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UPDATE – 17

मैंने कपडे के ऊपर से ही उनकी एक चूची अपने मुह में भर ली

और चूसने लगा फिर मैंने उनको घुमा दिया

और नीचे झुक कर उनके उभरे हुए चूतरो को दबाने लगा.

 फिर मैंने उनकी जांघ पर जोर से काट लिया.

आह आ काटो मत.

आंटी दर्द से कराही.

अब मैंने अपना लंड उनकी गांड की दरार में लगाया

 और घस्से लगाने लगा.

झे बहुत मज़ा आ रहा था

जितना कभी मुठ मारने में भी नहीं आया.

मैं अपने हाथ आगे बढ़ा कर आंटी की गदराई चूचियो को मसलने लगा.

तभी रश्मि दीदी की आवाज़ आई.

आंटी? आप कहाँ हो? दीदी निचे आ गयी थी.

आवाज़ सुनते ही आंटी बहोत परेशान हो गयी और बोली

अरे मोनू अआह कमीने छोड़ दे

अब तो वरना दोनों पकडे जायेंगे.

मेरा क्या है पर तेरी बहन तेरे बारे में क्या सोचेगी.

पर मै आंटी की बात को इग्नोर करता हुआ

अपना लंड आंटी के नरम चूतरो पर रगड़ता रहा.

देख रश्मि अब इधर ही आयेगी.

आह इश्श मान जा मोनू. आंटी फिर से बोली.

डर तो मुझे भी था पर हवस डर से बड़ी थी.

आंटी के उभरे हुए नरम गांड पर लंड रगड़े जाने का मज़ा डर से जीत गया

और मैंने धक्के तेज़ कर दिए.

मैं जल्दी से अपना पानी निकालना चाहता था.

आंटी क्या तुम बाथरूम में हो.

रश्मि दीदी अब बाथरूम के दरवाजे पे आके खड़ी हो गयी थी.

जल्दी बाहर आओ मुझे भी बाथरूम जाना है.

कामिनी आंटी बोली, रश्मि थोडा टाइम लगेगा तुम ड्राइंग रूम में बैठ जाओ.

आंटी क्या कर रही हो.

 मेरी छूट जाएगी जल्दी आओ.

 बोल कर दीदी ड्राइंग रूम की तरफ चली गयी.

छोड़ दे मुझे कुत्ते.

आह ईस रश्मि फिर से आ जाएगी.

आंटी बोली और उन्होंने अपने चुतड थोड़े पीछे किये.

मेरे फूले हुए लंड के लिए इतना बहुत था

और मेरे लंड ने पानी छोड़ दिया.

मैं पीछे से आंटी से चिपक गया.

शानदार ओर्गास्म था.

तक़रीबन 2 मिनट हम वैसे ही खड़े रहे

फिर आंटी ने मुझे हटाया और देखा की

उनकी सलवार पीछे से मेरे माल से भीग सी गयी है.

आंटी के चेहरे की शरारत वाली हंसी अब गायब हो गयी थी

और उसकी जगह उनकी आँखों में मेरे लिए गुस्सा था.

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