Ek Lambi Pariwarik Chudai Ki Kahani – Update 33

Ek Lambi Pariwarik Chudai Ki Kahani - Long Incest Story
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तभी पंकज ने आराधना को रोका और ऊपर उठाया

आराधना –“क्या हुआ पापा, आपने मुझे रोका क्यों”

पंकज –“आरू अगर मेरा पानी निकल गया तो तुम प्यासी रह जाओगी, इसलिए पहले मैं तुम्हारी प्यास बुझा देता हूँ”

आराधना –“आपको मेरी कितनी परवाह है पापा” ये कहकर आरू हौले हौले मुस्कुराने लगी,

पंकज ने बड़े प्यार से उसे दोबारा लेटाया और और फिर अपना मुंह आरू की चूत से सटा दिया, आराधना की चूत तो गरम भट्टी की तरह सुलग रही थी, फिर पंकज ने उसकी गरम चूत पर किस करना शुरू कर दिया,

पंकज के मुंह से निकलती गरम सांसे जब आराधना की चूत पर महसूस होती तो आराधना की उत्तेजना और भी ज्यादा भड़क जाती, अब पंकज ने अपने होठो से आरू की चूत के होठों को दबोच लिया और उन्हें बड़ी ही बेसब्री से चूसने लगा, आराधना आँखें बंद करके लम्बी लम्बी सांसें ले रही थी, और अपने पापा के बालो में हाथ फेरे जा रही थी,

फिर पंकज ने अपनी जीभ का इस्तेमाल करते हुए आरू की चूत की दोनों स्किनो को अलग किया और बड़े ही प्यार से अपनी जीभ चूत के अंदर घुसा दी, आरू को तो जैसे जोर का झटका लगा, उसे ऐसा महसूस हो रहा था मानो उसके पापा अपनी जीभ से ही उसकी चुदाई कर रहे हो,

इधर पंकज अपनी जीभ को चूत के अंदर गोल गोल घुमाने लगा, और दुसरे हाथ से आराधना के नंगे मम्मो को बुरी तरह मसलने लगा,

इस दोगुने हमले से आराधना तो मजे के मारे पस्त हुए जा रही थी, पंकज अपनी जीभ को चूत के और अंदर तक घुसाने की कोशिश कर रहा था, तकरीबन 5 मिनट बाद ही आराधना की सिसकियाँ जोर पकड़ने लगी, पंकज समझ गया कि आरू झड़ने वाली है, इसलिए पंकज भी आराधना की चूत में अपनी जीभ जल्दी जल्दी ऊपर नीचे करने लगा और उसकी पूरी चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा और जल्दी जल्दी उसके बोबे दबाने लगा उन्हें मसलने लगा

तभी अचानक आराधना ने पंकज के बालो को कस कर पकड़ लिया और उसके मुंह से एक तेज़ लम्बी सिसकारी फुट पड़ी

“आअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह्ह्ह्ह……………पापा………….” और साथ ही आराधना की चूत से बहुत सारा पानी निकल पडा जो उसकी जांघों से होते हुए बेडशीट पर गिरने लगा,

पंकजने अपनी जीभ से उसका लगभग सारा पानी चाट कर साफ कर दिया और उसकी झांग और चूत भी चाट के साफ़ कर दी,

आराधना –“मजा आ गया यार पापा……आप सच में कितना अच्छा चूसते हो…..अब मेरी बारी…”

ये कहकर आरू ने पंकज को अब लेटा दिया और खुद उनके टांगो के बिच बैठ गयी, और फिर उनका पूरा तना हुआ लंड अपने मुंह में भर लिया और उसे चूसने लगी, वो उसे पूरा अपने मुह में लेके चूसने लगी, कभी वो अपनी जीभ पूरे लंड पर फेरती, उसे चाटती, कभी लंड के टोपे को जल्दी जल्दी अपने होंठो से अंदर बाहर करती, कभी अपने मुह से लंड निकाल के अपने हाथों से उसे जल्दी जल्दी ऊपर नीचे करती

पंकज को तो इन सबमे बहुत मजा आ रहा था, आरू पूरी तल्लीनता से अपने पापा का लंड चूसने में लगी हुई थी, और उसकी मेहनत ने जल्द ही रंग दिखाना शुरू कर दिया, और पंकज के लंड ने बहुत सारा माल उगल दिया, जिसे आरू चटकारे लेकर चाट गयी,

पंकज –“वाह बेटी, सच में तू कमाल है”

आराधना -“वो तो मैं हूँ ही पापा, अच्छा चलो अब फटाफट हाथ मुंह धो लो, मोम और प्रीती बाहर वेट कर रहे होंगे” हमे 15 मिनट से भी उपर हो गये है यहाँ

पंकज –“हाँ सही कहा तुमने बिलकुल”

और पंकज और आराधना ने फटाफट अपने कपड़ो को ठीक किया और फिर बाहर आकर डाइनिंग टेबल पर बैठ गया जहाँ प्रीती पहले से उनका इंतज़ार कर रही थी

पंकज और आराधना ने फटाफट अपने कपड़ो को ठीक किया और फिर बाहर आकर डाइनिंग टेबल पर बैठ गया जहाँ प्रीती पहले से उनका इंतज़ार कर रही थी

सब लोग अब डाइनिंग टेबल पर आकर बैठ गये, स्मृति सभी को खाना सर्व करने लगी कि तभी बेल बजी

स्मृति ने जाकर गेट खोला तो सामने कुशल खड़ा था,

स्मृति –“आज तो बड़ी देर लगा दी बेटा”

कुशल –“वो मोम, कई दिनों बाद मिला था ना फ्रेंड से, इसलिए टाइम लग गया”

स्मृति –“अच्छा चल जल्दी से हाथ मुंह धो ले, फिर आकर खाना खा ले”

कुशल –“ओके मोम”

कुशल ने जल्दी से हाथ मुंह धोया और आकर बाकि लोगो के साथ ही डाइनिंग टेबल पर बैठ गया, स्मृति ने जल्द ही सबके और खुद के लिए भी खाना सर्वे किया, और फिर सब लोग खाना खाने लगे

तभी अचानक कुशल का ध्यान प्रीती की तरफ गया, कुशल ने जब प्रीती की और ध्यान से देखा तो बस देखता ही रह गया, प्रीती आज वाकई बहुत ही क्यूट सी लग रही थी, उसने एक पता सा क्रीम कलर का टॉप और ब्लैक कलर का बरमुडा पहना हुआ था,

प्रीती और कुशल टेबल पर जस्ट एक दुसरे के सामने बैठे हुए थे, आराधना प्रीती के बगल में बैठी थी, कुशल की तरफ बाजु में स्मृति और हेड चेयर पर पंकज खुद बैठा हुआ था,

कुशल तो खाना खाते खाते बस प्रीती को ही देख रहा था, वैसे भी काफी दिन हो गये थे प्रीती की लिए हुए, इसलिए आज उसे प्रीती पर कुछ ज्यादा ही प्यार आ रहा था, प्रीती भी कुशल की आँखों को अपने बदन पर चुभती हुई महसूस कर रही थी, और सच पूछो तो उसे तो बड़ा मजा आ रहा था क्यूंकि कुशल ने कई दिनों से उसकी तरफ ध्यान से देखा भी नही था,

इधर कुशल को अचानक एक शरारत सूझी, उसने चुपके से जेब में से अपना मोबाइल निकाला और प्रीती को एक मेसेज कर दिया “क्या बात है प्रीती, आज तो बड़ी ही सेक्सी लग रही है, बिलकुल माल लग रही है कसम से, बता तो जरा अंदर कौनसी ब्रा पेंटी पहनी हुई है”

थोड़ी देर बाद ही प्रीती का रिप्लाई आ गया “क्या बता है, आज मुझ पर ध्यान कैसे दे लिया, वैसे तो मेरी तरफ देखता ही नही और आज तुझे मैं सेक्सी लग रही हूँ”

प्रीती का मेसेज पढकर कुशल को समझ आ गया कि शायद उस दिन वाली बात से ये आज भी खफा है जब उसने प्रीती को कमरे में बंद कर दिया था और निचे आकर अपनी मोम के साथ चुदाई की थी, कुशल ने सोचा की प्रीती के गुस्से को कम करना जरूरी है वरना बैठे बिठाये एक मस्त माल हाथ से निकल जायेगा

कुशल ने झटपट मेसेज किया “ऐसा तो कुछ नही है, मैं तो हमेशा ही तेरी देखता हूँ, तेरे सिवा है ही कौन मेरा और मेरे पप्पू का ख्याल रखने वाला…….”

कुशल का जवाब पढकर प्रीती के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ गयी पर उसने उसे ज़ाहिर नही होने दिया, उसने दोबारा रिप्लाई दिया “मुझे क्या पता तूने कहाँ कहाँ अकाउंट खुला रखा है, तेरा पप्पू का क्या भरोसा, पता नही किस किस के अकाउंट में जमा करवाता है”

कुशल ने भी जवाब दिया “नही यार, मेरा पप्पू तो बस तेरे अकाउंट में ही पैसे जमा कराना चाहता है, सच में”

कुशल का मेसेज पढकर इस बार प्रीती की हंसी कण्ट्रोल नही हुई और गले का निवाला हंसी के कारण अटक सा गया, और उसे खांसी आने लगी

स्मृति –“आराम से खा प्रीती, ऐसे क्या खा रही है, ले पानी पी” स्मृति ने पानी का गिलास प्रीती की और बढ़ाया जिसे प्रीती ने पी लिया

आराधना ने आँखों के इशारे में ही प्रीती से पूछा कि क्या हुआ

प्रीती ने भी झट से टेबल के निचे से ही आराधना को अपना मोबाइल दिखाकर इशारा किया, आराधना एक पल में ही समझ गयी कि जरुर प्रीती और कुशल की बाते चल रही है, आराधना ने टेबल के निचे से प्रीती की जांघों को हल्के से दबा दिया मानो कह रही हो कि मुझे भी पढ़ा ना

इधर कुशल ने दोबारा प्रीती को मेसेज किया –“क्या कर रही है प्रीती, आराम से निवाला मुंह में ले, इसके बाद तो पता नही क्या क्या मुंह में लेने वाली है, अगर ऐसे खान्सेगी तो वो कैसे मुंह में लेगी”

प्रीती ने चुपके से दोबारा कुशल का मेसेज पढ़ा और झट से उसे आराधना के मोबाइल पर भी फॉरवर्ड कर दिया, आराधना तो कुशल का मेसेज पढकर गरम सी हो गयी, और मन ही मन सोचने लगी कि सच में उसका छोटा भाई अब छोटा नही रहा

इधर प्रीती ने भी दोबारा रिप्लाई किया “मैं कुछ नही लेने वाली मुंह में”

कुशल : “तो तू ही बता दे फिर कहाँ लेगी हा हा हा”

प्रीती : “कहीं नही लेना मुझे तो”

कुशल : “ऐसे कैसे नही लेना, मैं जबरदस्ती दे दूंगा”

प्रीती : “क्या दे दोगे” प्रीती भी फुल मजे के मूड में आ गयी थी, इस बिच वो सारे मेसेज आराधना को भी फॉरवर्ड कर रही थी, और आराधना भी इन दोनों की इस मस्त चैटिंग को पढकर गरम हुए जा रही थी

कुशल : “क्यूँ तुझे नही पता कि क्या दूंगा”

प्रीती : “नही मुझे तो नही पता”

कुशल : “नाटक करती है ज्यादा”

प्रीती : “इसमें नाटक क्या है, मुझे तो नही पता सच में क्या दे दोगे, और कहाँ दे दोगे, तुम ही बता दो”

कुशल : “लगता है मुझे खुलकर ही समझाना होगा तुझे”

प्रीती : “हाँ तो बताओ ना”

कुशल : “तो सुन, मैं मेरा लंड तेरे मुंह में दे दूंगा, और ज्यादा नाटक किया तो पहले तेरी चूत मारूंगा और बाद में तेरी गांड में भी घुसेड दूंगा”

प्रीती और आराधना ने जब ये मेसेज पढ़ा तो उन दोनों की ही उत्तेजना चरम पर पहुंच गयी

प्रीती : “ओह्ह्ह्ह……..मैं तुझे घुसाने ही नही दूंगी, फिर”

कुशल : “तो मैं जबरदस्ती घुसा दूंगा”

प्रीती : “इतनी हिम्मत तुझमे नही है”

कुशल : “रुक आज रात को ही मैं तुझे अपनी हिम्मत दिखा दूंगा, साली की वो चुदाई करूंगा कि जिंदगी भर याद रखेगी”

प्रीती : “क्यूँ ऐसा क्या करेगा तू”

कुशल : “साली आज रात को ही बताऊंगा वो तो, तेरी चूत फाड़ कर ना रख दी तो बताना”

प्रीती : “रहने दे, तुझमे उतना दम नही” प्रीती कुशल को और ज्यादा भड़का रही थी ताकि वो सच में उसकी जबरदस्त चुदाई करे रात को

कुशल : “कुतिया साली, लगता है तू पहली चुदाई भूल गयी, याद नही कैसे चिल्लाई थी तू, कई दिनों तक दोबारा चोदने भी नही दिया था तूने, पर आज रात को तो उससे भी भयानक तरीके से चोदुंगा तुझे”

प्रीती : “कहीं उस दिन की तरह दरवाज़ा बंद करके भाग तो नही जायेगा”

कुशल : “नही, आज तो पूरी रात तुझे अच्छे से मसलुंगा, और आज तो तेरी गांड का भी उद्घाटन करूंगा”

प्रीती : “देखते है, कितना दम है तुझमे, या फिर बस फेंकता ही रहता है”

इधर आराधना को उन दोनों की चैट पढ़कर बहुत मजा आ रहा था और उसकी चूत में हल्की हल्की चीटियाँ भी रेंगने लगी थी,

प्रीती और आराधना अभी हल्के हल्के मुस्कुरा ही रही थी इस बात पर कि उसने कुशल को भड़का दिया कि तभी अचानक प्रीती को अपने पैर पर किसी के पैर का अहसास हुआ, उसे समझते देर ना लगी कि ये कुशल ही है पक्का

कुशल ने प्रीती के पैर पर अपना पैर रखा और धीरे धीरे सहलाने लगा, प्रीती अपना पैर हटाने की कोशिश कर रही थी पर तभी कुशल धीरे धीरे पैर को और उपर ले जाने लगा

आज प्रीती ने बरमूडा पेहेन रखा था तो कुशल उसकी मस्त मुलायम चिकनी टांगों को मस्ती से सहला रहा था, और फिर धीरे धीरे वो अब उसकी जांघ पर भी अपने पांव को सहलाने लगा

प्रीती भी अब धीरे धीरे गरम होने लगी, कुशल ने अपने पैर को थोडा सा और उपर ले जाने की कोशिश की और प्रीती ने भी अपने आप अपनी टांगों को थोडा सा चौड़ा कर लिया,

अब कुशल ने पैर के अंगूठे को प्रीती के बरमूडा ट्राई एंगल पर टिका दिया, यानि कि अब वो अपने पैर के अंगूठे से प्रीती की चूत को उसके बरमुडा के उपर से ही दबाने लगा,

प्रीती को तो इसमें बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था, और तभी अचानक कुशल अपने पैर के अंगूठे को प्रीती की चूत में घुसाने की कोशिश करने लगा, और जोर लगाकर उसकी चूत पर धक्के देने लगा, प्रीती की चूत तो कुशल की इस हरकत की वजह से पानी छोड़ने लगी, और कुशल भी चूत के उस गीलेपन को महसूस कर पा रहा था,

इधर प्रीती ने उत्तेजना के मारे आराधना की जांघ को दबा दिया, आराधना ने उसकी और आँखों के इशारे से पूछा कि क्या हुआ, तो प्रीती ने आराधना को टेबल के निचे की और इशारा किया,

आराधना ने सबसे बचके चुपके से जब टेबल के थोडा निचे की और देखा तो वो तो सन्न सी रह गयी, क्यूंकि कुशल का पैर का अंगूठा प्रीती की चुत में बरमूडा के उपर से ही धंसा हुआ था, और प्रीती का फेस भी अब थोडा लाल होने लगा था,

आराधना को लगा कि ऐसे तो मोम या डैड को शक हो सकता है, कुशल को रोकना जरूरी है, इसलिए आराधना ने बहाने से अपनी चम्मच निचे गिरा दी, चम्मच की आवाज़ सुनकर जैसे कुशल और प्रीती दोनों को होश आया, कुशल ने झट से अपना पैर हटा लिया, इधर मोका पाकर प्रीती भी तुरंत उठ गयी

प्रीती – “मेरा खाना तो हो गया, मैं अपने रूम में जा रही हूँ मोम”

स्मृति – “ओके बेटा”

प्रीती ने जल्दी से अपने हाथ धोये और फटाफट उपर अपने रूम में चली गयी, जल्द ही बाकि लोगो ने भी खाना खा लिया, आराधना अपने रूम की तरफ चल दी, कुशल भी अभी जा ही रहा था कि स्मृति ने उसे रोक लिया

स्मृति –“कुशल बेटा, मुझे शाम को स्विमिंग क्लास जाना है, तो मुझे छोड़ देना वहां”

कुशल –“ओके मोम” कुशल कुछ ज्यादा नही बोला क्यूंकि पंकज अभी व्ही पर था, पर उसके मन में तो लड्डू फुट रहे थे, उसे पता था कि जरुर आज कुछ न कुछ होना है मोम के साथ” यहीं सोचते सोचते वो उपर अपने रूम में आ गया

खाना खाकर सब लोग अपने अपने कमरों में चले गये, आराधना भी काफी थक चुकी थी इसलिए उसने भी अब थोडा रेस्ट करना ही बेहतर समझा, प्रीती आज रात के सपने सजो रही थी, पंकज और स्मृति भी जाकर थोडा रेस्ट करने लगे, कुशल तो आज स्विमिंग क्लास में क्या क्या होने वाला है ये सोचकर ही उत्तेजित हुए जा रहा था

शाम के लगभग 4.30 बजने वाले थे, स्मृति की नींद खुल चुकी थी, उसने बाकि सब के लिए चाय बनाई और एक एक करके सबके कमरे में जाकर उनकी चाय रख दी,

अब वो कुशल की कमरे में गई, कुशल बेड पर आँख बंद किये लेटा था, स्मृति उसके बेड के पास गयी और चाय साइड में टेबल पर रख दी

सोते हुए कुशल उसे बहुत ही प्यारा लग रहा था, उसने झुककर उसके माथे पर एक किस कर लिया, जैसे ही हटने को हुई , कुशल ने तुरन्त उसे पकड़ा और दोबारा झुकाकर उसके होठों को चूसने लगा,

स्मृति को ये किस बहुत ही अच्छा लग रहा था, पर उसे पता था कि अभी सही वक्त नही है, इसलिए उसने कुशल को थोडा जोर लगाकर अपने से दूर किया और फिर बोली

स्मृति –“रुक जा, इतना बेसब्रा मत हो, वैसे भी अभी तुम्हे मुझे स्विमिंग क्लास ले जाना है, चल फटाफट चाय पीकर तैयार हो जा”

कुशल –“ओके मोम”

ये कहकर कुशल फटाफट बाथरूम में घुस गया, हाथ मुंह धोने के लिए, स्मृति भी उसके कमरे से बाहर आ गयी, वो पहले से ही तैयार हो चुकी थी, उसने पंकज को बताया कि वो कुशल के साथ स्विमिंग क्लास जा रही है,

थोड़ी देर बाद ही स्मृति और कुशल अपनी कार में निकल गये, रस्ते भर कुशल अपनी मोम के साथ हलकी फुलकी मस्ती करता रहा

जब वो लोग स्विमिंग क्लास पहुंचे तो देखा वहां तो आज कोई दिखाई ही नही दे रहा था, कुशल ने कार पार्क की और वो दोनों वह खड़े एक गार्ड के पास पहुंचे

कुशल –“अरे भाई, आज यहाँ इतना सूना सूना क्यूँ है”

गार्ड –“सर, आज तो क्लासेज की छुट्टी है ना, आपको पता नही था क्या”

कुशल स्मृति की और देख कर –“मोम, आज तो छुट्टी है, अब क्या करे”

स्मृति गार्ड से –“पर भैया हम तो बहुत दूर से आये है, प्लीज़ थोड़ी देर प्रैक्टिस करके चले जायेंगे”

गार्ड –“पर मैम्म….” इससे पहले कि वो कुछ और बोलता स्मृति ने अपनी पर्स में निकालकर एक 500 का नोट उसकी तरफ लहरा दिया, अब भला गार्ड क्या बोलता,

गार्ड –“ठीक है मैडम, पर 1 घंटे से ज्यादा नही प्लीज़, मेरा नोकरी का सवाल है”

स्मृति –“ओके”

कुशल समझ नही पा रहा था कि मोम ने गार्ड को पैसे क्यूँ दिए, अगर छुट्टी थी तो वो घर वापस जा सकते थे, एक दिन नही तैरने से क्या फरक पड जायेगा, पर जब उसे कुछ नही समझ आया तो उसने सोचा जो होता ह होने दो

कुशल और स्मृति जब अंदर पहुंचे तो वाकई वहां आज कोई नही था, आज स्विमिंग पूल की सफाई करके बिलकुल फ्रेश पानी भरा गया था, इस वजह से स्विमिंग पूल और भी ज्यादा आकर्षक दिखाई दे रहा था, कुशल भी स्विमिंग पूल की खूबसूरती देखकर दंग सा रह गया,

स्मृति – “आज तो काफी अच्छा लग रहा है पूल बाकि दिनों से”

कुशल – “ हाँ मोम, वाकई ये तो काफी खूबसूरत है”

स्मृति – “तो फिर एक काम कर ना, तू भी नहा ले आज”

कुशल –“पर मोम, ये तो लेडीज के लिए है ना, अगर किसी ने देख लिया तो?”

स्मृति –“अरे यहाँ कौन देखेगा, बाहर गार्ड ने कहा नही था कि आज कोई नही आएगा, तो तू टेंशन क्यूँ लेता है

कुशल –“चलो ठीक है मोम, मैं भी नहा ही लेता हूँ आज तो, पता नही फिर कभी आपके साथ नहाने का मोका मिले ना मिले

स्मृति –“चल फिर अपने कपडे उतार”

कुशल –“आप भी नहाओगी न मोम” कुशल अपनी टी शर्ट उतारते हुए बोला

स्मृति –“हाँ क्यूँ नही”

कुशल ने अपनी टीशर्ट और पेंट उतार दी, चड्डी में उसका शांत लौड़ा भी काफी बड़ा लग रहा था, स्मृति ने जब तिरछी नजर से कुशल की चड्डी के उभार को देखा तो उसने अपने होठों पर अपनी जीभ फेर दी

कुशल –“मोम, आप भी तो अपनी साड़ी उतारो न, आपका स्विमसूट कहाँ है”

स्मृति –“वो तो मैंने अंदर ही पहन रखा है”

कुशल –“तो फिर जल्दी से अपनी साड़ी उतरिये और स्विम सूट बिकिनी में मुझे अपनी बॉडी के दर्शन कराइए ना मोम, देखो ना मेरा लंड भी कैसे उतावला हुआ जा रहा है आपको बिकिनी में देखने के लिए” कुशल ने अपने लंड की ओर इशारा करते हुए कहा

स्मृति ने जब दोबारा कुशल के लंड की और देखा तो अब सच में कुशल का लंड धीरे धीरे बड़ा होने लगा था,

स्मृति –“अच्छा ठीक है, मैं उतारती हूँ अपनी साड़ी, पहले तू अपनी अंडर वियर उतार और पूल में कूद जा”

कुशल –“पर मोम, चड्डी उतारने में तो रिस्क है ना”

स्मृति –“क्यूँ इतने से रिस्क से ही डर गया, ऐसे तो बड़ा लायन बना फिरता है” स्मृति जान बुझकर कुशल को उकसा रही थी,

कुशल –“अच्छा तो ये बात, अब तो आपको लायन की हिम्मत दिखानी ही होगी”

ये कहते हुए कुशल ने अपनी चड्डी को तुरंत अपने पैरो की कैद से आजाद कर दिया, चड्डी उतरते ही उसका लंड स्प्रिंग की तरह उछलकर स्मृति की आँखों के सामने आ गया, भले ही कुशल का लंड अभी पूरा तना हुआ नही था, पर अब भी उसका लंड कम से कम 6 इंच के आसपास नजर आ रहा था,

स्मृति –“ये हुई ना बात लायन, अच्छा अब पूल में कूद जा”

स्मृति का इतना कहना ही था कि कुशल फटाक से पूल में कूद गया

कुशल –“अब आप भी तो अपने कपडे उतारो ना मोम”

स्मृति –“क्यूँ नही, अभी ले”

ये कहकर स्मृति अपनी साड़ी को धीरे धीरे उतारने लगी, कुशल तो ये नजारा देखकर बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो गया, क्यूंकि स्मृति गांड मटका मटका कर अपनी साड़ी उतार रही थी, अब स्मृति सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में ही थी,

कुशल –“जल्दी करो ना मोम, अपना ब्लाउज और पेटीकोट भी उतार दो, मुझे आपको टू पिस बिकिनी में देखना है”

स्मृति ने भी कुशल को और तडपाना सही नही समझा, और तुरन्त अपना ब्लाउज और पेटीकोट भी उतारकर साइड में रख दिया, कुशल ने जब स्मृति को सिर्फ ब्रा पेंटी में देखा तो जैसे उसके दिमाग का फ्यूज़ ही उड़ चूका था,

कुशल अपनी मोम की मस्त मोटी मोटी चुचियों का उभार उनकी ब्रा में से साफ साफ देख पा रहा था, स्मृति का

उठा हुआ गदराया लगभग नंगा पेट और उस पर एक बड़ी सी गहरी नाभि की झलक सी देख कर कुशल का तो कलेजा ही मुंह को आ गया, आज से पहले उसने अपनी मोम को बिकिनी अवतार में इस तरह नही देखा था, उनके पेट का उठाव और नीचे फैली हुई मस्त गदराई कमर को देख कर ही कुशल को अपनी मोम के फूले हुए गदराए भोसड़े का एहसास होने लगा था

स्मृति की मोटी-मोटी जांघे इतनी गदराई नज़र आ रही थी कि कुशल को लग रहा था कि बस अभी मोम अपनी ब्रा पेंटी भी उतार दे और वो जाकर ताबड़तोड़ तरीके से उनकी जबरदस्त चूत मारे

शायद स्मृति भी कुशल के मन की बात को जान गयी इसलिए उसने बड़े ही मस्ताने अंदाज़ में अपनी ब्रा और पेंटी भी उतार दी और भरपूर तरीके से कुशल को अपना बदन दिखाने लगी, कुशल का हाल अब और भी बुरा हो चूका था,

फिर स्मृति भी पूल के बिलकुल पास आकर झुककर पानी को छूती हुई बोली “वाह, पानी तो आज बहुत ही ताज़ा ताज़ा है, सच में बड़ा मजा आएगा आज तो” और ये कहते हुए स्मृति पूल में लगी सीढियों के सहारे पूल में उतरने लगी, स्मृति की गांड अब कुशल की तरफ थी

कुशल ने जब अपनी मोम के बड़ी सी गांड और बिच में एक मस्त चूत के चीरे को देखा तो अब उससे और बर्दास्त करना बहुत मुश्किल हो गया, उसने आगे बढकर उसी अवस्था में अपनी मोम को जकड़ लिया, अपने बेटे की मजबूत बाँहों की जकड़ में आते ही स्मृति के बदन में भी एक टिस उभर गयी, स्मृति को अपनी गांड पर अपने बेटे के अब पूरी तरह तने 8.5 इंच के लोडे का अहसास होने लगा था, लंड के एहसास मात्र से ही स्मृति बुरी तरह सिहर उठी

इधर कुशल ने अपने दोनों हाथो से अपनी मोम के मस्त खरबूजों को दबोच लिया और पीछे से अपने लंड को स्मृति की गांड से सटाकर मस्ती से रगड़ने लगा

स्मृति की बुर अब बुरी तरह पनिया चुकी थी, इधर कुशल ने अब अपनी मोम को पलट दिया और उसका चेहरा अपनी तरफ कर लिया,

कुशल स्मृति के होठों को अब बुरी तरह चूस रहा था, स्मृति भी अपने बेटे के इस चुम्बन में भरपूर साथ दे रही थी, कुशल का खड़ा लंड स्मृति की चूत के दरवाजे पर बार बार ठोकर मार रहा था, अब कुशल ने अपने दोनों हाथ स्मृति के पीछे किये और निचे लेजाकर उसके विशाल चुतरो को सहलाने लगा, स्मृति ने भी अपना एक हाथ आगे बढाकर पानी के अंदर खड़े कुशल के लौड़े पर लगा दिए,

अब कुशल झुका और अपनी मोम की भारी चुचियों का रस पीने लगा, कुशल ने अपने एक हाथ अब स्मृति की गांड से हटाया और आगे लाकर उसकी मस्त चुत पर रख दिया,

कुशल –“आह्ह्ह्ह…..मोम…..आपकी चुत कितनी गरम है” कुशल ने जोर से स्मृति की चूत को मसलते हुए कहा

स्मृति – “ आऽऽहहह बेटाआऽऽऽ……………” स्मृति की आहें निकल रही थी

कुशल – “ मोम अच्छा लग रहा है ना?” ये कहते ही कुशल ने स्मृति की चुत में अपनी दो उंगलिया घुसा दी, उसे तो ऐसा लग रहा था मानो उसने अपनी उंगलिया किसी गरम भट्टी में डाल दी हों

स्मृति – “ आऽऽहहह…………… हाँ बेटा, सच में बहुत अच्छा लग रहा है”

कुशल 5 मिनट तक स्मृति की चूत में अपनी अंगुलियों को अंदर बाहर करता रहा, साथ साथ अपने मुंह से उसकी चुचियों का रसपान भी करता रहा, इस दो तरफे हमले के सामने स्मृति ज्यादा देर तक टिक नही पाई और वो भालभला कर झड़ गयी

स्मृति –“अह्ह्ह्हह…..बेटा ….सच में तू कमाल है……5 मिनट में ही मेरा पानी निकाल दिया”

कुशल –“मोम आपकी सेवा करना तो मेरा फ़र्ज़ है”

स्मृति –“चल अब थोड़ी सेवा मैं तेरी कर देती हूँ, चल अब इस दिवार पर बैठ”

कुशल एक आज्ञाकारी बालक की तरह स्विमिंग पूल की साइड में आकर उपर चढ़कर बैठ गया, उसका मस्त लोडा अब भी आसमान की तरफ मुंह किये खड़ा था

स्मृति पूल में रहते हुए ही उसकी दोनों टांगो के बिच में आ गयी, और फिर स्मृति ने धीरे से कुशल के उस विकराल लंड को अपने हाथो में ले लिया और बड़े प्यार से उसे चूमने लगी, वो अपनी पूरी जीभ से लोडे को चाट रही थी और फिर कुशल के बॉल्स भी चूसने लगी.

अपने लंड पर अपनी मोम के गरम होठों के एहसास से कुशल तो जैसे स्वर्ग में आ गया था,

इधर अब स्मृति ने झट से अब लंड को अपने मुंह में लिया और जोर जोर से उसके सुपाडे को चूसने लगी,

कुशल मजे से भरकर स्मृति के मम्मे दबाने लगा, स्मृति भी उसका लौड़ा चूसते हुए उसके बॉल्ज़ को पंजे में लेकर सहला रही थी

अचानक कुशल बोला -“ आह्ह्ह्ह्ह…. मोम अब रुको, मैं नीचे आता हूँ” ये कहकर वो भी पानी में कूद गया

स्मृति –“क्या हुआ, तू निचे क्यूँ आ गया, मजा नही आ रहा था क्या”

कुशल –“मजा तो बहुत आ रहा था मोम, पर अगर 2 मिनट और आप मेरा लंड चूसती तो पक्का मेरा पानी निकल जाता और फिर आप प्यासी रह जाती, अब अब आप बाहर जाओ और यहाँ बैठो” ये कहते हुए उसने स्मृति को अपनी गोद में उठाया और उसे दिवार पर बैठा दिया और खुद आकर अब उसकी टांगो के बिच खड़ा हो गया

कुशल –“मोम, अपनी टाँगे फैलाइए ना थोड़ी सी”

कुशल का बस कहना था और स्मृति ने अपने पैरो को जितना हो सकता था उतना चौड़ा कर लिया

कुशल की आँखों के सामने अब स्मृति की चूत एकदम मस्त चमक रही थी, उससे रहा नही गया और उसने झट से अपना मुंह स्मृति की बुर में घुसा दिया और उसकी फाँकों को चाटने लगा

स्मृति के मुंह से अब जोर जोर से आहें निकल रही थी, उसने अपनी बाहँ पीछे करके अपनी जाँघों को उठाकर कुशल के कंधों पर रख दिया, कुशल भी मस्ती में आकर अपनी मोम की बुर चुसे जा रहा था, स्मृति भी अपनी कमर उछाल उछाल कर अपनी चूत को उसके मुँह से रगड़े जा रही थी

स्मृति – “ आऽऽऽऽह बस कर नाआऽऽऽऽऽ नहीं तो मैं झड़ जाऊँगी आऽऽह्ह्ह्ह्ह”

कुशल अपना मुँह हटा कर बोला- “मोम, मुझे अब आपको चोदना है”

स्मृति –“तो चोद ले ना, मैंने कब मना किया है”

स्मृति के कहते ही कुशल ने उसे पकडकर दोबारा पूल में खड़ा कर लिया और उसकी चुचिया दबाने लगा, स्मृति के पीठ कुशल के साइन से रगड़ खा रही थी, और उसकी चुत उसके लोडे को छु रही थी,

कुशल का लौड़ा इतना कड़ा हो गया था कि उसे अब दर्द सा होने लगा था, वो मस्ती में आकर अब अपने लंड का सुपाडा स्मृति की बुर पर रगड़ने लगा था, लंड की छुअन से ही स्मृति की सिसकारी निकल गयी,

अब कुशल बोला- “ मोम आप ख़ुद ही मेरे लौड़ा अपनी बुर पर रखो ना”

स्मृति ने मुस्कुरा कर अपने एक हाथ से अपनी बुर फैलायी और दूसरे हाथ को पीछे ले जाकर कुशल का लोडा पानी में ही पकड़ कर उसे अपनी चूत के छेद पर सेट कर लिया और फिर बोली –“ले बेटा, अब धक्का मार और अंदर डाल”

कुशल शरारत से मुस्कुराया और बोला- “ मोम क्या डालूँ? और कहाँ डालूँ?”

स्मृति भी प्यार से मुस्कुराती हुई बोली- “ आऽऽह बदमाश , अपना लौड़ा डाल अपनी मोम की बुर में, आह्ह्ह्ह्ह…..” कुशल ने बिच में ही एक दमदार शॉट लगाते हुए सर्रर्र से अपना लोडा पूरा स्मृति की चूत में घुसा दिया

स्मृति –“हाय्य्य्य्य्य्य धीरेएएएएएए से बेटाआऽऽऽऽऽ.. तेरा बहुत बड़ा है रे….”

कुशल – “ आऽऽह मोम आपकी बुर कितनी टाइट है, आऽऽहहह मज़ा आ गया”

कुशल ने फिर से धक्का लगाया और इस बार पूरा लौड़ा उसने जड़ तक अंदर कर दिया

स्मृति की सिसकारियाँ गूँजने लगी।

कुशल – “ आऽऽहहह मोम बहुत मज़ा आ रहा है आपको चोदने में आऽऽह क्या मक्खन सी बुर है आऽऽहहह”

अब कुशल उसकी चूचियाँ दबाते हुए धक्के मारने लगा, स्मृति भी गरम होकर अपनी कमर उछाल उछाल कर चुदवाने लगी

स्मृति – “ आऽऽऽह बेटा तू बहुत अच्छा चोदता है रे….. हाय्य्य्य्य मेरी प्यास ऐसे ही बुझाते रहना आऽऽऽऽऽहहह..”

कुशल के पावरफुल धक्कों से स्मृति मस्ती से भर गयी और उसकी बुर से फ़च फ़च की आवाज़ आने लगी,

20 मिनट की धांसू चुदाई के बाद स्मृति को लगा कि वह अब और नहीं रुक सकती तो वह कुशल के चूतरों को अपनी तरफ़ दबाने लगी जैसे उसके आँड भी अंदर घुसा लेगी,

वो चिल्लायी- “ आऽऽऽऽहहह चोद हाऽऽऽऽयहय फाड़ दे मेरीइइइइइइइइइ बुर, मरीइइइइइइइइइइ मैं तो ह्म्म्म्म्म्म्म्म्म उइइइइइइइइ मैं गयीइइइइइइइइइइइइइ बेटाआऽऽऽऽऽऽऽऽऽ..”

कुशल भी उसकी आवाज़ों से गरम हो गया और ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाकर झड़ने लगा, और अपना सारा पानी अपनी मोम की चूत के अंदर ही उड़ेल दिया

स्मृति और कुशल का पानी स्मृति के चूत से रिसते हुए स्विमिंग पूल के पानी में मिलने लगा,

स्मृति और कुशल दोनों की ही आँखों में अब संतुष्टि साफ झलक रही थी, कुशल ने आखिरी बार अपनी मोम को किस किया और फिर दोनों ने फटाफट कपडे पहन लिए, और फिर बाहर आकर गाड़ी में बैठकर घर की तरफ रवाना हो गये,

अब कहानी को वापस घर की तरफ ले चलते है, इस बिच वहां काफी कुछ बदल चूका था, पर हम वहीं से शुरू करते है जहाँ छोड़ा था, यानि कि जब शाम को स्मृति ने सबको उनके कमरों में जाकर चाय दी,

स्मृति ने सबसे पहले पंकज को चाय दी, और उसे बता दिया कि वो अभी कुशल के साथ स्विमिंग क्लास जा रही है, पंकज ने भी कोई ऐतराज़ नही किया, पंकज को चाय देने के बाद स्मृति उपर गई, उपर बाई तरफ कुशल का रूम था, और दाहिनी तरफ दो रूम प्रीती और आराधना के थे, स्मृति सबसे पहले कुशल के कमरे में गई, और उसे जगाकर चाय पीने को कहा और ये भी बता दिया कि अभी बस 10 मिनट में ही उन दोनों को स्विमिंग क्लास के लिए निकलना है,

कुशल को जगाने के बाद स्मृति प्रीती के कमरे में गई, पर प्रीती तो शायद घोड़े बेचकर सो रही थी, उसने नींद में ही मोम को मना कर दिया कि उसे चाय नही पीनी और अभी कुछ देर और सोना है, स्मृति ने भी उसे डिस्टर्ब करना सही नही समझा और आराधना के कमरे का दरवाज़ा खटखटाने लगी,

थोड़ी ही देर में आराधना ने दरवाज़ा खोल दिया, स्मृति ने उसे चाय दे दी और सीधा निचे की तरफ चल दी, आराधना ने भी दोबारा अपने रूम को बंद किया और बिस्तर में आकर चाय की चुस्कियां लेने लगी,

अभी बस उसने जस्ट चाय खत्म की ही थी कि उसे निचे हॉल में कुछ हलचल की आवाज़ सुनाई दी, वो खड़ी होकर बाहर आई तो उसने देखा कि निचे हॉल में मोम और कुशल रेडी होकर कहीं जाने के लिए तैयार खड़े थे

स्मृति को समझ नही आया कि इस वक्त वो लोग कहाँ जा रहे है, इसलिए उसने खुद ही उनसे पूछ लिया

आराधना –“मोम, आप लोग कहीं बाहर जा रहे है क्या?”

‘स्मृति –“हाँ आरू, वो कुशल मुझे स्विमिंग क्लास में छोड़ने जा रहा है”

आराधना –“ओके मोम” ये कहकर आरू वापस अपने कमरे में आ गयी और स्मृति कुशल बाहर चले गये

आराधना को ऐसे लग रहा था जैसे स्विमिंग क्लास के नाम से मोम कुछ ज्यादा ही एक्साइट नज़र आ रही थी, तभी उसे प्रीती की बात याद आ गयी कि कुशल और मोम आपस में चुदाई करते है, ये बात दिमाग में आते ही उसका माथा ठनका

“जरुर मोम, स्विमिंग क्लास के बहाने कुशल के साथ मस्ती करके आएगी, सच में कितनी बड़ी रंडी है मोम, अपने बेटे का लंड भी अपनी चुत में ले लिया, पर इसमें उनकी भी क्या गलती, प्रीती बोल रही थी कि कुशल का लंड बहुत ही ज्यादा लम्बा और मोटा है, तभी शायद मोम की चूत पिघल गयी उसे देखकर, पर क्या सच में कुशल का लंड इतना मस्त है” कुशल के लंड के बारे में सोचते सोचते ही आरू की चूत से पानी की दो बुँदे छलक सी पड़ी, अपनी चुत में गीलेपन को महसूस करते ही आराधना के चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान आ गयी

“कमबख्त ये फुद्दी भी ना, जब देखो टेसुए बहाती रहती है, आज प्रीती और पापा से इस निगोड़ी की मालिश करा चुकी हूँ पर ये है कि मानती ही नही” आराधना अपनी चुत पर हाथ रखते हुए सोचने लगी

……………………………………………………………………

इधर स्मृति कुशल के जाने के बाद पंकज अपने रूम से बाहर आ गया, आज पुरे दिन रेस्ट करने की वजह से उसकी पूरी थकान उतर चुकी थी, हालांकि उसकी नींद तो तब ही उड़ चुकी थी जब आज दोपहर को आरू ने उसे अपनी मस्त चुत का पानी चखाया था, वो उस हसीं पल को याद करते हुए बाहर हॉल में आकर सोफे पर बैठ गया, और अख़बार के पन्ने पलटने लगा

वो अभी बस अख़बार पढ़ ही रहा था, कि तभी किसी ने डोर बेल बजा थी

“इस वक्त कौन आया होगा” सोचते सोचते पंकज ने दरवाज़ा खोला, और दरवाज़ा खोलते ही उसके चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान आ गयी क्यूंकि उसके सामने उसकी बेटी की फ्रेंड सिमरन खड़ी थी,

सिमरन को देखते ही पंकज के लंड में एक सुरसुरी सी दौड़ गयी, पंकज तो बस उसे खड़ा खड़ा घुर ही रहा था, उसको इस तरह घूरते देखकर सिमरन के चेहरे पर भी मुस्कान आ गयी

सिमरन –“घुरना खतम हो गया हो तो क्या मैं अंदर आ सकती हूँ” सिमरन ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा

पंकज -“हाँ हाँ बेटी आओ” पंकज थोडा सकपका गया

सिमरन –“आज तो बड़े दिनों बाद दिखाई दिए आप, कहाँ गुल खिला रहे थे” सिमरन तो पहले से ही जानती थी कि पंकज तो दिल्ली में अपनी बेटी के साथ मस्तियाँ करके आया है,

पंकज –“अरे बेटी, मैं क्या गुल खिलाऊंगा, मैं तो दिल्ली में था बिज़नस के सिलसिले में, पर अब वापस यहाँ आकर थोड़े गुल खिलाने की इच्छा हो रही है”

सिमरन –“अच्छा जी, हम भी तो जाने कौन है वो खुसनसीब”

पंकज –“है एक लडकी, मेरी बेटी की फ्रेंड है, पता है कुछ दिन पहले ही उसने मेरा बहुत ही मस्ती से चूसा है कसम से”

सिमरन –“क्या चूसा है”

पंकज –“मेरा लंड, और क्या, अब तो बस एक बार वो अपनी फुद्दी चूसा दे, फिर तो मोज़े ही मोज़े हैं”

सिमरन –“ह्म्म्म…. तो आपको अब उसकी बुर देखनी है, पर मिस्टर, इतना आसान नही है उसकी चूत देखना”

पंकज –“हय्य… इतना तो जुल्म ना करो ……एक बार अपनी फुद्दी का वो अनमोल खूबसूरत सुराख़ दिखा दो बस…… कसम से मजा आ जायेगा”

सिमरन –“क्यूँ आंटी नही दिखाती क्या अपना सुराख़”

पंकज –“दिखाती है, पर एक चीज़ को इतनी बार देखने पर इंटरेस्ट खत्म हो जाता है, अब कुछ नया देखने का मन करता है”

सिमरन –“तो आपको मेरी जरूरत क्या, आपके तो घर में ही एक बड़ा ही मस्त सुराख़ है, देख लीजिये”

पंकज –“अरे नही, अभी तो तो आरू बच्ची है, उसमे वो मजा कहा” पंकज ने ऐसे दिखाने की कोशिश की जैसे मानो वो तो आरू को कभी उस नज़र से देखता ही नही है

सिमरन –“अरे कहाँ बच्ची,अब तो वो पूरी माल बन चुकी है, एक बार ध्यान से देखिये तो सही” सिमरन पंकज को उकसाने की कोशिश कर रही थी ताकि वो उसे कुछ तो बताये अपने और आराधना के बारे में, पर पंकज अभी अपने और आरू के बारे में किसी को भी बताना नही चाहता था

पंकज –“अरे छोडो ना यार उसको, तुम अपना बताओ, प्लीज़ जल्दी से एक बार मेरे पप्पू को चूस दो ना, देखो ना तुम्हे देखकर कैसे तन गया है बेचारा” पंकज ने अपने लोअर के उपर से अपने तने हुए लंड की ओर इशारा करके कहा

सिमरन –“ अरे आपका हथियार तो सच में अभी से खड़ा होकर सलामी दे रहा है मुझे, पर इसे समझादो अभी सही टाइम नही है”

पंकज –“तो सही टाइम कब आएगा, अब और इंतज़ार नही होता सच में”

सिमरन –“चिंता मत करिये, जल्द ही वो टाइम आएगा, और तब जी भर कर अपने पप्पू की मालिश करवा लेना मुझसे”

पंकज उसकी बात सुनकर बड़ा खुश हुआ,

पंकज –“अच्छा ठीक है, अब तुम आरू से जाकर मिल लो, पर अपना वादा याद रखना”

सिमरन –“जरुर अंकल” ये कहते हुए सिमरन उपर की ओर जाने लगी और उपर जाते हुए उसने पंकज की और एक किस हवा में दे दिया

पंकज सिमरन की अदाएं देखकर समझ गया कि पक्का ये लडकी जल्दी ही उसकी टांगो के निचे होंगी

पंकज को अपनी चूत के सपने दिखाकर सिमरन सीधा उपर आराधना के कमरे में चली गई, आराधना उस समय अपने मोबाइल में कुछ काम कर रही थी, जैसे ही उसने सिमरन को देखा वो भागकर उसके गले लग गई,

सिमरन – क्या बात है आरू मैडम, आज बड़ा प्यार आ रहा है मुझ पर

आराधना – क्या यार, एक तो इतने दिनों बाद तुझे देखा है, और तू बोलती है………

सिमरन – अच्छा नाराज़ क्यों होती है, मैं तो मजाक कर रही थी,

आराधना – चल ठीक है, आजा बेड पर बैठ कर बात करते है,

आराधना ने सिमरन को अंदर लिया और दरवाजे को अंदर से लॉक कर लिया और दोनों सहेलियाँ आकर बिस्तर पर बैठ गइ

सिमरन – अच्छा अब बता ना, क्या रहा दिल्ली में, जो काम करने गई थी, वो किया या खाली हाथ ही वापस आ गई…

आराधना – क्यूँ कमीनी, तुझे बड़ी जल्दी है जानने की… क्या करेगी जानकर

सिमरन – अरे आरू बता ना प्लीज़…. जब से प्रीती ने मुझे फ़ोन पर बताया है कि तू वापस आ गई है तब से मेरे दिल में बैचैनी सी हो रही है जानने की

आरू – अरे वाह, आजकल प्रीती से जयादा ही नजदीकियां बढ़ गयी है तेरी…. क्या चक्कर है???

आराधना जानना चाहती थी कि उसकी बेस्ट फ्रेंड उससे सच बोलती है या झूट, पर सिमरन ने भी उसे निराश नही किया

सिमरन – देख आरू, अब तुझसे क्या छुपाना, सच तो ये है कि प्रीती भी अब जवान हो चुकी है, बेचारी को जवानी के मजे लेने थे, सो मैंने भी उसे जवानी का अलग मजा चखा दिया

आरू – “कैसा मजा???” आराधना अनजान बनती हुई बोली

सिमरन – वो ही मजा जो दो लडकियाँ आपस में लेती है… समझी

आरू – मतलब… तुम दोनों ने लेस्बियन रिलेशन बनाये…???

सिमरन – और नही तो क्या…. पर तू प्लीज़ गुस्सा मत होना उस पर … और मुझ पर भी….

सिमरन की बात सुनकर आरू हंसने लगी…..

सिमरन – अरे तू हंस क्यों रही है…. मैंने तो सोचा था तू मुझसे गुस्सा हो जाएगी… उस दिन वो कंडोम वाली बात के लिए कितनी नाराज़ हुई थी…

आरू – पर अब मैं वो आरू नही रही,, अब मैं तुझसे गुस्सा हो ही नही सकती… दरअसल बात ये है कि…..

सिमरन – क्या बात है.. बता ना…….

आरू – दरअसल बात ये है कि मैंने भी प्रीती के साथ…..

सिमरन – प्रीती के साथ क्या….????

आरू – तुझे पता है क्या……

सिमरन – OMG…. मतलब तूने भी प्रीती की चूत का स्वाद चख लिया

आरू – ह्म्म्म…….

सिमरन – वाह… तू तो बड़ी ही तेज़ निकली… ये सब कब हुआ….

आरू – कल हम दिल्ली से वापस आये थे ना, उसके बाद ही ये सब कुछ हो गया.. अब तो प्रीती तेरी तरह ही मेरी बेस्ट फ्रेंड बन चुकी है… पर वो मुझे सब कुछ बताती है… तेरी तरह कुछ छुपाती नही…

सिमरन – क्यों, मैंने क्या छुपाया तुझसे????

आरू – यही कि तेरा बॉयफ्रेंड कोन है… कौन है वो जिसके साथ तू हमारे घर में मस्त रंगरेलिया मना कर गयी थी…..

सिमरन – मतलब… तुझे प्रीती ने सब कुछ बता दिया…….

आरू – हम्म्म्म……… पर मुझे लगा था कि तू मुझे बताएगी… खास कर जब मैंने तुझे अपने और पापा के बारे में इतना कुछ बता दिया….” आरू थोड़ी नाराज़गी से बोली….

सिमरन – सोरी यार आरू… मेरा मन तो था कि मैं तुझे बता दूँ कि मैं अपने भाई के साथ ही चुदाई करती हूँ… पर फिर मुझे डर था कि कहीं तू गुस्सा ना हो जाये…

आरू – चल ठीक है इस बार तो मैं तुझे माफ़ करती हूँ, पर आगे से तू मुझसे कुछ नही छुपाएगी, ठीक है ना

सिमरन – प्रॉमिस, पक्का कुछ नही छुपाऊगी , पर एक मिनट, तूने बोला कि प्रीति ने तुझसे कुछ नही छुपाया, इसका मतलब उसने तुझे ये भी बताया क्या कि वो भी किसी के साथ चुदाई करती है

आरू – ह्म्म्म… ये भी बताया

सिमरन – सच में…..

आरू – हाँ सच में…

सिमरन – मुझे बिलीव नही हो रहा, पहले तू मुझे बता कि उसने तुझे क्या बताया… कि वो किससे अपनी चूत मराती है

आरू – तू ऐसे नही मानेगी, तो सुन, उसने मुझे बताया कि वो कुशल के साथ ही चुदाई करती है…अब खुश

सिमरन – ये प्रीती तो बड़ी कमाल की निकली यार, अच्छा इसका मतलब तूने भी उससे कुछ नही छुपाया

आरू – नही यार, अगर वो मुझे इतना कुछ बता सकती है, तो मेरा भी फ़र्ज़ बनता है ना कि मैं भी उससे कुछ ना छुपाऊ

सिमरन – मतलब तूने उसे अपने और अपने पापा के बारे में सब कुछ बता दिया

आरू – हाँ यार, बता दिया…. और ये भी बता दिया कि दिल्ली में किस तरह मैंने और पापा ने सुहागरात मनाई… और कैसे उन्होंने प्यार से मेरी इस चूत को चूसा था… सब कुछ बताया

सिमरन – इसका मतलब तूने आखिर तीर निशाने पर मार ही दिया… हा हा हा

आरू – ह्म्म्मम्म…………………हा हा हा

सिमरन – काश मेरी भी प्रीती जैसी ही कोई बहन होती

आरू – तो क्या मैं और प्रीती तेरी बहनों से कम है क्या

सिमरन – हम्म… सच यार अब तो तुम दोनों मुझे अपनी सगी बहनों जैसे ही लगती हो… पर क्या तुझे पता है कि कुशल प्रीती के अलावा और किसकी फुद्दी लेता है

आरू – हम्म्म्म…… मोम की ना….

सिमरन – यार तुझे तो सब पता है

आरू – हाँ, प्रीती ने मुझसे कुछ नही छुपाया…

सिमरन – वैसे तूने कुशल का लंड देखा है क्या…..

आरू – नही यार, वैसे प्रीती कह रही थी कि उसका लंड कम से कम 8 इंच लम्बा और 3.5 इंच मोटा है, यानि पापा से भी बहुत बड़ा और मोटा

सिमरन – लगता है तेरी भी इच्छा हो रही है कुशल का लंड अपनी चूत में लेने की

आरू – अब तुझसे क्या छुपाऊ यार, पर हाँ सच में मैं एक बार कुशल का लंड भी अपनी चूत में लेना चाहती हूँ…

सिमरन – सही कहा यार, जो लड़का अपने लंड से तेरी मोम जैसे मस्त घोड़ी की चूत शांत कर दे उसका लंड पक्का बड़ा ही तगड़ा होगा,

आरू – क्यूँ कमीनी, लगता है तेरा भी मन कर रहा है कुशल का लंड खाने का

सिमरन – हाँ यार, प्लीज़ कोई जुगाड़ कर ना

आरू – पहले मेरा तो होने दे, फिर तेरा भी करा दूंगी

सिमरन – चल फिर ठीक है, तू जल्द से जल्द तेरे पापा की तरह ही कुशल को अपने जाल में फंसा कर अपने हुस्न का दीदार करा दे, फिर मैं भी थोडा हाथ साफ कर ही लुंगी,…हा हा हा …

आरू भी सिमरन की बात सुनकर हंसने लगी….

कुछ देर और दोनों सहेलियाँ ऐसे ही बात करती रही… फिर सिमरन अपने घर चली गई… और आरू ये सोचने लगी कि अब कुशल को कैसे अपने जाल में फंसाया जाए….

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