर पर अकेला रहेगा.

उसने दीदी को यही बताने के लिए फ़ोन किया था

और वो बाद में फिर से फ़ोन करके दीदी से बात कर लेगा.

मुझे अब रिशू से चिड होती जा रही थी.

 उधर दीदी ने अब मुझसे बात करना काफी कम कर दिया था

 शायद इसकी एक वजह ये थी की वो समझ गयी थी

 मेरी नज़रो में उनके लिए फर्क आ गया है.

इसलिए मुझे दीदी की तरफ से भी कोई ऐसा मौका नहीं मिला

जिसका मैं फायदा उठाता.

 दीदी दिन रात रिशू के ख्याल में ही खोई रहती थी.

मैंने देखा रात को वो मेरे सोने का वेट करती रहती है

तो मैंने एक दो बार सोने का नाटक करके देखा

की मेरे सोने के बाद वो गन्दी किताबे पढ़ती है

और अपनी चूत में ऊँगली करती है.

ये सब और फिर रिशू के मुह से दीदी की चुदाई की

 कहानिया सुन कर मेरे अन्दर दीदी को चोदने की

 इच्छा दिन पर दिन आग पकडती जा रही थी.

मुझे लग रहा था की रिशू फिर से दीदी को

 चोदने आ रहा है और मैं उसे कैसे भी रोकू.

ऐसे में एक दिन मम्मी ने मुझे बुलाया और

कहा तेरी मौसी का फ़ोन आया था,

 इस बार तेरे कजिन्स राखी पर नहीं आएंगे.

हर साल तो वही लोग आते है मम्मी क्यों न

 इस बार मैं दीदी को लेके वहां चला जाऊ.

 मैंने तुरंत मम्मी से कहा. मुझे लगा की जब

 हम यहाँ नहीं होंगे तो रिशू लंड हिलाता वापस चला जायेगा.

मम्मी: ठीक है. मैं आज ही तेरी मौसी को फ़ोन कर देती हूँ.

मोनू: नहीं मम्मी, हम उन्हें सरप्राइज देंगे.

मम्मी ने पैसे देकर मुझे बोला जाकर ट्रेन के टिकेट

बुक करवा लाओ और मैं रिजर्वेशन करवाने चला गया.

 राखी से एक दिन पहले की टिकेट आराम से मिल गयी

और जब मैं लौट कर आया तब तक

 दीदी को भी मम्मी ने बता दिया था.

अब दीदी को तो पता नहीं था की उनका यार

उनको चोदने के लिए उसी समय यहाँ आने वाला था

तो वो आराम से जाने के लिए तैयार हो गयी.

ट्रेन में बैठते ही दीदी मुझसे पहले ही तरह ही

बातें करने लगी और मुझे लगा की हमारे लौटने

तक सब नार्मल हो जायेगा. सफ़र अच्छा रहा

और हम रात होने से पहले मौसी की कोठी पर पहुच गए.

जब हमने बेल बजाई तो मौसी का कुत्ता राकी

 हमारे स्वागत के लिए भौकता हुआ बाहर आया.

 दीदी को राकी से बहुत डर लगता था.

राकी एक कट्टा कट्टा जर्मन शेफर्ड था.

 वैसे दीदी को सभी कुत्तों से डर लगता था

पर राकी से वो कुछ ज्यादा ही डरती थी.

 तब तक मनीष भी बाहर आ गया.

मैं आपको बता दूं की मेरी मौसेरी बहन का नाम मोनिका है.

 और उसकी भी उम्र १९ साल है और मेरा कजिन

मनीष उससे १ साल बड़ा है पर मेरी उससे अच्छी बनती है.

हम दोस्तों की तरह ही रहते है.

मेरे मौसी और मौसा दोनों डाक्टर है और

शहर का सबसे बड़ा नर्सिंग होम चलाते है.

कुल मिलाकर अच्छे पैसे वाले लोग है.

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