.पता नही कौन था उसकी ख्यालो क़ी दुनिया मे जो उसके बदन के साथ खेल रहा था, पता नही कौन था जो ख्वाबो मे उसके कुंवारे भड़कते यौवन की आग बुझा रहा था, कौन था जो खवाबो मे उसके कोमल बदन को रोन्द रहा था. वो जो भी था लेकिन उसने आराधना को चोंका दिया था, एक तरफ वो एग्ज़ाइटेड थी कि आज वो मास्टरबेट करने मे सक्सेस्फुल हो गयी और उसने वो सूख देख लिया जिससे वो अंजान थी. उसके चेहरे की ग्लो बता रही थी के उसने बहुत एंजाय किया, चेहरा चमक उठा था. चेहरे की शाइनिंग देखते ही बनती थी, पहला मास्टरबेशन कुच्छ ऐसा ही अहसास है जैसे किसी इंडिविजुयल ने अंतरिक्ष मे कोई रॉकेट उड़ा दिया हो. उसको अहसास हो गया था कि फर्स्ट टाइम सेक्स कितना पेनफुल हो सकता है क्यूंकी मास्टरबेशन के दौरान उसकी पुसी मे उसकी दूसरी फिंगर एंट्री नही ले पाई.
आराधना उठती है और वॉशरूम मे जाकर अपने हाथ हो धोने लगती है. तभी उसकी नज़रे सामने वाले मिरर पे पड़ती है, अपनी नज़रो से खुद नज़रे मिलते ही वो शरमा जाती है. फिर से मिरर मे चारो और घूम घूम कर अपने आप को देखती है, वो थोड़ा सा मॅक्सी को उठाती है और फिर नीचे कर देती है. और फाइनली बिस्तर मे आकर शांति से सो जाती है. वो एक ऐसी चैन की नींद थी जिसे वो ही समझ सकती थी. जवानी मे ये बदन वैसे ही नही सोने देता है जब तक की इसकी भूख ना मिटाई जाए.
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सनडे मॉर्निंग, सबसे पहले स्मृति उठ गयी है. आज ईव्निंग मे उन्हे शॉपिंग के लिए जाना है लेकिन अभी मॉर्निंग मे स्मृति ने उठ कर घर के ग्राउंड फ्लोर को क्लीन करना शुरू कर दिया. सफाई करते करते वो मीठी मीठी आवाज़ मे सॉंग गुनगुनाती रहती है. सफाई के दौरान अपने स्मार्टफॉन को चेक करती है, जिससे पे करीब 1 घंटे पहले ही उस ट्रिपल ऐक्स_लाइयन के नोटिफिकेशन्स आए हुए थे. ” क्या ये सोता भी है या नही”. स्मृति अपने मन मे बॅड बड़ाती है. और फोन को साइड मे रख कर फिर से सफाई मे लग जाती है. ठीक 10 मिनिट बाद फिर से एक नोटिफिकेशन आता है, नोटिफिकेशन साउंड को सुनकर वो भाग कर फोन के पास आती है लेकिन इस बार ये एरटेल की तरफ से स्मस था. वो अपने माथे पे हाथ मारती है कि क्या हर टाइम यही लगता है कि वो लाइयन ही परेशान कर रहा होगा. और फोन को रखने ही वाली थी कि फिर से एक नोटिफिकेशन दिखाई दिया, उसने तुरंत देखा और ये लाइयन का ही था.
लाइयन – यू देअर?
लाइयन – हेलो, एनी ब्यूटिफुल लेडी ईज़ देअर?
स्मृति – क्या बात है बताओ. क्या रात को सोते नही हो क्या?
लाइयन – सो क्या जब मेरे फ्रेंड्स के पास मेरे लिए टाइम ही नही है.
स्मृति – ओह्ह्ह तो इतने गम है तुम्हारी लाइफ मे. वैसे कौन दोस्त है जिसके पास तुम्हारे लिए टाइम है.
लाइयन – है एक बहुत ब्यूटिफुल आंड स्वीट लेडी. अपने घर मे ही बिज़ी रहती है, दोस्त चाहे भाड़ मे उसे किसी का ध्यान नही है.
स्मृति समझ गयी थी कि लाइयन का इशारा खुद उसी की तरफ था.
स्मृति – ऐसा भी हो सकता है कि उस ब्यूटिफुल लेडी पे और भी रेस्पॉन्सिबिलिटीस हो. और उसे टाइम ना मिल पाता हो, क्यू?
लाइयन – क्या हमारी ही इतनी बुरी किस्मत है कि हमे दोस्त भी वो मिली जो सबसे ज़्यादा रेस्पॉन्सिबल है सबके लिए बस अपने दोस्त के लिए ही नही.
स्मृति – हा हा हा हा हा
लाइयन – मेरा दोस्त स्माइल करता है तो मुझे बहुत अच्छा लगता है.
स्मृति उसकी बात पढ़ कर शरमा सी जाती है.
स्मृति – लेकिन दोस्त ने इतनी बाते बनानी कहाँ से सीखी?
लाइयन – किस्मत सीखा देती है स्मृति जी. कौन सा हम मा के पेट से सीख कर आते है
.स्मृति – तुम्हारी बाते तो बस उपर वाला जाने. खैर और बताओ अब क्या कर रहे हो.
लाइयन – कपड़े उतार रहा हू.
स्मृति – तुम फिर से शुरू हो गये.
लाइयन – स्मृति जी अगर मे सच भी बोलू तो आपको लगता है मे शुरू हो गया. पता नही आपको तो मे ही सबसे बुरा लगता हू.
स्मृति – तो सुबह के 9 बजे है और तुमने मुझसे चाटिंग शुरू कर दी, पहले नहा ही लेते ना. किसने ज़बरदस्ती करी है.
लाइयन – वो स्मृति जी मे नहाने के लिए नही बल्कि सोने के लिए कपड़े उतार रहा था.
स्मृति – हा हा हा हा. फिर से सो रहे हो. गुड, सो जाओ.
लाइयन – फिर से नही, दर असल मे रात को सो ही नही पाया. इसीलिए अब सो रहा हू, अगर रात को सो गया होता तो अब नही सोता.
स्मृति – ठीक है अब चाटिंग बाद मे करना. कपड़े उतारो और सो जाओ, वैसे भी रात को मज़दूरी करी है बेचारे ने.
लाइयन – एक ही कपड़ा था बॉडी पे वो मे उतार चुका हू. और रात को मज़दूरी नही मेहनत करनी पड़ गयी थी स्मृति जी, जो मे पूरी मेहनत से करता हू.
स्मृति उसकी एक कपड़े वाली बात सुनकर शॉक्ड रह जाती है. उसके मन मे ये ख्याल आ रहा था कि क्या अब इसने कुच्छ नही पहना है. लेकिन शरम की वजह से वो पुछ नही सकती थी. चाटिंग करते करते कुच्छ दिन हो भी गये थे तो वो और धमकिया देना नही चाहती थी उसे.
स्मृति – ऐसी क्या मेहनत कर दी इस नालयक ने. पहाड़ तोड़ दिया क्या कहीं?
लाइयन – नही स्मृति जी, कल रात एक पार्टी मे गया था. वहाँ आप की जैसी एक भाभी से मुलाकात हो गयी और पूरी रात उसी के साथ मेहनत करने मे गुजर गयी.
लाइयन ने ये बात लिख तो दी लेकिन इस बात से स्मृति का पारा सातवे आसमान पे पहुँच गया.
स्मृति – यू ईडियट, तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई उसको मेरा जैसे कहने की. कई बार मुझे लगता है कि उन्मेच्योर लड़का है लेकिन दिल का सॉफ है लेकिन तुम एक बेहद गंदे लड़के हो.
स्मृति का चेहरा गुस्से मे लाल हो चुका था.
लाइयन – स्मृति जी, क्या आप अपना सारा गुस्सा मेरे लिए ही बचा कर रखती है. मेरे कहने का मतलब था कि वो भाभी आप की तरह बेहद सुंदर और अट्रॅक्टिव लग रही थी. मेरा इमॅजिनेशन ऐसा था जैसे मे आपसे ही मिल रहा हू.
अपनी तारीफ सुन कर स्मृति थोड़ा रिलॅक्स हुई और अपने आप पर इतराती है.
स्मृति – ओके. तो घुमा फिरा कर बात मत किया करो. एनी वे लेकिन उसने तुमसे मेहनत कैसे कराई?
लाइयन – क्या स्मृति जी, कहीं आप दोबारा गुस्सा ना हो जाना लेकिन आप मेरी दोस्त है तो आपसे तो मे दिल की बात शेर कर ही लेता हू. आक्च्युयली कल एक फ्रेंड की बर्तडे पार्टी मे गया था. काफ़ी कलर्फुल पार्टी थी.
स्मृति- ह्म्*म्म्मम……
लाइयन – बिल्कुल आपके जैसी एक भाभी उस पार्टी की जान थी. ब्लॅक कलर की लोंग पार्टी ड्रेस मे वो एक अप्सरा लग रही थी. ड्रेस भी बॅकलेस थी तो उसकी नेक से लेकर कमर तक बॉडी का पूरा दीदार हो रहा था. मुझे ऐसा लग रहा था जैसी स्मृति जी ही उतर कर इस पार्टी मे आ गयीं हो. क्या बला की खूबसूरत थी वो. अगर मॅरीड ना होती तो कसम से शादी का पहला प्रपोज़ल मे ही देता. वो बात अलग है कि हम जैसे ग़रीबो के नसीब मे आप जैसे यानी उस भाभी जैसी खूबसूरती नही होती.
स्मृति इनडाइरेक्ट्ली अपनी तारीफ सुनकर पागल हुए जा रही थी. लाइयन भी मँझे हुए खिलाड़ियो की तरह पेश आ रहा था.
स्मृति – ह्म्*म्म………
लाइयन – फिर क्या स्मृति जी, अपने हज़्बेंड के साथ खड़े होकर ड्रिंक ले रही थी लेकिन निगाहे चारो और ज़्यादा उजाला फेला रही थी. जैसे ही उसकी निगाहे मुझसे मिली, आदत से मजबूर हमारी एक आँख दब गयी उसकी तरफ.
स्मृति – कितने जूते पड़े फिर. मेरी जैसी शरीफ लेडी के साथ बद तमीज़ी करोगे तो जूते ही पड़ेंगे.
स्मृति भी ऐसे पेश आने लगी थी जैसे वो खुद फील कर रही हो कि सब कुच्छ उसके साथ ही हो रहा हो.
लाइयन- बचपन से आदत है जी, खूबसूरत माल को देखते ही आँख खुद दब जाती है. ड्रिंक करते हुए जब उसने मुझे आँख मारते हुए देखा तो उसे यकीन नही हुआ यानी वो श्योर नही थी. तिरछी निगाहो से उसने फिर देखा तो फिर से एक बार आँख दबा दी.
स्मृति खूबसूरत माल जैसे शब्द सुनकर और हॅपी हो रही थी लेकिन लाइयन को दिखा नही रही थी.
स्मृति – अच्छा….
लाइयन – उसके मूँह से एक हल्की सी स्माइल निकली और उस स्माइल पे तो मे मर मिटा. आख़िर वो मुझे अपने बेस्ट फ्रेंड जैसी लग रही थी यानी आपके जैसी.
स्मृति – ज़्यादा मक्खन मत लगाओ और आगे बताओ.
लाइयन – बस नैन मिलते रहे और जितनी बार भी मिले, हमारे नैन तो अपना कमाल दिखाते ही रहे. जब खूबसूरत आपके जितनी तो एक दो बार फ्लाइयिंग किस भी दे दी.
स्मृति – अगर मे होती तो कस के थप्पड़ जमाती.
लाइयन – आपके जैसी ब्यूटिफुल, स्वीट, हॉट, सेक्सी बॉम्ब मुझे थप्पड़ मारे तो जिंदगी भर ख़ाता रहू कसम से.
स्मृति – खैर बाते बनाने मे तो तुम्हारा कोई जवाब नही है अब आगे बताओ.
लाइयन – फिर क्या था मेने इशारे मे उससे उसका फोन नंबर माँगा लेकिन उसने चारो तरफ देख कर और सही मौके पे मुझे स्माइल करते हुए मना कर दिया.
स्मृति – गुड लेडी….
लाइयन – प्लीज़ मुझे गालियाँ मत देना लेकिन उसकी खूबसूरती से पागल हो चुका था मे. वो अकेले चलते वहाँ पहुँच गयी जहाँ डीजे स्टेज लगा हुआ था. चलने मे जो बात थी क्या बताऊ, उसके ,,,,, ऐसे मटक रहे थे जिससे सॉफ पता चल रहा था कि कितनी गदराई हुई बॉडी की मालकिन है.
स्मृति – गुड बॉय, अच्छा है कि सॉफ सॉफ नही लिखा.
लाइयन – आप बताएए ना कि चलते हुए क्या मटक रहे थे.
स्मृति – हप!!!! आगे बताओ
लाइयन – तो मुझे ही बताना पड़ेगा कि क्या मटक रहे थे क्यूंकी मेरी खूबसूरत दोस्त को नही समझ आया.
स्मृति – चलते हुए उसके हिप्स मटक रहे थे. अब खुश!! वैसे तुम्हारी जान कारी के लिए बता दू कि ये नॅचुरल है, कोई लेडी आप जान के ऐसा नही करती.
लाइयन – क्या आपके साथ कभी किसी पार्टी मे ऐसा हुआ है क्या?
स्मृति – जान ना ले लू उसकी जो ऐसा कर दे. तुम आगे बताओ
लाइयन – वो धीरे धीरे चल कर वहाँ पहुँच गयी जहाँ डीजे स्टेज था. दूसरी तरफ मे भी धीरे धीरे चला और डीजे स्टेज की दूसरी साइड खड़ा हो गया. अब वो और मे आमने सामने था और बीच मे डीजे स्टेज था.
स्मृति – ओके..
लाइयन – जैसे जैसे मौका मिलता मे उसे कोई ना कोई इशारा कर देता. फोन नंबर दोबारा माँगा तो उसने मना कर दिया, फ्लाइयिंग किस दी तो हंस के टाल दिया. इशारे मे उसे ये बताया कि तेरी बॉडी नही आग की भट्टी है जिसमे कोई भी जल जाए और वो धीमे धीमे स्माइल करती रही. फिर एक बार मेने उसे अपने थंब और फिंगर को गोल करके, उसके बीच मे उंगली डाल कर इशारा किया.
स्मृति – ओह माइ गॉड. क्या अब भी वो हँसती रही, उसने दो थप्पड़ नही जड़े तुम्हारे.
लाइयन – तो यानी आपको पता है कि वो इशारा किस चीज़ का होता है?
स्मृति – ज़्यादा स्मार्ट मत बनो. आगे बताओ.
स्मृति समझ गयी थी कि लाइयन ने उसकी बात पकड़ ली है.
लाइयन – थप्पड़ तो नही लेकिन धीरे धीरे वो मेरी तरफ चल कर आने लगी. सच कह रहा हू स्मृति जी मेरी तो फट गयी कि बेटा आज तो गया.
स्मृति – हा हा हा हा हा हा. गुड
लाइयन – वो धीरे धीरे चल कर मेरे तरफ आने लगी. मेरी तो साँसे ही अटक गयी थी, समझ आ गया था कि खूबसूरती बस धोका देती है.
स्मृति – गुड, ऐसा काम करोगे तो धोका ही मिलेगा.
लाइयन – वो आकर मेरे सामने खड़े हुए आदमी के पास आकर रुक गयी. उस आदमी की पीठ मेरी तरफ थी, और बोली के मे टाय्लेट जा रही हू. ये बात दर असल अपने हज़्बेंड को बोल रही थी जो मेरे सामने ही खड़ा था. मेरी जान मे जान आई और मेने एक बार और हिम्मत करके इशारे मे पुछ लिया कि इस पार्टी हॉल मे टाय्लेट कहाँ है. इस इशारे के टाइम उसका हज़्बेंड मुझे नही देख सकता था क्यूंकी उसकी पीठ मेरी तरफ थी.
स्मृति – फिर??
लाइयन – फिर क्या था, वो स्टाइल मे आगे बढ़ी और अपने हज़्बेंड को हग किया. अब उसका फेस मेरी साइड था और अपने हज़्बेंड के शोल्डर पे रखा हुआ था. और धीरे से अपने हज़्बेंड के कानो मे बोला कि हनी टाय्लेट सेकेंड फ्लोर पर है. ये बोलते हुए उसकी सेक्सी आइज़ मेरी साइड थी. मे समझ गया कि ये हिंट मुझे ही दिया गया है. मे ये भी समझ गया कि इस पार्टी हॉल से वो अच्छी तरह से वाकिफ़ है.
स्मृति – ओह्ह नो. शी वाज़ आ बिच.
लाइयन – वो जो भी थी लेकिन कसम से थी जबरदस्त. सच बता रहा हू कि अभी भी सोच रहा हू तो मेरा बाबू आसमान छुने की कोशिश कर रहा है.
स्मृति को भी काफ़ी टाइम हो गया था हज़्बेंड के साथ सेक्स किए हुए. ये एरॉटिक सिचुयेशन उसके चेहरे को और लाल कर रही थी.
स्मृति – बाबू?? ये क्या है?
लाइयन – समझिए ना स्मृति जी. बाबू यानी मेरा लंड.
लाइयन ने भी तुरंत मौके को देख कर टाइप कर दिया. स्मृति को पता था क़ी वो बिना कुच्छ पहने चॅट कर रहा है. इसीलिए उसकी एक फुल पिक्चर स्मृति के माइंड मे घूम गयी.
स्मृति – रहोगे जाहिल ही. अगर चॅट करनी है तो अंडरवेर पहनो और उसके बाद ऐसी बात ना करना.
लाइयन- लेकिन स्मृति जी…
स्मृति – लेकिन क्या?
लाइयन- आप तो मॅरीड है. डेली लंड को देखती ही होंगी, जब ये खड़ा होता है तो अंडरवेर मे कैसे समाएगा. वैसे भी मे फ्रेंची पहनता हू.
स्मृति ये ऐसी बाते सुन कर पता नही क्यू परेशान हुए जा रही थी. लाइयन की इस बात से उसे ये भी याद आ गया था कि वाकई मे उसे अपने हज़्बेंड से मिले हुए कुच्छ दिन ही गये थे. लाइयन की ये गंदी लॅंग्वेज उसके माइंड पे हावी हुए जा रही थी लेकिन वो शो नही कर रही थी.
स्मृति – बेशर्मी की भी हद होती है. अभी ट्राउज़र पहनो या कुच्छ भी पहनो और तभी चॅट करना. क्या तुम्हारे घर मे कोई मा या बहन नही है अगर कोई तुम्हे बिना कपड़ो के देख ले तो.
लाइयन – जी मेडम लो पहन लेता हू. लेकिन आपकी जान कारी के लिए बता दू कि मेरे घर मे मा बहन सब है लेकिन सब अपनी अपनी लाइफ मे मस्त है और सब अपने अपने रूम मे है. रही बात देखने की तो मे खुद जाकर तो दिखा नही रहा हू, अगर वो खुद ही देख ले तो उनकी अच्छी किस्मत से मे क्यू जलु.
स्मृति मन मे सोच रही थी कि ये कोई बेहद नालयक लड़का है. लेकिन दूसरी तरफ उससे चाटिंग करने की स्मृति को आदत भी पड़ गयी थी. वो रिलॅक्स थी क्यूंकी उसे ऐसा लगता था कि चाटिंग ही तो है. कुच्छ देर तक लाइयन का कोई रिप्लाइ नही था क्यूंकी शायद वो ट्राउज़र पहन रहा था या पहन ने का बहाना कर रहा था.
लाइयन – आइ आम बॅक…
स्मृति – ओके. अब बताओ अपनी उस बिच भाभी के बारे मे.
लाइयन – अगर कुच्छ नही सुन ना तो मत सुनो लेकिन मेरी उस भाभी के बारे मे कुच्छ मत कहो स्मृति जी.
स्मृति – ओह्ह हो. तो इतना लव हो गया है उस भाभी से.
लाइयन – लव की बात नही है. दर असल उसमे मुझे आपकी छवि दिखाई देती है और कोई आपके बारे मे कुच्छ बोले तो उसकी मा….
स्मृति को ये बात सुनकर अच्छा भी लगा और गुस्सा भी आया क्यूंकी उसने फिर से गंदी लॅंग्वेज यूज़ करने की कोशिश की. लेकिन स्मृति ने अब उसकी इन हर्कतो को इग्नोर करना शुरू कर दिया था ये स्पच कर कि है ही गँवार.
स्मृति – ओके ओके. सॉरी, चलो आगे बताओ.
लाइयन – सभी लोग पार्टी के लिए ग्राउंड मे थे. वो भाभी धीरे धीरे बिल्डिंग के लिए अंदर जाने लगी. लोंग ड्रेस को उसने अपने हाथो से पकड़ा हुआ था और थोड़ा सा ज़मीन से बचाती हुई चल रही थी, धीरे धीरे सबकी नज़रो से बचते हुए मे भी पीछे चल दिया.
स्मृति – ह्म्*म्म्ममम…….
लाइयन – वो मेरे आगे थी और उसकी नंगी पीठ ठीक मेरी आँखो के सामने थी. उसने पीछे मूड कर मुझे देखा और एक स्माइल दी. कसम से मुझे ऐसा लग रहा था जैसे स्मृति जी मेरे सामने हो. मे भी पागलो की तरह पीछे चला जा रहा था.
स्मृति भी ना चाहते हुए ऐसे मुकाम पर आ गयी थी जहाँ लाइयन मे उसको ऐसा फील करना शुरू कर दिया था कि वहाँ कोई भाभी नही बल्कि स्मृति खुद ही थी. स्मृति के कान गरम हो चुके थे, आँखे मॉर्निंग टाइम मे ही लाल हो रही थी. बड़ी मुश्किल से वो अपने को संभाले हुए थी.
स्मृति – ह्म्*म्म्मम…..
लाइयन – वो धीरे धीरे बिल्डिंग की तरफ बढ़ती जा रही थी. मुझे लगता है कि उसकी गान्ड आप के जितनी ही सेक्सी होगी जिसपे मेरी निगाह पूरी लगी हुई थी. सच बोल रहा हू मे उसे ऐसे देख रहा था जैसे स्मृति को देख रहा हू. मेरा लंड खड़ा होने लगा था.
वो गंदी पे गंदी लॅंग्वेज यूज़ किए जा रहा था लेकिन आज स्मृति उसे नही रोक पा रही थी बल्कि चाटिंग मे पूरा सपोर्ट कर रही थी.
स्मृति – फिर???
लाइयन – उसने बिल्डिंग मे एंट्री ली और स्टेर्स लेकर उपर चली गयी. धीरे धीरे मे बिल्डिंग मे पहुँचा और मुझे सीढ़ियाँ दिखाई दी लेकिन स्मृति दिखाई नही दी. ओह्ह सॉरी भाभी दिखाई नही दी.
स्मृति की साँसे तेज होती जा रही थी. उसे ऐसा लग रहा था जैसे लाइयन उसी की तरफ बढ़ रहा हो.
स्मृति – फिर??
लाइयन – मे फर्स्ट फ्लोर पे पहुँचा और उसके बाद सेकेंड फ्लोर पे. लेकिन वो मुझे दिखाई नही दे रही थी. मे उसे पागलो की तरह ढूंड रहा था जैसे कोई पागल प्रेमी अपनी लैला को ढूंड रहा हो.
स्मृति – ओके… मिली या नही?
लाइयन – टाय्लेट मे ढूँढा, ईवन लॅडीस टाय्लेट मे भी ढूँढा लेकिन नही मिली. बिल्डिंग मे कोई नही था, चारो तरफ भाग भाग कर पागल हो रहा था. तभी मुझे उस बिल्डिंग की किचन मे से आवाज़ कुच्छ आवाज़ आई.
स्मृति -फिर??
लाइयन – किचन मे जैसे ही मे पहुँचा. मे रिलेक्स हो गया, वो वोही थी. बड्रे रेफ्रिजरेटर से पानी की बॉटल निकाल कर पी रही थी. वो अपने बाल खोल चुकी थी. स्मृति जी ऐसे लग रही थी जैसे सेक्स की देवी हो.
स्मृति की हालत और खराब हुए जा रही थी.
स्मृति – फिर क्या हुआ???
लाइयन – उसकी और मेरी आँखे मिली, पता नही क्यू मुझे फिर से ऐसा लगा जैसे मेरे सामने स्मृति खड़ी हो. मेने उससे पुछा पानी मिलेगा? वो घूम गयी और फिर से पीठ मेरे सामने थी. मे धीरे धीरे उसकी तरफ बढ़ा. उसकी मस्त मोटी मोटी गान्ड मुझे इन्वाइट कर रही थी. मे उसके बहुत करीब पहुँच गया.
स्मृति – यार बहुत स्लो टाइप करते हो. जल्दी जल्दी लिखो ना.
स्मृति भी आज उतावली हो रही थी ये जान ने के लिए कि आख़िर क्या हुआ.
लाइयन – अब मे कोई रोमॅंटिक हीरो तो था नही जो टाइम लगाता. जाकर उसकी पीठ पे दोनो हाथ रख दिए, उसकी दोनो आँखे बंद हो गयी. मे समझ गया कि लोहा गरम है. मेने अपने दोनो होठ उसकी गर्दन पे टिका दिए. क्या खुसबु आ रही थी उसके बदन से. उसको गर्दन पे किस करते करते मेने अपने दोनो हाथ उसकी ड्रेस मे घुसा दिए और उसकी चुचियों को पकड़ लिया. क्या चुचियाँ थी उसकी शायद बिल्कुल आपके जैसी साइज़ 38 डी से कम नही होगा.
स्मृति तो खो चुकी थी. उसने आज तक ऐसी चाटिंग नही करी थी.
स्मृति – जी नही, मेरा साइज़ 38 डी नही है.
लाइयन – जो भी आपका साइज़ है लेकिन उसकी चुचियो को मे यही सोच कर दबा रहा था कि वो आपकी ही है.
स्मृति – लेकिन क्यू सोच रहे थे कि वो मे हू?
लाइयन – इससे मेरे लंड मे और ताक़त आ जाती है जैसे कि अभी भी ट्राउज़र से भी बाहर निकलने को तैयार हो रहा है.
स्मृति – हा हा हा हा. तो कोई ले आओ ना जो इसे शांत कर दे.
लाइयन – कभी ना कभी आएगी ही वो. मुझे अपने प्यार पे पूरा भरोसा है.
धीरे धीरे मे भी उसके पीछे पीछे चल दिया. वो सेकेंड फ्लोर के एक कॉर्नर मे मूड गयी और थोड़ा दूर चलते ही एक रूम के अंदर चली गयी. मेरी फट तो रही थी लेकिन हिम्मत करके मे भी अंदर चला गया. वो मेरी तरफ पीठ करके खड़ी थी. मेरे अंदर घुसते ही वो अपने दोनो हाथ पीछे ले गयी और अपने ड्रेस की नाट खोली और ड्रेस एक दम नीचे. अब वो बस अपनी पैंटी मे थी. क्या नज़ारा था स्मृति जी, इतनी सुंदर लेडी आज बस मेरे सामने पैंटी मे थी. लड़को के लिए तो किसी लड़की की पैंटी ही देखना काफ़ी होता है यहाँ तो पैंटी मे एक खूबसूरत बदन भी था.
स्मृति – ज़्यादा पैंटी देखने का शोक है तो घर मे देख लिया करो. किसी ना किसी की दिख ही जाएगी.
स्मृति ने उसका मज़ाक उड़ते हुए कहा.
लाइयन – हर किसी की पैंटी का कलर, साइज़ , ब्रांड सब पता है मुझे.
लाइयन ने भी बेशर्मी से जवाब दिया.
स्मृति – तुम तो हो ही निकम्मे. आगे बताओ.
लाइयन – मेने आगे एक कदम ही बढ़ाया था कि वो उसी पोज़िशन मे धीमे से बोली कि क्लोज़ दा डोर. उसके ये बोलते ही मुझे समझ आ गया कि मुझे थप्पड़ क्यू पड़ा था. मेने गेट बंद करा और आगे बढ़ा, ऐसे लग रहा था जैसे आग की तरफ बढ़ रहा हू. आगे बढ़कर मेने उसे जैसे ही बाँहो मे लिया उसके मूँह से आअहह निकल गयी. मे समझ गया कि वो प्यासी है. और मुझसे बेहतर उसकी प्यास भुजाने वाला भला कौन होता.
स्मृति को पढ़ते हुए भी डर लग रहा था कि पता नही अब क्या होगा. इमॅजिनेशन इस उस दुनिया मे ट्रिपल ऐक्स_लाइयन उसे डाल चुका था जिसमे उसे यही लग रहा था कि सब कुच्छ उसी के साथ हो रहा है.
स्मृति – फिर क्या हुआ?
लाइयन – क्या मुझे तुम्हारी, सॉरी उस भाभी की प्याअ बुझा देनी चाहिए?
स्मृति – शायद वो प्यासी है ही नही.
स्मृति का इशारा अपनी तरफ था.
लाइयन – क्या अपने हुश्न की वो दो बूँद अपने आशिक के उपर नही गिरा सकती. क्या वो यही चाहेगी कि उसका आशिक पैदा हो और मर जाए बिना उसे पाए ही.
स्मृति – देखो मेरी मजबूरी समझो.
स्मृति ने जैसे ही टाइप करके भेजा उसे अपनी ग़लती का अहसास हो गया कि उसने क्या टाइप कर दिया.
स्मृति – मेरा मतलब है कि अपनी उस भाभी की मजबूरी समझो.
स्मृति ने जैसे ही टाइप करके भेजा उसे अपनी ग़लती का अहसास हो गया कि उसने क्या टाइप कर दिया.
स्मृति – मेरा मतलब है कि अपनी उस भाभी की मजबूरी समझो.
जैसे जैसे स्मृति कन्फ्यूज़ हो रही थी, वैसे वैसे लाइयन को अहसास हो रहा था कि उसका जादू चल रहा है.
लाइयन – खैर छोड़ो, आगे बताऊ?
स्मृति – हाँ बताओ
लाइयन – उसके नंगे बदन को पकड़े हुए मेने उसके कानो मे किस करते हुए पुछा की आए हुष्ण की ज्वालामुखी तेरा नाम क्या है. पता है उसने क्या जवाब दिया?
स्मृति – क्या?
लाइयन – उसने बोला कि मेरा नाम स्मृति है.
स्मृति – तुम झूठ बोल रहे हो. ये नाम तुम जान बुझ कर बता रहे हो.
लाइयन – उसने मुझे यही नाम बताया अब अगर आप कहो तो मे अपनी तरफ से बदल देता हू.
स्मृति – ये अहसान करना ज़रूरी नही है. आगे बको
लाइयन – स्मृति के कंधो को पकड़ मेने अपनी तरफ घुमाया, उसका गुलाब जैसा चेहरा मेरे सामने था और गुलाबी होठ भी. मेने अपने दोनो होंठ उसके गुलाबी होंठो पे रख दिए. उसकी दोनो चुचियाँ मेरे सीने मे गढ़ रही थी. स्मृति ने मेरे शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए थे. स्मृति मेरे साथ ऐसे पेश आ रही थी जैसे मुझे खा जाएगी. मेरी शर्ट उतार दी उसने.
लाइयन का इशारा स्मृति की तरफ था.
स्मृति – उसे क्या वो भाभी समझा है. वो कभी नही आएगी. लेकिन तुम आगे बताओ.
स्मृति को अपनी चूत की मूव्मेंट पता चल रही थी. सच तो ये है कि उसकी चूत सुबह सुबह ही गीली हो गयी थी.
लाइयन – फिर उसके लेफ्ट बूब्स पर से मेने हाथ हटाया और उसकी ड्रेस की नेक पर बनी नाट को खोलने लगा मे. स्मृति जी उसने वो ज़रा जिससे मुझे और लगने लगा कि वाकई मे वो आपके जैसी है. वो घूमी और कस के एक थप्पड़ दिया मेरे गाल पे.
स्मृति – हे… क्यू बच्चू मज़ा आया. बड़े आए बूब्स दबाने वाले.
स्मृति भी थोड़ा ओपन हो रही थी उसके साथ.
लाइयन – थप्पड़ मारते ही वो स्लो मोशन मे आगे की ओर चल दी और किचन के गेट पर पहुँच कर फिर से एक बार मूडी और मुझे फिर से एक स्माइल दी. थप्पड़ खाने के बावजूद मे उसके बदन का भूखा था.
लाइयन – कैसी लगी मेरी चेस्ट???
स्मृति – मुझसे क्यू पुच्छ रहे हो?
लाइयन – नही मेने लिप्स को अलग करते हुए उससे पुछा कि कैसी लगी मेरी चेस्ट और वो कुच्छ नही बोली. मे समझ गया कि उसे पसंद आई. मेने अपने आपको झुकाया और अपने लिप्स को स्मृति के बूब्स पे रख दिया, मेरा स्टाइल थोड़ा अलग है तो मे उन्हे दबा भी रहा था और चूस भी रहा था. स्मृति आअहह करे जा रही थी.
स्मृति – क्या आराम से पेश नही आ सकते थे.
लाइयन – लेकिन स्मृति जी वो बोले तो सही. वो तो ऐसे पेश आ रही थी जैसे कब से अपनी चुचियाँ मुझसे ही दब्वाने को बचा कर रखी हो. ये काफ़ी देर चला फिर मेने अपने हाथ स्मृति की पैंटी की तरफ बढ़ाए. पैंटी जैसे ही थोड़ी नीचे हुई मुझे समझ आ गया कि जितनी खूबसूरत स्मृति है उतनी ही खूबसूरत उसकी चूत है. उसकी चूत पे घने बाल थे.
स्मृति – छ्ह्हि, गंदी कहीं की.
लाइयन – क्यू तुम्हे घने बाल अच्छे नही लगते.
स्मृति – वैसे मे तुम्हे क्यू बताऊ? लकिन फिर भी हिंट दे देती हू कि मुझे क्लीन रहना पसंद है.
लाइयन – बिल्कुल क्लीन?
स्मृति – यस. और अब ज़्यादा मत पुछो. बताओ क्या हुआ.
लाइयन – उसकी पैंटी नीचे होते ही मेने उसे लेटने का इशारा किया स्मृति के लेट ते ही मेने अपना मूँह उसकी चूत पे लगा दिया.
स्मृति को ऐसा लगा जैसे वो मर ही जाएगी. 3 बच्चो की मा होने के बावजूद आज वो एक कमसिन लड़की की तरह फील कर रही थी. उसको फील होने लगा था कि बॉडी मे फीलिंग आ चुकी है.
स्मृति – फिर?
लाइयन – मे स्मृति की चूत को पागलो की तरह चाट रहा था. वो बड़बदाए जा रही थी कि क़िस्स्सस्स मी……. कभी का ही अपने लिप्स वहाँ से हटा कर अपनी 2 फिंगर उसकी चूत मे घुसा देता था. कितना पानी था पता नही उसकी चूत मे. गर्दन इधर उधर पटक रही थी. मे समझ गया था कि इसको प्यार की ज़रूरत है लेकिन बदनामी से डरती है. उसकी चूत को करीब 10 मिनिट तक मे ऐसे ही चूस्ता रहा.
स्मृति मन ही मन सोच रही थी कि झूठा कहीं का. 10 मिनिट मे तो कितनी बार उसका रस निकल जाता.
लाइयन – वो मेरे बाल खींचने लगी थी, मे समझ गया था कि आग अब बहुत बढ़ गयी है और ज़्यादा करने से लॉस हो सकता है. मेने अपने होंठ हटाना ही सही समझा, थोड़ी देर बाद वो उठ कर बैठ गयी जब तक मे अपनी जीन्स खोल चुका था. वो आगे बढ़ी और और मेरी फ्रेंची के उपर से ही उसने मेरा लंड पकड़ लिया. उसकी आँखे ही बता रही थी कि उसे कितना सुकून मिला मेरे लंड का अहसास मिलने से.
स्मृति की हालत अब फाइनल स्टेज पर पहुँच गयी थी. एक जगह बीत कर उसका हाथ उपर से ही अपनी चूत पे पहुँच गया था. एग्ज़ाइट्मेंट के सागर मे वो डूबती जा रही थी. लाइयन उस पर अपना पूरा जादू चलाने मे कोई कमी नही छोड़ रहा था.
लाइयन – स्मृति जी यू देअर्?
स्मृति – यू कॅरी ऑन प्लीज़….
लाइयन – वैसे आप क्या कर रही है?
स्मृति – डॉन’ट आस्क, प्लीज़ बताओ फिर क्या हुआ.
लाइयन – प्लीज़ माइंड कीजिए अगर मे लंड चूत जैसे गंदे शब्द यूज़ कर रहा हू.
स्मृति – अब तो तुमने आदत ही डाल दी है. प्लीज़ बताओ मुझे कि फिर क्या हुआ.
लाइयन – स्मृति नीचे बैठी, मेरी फ्रेंची नीचे करी और मेरा लंड बाहर निकाल लिया. मेरे लंड को देख कर उसके फेस पे एक मुस्कुराहट थी. उसने टाइम वेस्ट नही किया और अपनी गुलाबी लिप्स को खोल कर मेरा लंड अपने मूँह मे ले लिया
स्मृति – एक बात बोलू ?
लाइयन – बोलो जी
स्मृति – यू आर सो रोमॅंटिक…..
स्मृति ने ये बात टाइप करके भेजी ही थी कि ट्रिपल ऐक्स_लाइयन ऑफलाइन हो गया. स्मृति की ऐसी हालत हो गयी जैसे उसे कोई सेक्स के दौरान छोड़ कर चला गया हो.
दर असल, स्मृति अपने उपर से अपना कंट्रोल खोती जा रही थी. उसकी चूत को लाइयन बुरी तरीके से गीला कर चुका था. स्मृति की ऐसी हालत सेक्स के दौरान भी नही होती थी. वो एक शरीफ लेडी थी लेकिन उसके अंदर छुपि हुई भावनाओ को लाइयन जगा चुका था. जिसका अहसास स्मृति को नही हो पाया था. वो काफ़ी टाइम तक उसका वेट करती रही लेकिन वो ऑनलाइन नही आया. उसका मन अब सफाई मे नही लग रहा था, वो उठ कर अपने रूम की ओर चल देती है.
दूसरी तरफ आराधना उठ चुकी है. नॉर्मली सनडे को सभी बच्चे देर तक सोते है लेकिन आज एक नयी मॉर्निंग थी आराधना की लाइफ मे और इस एग्ज़ाइट्मेंट मे वो जल्दी उठ गयी थी. वो नहा कर बाथरूम से बाहर आती है. वॉर्डरोब से एक टी-शर्ट निकालती है और उसे देख कर वो वापिस रखने लगती है क्यूंकी उसे याद आ जाता है कि ये वो ही टी-शर्ट है जो उसे बूब्स पे से बेहद टाइट है जबकि वो लूस क्लोदिंग ही प्रिफर करती थी. ये इन्सिडेंट उस दिन का है जब प्रीति उसके रूम मे आई थी. फिर एक मुस्कुराहट के साथ पता नही क्यू वो ये फ़ैसला करती है आज उसी टीशर्ट को पहनेगी वो. उसके फेस पर एक मुस्कान थी जिसमे वो और भी खूबसूरत लग रही थी. बाथरूम के अंदर जाकर वो ब्रा पहनती है और पैंटी भी. पैंटी पहन ने से पहले एक बार फिर से अपनी छोटी सी पुस्सी पे हाथ लगाती और खुद ही चिहुनक जाती है. ब्रा पहन ने के बाद वो टीशर्ट पहनती है लेकिन टीशर्ट पहनते ही उसे अहसास हो जाता है कि ब्रा को उतारना पड़ेगा नही तो टी-शर्ट नही आएगी. वो बिना ब्रा के ही टी-शर्ट पहन लेती है और उसके नीचे एक बर्म्यूडा. जो कि उसके नीस तक था. नॉर्मली वो ऐसे कपड़े अवाय्ड ही करती थी.
अब वो बिना ब्रा के टी–शर्ट पहन कर नीचे आने लगती है आज मोम को सर्प्राइज़ दूँगी जल्दी उठ कर. सीढ़ियों से उतरते टाइम उसके बूब्स ऐसे हिल रहे थे मानो उनके किसी कपड़े मे समेट कर रखना पासिबल ना हो उन बूब्स को. वो नीचे आने पे देखती है कि सफाई तो की गयी है लेकिन मोम दिखाई नही दे रही है. वो किचन मे जाती है लेकिन वहाँ पर भी कोई नही था. वो मोम डॅड के बेड रूम की तरफ बढ़ती है, बेड रूम मे वो घुसने ही वाली थी एक सीन उसके कदम रोक देता है.
उसके चेहरे मे जैसे बॉडी का सारा लाल रंग उतर आया हो. ऐसा क्या देख लिया उसने? नज़ारा की कुच्छ ऐसा था, जिस टाइम वो बेडरूम मे घुसने वाली थी उस टाइम उसने देखा कि बेड पे पंकज बैठा है और उसका विशाल लंड उसकी मा स्मृति के मूँह मे था. पंकज ने सिर्फ़ टी-शर्ट पहनी हुई थी और स्मृति ने ब्रा और पैंटी. दोनो के बाकी कपड़े बेड से नीचे पड़े हुए थे. स्मृति पंकज के लंड पर झुकी हुई थी जबकि पंकज की आँखे सॅटिस्फॅक्षन से बंद थी. शायद ये पहला मौका था जब स्मृति ने उसके लंड को अपने मूँह मे लिया था. दोनो को आराधना ने क्लियर देखा लेकिन उन दोनो मे से किसी की नज़र आराधना पे नही पड़ी और उन्हे आइडिया भी नही था कि सनडे के दिन बच्चे इतनी जल्दी उठ सकते है.
ये पहला ऐसा सीन था जब आराधना ने किसी कपल को ऐसी हालत मे देखा हो वो भी तब जब वो अपनी जवानी की चरम सीमा पे थी. वो चीज़ जिसने उसको अंदर तक हिला दिया था – वो था पंकज का लंड. “क्या लंड ऐसे होते है” आराधना के मन मे शायद यही ख्याल आ रहा था. जिस तरीके से स्मृति का मूँह खुला हुआ था तो क्लियर पता चल रहा था कि उसे अपने मूँह को खोलने बहुत मेहनत करनी पड़ रही है और पंकज के लंड को मूँह मे लेने मे. आराधना साइड मे खड़े होकर तेज तेज साँसे लेने लगती है, उसको ऐसा फील हो रहा था जैसे फीवर हो गया हो. वो रह रह कर यही सोच रही थी कि कहाँ मास्टरबेशन मे दो फिंगर यूज़ नही कर पाई तो स्मृति इसे कैसे अड्जस्ट करती होगी
दरअसल इस सीन से पहले जब स्मृति अपने पति के रूम में गई थी तो तब तक उसकी हालत लॉयन खराब कर चुका था, सेक्स किए हुए उसे भी बहुत दिन हो चुके थे और लॉयन जैसे किसी अनजान ने उसके जज्बातों को भड़का दिया था,
स्मृति जब अपने रूम में पहुंची थी तो उसने पंकज को जगा हुआ पाया, तभी उसने डिसाइड कर लिया कि आज वह पंकज के साथ सेक्स करके ही रहेगी नहीं तो बहुत मुश्किल हो जाएगी, पंकज की हालत सिमरन पहले ही खराब कर चुकी थी और तभी से उसे भी कुछ नसीब नहीं हुआ था, इधर स्मृति कमरे में पहुंचकर बेड़ पर जा चढ़ी और पंकज के ठीक सामने आकर खड़ी हो गई, पंकज की दोनों सीधी टांगे स्मृति के टांगों के बीच में थी और फिर उसे स्मृति ने एक स्माइल दी जिसने पंकज को समझा दिया की स्मृति को आज प्यार की जरूरत है ,पंकज स्मृति का हाथ पकड़ कर खींचता है और अपने सीने से लगा लेता है ,आज स्मृति पंकज कि वह ख्वाहिश भी पूरी कर देना चाहती थी जो उसने कभी नहीं की थी यानि उसके लंड को चूसने की इच्छा ,थोड़ी देर के लिए उनके हाथों का मंथन चला और उसके ठीक बाद स्मृति ने पंकज का लंड निकाला और उसे अपने मुंह में ले लिया ,पंकज को ऐसे लगा जैसे ऊपर वाले ने उसकी कैसे सुन ली ,
इसी दौरान आराधना तैयार होकर नीचे आ गई और उसने पंकज और स्मृति को इस हालत में देख लिया था ,आराधना उन दोनों के बेडरूम के गेट पर साइड में खड़ी थी ,उसने अपनी पीठ दीवार से लगा दी थी और आंखें बंद थी ,उसको जैसे पंकज का लंड देखकर चक्कर सा आ गया हो , जिसे स्मृति खूब मन से चूस रही थी, आराधना की यह अवधारणा बन चुकी थी कि शायद मम्मी इसे रोज ऐसे ही चुस्ती होगी, लेकिन उसे भी पता नहीं था कि आज स्मृति भी किस आग से गुजर रही है जो लॉयन भड़का चुका था, बड़ी हिम्मत करके आराधना ने फिर से अंदर झांकने की कोशिश की ,अंदर का नजारा और भी हॉट था, पंकज अपनी टी-शर्ट उतार रहा था और उसका आधा लंड अभी भी स्मृति के मुंह में था ,आधा लंड मुह में होने के बावजूद भी काफी लंड बाहर ही था ,पंकज ने जैसे ही अपनी टी शर्ट उतारी उसकी बालों से भरी मजबूत छाती नंगी हो गई, एकदम माचो मैन लग रहा था,
स्मृति अपना मुंह ऊपर नीचे करके उसके लंड को पूरा अंदर लेने की कोशिश कर रही थी ,लेकिन वह जा नहीं रहा था ,उसके लंड की नसों को देखकर आराधना को ऐसा लग रहा था जैसे वह अभी फटने वाला है, लेकिन उसे नहीं पता था कि लंड की यह खासियत होती है
आराधना फिर से अपने आप को पीछे कर लेती है ,उसके पांव कांप रहे थे, दिल की धड़कन बहुत बढ़ गई थी, सर चकरा रहा था ,कल रात ही उसने पहली बार हस्तमैथुन किया और आज सुबह ही उसे एक मजबूत लंड दिखाई दे गया ,उसे भी समझ नहीं आ रहा था कि आखिर उसकी जिंदगी में किस्मत ये कैसा खेल रहे खेल खेल रही है,
तभी उसे अंदर से पंकज की आवाज सुनाई देती है वह कान लगाकर गौर से सुनने की कोशिश करती
पंकज – “पूरा अंदर लेना डार्लिंग” पंकज स्मृति से कह रहा था
स्मृति – “यह कोई बच्चों का लोलीपोप नहीं है ,मुझे ही पता है कि मैं इसे कैसे अंदर ले रही हूं, इससे ज्यादा मुझसे नहीं होगा “स्मृति ने अपने मुंह से पंकज के लंड को हटाकर यह बात कही
पंकज – “ मेरी जान मर्दों के लंड तो ऐसे ही होते हैं, कहो तो बाहर से कोई छोटा खिलौना ले कर आता हूं” पंकज स्मृति को चिढ़ाते हुए कहते हैं
स्मृति – “मुझसे यह गंदी लैंग्वेज में बात मत किया करो” और फिर से स्मृति ने अपना मुंह उसके लंड पर दोबारा लगा दिया
बाहर खड़ी आराधना ने जब अपने पिता के मुह से लंड शब्द को सुना तो वह भी शॉक रह गई, और वह रोमांचित भी थी, शायद उसे यह सब अच्छा भी लगा और शायद उसने यह भी सोचा होगा कि पति पत्नी कितने पर्सनल होते हैं ,बाहर तो किसी के रूप का कोई पता नहीं चलता और असलियत में वह कैसी भाषा में बात करते हैं, पता नहीं आज वहां खड़ा रहना आराधना के लिए बहुत मुश्किल हो रहा था, उसके बर्दाश्त से सब चीजें बाहर होते जा रहे थे, उसका कुंवारा और जवान मन पागल होता जा रहा था, उसके चेहरे पर कुछ गंभीर भाव भी थे ,लेकिन यह क्यों थे पता नहीं ,उसे अब रुकना बेहद मुश्किल सा हो रहा था, लेकिन वह अपने कदम भी नहीं हिला पा रही थी ,बड़ी हिम्मत करके वह थोड़ा आगे को बढ़ी , वह दबे पांव निकलने की सोच रही थी कि तभी उसके पांव उसे धोखा दे गए और एक मामूली सी आवाज ने पंकज का चेहरे को बाहर की तरफ घुमा दिया ,जब नियति कोई चीज होती है तो उसे कोई भी नहीं टाल सकता ,जैसे ही थोड़ी आवाज हुई आराधना ने अपने कदम रोक लिए
और रूम की तरफ देखा और उनकी तरफ देखते ही पंकज और आराधना की नजर मिल गई, आराधना इस टाइम साइड पोज़ में पंकज के सामने थी जिससे उसके बूब्स की शेप पंकज को क्लियर दिखाई दे रही थी, आराधना को Idea था कि अब शायद वो घबरा जाएंगे और मां को वहां से हटाएंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ ,पंकज की तरफ से कोई रिएक्शन नहीं था ,उसने अभी दोनों हाथों से स्मृति के चेहरा पकड़ा हुआ था जो उसके लंड को चूसने में मस्त थी ,करीबन 10 सेकंड तक दोनों की नजरें मिली रही और पता नहीं कितने टाइम में दोनों की नज़रों ने एक दूसरे से क्या कहा ,आराधना की सांसे ऐसी ऊपर नीचे हो रही थी कि मानो पता नहीं क्या हो गया हो, कुंवारी लड़की का लंड देखना ठीक ऐसा ही जैसे किसी ने अपने बेडरुम में कोई सांप या बिच्छू देख लिया हो ,आराधना और पंकज की नजरें अभी भी मिली हुई थी, कमाल की बात यह थी कि कोई सिचुएशनल ड्रामा नहीं हो रहा था, जैसे कोई शर्मा कर नजरे चुराई या फिर पंकज उठकर गेट बंद करें,
आराधना फाइनली अपनी नजर निचे करती है और ऊपर की ओर जाने लगती है, उसके चेहरे पर ना जाने क्यों गुस्से के भाव थे, वह धीरे धीरे ऊपर आ जाती है और डायरेक्ट बाथरुम में घुस जाती है, बाथरूम में जाते ही वह अपनी टी-शर्ट उतार कर फेंक देती है और बाथ टब के कोर्नर में बैठ जाती है, उसने अब ऊपर कुछ नहीं पहना हुआ था ,रह रह कर उसको वह सब याद आ रहा था जो उसने नीचे देखा था, बोटम में वह कंफर्टेबल फील नहीं कर रही थी तो उसे भी उतारने का फैसला किया उसने,
उसको ऐसा फील हो रहा था जैसे सिर दर्द हो रहा हो, बॉडी में मीठा मीठा दर्द हो रहा था ,वह ख्यालों में खोई हुई थी, उसको अभी भी यकीन नहीं हो रहा था कि उसने मॉम डैड को ऐसे ओपन में यह सब करते हुए देख लिया था ,जबकि तीन जवान बच्चे घर में ही है, और क्या वह यह सब रात से ही कर रहे हैं, क्या सेक्स ऐसी चीज है कि रात में भी पेट नहीं भरता उनका ,यह सब सवाल उसके दिमाग में घूम रहे थे,
जरुर ज्यादा आग मां को ही लगी हुई है ,तभी तो कितने प्यार से हो पापा का लंड ……..वह सोचते हुए रुक जाती है,
“हां शायद मैं सही हूं डेड तो नॉर्मल थे लेकिन माँ ज्यादा उतावली हो रही थी, रात में उनका पेट नहीं भरा इतने बड़े साइज को भी वह बार-बार लेने की हिम्मत रखती है “ स्मृति की एक इमेज उसके मन में बनती जा रही थी पता नहीं क्या सोचते सोचते उसका एक हाथ अपने पहुंच गया और जैसे ही उसी को टच किया उसे समझ आ गया कि उसका बेहद ज्यादा असर हुआ है
“क्या मेरी उम्र सही है यह सब सोचने की” आराधना के दिमाग में यह सवाल आ रहे थे, कहीं इससे मेरे फ्यूचर पर तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा ,पता नहीं वह क्या क्या सोचने में बिजी थी
सोचते सोचते फिर से उसकी एक उंगली अंदर जा चुकी थी ,वह ऊँगली को अंदर से और अंदर तक पहुंचाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उसके दिमाग में बस वही सीन घूम रहा था जो वह नीचे देख कर आई थी, जो उसे और ज्यादा एक्साइट कर रहा था, बाथ टब पर बैठना से उसे कम्फ़र्टेबल नहीं लग रहा था तो बाथरूम के फ्लोर पर ही बैठ गई, उंगली अंदर और बाहर हो रही थी लेकिन उसे थोड़ा और आरामदायक करने के लिए उसने अपनी टांगे और ज्यादा फैला दी जिससे उसके उंगली और भी स्मूथ होकर अंदर जाने लगी थी ,वह बिना ब्रा और पैंटी की थी यानि बिल्कुल नंगी, ये आराधना स्टाइल नहीं था लेकिन नीचे के सीन ने उसकी आग को और बढ़ा दिया था
दूसरी तरफ स्मृति पंकज का लंड चूसने में लगी हुई थी ,लेकिन पंकज का ध्यान कहीं और ही था, वैसे भी पति को पत्नी का क्रेज एक लिमिटेड टाइम तक ही रहता है, स्मृति को ये आशा थी कि आज वह पंकज के लंड को चुसेगी तो पंकज भी उसे ओरल सेक्स का सुख देगा ,लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ, स्मृति जैसे ही उसके लंड से हटी पंकज बोला कि डार्लिंग अब नहीं रात को प्लान बनाएंगे
स्मृति को तो जैसे सारे अरमान मर गए, उसे लगा कि दुनिया के सारे गम उसी पर टूट पड़े हो, एक झटके में वो बेड से उतरी और कपड़े उठाकर बाथरुम में घुस गयी ,कहा जाता है कि आग और औरत की आग को बुझाया न जाए तो पूरा घर हिला देती है
आराधना धीरे धीरे अपनी स्पीड बढ़ा चुकी थी ,उसका एक हाथ चुत पर था तो दूसरा अपने बूब्स पर पहुंच गया था ,वह बहुत ज्यादा एक्साइटेड हो गई थी और यही था जो वह कर सकती थी
आह्ह्ह ओह्ह्ह्हह के बेहद गर्म साउंड उसके गुलाबी होठों से बाहर आ रहे थे, और कुछ ही मिनटों में वो ठंडी पड़ गई, उसे अब की बार कुछ ज्यादा ही मजा आया ,उसके दिमाग में फिर से बहुत सारे सवाल आ रहे थे कि हर बार उसका मज़ा बढ़ रहा है लेकिन कहीं तो इसका एंड होगा आखिर यह कैसी प्यास है जो जितना बड़ा उतना ही बढ़ती है
कल रात से वह दो बार हस्तमैथुन कर चुकी थी और अब आराम करना चाहती थी इसलिए बेड पर आ कर लेट गई
संडे शाम को पूरी फैमिली शॉपिंग जाने के लिए रेडी थी ,लेकिन सबके माइंडसेट कहीं ना कहीं डाइवर्ट है, खैर नॉर्मल तो सभी देख रहे थे ,पंकज ने अपनी गाड़ी घर के गेट पर लगा दी ,स्मृति सबसे आगे पंकज के साथ बैठ गई ,और पीछे वाली 3 सीटों पर आराधना उसके बाद कुशल और सबसे अंत में प्रीति बैठी हुई थी, आराधना और स्मृति ने सूट पहना हुआ था जबकि प्रीति ने जींस और टी-शर्ट
गाड़ी घर से बाहर निकल गई, सब शांत हैं पंकज नॉर्मल म्यूजिक ऑन कर देता है ,पंकज अपने ड्राइविंग मिरर में पीछे देखता है और उसे आराधना के नेचुरल गुलाबी होंठ दिखाई दे जाते हैं, वह अपनी गर्दन को थोड़ा सा और नीचे करता है तो मिरर में ही उसकी नजरें आराधना से मिल जाती हैं, पंकज उसे एक नॉर्मल सी स्माइल देता है लेकिन वो ऐसे मुंह फेर लेती है जैसे उससे गुस्सा है ,पंकज को यह बड़ा अजीब लगा,
स्मृति पता नहीं किसके ख्यालों में गुम है और कुछ नहीं बोल रही है, कुशल का असली गुस्सा प्रीति पर था जो कि उसे कल से ही आ रहा था लेकिन वह कुछ बोल नहीं रहा था ,पूरी गाड़ी में एक सन्नाटा जिसे प्रीति तोड़ती है
प्रीति –“क्या भाई बड़ा अपसेट सा लग रहा है सब ठीक तो है ना , तू तो तो शॉपिंग के लिए बड़ा एक्साइटेड था” प्रीति ने कुशल को चिढ़ाते हुए कहा
कुशल – ” नहीं यार बस ऐसे ही सोच रहा हू की आज क्या क्या ख़रीदूँ”। कुशल ने बात को टालते हुए कहा
प्रीति -” ठण्डा पानि, हे हे हे हे”। प्रीती ने कुशल के कान के क़रीब आकर स्लो वौइस् में कहा
कुशाल -” तेरी चूत में डालने के लिए?” कुशल ने भी उसी स्टाइल में आराम से प्रीति के कानो में कह दिया जिसे और आस पास वाले नहीं सुन सकते थे क्यूंकि म्यूजिक चल रहा था। प्रीती इस बात को सुनकर समझ सकती थी की कुशल में कितना गुस्सा है अभी भी।
” पापा आज गर्मी भी बहुत है प्लीज आइस क्रीम पार्लर पे तो जरूर लेकर चलना”। कुशल में पंकज से कहा
” हाँ हाँ क्यूँ नहीं, क्यूँ आराधना तुम्हारा क्या सोचना है” पंकज ने मिरर में देखते हुए ही आराधना से पुछा,आराधना ने भी जवाब दिया कि क्यों नही
पंकज – ” क्यों स्मृति, तुम्हारा क्या ख्याल है आइस क्रीम के बारे में?” पंकज स्मृति से पूछ्ता है।
स्मृति – “मेरा मूड नहीं है”, स्मृति ने जवाब दिया
” हाँ तेरा क्यों मूड होग, जब घर बेठे बेठे ही vip आइस क्रीम चूसने को मिल रही है”, आराधना अपने मन में ही सोचती है, पता नहीं क्यूँ वो स्मृति के बारे में ऐसा सोच रही थी
खैर थोड़ी देर की ड्राइव के बाद वो मॉल पहुँच जाते है, सबसे आगे स्मृति और पंकज है, उनके पीछे आराधना और सबसे पीछे प्रीती और कुशल,
पंकज स्मृति का हाथ पकड़ लेता है और ये सब आराधना देख रही थी, उसके चेहरे पे स्माइल जरा भी नहीं थी
पीछे कुशल और प्रीती दोनों शांत थे, लकिन प्रीती उस चुप्पी को तोड़ती है –
प्रीति – ” ओए होए कुशल आज तो हीरो बन जाएग, नए कपडे लेकर। “
कुशल -” मुझे हीरो बनने के लिए नए कपड़ो की जरुरत नहीं है” कुशल ने ऐटिटूड में आकर कहा
प्रीति – ” कितनी ग़लतफ़हमी है तुझे, हा हा हा हा ह, आइना देखा कर डैली”
ये बात बोल कर प्रीती तेज तेज आगे आराधना के पास जाने लगती है, कुशल की निगाहें बस उसके मटकते हिप्स पर थी, जीन्स बेहद लो वेस्ट और टाइट थी और उसने एक शार्ट टीशर्ट पहनी हुई थी जिससे उसकी जीन्स और टीशर्ट के बीच में खाली स्पेस था, कुशल ने गौर से देखा तो खाली स्पेस में उसकी रेड पैंटी दिखाई दे रही थी जिसकी एक मामूली सी स्ट्राइप स्टाइल में जीन्स से बहार थी।
” लड़की को इतना सेक्सी भी नहीं होना चहिये” कुशल अपने मन में सोच रहा था, प्रीती की गाँड की तरफ देखते हुए, तभी प्रीती ने पीछे मुड कर देखा और कुशल को अपने हिप्स को घुरता पाया
” तेरे नसीब में नहीं है”। प्रीती ने पीछे मुड कर कुशल से कहा और है आराधना दीदी के पास भाग कर पहुँच गयी
अब कुशल पीछे अकेला रह गया था, उसकी निगाहें बस प्रीती के हिप्स पर ही जमी हुई थी और जमे भी क्यों न, जो स्लोप उसकी कमर में कुशल देख रहा था ऐसा स्लोप तो आज कल कम ही देखने को मिलता है
प्रीति को भी पूरा अहसास था कि कुशल की निगाहें कहाँ है तो वो और भी मटक मटक के चल रही थी
आगे प्रीती और आराधना चलते चलते बाते करते है –
प्रीति -” दीदी क्या बात है, कहाँ खोयी रहती हो आज कल, कोई इश्क विश्क का तो चक्कर नहीं है”प्रीती ने मजाकिया अंदाज़ में आराधना से कहा
आराधना -” मैं ऐसे चक्करो में नहीं पडती” आराधना ने रिप्लाई किया
प्रीति -” हाँ में तो भूल गयी थी कि हमारी दीदी हिटलर है, हे हे हे हे”
आराधना -” अगर मुझे ये चक्कर अच्छे नहीं लगते तो मैं हिटलर हो गयी?”
प्रीति -” दीदी अगर आप जैसी ही थिंकिंग सभी लड़कियों की हो गयी तो इन सब लड़को का क्या होगा, इनका तो जीवन ही बेकार हो जाएगा, लेकिन चलो छोडो, ये बताओ की आज क्या खरीद रही हो? आज तो कुछ ऐसा ले लो जिससे बिजली गिर जाए चारो तरफ”। प्रीती ने फिर शरारती अन्दाज़ में कहा
आराधना – ” मुझे ऐसे कपडे पसन्द नहीं है जिनसे बिजलियाँ गिरे और मुझे हमेशा पुरे कपडे पहनने ही पसंद है, तेरी तरह नहीं जो है पैंटी दीखाती घूम रही है”,आराधना ने प्रीती की पैंटी की विज़िबल स्ट्राइप की तरफ इशारा करते हुए कहा
प्रीति – ” ओह्ह हो, कहीं ऐसा तो नहीं है की आप जेलस फील कर रहीं है, और वैसे भी दीदी क्या करु , कैसे छुपाऊँ इस बॉडी को, ये साली छिपति ही नही” प्रीती ने बड़े ही रोमांटिक अंदाज़ में कहा और फिर वो हंसने लगी
*****
आराधना – ” जेलस? मैं क्यों जेलस होने लगी तेरे से, सेक्सी अगर चाहूं तो मैं भी दीख सकती हू लेकिन मैं ऐसा चाहती नहीं, “
प्रीति – ” वो तो ठीक है लेकिन दीदी आज कल ब्रांड्स पुरे कपडे बनाने में भी डरते है, बिकते ही नहीं, जो बिज़नेस टिका हुआ है वो आप जैसी क्लास कस्टमर्स के दम पर ही टीका हुआ है,”, प्रीती ने फिर से एक तीर छोड़ दिया,
इतने मैं आगे जाकर पंकज और स्मृति रूक गए और बच्चो का इंतज़ार करने लगे, धीरे धीरे आराधना, प्रीती और कुशल तीनो वहां पहुँच गए,
” आज हम बाते बनाने नहीं शॉपिंग करने आये है” पंकज ने मजाक में सब बच्चो से कहा, और फिर तीनो एक बहुत बड़े ब्रांडेड शो रूम में घुस जाते है, पंकज और स्मृति अभी भी साथ साथ थे और आराधना उनके पीछे चल रही थी,
प्रीति लेडीज वेस्टर्न डिपार्टमैंट में घुस गयी थी क्यूंकि वो वेस्टर्न क्लोथ्स की शौकीन थी, कुशल भी प्रीती के पीछे चलने लगता है,
प्रीति -” तू कहाँ मेरे पीछे पीछे आ रहा है?”,
कुशाल -” सोचा तेरी हेल्प कर दूँ शॉपिंग मे”,
प्रीति – ” मैं कोई दूध पीती बच्ची नहीं हू और न ही पहली बार शॉपिंग कर रही हूँ, तू जा अपने डिपार्टमैंट में”, और प्रीती कुशल के चेस्ट पर हाथ लगा कर पीछे धक्का देने लगती है,
कशाल -” मेरा डिपार्टमैंट? क्या तू नहीं है मेरा डिपार्टमैंट”, ये बात सुनकर प्रीती शर्मा जाती है,
प्रीति -” कुशल हर टाइम मज़ाक़ नहीं, प्लीज तू जा अपने कपडे ख़रीद, नहीं तो अगर मदद करनी ही है तो जा आराधना दीदी की कर दे”
कशाल -” आराधना दीदी को एक बुरका गिफ्ट कर देता हूँ, उनकी शॉपिंग खत्म हो जाएगी, हा हा हा हा”, और कुशल मेन डिपार्टमैंट की तरफ जाने लगता है,
****
आराधना अभी भी पंकज और स्मृति के पीछे थी, लेकिन पंकज और स्मृति को अब अहसास नहीं था और वो इस ख्याल में थे कि तीनो बच्चे जा चुके है, चलते चलते पंकज अपना एक हाथ स्मृति की कमर पे रख देता है लकिन स्मृति एक झटके में हटा देती है, आराधना ये सब देख रही थी, फिर पंकज और स्मृति दबी आवाज में बात करने लगते है, लेकिन आराधना के कान वहीपर थे –
पंकज -” क्या बात है ,मेरी जान क्यों गुस्सा है?”, पंकज ने चलते चलते कहा
स्मृति – ” मैं क्यों होने लगी गुस्सा”,
” नख़रे तो देख, पूरी रात ऐसी तैसी करने के बाद भी नखरो की कमी नहीं है”, आराधना अपने मन में ही बड़बड़ा रही थी,
पंकज – ” डार्लिंग, क्या अभी तक मॉर्निंग वाली बात पे गुस्सा हो? चलो आज रात फिर मूड बना लेंगे, टेंशन क्यों लेती हो”, पंकज ने स्मृति को रिलैक्स करते हुए कहा
स्मृति – ” पता नहीं क्यों मेरे लाइफ में प्यार की कमी है”, स्मृति ने सीरियस होते हुए कहा
आराधना का मुँह खुला का खुला रह गया ये बात सुनकर, ” इतना बड़ा डण्डा लेने के बाद भी प्यार की कमी है लाइफ में, हे भगवान आखिर मेरी माँ की डिमांड क्या है, पता नहीं डैडी इतने नखरे क्यों झेल रहे है”, आराधना अपने मन में सोचती है,
थोड़ा सा आगे चलने के बाद एक मॉडल गर्ल स्टेचू आती है जिसपे एक नाईट गाउन लगा हुआ था जो बेहद सेक्सी था, पिंक कलर में शिफॉन मटेरियल और वो भी बिलकुल ट्रांसपरेंट, नाईट गाउन का टॉप पोरशन ब्रा स्टाइल में ही था और नीचे एक एडिशनल पैंटी दी हुई थी, नाईट गाउन की जो लेंथ थी वो सिर्फ पैंटी तक ही थी, उस नाईट गाउन को देख कर पंकज रूक जाता है
पंकज -” स्मृति क्यों न आज तुम इसे लो” पंकज स्मृति को वो नाईट गाउन दीखाता है,
स्मृति – ” अगर आपको पहनना है तो ले लो”, स्मृति ने ऐटिटूड दिखते हुए कहा
पंकज – ” डार्लिंग, मेरा दिल है कि मैं तुम्हे इस ड्रेस में देखु तो बुराई क्या है”,
समृति – ” क्या मेरे दिल की सारी बाते सुनी जाती है जो मैं सुनु”,
पंकज -” गुस्सा क्यों होती हो, जो लेना है ले लो”, आराधना ये सब बाते सुन रही थी,
इस तरफ प्रीति, एक बेहद सेक्सी और शार्ट ड्रेस को देख रही थी, ड्रेस का कलर रेड था, ड्रेस की लेंथ प्रीती की जांघ तक होगी, वो उस ड्रेस को लेकर एक सेल्स गर्ल के पास जाती है,
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प्रीती -” एक्सक्यूस मी, क्या आप मुझे बता सकती है कि इस ड्रेस के साथ बॉटम कौन सा चलेगा”, प्रीती ने सेल्स गर्ल से पुछा
सेल्स गर्ल – ” नहीं इस ड्रेस के लिए आपको किसी बॉटम की जरुरत नहीं है, ये ड्रेस आपकी थाइज तक रहेगा,”
प्रीति -” कहीं ये ज्यादा छोटी तो नहीं है?”
सेल्स गर्ल -” आपके जैसी सेक्सी गर्ल के लिए ही तो ये बनी है, एक बार ट्राय तो करिये और अपने बॉय फ्रेंड को दिखाइये, कसम से कहती हूँ इलेक्ट्रिक शॉक लग जाएगा”, सेल्स गर्ल ने एक आँख दबाते हुए कहा
प्रीति – ” बॉय फ्रेंड? कौन बॉय फ्रेंड?”,
सेल्स गर्ल -” वो ही जिसे आप इतने प्यार से इस डिपार्टमेंट से बाहर भेज रहीं थी, वाकई में शायद दीवाना है आपका”, प्रीती समझ गयी थी कि वो कुशल की बात कर रही है और उसकी आँखे एक आईडिया के साथ चमक जाती है,
प्रीति -” क्या मैं एक बार ट्राय करके ये ड्रेस अपने बॉय फ्रेंड को दिखा सकती हूं?” प्रीती ने बहुत ही भोला बनते हुए कहा
सेल्स गर्ल-” ये भी कोई कहने की बात है, कहो तो आपके केबिन में ही भेज दूँ, वैसे भी अभी क्राउड इतना नहीं है?” सेल्स गर्ल में फिर से नॉटी स्टाइल में बोली
प्रीति – ” प्लीज आप मेरा ये काम कर दीजिये, में ट्राइ कर रही हू और आप उसे अंदर मेरे केबिन में भेज दीजियेगा”,
सेल्स गर्ल -” ऑफ कोर्स ,नो इस्सु, हमेशा लवर्स की हेल्प करती हू मैं, आप जाइये और ट्राय करिए”,
प्रीति तुरंत उस ड्रेस को लेकर ट्रायल रूम में जाती है, एक झटके में टी-शर्ट उतार देती है, ट्रायल रूम मिर्रर्स में अपने बम टाइप बूब्स को ब्रा में देखति है, उसे खुद भी समझ आा रहा था कि वो कितनी सेक्सी है, दोनों हाथ पीछे ले जाकर ब्रा भी उतार देती है और दोनों बूब्स आाजद, उसके बाद वो है जीन्स को उतारती है, जीन्स उतरने में ही उसकी क्या किसी भी सेक्सी लड़की की सबसे ज्यादा मेहनत लगती है, जैसे तैसे वो भी उतर गयी और उसके बाद पैंटी भी, उसने बिना टाइम वेस्ट किये उस ड्रेस को अपने ऊपर ड़ाला और पीछे से ज़िप बंद करनी चाहि लेकिन फिर पता नहीं क्या सोच कर छोड़ दीं, अपने बाल उसने खोल लिए और फ्रंट से ड्रेस का व्यू थोड़ा सा खोल दिया जिससे बूब्स और थोड़े विज़िबल हो जाए, अभी वो और सेटिंग कर ही रही थी कि तभी ट्रायल रूम का गेट नॉक हुआ,
प्रीति -” हु इस दिस?

