आराधना -” लेकिन पापा मे तो हमेशा पूरे कपड़े पहन के रहती हू फिर कैसे आपने मेरा…” आराधना ने नज़रे झुका कर शरमाते हुए पुछा. पंकज रूम के चारी तरफ नज़रे फेलाता है जैसे वो कुच्छ ढूंड रहा हो. तभी उसे एक छोटा खरबूजा दिखाई देता है वॉर्डरोब के साइड मे, स्मृति ने आराधना को खाने के लिए दिया था. पंकज उसे उठाता है और उसे बेड पर रखता है, और एक बारीक सी चादर उठा कर उसके उपर डाल देता है.
पंकज-” देखो इस खरबूजे को क्या ये ढक गया”. आराधना इस बात का मतलब समझते ही शरम से लाल हो जाती है और धात कह कर बाथरूम मे भाग जाती है.
पंकज -” आराधना इतनी जल्दी क्या है, फ्रेश बाद मे हो जाना”.
आराधना-” आज आप बहुत नॉटी मूड मे है, हम बाद मे बात करेंगे”. आराधना ने बाथरूम के अंदर से ही कहा.
पंकज -” अरे, यू आर सो स्वीट गर्ल. लगता है मेरे खरबूजे वाले मज़ाक से तुम बुरा मान गयी हो”.
आराधना -” बुरा नही बल्कि आपने मुझे अच्छे तरीके से सच्चाई बता दी है, मुझे ही ग़लत लगता था कि पूरे कपड़े पहन ने से ……” आराधना बीच मे ही चुप हो जाती है
पंकज -” पूरे कपड़े पहन से क्या”
आराधना -” कुच्छ नही, आप जाओ यहाँ से”. आराधना ने शरमाते हुए कहा
पंकज -“डोंट अफ्रेड ऑफ मी माइ डियर. आइ आम युवर डॅड आंड युवर बेस्ट फ्रेंड. बताओ मुझे कि पूरे कपड़े पहन से क्या?”
आराधना -” आपको पता तो है कि मे क्या कहना चाह रही हू”.
पंकज -” मुझे नही पता सच मे”
आराधना -” मुझे लगता था कि पूरे कपड़े पहनने से मेरी बॉडी का कोई आइडिया नही लगा सकता लेकिन मे ग़लत थी. आपको तो मेरे बारे मे सब कुच्छ और सही सही पता है”.
पंकज -” हा हा हा हा. चलो देर आए दुरुस्त आए. अब तो तुम्हे यंग लड़कियो की तरह कपड़े पहनने चाहिए आँटी की तरह नही”.
आराधना -” तो यानी जैसे कपड़े आपने लाकर दिए वैसे पहन ने चाहिए मुझे”. आराधना ने मज़ा लेते हुए कहा
पंकज -” एग्ज़ॅक्ट्ली, इसमे बुराई क्या है. सिमरन को देखो वो भी तो यंग लड़की है”.
आराधना -” ताकि अबकी बार कहीं बाहर बटन टूट जाए”.
पंकज -” स्वीटी ग़लती मेरे गिफ्ट किए हुए ब्लाउस की नही बल्कि ….” पंकज बीच मे ही चुप हो जाता है
आराधना -” बल्कि क्या”. वो बहुत धीमी आवाज़ मे बाथरूम के अंदर से ही पूछती है
पंकज -” ग़लती ब्लाउस की नही बल्कि तुम्हारे फुल जवान बूब्स की है, जो उसमे समा ही नही पाए पूरी कोशिश के बावजूद”. ये बात बोलते ही दोनो तरफ पिन ड्रॉप साइलेन्स था. काफ़ी देर तक कोई नही बोला. आराधना का शरम के मारे बुरा हाल था, वो बोले तो क्या बोले. पंकज ही उस साइलेन्स को तोड़ता है.
पंकज -” अरे बेटा मे तो भूल ही गया, मुझे सिमरन का मोबाइल नंबर चाहिए था”.
आराधना -” क्यूँ आपको उससे क्या काम है”.
पंकज -” नही वो ऐसे ही, तुम्हारी फ्रेंड है ना कभी कोई ज़रूरत हो तो बात कर लूँगा”. आराधना उसे नंबर बता देती है.
पंकज -” ओके, अब मे नीचे जा रहा हू”
आराधना -“ओक”
पंकज -” चला जाउ”
आराधना -” हाँ जाइए ना”.
पंकज -” पक्का चला जाउ”. तभी फिर से बाथरूम का गेट खुलता है और टवल लपेटे आराधना फिर से बाहर निकलती है. पंकज का हाथ पकड़ कर वो उसे अपने बेड रूम के बाहर ले जाती है, और उसे बाहर छोड़ते ही गेट बंद कर लेती है. गेट बंद करने के टाइम उसके चेहरे पर एक मुस्कान थी.
स्मृति बाजार से सामान लेकर घर लौट आती है और आते ही किचन मे पहुँच जाती है. उसने पिंक सूट आंड सलवार पहना हुआ था, बाहर की गर्मी से उसकी बॉडी पसीने मे भीग गयी थी जिससे उसकी पिंक ब्रा विज़िबल थी. घर मे एंट्री होते ही पंकज और उसकी निगाहे मिल जाती है लेकिन पंकज उसे इग्नोर कर देता है क्यूंकी उसका काम सिमरन कर चुकी थी, और वैसे भी उसका ध्यान आराधना के टवल खोलने वाले सीन पर था स्मृति के किचन मे चली जाती है.
थोड़ी देर बाद कुशल जाग जाता है और नीचे आकर सोफे पे अपने डॅड के साथ बैठ जाता है.
कुशल -” मोम चाइ मिलेगी”. वो वहॉं से चिल्लाता हुआ बोलता है.
स्मृति -” नही मिलेगी”. उसके इस जवाब से पंकज को हँसी आ जाती और इससे कुशल को गुस्सा आ जाता है और वो किचन की ओर चल देता है. किचन मे घुसते ही वो पॉट उठाता है और गॅस पे रख देता है.
कुशल -” मे खुद बना लूँगा चाइ”. वो गुस्से मे अपनी मम्मी से बोलता है. और लाइटर ढूँडने लगता है, लाइटर मिलने पर वो गॅस को जलाने की कोशिश करता है लेकिन गॅस नही जलती. ये देख कर स्मृति को हँसी आ रही है. कुशल और ज़्यादा जी जान से लाइटर को क्लिक करने लगता है. अब कुशल का चेहरा स्मृति की ओर था और तभी गॅस जल जाती है. “आआओउुुुउउ” कुशल चिल्ला कर पड़ता है क्यूंकी उसकी एक फिंगर गॅस मे जल जाती है. ये देखार स्मृति भाग कर कुशल की तरफ जाती है और उसका हाथ पकड़ कर देखती है, वो खींच कर उसके हाथ वॉश बेसिन मे पानी नीचे ले आती है.
स्मृति एक मा है जिसे अपने बेटे के हाथ जलने पर दूख हो रहा है. वो वॉश बेसिन मे उसकी फिंगर्स पे पानी डालते डालते उसे डाँट लगाती है.
स्मृति -” कभी तेरे पापा ने भी चाइ बनाई है जो तू बना लेगा. इतने स्किल्ड होते तुम लोग तो बात ही क्या थी”. और वॉश बेसिन से हाथ हटाने के बाद कुशल अपना हाथ खुद देखता है, उसकी फिंगर्स पे बर्निंग साइन्स थे.
कुशल -” ओह, फक्क”. ऑटोमॅटिकली इसके मूँह से अपनी जले हुए निशान देख कर निकल जाता है. स्मृति ये बात सुन कर शॉक हो जाती है.
स्मृति -” क्या कहा तूने अभी?”. स्मृति ने उसे गुस्से मे आँखे दिखाते हुए पुछा
कुशल -” ओह..ह लक्क, माइ बॅड लक आक्च्युयली”. कुशल ने बात पलटने की कोशिश की.
स्मृति -” मुझे पागल समझता है तू, तो अब स्कूल मे ये गंदी चीज़े सीखने लगा है” स्मृति ने उसके कान पकड़ते हुए कहा
कुशल-” मोम वो खुद ब खुद निकल गया मूँह से. पता नही कैसे”. कुशल ने भोला बनते हुए कहा
स्मृति -” ज़्यादा इंग्लीश सिख गया है तू लगता है”. स्मृति अबकी बार थोड़ा लाइट हो गयी थी और थोड़ा सा मुस्कुराते हुए कहा
कुशल -” ठीक है मोम, मे हिन्दी ही सीख लेता हू”. कुशल ने नॉटी स्टाइल मे कहा. स्मृति नॉर्मल हो चुकी थी लेकिन जब उसे समझ आया कि कुशल क्या कहना चाहता है तो वो फिर से कुशल के पीछे भागी और कुशल भाग कर अपने डॅडी के पास आ जाता है.
स्मृति -” आपको आइडिया भी है कि ये कितना बिगड़ गया है”. स्मृति ने पंकज की तरफ देखते हुए कहा
पंकज -“कितना?”
स्मृति -” गंदी गंदी बाते निकालता है मूँह से”
पंकज -” क्या कह दिया मेरे भोले बेटे ने”. पंकज कुशल के सर मे हाथ घुमाता हुआ बोलता है
स्मृति -” हा हा हा हा, भोला और ये. आपका बेटा है ना”.
पंकज -” किसी और का भी हो तो लेकिन है तो भोला है ही बेचारा”. पंकज ने नॉटी स्टाइल मे कहा. स्मृति गुस्से मे पाँव पटकती हुई किचन मे भाग जाती है. थोड़ी देर बाद स्मृति चाइ लाती है दोनो के लिए, उसे पीकर कुशल उपर चला जाता है. किसी बहाने से पंकज घर से बाहर निकलता है और सिमरन को फोन मिलाता है. सिमरन कॉल पिक करती है.
सिमरन – हेलो
पंकज – हाई सिमरन, हाउ आर यू?
सिमरन – आइ आम ओके, हू ईज़ दिस?
पंकज – क्या मेरी आवाज़ भी भूल गयी हो. आइ आम पंकज, आराधना’स फादर.
सिमरन – ओककक अंकल. सॉरी आइ आम इन वॉशरूम, तो आवाज़ क्लियर नही थी.
पंकज – क्या कर रही हो वॉशरूम मे.
सिमरन – टीवी देख रही हू. सिमरन ने मजाकिया अंदाज़ मे कहा.
पंकज – यू आर आ नॉटी गर्ल.
सिमरन – आप क्वेस्चन ही ऐसे पुच्छ रहे है. वॉशरूम मे गर्ल्स क्या करती है, नही पता तो आराधना से पुछ लो वो बता देगी. बाइ दा वे, आइ वाज़ पेयिंग आंड नाउ आइ आम गोयिंग आउट.
पंकज – ओके ओके. और सूनाओ क्या चल रहा है.
सिमरन – कुच्छ खास नही आप बताइए कि क्या चल रहा है.
पंकज – बस याद आ रही थी तुम्हारी. आज तुमने जो ब्रेकफास्ट मुझे कराया वो मे कैसे भूल सकता हू.
सिमरन – हा हा हा हा. वैसे आदमी मस्त है आप.
पंकज – लड़की तुम भी कमाल हो. चलो कभी प्लान बनाओ ना लंच या डिन्नर का.
सिमरन – अंकल ब्रेकफास्ट का ही जमाना है आज कल. लंच ऑर डिन्नर नो गारंटी.
पंकज – ऐसा ना बोलो यार. ब्रेकफास्ट अधूरा है अगर लंच या डिन्नर ना हो तो.
सिमरन – हा हा हा हा. अंकल मुझे बस ब्रेकफास्ट करना ही आता है. इसके अलावा मुझे कुच्छ नही आता.
पंकज – कौन मा के पेट से सीख कर आता है. जहाँ एक बार लंच किया तुमने वहाँ एक्सपर्ट बन जाओगी.
सिमरन – वेरी फन्नी. हे हे हे हे
पंकज – वैसे जान ना चाहता हू कि क्या आज तक तुमने लंच किया है कि नही. या आज तक बिना लंच के ही गुज़ारा चल रहा है.
सिमरन – अंकल मेरी ओपन नेस से हो सकता है कि सबको लगे कि मे लंच कर चुकी हू लेकिन सच मे आज तक बस ब्रेकफास्ट से ही गुज़ारा चल रहा है. ब्रेकफास्ट भी खुद ही करना पड़ता है.
सिमरन का इशारा मास्टरबेशन की तरफ था.
पंकज – सो सॅड. क्या कोई ऐसा मिला नही जो तुम्हे लंच करा सके.
सिमरन – अंकल मिला तो है लेकिन कभी लंच करने के लिए सूटेबल प्लेस नही मिला. और वैसे भी मेरी फ्रेंड आराधना बिल्कुल कॉपरेट नही करती.
पंकज – हा हा हा हा. अपनी मा पे गयी एक दम, एक दम स्ट्रिक्ट.
सिमरन – तो स्मृति आंटी को तो आप सही से ब्रेकफास्ट और डिन्नर कराते होंगे. हे हे हे हे
पंकज – याद नही लास्ट टाइम कब कराया था. आज कल पता नही स्मृति को ब्रेकफास्ट से क्या परहेज हो गया है.
सिमरन – कहीं लंच कहीं और तो नही चल रहा है आंटी का. हा हा हा हा
पंकज – हर किसी की अपनी लाइफ है. लंच करना तो मे भी कहीं और चाहता हू लेकिन बात नही बन पा रही.
सिमरन – सब्र का फल मीठा होता है अंकल. तो थोड़ा सब्र रखिए.
पंकज – तो ठीक है बेटा. हम इंतेज़ार करेंगे.
सिमरन – ओके अंकल. अब मे इजाज़त चाहती हू. बाइ, टेक केर आंड सेक्सी ड्रीम्स. ओह्ह्ह आइ मीन स्वीट ड्रीम्स.
पंकज – ओके स्वीटी, गुड नाइट आंड स्वीट ड्रीम्स.
कॉल डिसकनेक्ट हो जाता है. और पंकज दोबारा घर मे आ जाता है. किचन मे जाकर रेफ्रिजरेटर से एक बियर निकालता है और हॉल मे आकर पीने लगता है. उसके माइंड से सिमरन निकल ही नही थी, रह रह कर उसके हाथ अपने लंड पर पहुँच रहे थे.
आज सॅटर्डे नाइट है. कुशल अपने रूम मे है और बोर हो रहा है, वो नीचे आता है और अपने डॅड को बियर पीते हुए देखता है. उसने आज तक कभी स्मोकिंग या ड्रिंकिंग नही की है लेकिन उस के दिल मे हमेशा क्वेस्चन्स रहते थे कि लोग अक्सर ये सब क्यू करते है. आज उसके दिल मे ये क्वेस्चन के जवाब जान ने की इच्छा थी. वो किचन मे जाता है जहाँ स्मृति खाना बनाने की तैयारी कर रही थी.
कुशल -” मोम आज बहुत गर्मी है”. कुशल बात स्टार्ट करता है
स्मृति -” हाँ है तो, वो माथे से पसीने हटाते हुए बोलती है”.
कुशल -” मोम मेरा फ्रेंड मोहित बोलता है गर्मी मे बियर बहुत हेल्पफुल रहती है”. ये बात सुन कर स्मृति काम रोक कर उसकी तरफ देखती है.
स्मृति -” तो मोहित ही है जो तुझे वो सब बोलना सिखाता है”.
कुशल -” वो बोलना? क्या बोलना मोम?”
स्मृति – ” ज़्यादा स्मार्ट मत बन, वो जो तू अभी फक बोल रहा था”. स्मृति ने उसे डाँट लगाते हुए कहा
कुशल -” तो बोला तो आपने भी मोम अभी”.
स्मृति -” चल ज़्यादा बाते मत बना और भाग यहाँ से”.
कुशल -” मोम एक बियर दो ना फ्रीज से”. स्मृति उसकी तरफ देखती है, वो पसीने मे नहाई हुई थी, उसके चेहरे पर भी पसीने की बूंदे थी. दुपट्टा उसने कमर से बाँधा हुआ था, काम करने के लिए.
स्मृति -” तुझे नही मिलेगी”.
कुशल -” आप नही दोगि तो कौन देगा मुझे मोम”. स्मृति इस बात का डबल मीनिंग सोच कर हँसने लगती है.
कुशल -” हंस क्यूँ रही है आप मोम”
स्मृति -” मेने कहा ना कि तुझे बियर नही मिलेगी”.
कुशल -” मोम आप भी तो पीती हो, फिर मुझे क्यूँ मना कर रही हो”.
स्मृति – “आइ आम ऐन अडल्ट. मे पी सकती हू”.
कुशल -” तो क्या मे अडल्ट नही?”.
स्मृति-” नो”
कुशल -” तो आप कहाँ से अडल्ट है”.
स्मृति – ” मे एक मॅरीड लेडी हू, मेरे तीन बच्चे है. क्या इतना काफ़ी नही है अडल्ट होने के लिए”.
कुशल-” मोम क्यू पागल बना रही हो. आप मोम है तो इससे अडल्ट होने का क्या लिंक है. आपकी शादी हो गयी तो आप मोम है, अगर मेरी हो गयी होती तो मेरे भी बच्चे हो गये होते”. इस बात को सुन कर स्मृति की फिर से हँसी छूट जाती है.
स्मृति ” अच्छा तो तू इतना बड़ा हो गया है कि तुझे बच्चे कैसे होते है ये पता चल गया है”.
कुशल -” मोम वाकई मे मेरा बड़ा हो गया है”.
स्मृति – ” क्या? क्या कहाँ तूने अभी”. स्मृति काम छोड़ कर उससे पूछती है.
कुशल -” मोम मेने कहा क़ी वाकई मे मे बड़ा हो गया हू”. कुशल ने बात पलट दी.
स्मृति -” मुझे पागल समझता है”. स्मृति उसके कान पकड़ते हुए बोलती है.
कुशल -” मोम आपने क्या सुना वैसे”.
स्मृति -” ज़्यादा स्मार्ट मत बन”.
कुशल -” तो दे दो ना अब”. कुशल उसकी आँखो मे देखते हुए बोलता है. उसकी इस बात से स्मृति घबरा जाती है, और उसका कान छोड़ कर दूसरी तरफ घूम कर पूछती है
स्मृति -” क्या?”. ये बात वो बहुत लो वाय्स मे पूछती है
कुशल -“बच्चा. ओह सॉरी आइ मीन बियर. आपने भी दिमाग़ को हिला दिया है”.
स्मृति -” बस एक मिलेगी. बोल अगर ओके है तो”.
कुशल -” मोम यू अरे ग्रेट”. और भाग कर वो अपनी मोम को हग कर लेता है और उनके गाल पर एक किस कर देता है.
स्मृति – ” और कुच्छ खा भी लियो इसके साथ, नही तो नुकसान करेगी.” स्मृति उसे फ्रीज से निकाल कर एक बियर दे देती है और वो उसे लेकर उपर जाने लगता है.
स्टेर्स पे ही उसकी मुलाकात प्रीति से हो जाती है जो कि नीचे जा रही थी. उसकी हाथ मे बियर की बॉटल देख कर प्रीति उससे पूछती है
प्रीति -” ते क्या पीने की प्लॅनिंग कर रहा है.”
कुशल -” तेरा दूध, आइ मीन तेरा खून. तू भी पीएगी”. ये बात बोलते बोलते कुशल लगभग सारी सीढ़ियाँ क्रॉस कर चुका है और प्रीति नीचे वाली सीढ़ियों पे रह जाती है. प्रीति उसकी ये बात सुनकर उसके पीछे भागती है. ” मेरा खून पिएगा”. ये कहते हुए वो उसके पीछे भागती है. कुशल भाग कर अपने रूम मे घुस जाता है और डोर के साइड मे खड़ा हो जाता है. प्रीति जैसे ही गुस्से मे भाग कर आती है, कुशल उसका हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींच लेता है. ” धड़क्क्क” की आवाज़ के साथ दोनो के सीने आपस मे टकरा जाते है और कुशल प्रीति को कस कर पकड़ लेता है. कुशल एक मजबूत शरीर वाला लड़का था और प्रीति एक चुलबुली लड़की
इस टाइम दोनो के सीने आपस मे मिले हुए थे और कुशल ने प्रीति को कमर पर से कर पकड़ रखा था. सीना दबने से प्रीति के बूब्स और उपर की तरफ आ गये थे. वैसे भी प्रीति भाग कर आई थी जिस वजह से उसकी साँसे बहुत तेज चल रही थी प्रीति अपने आप को छुड़ाने की कोशिश कर रही थी.
प्रीति – “छोड़ मुझे, मेरा खून पिएगा”. प्रीति उसकी आँखो मे देखती हुई और उसकी चेस्ट मे आराम से मुक्का मारते हुए बोलती है
कुशल -” पिला दे, कम नही होगा कसम से”. प्रीति उसकी बात सुनकर शरम से लाल हो जाती है और अपना विरोध कम करते हुए साइड मे देखती है. अब भी वो दोनो उसी पोज़िशन मे है
प्रीति -” क्या पीने की बात कर रहा है”. प्रीति लो वाय्स मे साइड मे देखे हुए बोलती है
कुशल -” खून के सिवाय ऐसा तो कुच्छ दिखाई नही देता जो पीने के लायक है”. कुशल ये बात उसके बूब्स की तरफ देखता हुआ बोलता है
प्रीति ( शरमाते हुए)-” क्यू क्या कमी है बाकी चीज़ो मे”. प्रीति उसकी आँखो मे देखती हुई बोलती है. तभी प्रीति उससे एक झटके के साथ अलग हो जाती है. उसकी साँसे बहुत तेज चल रही थी, वो थोड़ी घबराई हुई भी थी. उसके बूब्स उसकी सांसो के साथ उपर नीचे हो रहे थे.
प्रीति ( दूसरी तरफ मूँह फिराते हुए) – ” ये क्या कर रहा है”. उसके चेहरे पे एक मुस्कान थी. दर असल प्रीति के इतने करीब आ जाने से कुशल का लंड विकराल रूप मे आने लगा था और फाइनली उसके बूब्स को देख कर उसका लंड प्रीति के पेट पर वाइब्रेशन करने लगा था.
कुशल -” क्या हुआ प्रीति?” कुशल ने भोला बनते हुए कहा
प्रीति -“तो तू मुझे इस नज़र से देखता है”. प्रीति ने दूसरी तरफ मूँह रखते हुए ही कहा.
कुशल -” क्या बात कर रही है, किस नज़र से देखता हू मे तुझे”.
प्रीति -” ज़्यादा बन मत, ये मेरे पेट पे क्या चुभ रहा था? पता नही है तुझे?”.
कुशल -” चुभ तो कुच्छ मेरे सीने भी रहा था. लेकिन क्या मेने कहा कि तू मुझे किस नज़र से देखती है. लेकिन वैसे क्या चुभ गया तेरे पेट मे.”
प्रीति घूमती है ये देखने के लिए की आख़िर उसके पेट मे क्या चुभ रहा था. जैसे ही वो घूमती है, एक और झटका. कुशल का लंड उसके शॉर्ट मे टेंट की तरह तना हुआ था, ऐसा लग रहा था जैसे कि उसने कोई नकली रोड लगा ली हो शॉर्ट मे. ” ओह माइ गॉड”. प्रीति के मूँह से खुद ब खुद निकल जाता है.
प्रीति की तो जैसे साँसे ही रुक जाती है. वो दूसरी तरफ मूँह करके तेज तेज साँसे लेने लगती है. कुशल दूर खड़ा हुआ ही उससे पूछता है.
कुशल -” क्या हुआ प्रीति, क्यूँ इतना डर रही है”.
प्रीति ( निगाहे नीचे किए हुए) – ” तुझे क्या हुआ है, नॉर्मल तो है तू”.
कुशल -” ये कैसी बहकी बहकी बाते कर रही है. ऐसा क्या देख लिया तूने”.
प्रीति -” इसे क्या हुआ है?”. वो दूसरी तरफ देखते हुए उसके लंड की ओर इशारा करती है.
कुशल -” ओह ये, ये तो शायद मुझे पेशाब आ रहा है”. कुशल ने हंसते हुए कहा.
प्रीति -” तो जा कर के आना, खड़ा क्यो है”. प्रीति का चेहरा बिल्कुल लाल हो चुका था, थोड़ा थोड़ा पसीना भी आ रहा था.
कुशल -” ओह मेरी प्यारी बहना, इससे डर गयी. ऐसे डरेगी तो हम तेरी शादी कैसे करेंगे”. ये कहते हुए कुशल उसके ठीक पीछे आकर खड़ा हो जाता है और पीछे से प्रीति को हग कर लेता है. प्रीति एक दम सकपका जाती है लेकिन ऐसे शो करती है जैसे वो नॉर्मल है. कुशल का लंड अब ठीक उसकी गान्ड के उपर था.
प्रीति -” मुझे नही करनी शादी वादी. ये को बेकार के काम है”. उसकी गान्ड पर धीरे धीरे कुशल के लंड का दवाब बढ़ता जा रहा था.
कुशल -” तो ज़िंदगी भर कली ही बनी रहेगी, फूल नही बन ना है तुझे?”. कुशल अपने फेस को प्रीति के कान के पास ले जाकर ये बात बोलता है. प्रीति की आँखे बंद हो चुकी थी और दिल की धड़कने बढ़ चुकी थी.
प्रीति -” वो… वो भाई…. मुझे कुच्छ चुभ रहा है”.
कुशल -” तुझे कुच्छ ग़लतफहमी है, कुच्छ नही ऐसा चुभने वाला”. ये बात सुनकर प्रीति धीरे धीरे हाथ पीछे ले जाती है. और उसके होश उड़ जाते है जैसे ही उसका हाथ कुशल के लंड पर पहुँचता है. आगे से टच करने से उसे पूरा अहसास नही होता तो वो अपने हाथ को पीछे तक ले जाती है.
कुशल -” कैसा लगा?”. कुशल का ये क्वेस्चन प्रीति को अंदर तक झकझोड़ देता है.
प्रीति -” क्या?”
कुशल -” वही, जहाँ तेरा हाथ है”. और प्रीति उसकी ये बात सुनकर अपना हाथ हटा लेती है.
प्रीति -” मेरा हाथ… मेरा हाथ तो कहीं भी नही है”. प्रीति ने बनते हुए कहा. लंड के टच से वो अंदर तक पिघलती जा रही थी. एक कुँवारी और जवान लड़की के लिए इतना काफ़ी होता है. वो पूरी कोशिश कर रही थी कि कुशल को ये दिखाए कि वो नॉर्मल है लेकिन उसकी हालत खराब होती जा रही थी. कुशल अपने एक हाथ से प्रीति को हग करके रखता है और दूसरे हाथ से अपने शॉर्ट और अंडरवेर को नीचे कर देता है. अब उसका लंड एक दम नंगा था लेकिन प्रीति उसे नही देख सकती थी. वो अब नंगा ही प्रीति की गान्ड पर चुभ रहा था. कुशल अब अपने एक हाथ से प्रीति का एक हाथ पकड़ता है और फिर उसे ले जाकर अपने लंड पर रख देता है. प्रीति का हाथ जैसे ही नंगे लंड को टच करता है, वो पागल जैसी हो जाती है और एक झटके से कुशल से अलग हो जाती है.
प्रीति की हालत शब्दो मे बयान नही की जा सकती. एक जवान लड़की ने आज उसे टच कर ही लिया जिसकी उसे सबसे ज़्यादा ख्वाहिश होती है. उसका सीना उपर नीचे हो रहा है, उसकी पीठ अभी भी कुशल की तरफ है लेकिन उन दोनो के बीच मे कुच्छ डिस्टेन्स है. उसके दिल मे लखो सवाल थे कि मेरा सगा भाई ऐसा क्यू पेश आ रहा है और दूसरी तरफ उसके दिल मे एग्ज़ाइट्मेंट था.
दोनो आपस मे कुच्छ बाते नही कर रहे है और दोनो की ही हालत बेहद खराब है. प्रीति को भी अहसास होने लगा है कि उसकी पैंटी मे कुच्छ लिक्विड आ रहा है. कुशल की निगाहे अब भी प्रीति की मोटी मोटी गान्ड पर है जिसे देख कर उसका लंड और भी हार्ड होता जा रहा है. प्रीति वहीं खड़े खड़े उसे तीर्छि निगाहो से देखती है, कुशल उसकी तरफ एक कदम बढ़ाता. प्रीति ये देख कर आँखे बंद कर लेती है, उसका दिल धड़क रहा है कि अब क्या होने जा रहा है. कुशल ठीक उसके पीछे आकर खड़ा हो जाता है, प्रीति अपने शोल्डर्स के करीब उसकी सांसो को फील कर रही है. कुशल अपने हाथ को बढ़ा कर प्रीति की टी-शर्ट मे डाल देता है और उसके नंगे पेट को टच करता है. धीरे धीरे उसका हाथ उसकी नाभि पेर पहुँच जाता है.
” आआआहह…………. प्रीति के मूँह से एक जबरदस्त सिसरी निकल जाती है.
इस सिसकारी ने कुशल को सारे जवाब दे दिए कि प्रीति कि क्या हालत है. उसका पेट ऐसे काँप रहा है जैसे उसको एलेक्ट्रिक करेंट लगा हो, नाभि ऐसे हिल रही है जैसे पेट मे मछ्ली कूद रही हो.
कुशल अपने होंठ प्रीति की गर्दन पर फिराना शुरू करता है.
प्रीति – ” आअहह……. कुशल…. क्याअ कर रहा है.” प्रीति की आँखे बंद हो चुकी है और जैसे जैसे कुशल अपने होंठ उसकी गर्दन के आस पास घुमा रहा है, वैसे वैसे उसकी गर्दन भी घूम रही है. कुशल पीछे से प्रीति से बुरी तरह से चिपक चुका है, उसका विशाल लंड प्रीति की जीन्स को फाड़ कर अंदर घुस जाने के लिए तैयार हो रहा था. कुशल का एक हाथ अभी भी प्रीति के पेट पर ही घूम रहा है. कितना सॉफ्ट था उसका बदन, ये बस कुशल ही समझ पा रहा था. कुशल का हाथ उपर की तरफ बढ़ रहा था, बूब्स के, उसके अनटच बूब्स की तरफ. तभी एक झटके के साथ प्रीति उसके हाथ पर अपना हाथ मारती है और उसे उपर बढ़ने ने रोकने लगती है. प्रीति की साँसे बेकाबू हो रही थी, ये एक ऐसी फीलिंग थी जिस से वो अंजान थी. एक कुँवारी लड़की का बदन एक मोम की तरह होता है, थोड़ा गर्मी के करीब आते ही पिघलने लगता है और आज तो वो आग मे ही बैठी थी.
कुशल -” मेरा हाथ क्यू रोका प्रीति?”. कुशल अभी भी उसकी गर्दन पे ही किस कर रहा था, और कभी उसके शोल्डर्स पे भी किस कर रहा था
प्रीति( तेज सांसो के साथ)-” जीसस्स….जिस जगह तू बढ़ रहा है वो तेरे लिए नही है…… आआहहुउऊउउ…..”. प्रीति का इशारा अपने बूब्स की तरफ था, उसका चेहरा लाल पड़ चुका था.
कुशल ( अभी भी उसके शोल्डर और गर्दन पे किस करते हुए)-” तो क्या मुझे नीचे की तरफ बढ़ना चाहिए, तेरी चूत…..”. प्रीति उसे बीच मे ही रोकते हुए बोलती है.
प्रीति -“ओह्ह्ह्ह, ये कैसी बात कर… रहा है. यू अरे ए डर्टी बोययय्यी…”. प्रीति अब भी सिसक रही थी. कुशल का हाथ अब नीचे की तरफ बढ़ने लगा था. प्रीति के बूब्स उपर नीचे ऐसे हो रहे थे जैसे कोई बार बार बेलून मे हवा भर रहा हो और निकाल रहा हो. कुशल का हाथ अब उसकी नाभि से होता हुआ फिर से उसकी जीन्स तक पहुँचता है. जीन्स काफ़ी टाइट थी, जिसमे हाथ नही जा पा रहा था, कुशल पूरी कोशिश कर रहा था कि हाथ अंदर चला जाए लेकिन नही जा रहा था. तभी, वो हुआ जो कुशल ने सोचा भी नही था. प्रीति अपनी साँस अंदर खींचती है जिस से उसका पेट अंदर की तरफ हो जाता है, जीन्स थोड़ा लूज होती है और कुशल का हाथ सीधा अंदर उसकी पैंटी तक.
” कुशालल्ल्ल्ल….. प्लीज़….. प्लीज़ रुक जा”. प्रीति आँख बंद किए उससे रिक्वेस्ट करते हुए बोलती है. कुशल अपना हाथ बढ़ाता जा रहा था, अब उसका हाथ सीधा उसकी पैंटी मे और सीधा उसकी वर्जिन, कुँवारी छोटी सी चूत पे पहुँच जाता है. कुशल इस बात को देख कर हैरान नही था कि उसकी पुसी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी. वो इस गीलेपन मे ही अपनी एक उंगली अंदर घुसा देता है.
“आआअहह……” प्रीति के मूँह से एक और सिसकारी निकलती है.
” मुझे….मुझे पैन्न्न्न्न हो रहा है, फिंगर बाहर निकाल”. प्रीति ने कहा
” मेरी जान एक फिंगर से ये हाल है, तो जब मेरा विशाल लंड…..” कुशल बोलता है लेकिन प्रीति उसे चुप करा देती है.
” ओह, कुशल ऐसा नही होगा, तू इतना डर्टी कैसे हो गयाआआ”. प्रीति आँखे अभी बंद थी लेकिन अब कुशल ने अपनी एक फिंगर को धीरे धीरे उसकी पुसी मे अंदर बाहर करना शुरू कर दिया था. प्रीति की हालत और भी खराब होते जा रही थी, अब प्रीति अपने सीधे हाथ को हरकत मे लाते हुए पीछे ले जाने लगती है वो भी स्लो मोशन मे. धीरे धीरे उसका हाथ फिर से कुशल के लंड पर पहुँचता है. प्रीति अपने हाथ से उसे आगे से टच करती है, प्रीति का फेस सामने की तरफ है जिस वजह से वो देख नही सकती थी उसके लंड को इसीलिए उसने पहले पीछे हाथ ले जाकर उसके लंड को आगे से छुआ. उस पर प्रीति के गोरे और सॉफ्ट हाथ लगते ही उसका लंड बेहद गुस्से मे आ गया और जैसे ही उसमे जोश आया उसे फील करके प्रीति फिर से घबरा गयी.
” इसे किययाया हो रहा है”. प्रीति का इशारा कुशल के लंड की तरफ था
” तुझ जैसी सेक्सी लड़की का आज भोग लगाने की तैयारी कर रहा है ये शेर”. कुशल ने ये बात कहते हुए कुच्छ ज़्यादा ही अंदर तक अपनी फिंगर घुसा दी प्रीति की पुसी मे.
” कुशल व्हाट आर यू डूयिंग, आइ आम युवर सिस्टर यार”. प्रीति ने थोड़ा गुस्सा होते हुए कहा लेकिन कुशल बहुत हॅपी था क्यूंकी प्रीति ने उसे ग्रीन सिग्नल दिया कि फिंगर चलाता रह लेकिन आराम से
प्रीति फिर से उसके शेर को चेक करने लगती है, अपनी मुट्ठी मे उसे भरना चाहा लेकिन नाकाम. उसकी लंबाई चेक करने के लिए हाथ और पीछे ले जाती लेकिन हाथ और पीछे और पीछे जाता गया और फाइनली प्रीति की फिंगर्स कुशल के पेट को टच करती है जहाँ पे उसके लंड का एंड था.
” ओह्ह्ह, कुशल क्या ख़ाता है तुउुउउ…, ऐसा साइज़……… तेरी वाइफ तो गयी काम से “. प्रीति ने कुशल से कहा
” डार्लिंग, आज कुँवारी हो तो बड़ा लग रहा है. एक महीने बाद देखना, ऐसे खा जाया करोगी और पता भी नही चलेगा”. कुशल ने रिप्लाइ किया
” यू आर आ वेरी डर्टी बॉय कुशल, मुझे कुच्छ खाने का शोक नहियीईई है……”. प्रीति ने थोड़ा सा स्माइल करते हुए कहा.
अब कुशल अपना हाथ प्रीति की चूत से हटा लेता है और उसे बाहर निकालने की कोशिश करने लगता है. प्रीति इस सिचुयेशन को देख कर अपनी आँखे खोलती है और पीछे मूँह करके आँखो ही आँखो मे इशारे से पूछती कि क्या हुआ. कुशल बिना कुछ जवाब दिए अपने दोनो हाथ आज़ाद करता है, और प्रीति के दोनो शोल्डर्स पकड़ कर अपनी ओर घुमाता है. अब वो दोनो आमने सामने है, सामने आते ही प्रीति अपनी आँखे खोलती है और तभी ” आाआईयईईईईईईई” जैसे ही प्रीति की निगाह कुशल के लंड पे पड़ती है और मूँह से चीख निकल जाती है. तुरंत कुशल अपना एक हाथ प्रीति के मूँह पे रखता है और कहता है कि क्या हुआ.
” ये, ये कितना खौफनाक है”. प्रीति ने अपनी निगाहे दूसरी तरफ करते हुए कहा
” माइ डियर सिस्टर इसीलिए इसे लंड कहते है, ये डिफरेंट साइज़स मे अवेलबल होता है. यू आर सो लकी कि तुम्हे फुल ऑप्षन मिला है”. कुशल ने प्रीति का चेहरा फिर से अपनी तरफ करते हुए कहा.
” छ्हि, कैसी गंदी गंदी बाते करते हो तुम कुशल. कहाँ सीखी तुमने ये बाते, और भला मे इसे क्यू आक्सेप्ट करू”. प्रीति मे फिर से बनावटी गुस्से मे कहा
” लड़को वाला लंड और लड़को वाली बाते एक लड़के के पास ही होगी ना, और तू इसे इसीलिए आक्सेप्ट करेगी क्यूंकी तेरी सेक्सी बॉडी इसे डिज़र्व करती है. सच बोल रहा हू कि लकी है तू, नही तो एक से एक सेक्सी लड़की आज भी 5 या 6 इंच से गुज़ारा चला रही है”. कुशल ने फिर से उसे रिप्लाइ किया. अब प्रीति का चेहरा कुशल के दोनो हाथो मे है, कुशल की निगाहे उसके गुलाबी होंठो पर है. दोनो की नज़रे मिलती है और जैसे इशारो मे कुशल पूछता है कि तेरे होंठो का रस पीना चाहता हू. जवाब देने की बजाय प्रीति अपनी दोनो आँखे बंद कर लेती है और बिना कुच्छ कहे ही कुशल को रिप्लाइ मिल जाता है. कुशल अपने चेहरे को आगे बढ़ाता है और अपने दोनो लिप्स प्रीति के लिप्स पर रख देता है. दोनो के लिप्स आपस मे मिलते ही जैसे बिजली कडकने लगी हो, मिनिट के पता नही कौन से हिस्से मे प्रीति की सारी लिपस्टिक कुशल हटा चुका था. प्रीति ने भी अपने होठ हिलाने शुरू शुरू कर दिए थे, वो भी कुशल का साथ दे रही थी. इसी दौरान कुशल अपने दोनो हाथ नीचे ले जाकर उसकी टी-शर्ट को नीचे से पकड़ता है और उसे उपर उठाने लगता है लेकिन अपने दोनो हाथो से प्रीति उसे रोकती है. कुशल काफ़ी कोशिश करता है लेकिन प्रीति नही मानती. तभी प्रीति लिप्स को अलग करती है, और कुशल से कहती है.
प्रीति -” कुशल, इस से आगे मे नही जा सकती. वैसे भी हम दोनो आज बहुत आगे बढ़ चुके है.” प्रीति कुशल से थोड़ा दूर होते हुए बोलती है.
कुशल प्रीति की ओर बढ़ता है और फिर से उसके चेहरे को पकड़ कर अपने होंठ उसके होंठ से लगा देता है. इस बात प्रीति ने थोड़ी कोशिश की अलग होने की लेकिन नाकाम रही. कुशल अपना एक हाथ प्रीति के राइट बूब पर टी-शर्ट के उपर से ही रख देता है. “ओह, लिट्ल सिस यू गॉट वेरी सेक्सी बूब्स”. कुशल अपने मन मे सोचता है. प्रीति उसका हाथ हटाना चाहती थी लेकिन कुशल नही माना और धीरे धीरे उसके बूब्स को प्रेस करता रहा. थोड़ी देर बाद प्रीति का विरोध भी कम हो गया. अभी तक वो दोनो एक दूसरे के होठों का रस चूसने मे बिज़ी थे. इसके बाद कुशल अपना हाथ उपर की बजाय टी-शर्ट के अंदर घुसा देता है. प्रीति के होंठ कुशल के होंठो से जुड़े हुए है तो वो खुल कर विरोध भी नही कर पाई. टी-शर्ट के अंदर हाथ ले जाकर कुशल उसकी टाइट ब्रा के अंदर अपना हाथ घुसा देता है और अपना पंजा ठीक उसके राइट सेक्सी बूब्स पर टिका देता है.
ये पहला चान्स था जब प्रीति के बूब्स को किसी बॉय ने टच किया था. वो पागल हो चुकी थी, उसकी साँसे और तेज हो गयी थी. कुशल के लिप्स को अब वो बहुत जान लगा कर चूस रही थी. कुशल ने फिर से एक बार ट्राइ किया कि वो उसकी ट- शर्ट उतार सके, वो अपने दोनो हाथो से उसकी टी-शर्ट पकड़ता है और उपर की ओर उठा देता है.
इस बात कुशल का प्लान कामयाब हुआ. प्रीति आँख बंद किए हुए लीप लॉक को हटाती है और अपने दोनो हाथ उपर कर देती है जिस से कुशल टी-शर्ट को उतार सके. और एक झटके मे प्रीति बस ब्लॅक ब्रा मे रह जाती है. टी- शर्ट हटते ही प्रीति भाग कर कुशल के सीने से चिपक जाती है अपने आप को छुपाने के लिए.
उसके पेट मे अब कुशल का लंड चुभ रहा था लेकिन वो विरोध नही कर रही थी. अब प्रीति कुशल के सीने मे समाई हुई थी, कुशल ने इस मौके का फ़ायदा उठा कर, एक झटके के साथ प्रीति की ब्रा का हुक भी खोल दिया. और उसे उतारने की कोशिश करने लगा. प्रीति एक बार को सीने से अलग होती है और दोनो हाथ सामने की तरफ कर देती है.
क्या नज़ारा था. आज तक कुशल ने बस सोचा था कि प्रीति के बूब्स कैसे है लेकिन आज वो उसके सामने थे, एक दम वाइट आंड एक दम सुडोल. इससे बेस्ट बूब्स शायद ही किसी फिल्मी हेरोयिन के हो. कुशल इस मौके को नही खोना चाहता था और एक झटके मे उसने अपना मूँह प्रीति के बूब्स पर रख दिया.
” आअहह, लव…… मी…….. कुशल, लव मी मोर…….” उसकी जीभ का अहसास अपने बूब्स पे पड़ते ही जैसे प्रीति पिघल गयी. उसकी आँखे बंद हो गयी और वो अपने दोनो हाथ कुशल के सर मे फिरा रही थी. एक बूब को कुशल चूस रहा था आंड दूसरे हाथ से प्रीति की जीन्स का बटन खोल रहा था.
” आइ लव…….. यू कुशल……………….. आअहह, ओह”. प्रीति की हालत बेहद खराब कर दी थी कुशल ने. वो अब तक उसकी जीन्स का बटन खोल चुका था आंड उसकी ज़िप भी. वो अपने एक हाथ से कोशिश करने लगा कि उसकी जीन उतार पाए लेकिन वो उसके चुतडो पर बहुत टाइट फँसी हुई थी. प्रीति इसी सिचुयेशन मे दोनो हाथ कुशल के सर से हटाती है और अपनी जीन्स पर ले जाकर उसे नीचे करने लगती है. कुशल इसी सिचुयेशन मे उसे पीछे सरकाता हुआ बेड पे ले जाकर गिरा देता है और खुद सीधा खड़ा होकर अपनी टी-शर्ट उतरता है आंड उसके बाद इन्नर वेर भी. अब कुशल बिल्कुल नंगा है लेकिन बेड पे पड़ी हुई प्रीति की आँखे बंद है और वो उसे देख नही सकती.
प्रीति अपने पाँव के सहारे से अपनी जीन्स को अलग कर देती है. प्रीति के शरीर पर अब बस एक ब्लॅक ट्रॅन्स्परेंट पैंटी है. कुशल आगे बढ़कर दोनो हाथो से उसकी पैंटी को पकड़ता है और एक झटके के साथ उसे उसकी बॉडी से अलग कर देता है. प्रीति शरम मे मारे अपनी दोनो टांगे जोड़ लेती है.
कुशल घुटनो के बल फ्लोर पर बैठा है, प्रीति की दोनो टांगे पकड़ता है और धीरे से उन्हे फेला देता है.
कुशल की तो जैसे लॉटरी लग गयी हो. एक छोटी सी कुँवारी चूत उसके सामने थी, वो टाइम ना वेस्ट करते हुए अपना मूँह सीधा उसकी चूत पर लगा देता है. और अपनी जीभ को अंदर घुसाने की कोशिश करने लगता है.
प्रीति के लिए एक्सपीरियेन्स बिल्कुल नया था. वो आज सातवे आसमान पर थी, इतना शारीरिक सूख मिलने के बाद कोई लड़की अपने आप को नही रोक पाती. पूरा रूम प्रीति की सिसकारियो से गूँज रहा था, लेकिन कुशल भी पूरी मेहनत के साथ लगा हुआ था. उसकी चूत से जैसे पानी की नादिया बह रही हो ऐसा महॉल था.
” ऊऊहह, आअहह……, किस मी मोर………, आआहह. कुशल डू इट प्लीज़………, फक मी टुडे………,, प्रीति पता नही क्या क्या बोले जा रही थी.
” आअहह, आअहह….. ओह, और अंदरररर………. प्रीति का इशारा कुशल की जीभ की तरफ था जो प्रीति की छोटी सी चूत के अंदर घुसने की कोशिशी कर रही थी.
आआआआअहह ब्रो…….. आइ……….म ……कुम्मींगगगग…………….और ठीक इसके दो मिनिट बाद प्रीति अपना पूरा पानी कुशल के मूँह मे छोड़ देती है. उसकी चूत का मूँह बार बार खुल रहा था और बंद हो रहा था. आज प्रीति बहुत मस्त हो गयी थी. कुशल अब भी उसकी चूत को चाटे जा रहा था. प्रीति अपने दोनो हाथो से इशारा करती है कि उसका काम हो गया है.
” कुशल…… मेरा हो गया है……, प्लीज़ अब रुक जा”. प्रीति ने लेटे लेटे कहा. कुशल एक विजयी मुस्कान के साथ खड़ा हो जाता है. प्रीति बेड शीट से अपने को ढकने की कोशिश करती है.
कुशल -” मेरी जान, आज पता चला कि जवानी की आग कैसी होती है”. कुशल प्रीति की तरफ देखते हुए बोला
प्रीति -” दिख रही है कि जवानी की आग कैसी होती है”. प्रीति कुशल के विशाल लंड की ओर देखते हुए बोली.
कुशल -” तो अब इसे भी शांत कर दो ना”.
प्रीति -” क्या करना होगा मुझे?”
कुशल -” सकिंग”
प्रीति-” क्याआ? कुशल मे अभी इतनी बड़ी भी नही हू कि सकिंग कर पाउ. इसे देख ये कितना बड़ा है, मुझे नही लगता कि इसे सक कर पाउन्गि. तेरा मास्टरबेशन करने की कोशिश कर सकती हू”. प्रीति ने कुशल को समझाते हुए कहा
कुशल -” मेरी लिट्ल सिस्टर, तुम चुदने के लिए रेडी हो चुकी हो. अगर इसे मूँह मे नही ले पओगि तो चूत मे कैसे लोगि.”
प्रीति -” कुशल मुझे ये गंदी लॅंग्वेज बिल्कुल पसंद नही”. प्रीति उसे फिंगर दिखाती हुई बोलती है
कुशल -” सिस, अभी तुम्हारी चूत का पानी निकाला है तभी मेरी लॅंग्वेज गंदी लग रही है. थोड़ी देर बाद देखना मुझपे फिर से प्यार आने लगेगा.” ये बात सुनकर प्रीति के चेहरे पर एक स्माइल आ जाती है. अब धीरे धीरे कुशल अपने खड़े हुए लंड के साथ प्रीति की तरफ बढ़ता है. प्रीति करीब आते ही उसके लंड को दोनो हाथो मे पकड़ लेती है.
कुशल -” यार मेने तेरे लिए इतनी मेहनत की तो क्या तू नही कर सकती.” ये बात सुनते ही प्रीति अपनी बेड शीट हटा देती है और स्टाइल मे खड़े होकर कुशल के लंड के सामने बैठ जाती है और अपने होठ उस पर रख देती है.
” ओह, सेक्शययययी…. कुशल प्रीति के इस अंदाज़ पे फिदा हो गया. प्रीति अपना मूँह खोल कर उसका सुपाडा अपने मूँह मे लेना चाहती थी लेकिन परेशानी हो रही थी. वो कुशल की आँखो मे देखती है और कुशल जैसे उसे आँखो से ही रिक्वेस्ट करता है कि प्लीज़ कर दे ना आज सकिंग.
प्रीति स्टाइल मे अपने बालो को पीछे करती है और अपना मूँह पूरा खोल कर कुशल के लंड को अपने मूँह मे ले लेती है. उसके मूँह मे बस अभी उसका सुपाडा ही गया था.
कुशल के एग्ज़ाइट्मेंट का कोई ठिकाना नही था. वो अपना मूँह आसमान मे किए हुए मस्त था. प्रीति उसके लंड को धीरे धीरे और अंदर ले रही थी और अपने हाथो से उसकी बॉल्स को खिला रही थी. जब भी कुशल नीचे देखता, उसे 19 साल की जवान प्रीति वो भी नंगी अवस्था मे अपना लंड चूस्ते हुए दिखाई देती.
” उ र्र्र्र्र्ररर ग्रेअतत्त,,,,,,, प्रीतीईईईईईई, ऊऊहह. ऐसे हीईीई” कुशल बॅड बड़ाये जा रहा था.
प्रीति अपनी स्पीड बढ़ा चुकी थी, उसके मूँह मे अभी भी बस आधा ही लंड था. उसके सॉफ्ट लिप्स, कुशल के हार्ड लंड को पूरी जान से चूस रहे थे.
” प्रीतीिई, ईईइ लव यू………….. ओह, आइ……..एम…………” और एक तेज पिचकारी प्रीति के गले से टकरा गयी. प्रीति ने कोशिश की लंड को निकालने की लेकिन जैसे वो उसके मूँह मे फँसा हुआ था.
जैसे ही वो प्रीति की मूँह से बाहर आया, प्रीति सीधा बाथरूम मे भाग गयी और खांसने लगी.
कुशल बहुत रिलॅक्स था. उसने आज जन्नत की सेर कर ली थी. उसे यकीन नही हो रहा था कि प्रीति जैसी सेक्सी गर्ल उसके साथ न्यूड कंडीशन मे है. प्रीति बाथरूम के अंदर अपने आप को रिलॅक्स कर रही थी. और थोड़ी देर बाद वो कुशल का टवल लपेट कर बाहर आती है. दोनो की नज़रे मिलती है, प्रीति एक अच्छी सी स्माइल देती है उसे.
वो कुशल के ड्रेसिंग टेबल के सामने आकर अपने हेर कोंब करने लगती है. कुशल उसकी बॅक पर मज़ाक मे एक चपत लगाता है. प्रीति उसे नॉटी स्माइल के साथ देखती है. कुशल अब वॉशरूम के अंदर जाता है और गेट बंद कर लेता है.
वो बहुत हॅपी है कि आज रात उसका सपना पूरा होने जा रहा है. ये सोच कर ही उसके लंड मे फिर से एनर्जी आती जा रही है. वो फ्रेश होकर बाहर निकलता है लेकिन ये क्या. प्रीति रूम मे नही है और नही उसके कपड़े. कुशल पागलो की तरह उसे देखता है लेकिन वो दिखाई नही देती.
कुशल कपड़े पहन कर बाहर आता है और प्रीति के रूम के बाहर आकर देखता है कि रूम अंदर से लॉक है. कुशल उसके डोर को नॉक करता है.
प्रीति – (स्माइल करते हुए) ” कौन है”
कुशल -” ओपन दा डोर प्रीति”.
प्रीति -” आज सारे डोर ओपन कर दिए लेकिन अब ये डोर ओपन नही होगा”. वो रूम के अंदर से ही हंस हंस कर बोल रही थी.
कुशल -” लेकिन अभी तो, अभी तो…..”
प्रीति -” अभी तो क्या?”
कुशल -” अभी तो बहुत कुच्छ बाकी है”
प्रीति -” अभी क्या बाकी है, मुझे लगा कि तेरा एंडिंग पॉइंट हुआ था जो अभी भी मुझे अपने मूँह मे फील हो रहा है”. प्रीति ने अपने रूम के अंदर से ही स्लो वाय्स मे कहा
कुशल -” हाँ वो तो हुआ लेकिन अभी….”
प्रीति -” अभी क्या????”
कुशल -” अभी वो तो नही हुआ ना जो होना चाहिए इस सब के बाद यानी……… सेक्स.”
प्रीति -” कुशल हम जवान है, मे भी जवानी की दहलीज पर कदम रख चुकी हू. जोश मे आकर सब हो गया लकिन इससे आयेज कुच्छ नही होगा और प्लीज़ मुझे फोर्स मत कर.”
कुशल -” तो इतना कुच्छ भी क्यू किया, क्यू मेरे जज़्बात का मज़ाक उड़ा रही है. अगर कुच्छ करना ही नही था तो ये सब किया ही क्यू”. कुशल ने गुस्सा होते हुए कहा
प्रीति -” मेने कहा ना की जवानी के जोश मे ग़लती हो जाती है जो और जो मुझसे भी हो गयी. और वैसे भी जितना हुआ उतना तो चलता है.”
कुशल -” वाह वाह, खुद की जो मर्ज़ी वो किया अब जो मेरे मर्ज़ी है उसमे नखरे. बन तो ऐसे रही है जैसे हमेशा अपनी चूत को सील पॅक ही रखेगी”.
प्रीति -“तूने फिर से ते गंदी लॅंग्वेज शुरू कर दी ना. तू भी जानता है और मे भी कि कुँवारा कोई नही रहता. दिल हर किसी का करता है, सो मेरा भी करता है. तू अपनी किसी गर्ल फ्रेंड के साथ कर, उपर वाला जब मेरा बॉय फ्रेंड भेजेगा तो मे उसके साथ अपनी बॉडी शेर करूँगी.”
कुशल -” मेरी कोई गर्ल फ्रेंड नही है”
प्रीति – ” तो बन जाएगी, अभी बूढ़ा नही हुआ है तू. मे विटनेस हू कि तू जवान है और तेरी बॉडी का हर पार्ट जवान है. हे हे हे हे” प्रीति हंसते हुए कहती है. प्रीति जैसे जैसे हंस रही थी वैसे वैसे कुशल का गुस्सा बढ़ता जा रहा था.
कुशल – ” तो तू ढूंड ले अपना बॉय फ्रेंड. अब अगर तू खुद भी चाहेगी तो भी कुच्छ नही करूँगा. चलाती रह हाथ से काम. मे जा रहा हू”
प्रीति -” शुक्रिया कुशल, अगर कभी मे अपना होश खो भी दू तो अब तू कुच्छ नही करेगा. मुझे खुशी है, और अब प्लीज़ चला जा. मेरा नहाने का मूड है. कपड़े तो पहने है नही तो टाइम भी बच जाएगा.” प्रीति उसे और छेड़ते हुए बोलती है.
कुशल उसके डोर से हट जाता है और अपने रूम की ओर जाकर खड़ा हो जाता है. अपने रूम मे एंट्री लेते ही उसकी नज़रे प्रीति की पैंटी पर पड़ती है जिसे प्रीति उसके रूम मे ही भूल गयी थी. उस पैंटी को देख कर कुशल की हालत और खराब हो जाती है और उसका लंड ज़ोर मारने लगता है. उसको अभी भी किस्मत पे यकीन नही हो रहा था कि अभी चन्द मिनिट पहले प्रीति उसकी बाहों मे थी और अब उससे दूर है
” ग़लती मेरी ही है, सारा ड्रामा छोड़ कर पहले चोद ही देना चाहिए था.” कुशल अपने आप से कहता है. कुशल सारा सीन सोच सोच कर पागल होने लगता है, उसको अभी भी यकीन नही हो रहा था कि उसने प्रीति के जवान और नंगे बदन का दीदार किया है.
कुशल अपने ख्यालो मे खोया हुआ है और अपने हाथो से ही अपने लंड को खिला रहा है. तभी डोर ओपन होने की आवाज़ आती है, वो तुरंत समझ जाता है कि ये तो प्रीति का डोर है. उसका एग्ज़ाइट्मेंट आसमान पर पहुँच जाता है. वो अपने रूम से बाहर आता है.
प्रीति अपने रूम के गेट पर खड़ी हुई थी. कुशल उसके रूप को देख कर शॉक्ड हो जाता है, प्रीति ने एक बेहद शॉर्ट शिफ्फॉन ड्रेस पहनी है जो उसकी पुसी से बस थोड़ा सा नीचे है. अक्सर वो इस ड्रेस को लेगिंग के साथ पहनती थी लेकिन आज ड्रेस के नीचे कोई बॉटम नही था, सिर्फ़ उसकी पिंक पैंटी की मामूली झलक मिल रही थी. गीले और खुले बाल और जुवैसी लिप्स, एक सेक्सी गॉडेस लग रही थी वो. कुशल को तो जैसे कुच्छ समझ ही नही आ रहा था कि आज किस्मत ये क्या खेल कर रही है. प्रीति अपने रूम के डोर पर खड़े होकर कुशल को देख रही है और कुशल प्रीति को. कुशल प्रीति की नंगी टाँगो को देख कर पागल सा होता जा रहा है.
प्रीति अब अपने कदम टाय्लेट की तरफ बढ़ाती है जो उसी गॅलरी मे है, उसके एक हाथ मे कोई और कपड़ा भी है जो फोल्ड करके उसने पकड़ा हुआ था. उसकी चाल अभी ऐसी थी जैसे कोई सेक्सी मॉडेल रॅंप पर चल रही हो. प्रीति की निगाहे कुशल से मिली हुई है, और कुशल खड़ा हुआ बस उसे देख रहा है. प्रीति टाय्लेट के गेट पर पहुँचती है और टाय्लेट के अंदर जाती है और फिर से घूमती है. कुशल की तरफ 10 सेकेंड के लिए वो देखती ही रहती है. कुशल और उसके बीच की दूरी बस 10 कदम होगी.
प्रीति बिना गेट बंद किए अपने दोनो हाथ अपनी पैंटी पे ले जाती है…. और नीचे झुक कर एक स्लो मोशन स्टाइल मे पैंटी नीचे करने लगती है. नीचे करते हुए प्रीति की निगाहे बस कुशल पर ही है और एक सेक्सी कातिल मुस्कान भी. पैंटी नीचे करने के बाद वो फिर से सीधी खड़ी होती है और वो करती है जिसकी कुशल को उम्मीद भी नही थी. कुशल के सामने ही अपनी ड्रेस को उपर करती है और नीचे बैठ जाती है.
छ्ह्हीयीईयी……… एक जोरदार साउंड के साथ वो खुले दरवाजे मे ही कुशल के सामने पेशाब करने लगती है. कुशल अब पागल हो चुका है, उसने अपने कदम बढ़ाने शुरू किए और जैसे ही प्रीति से दो कदम की दूरी पर वो पहुँचा. “धदाम ” और गेट बंद. कुशल को ऐसे लगा जैसे आज पता नही कितनी बार उसकी इज़्ज़त का रेप होगा
कुशल -” ये क्या नया ड्रामा है तेरा, गेट खोल”. कुशल ने बाथरूम का गेट नॉक करते हुए कहा
प्रीति -” क्यू मुझे पेशाब करना अलाउ नही है, हे हे हे हे”. प्रीति ने मज़ाक करते हुए कहा
कुशल -” क्या अब से पहले भी ऐसे ही अपनी चुल खोल कर पेशाब करती थी तू”.
प्रीति -” हा हा हा हा, ऐसे नही करती थी लेकिन अब तू तो देख ही चुका है तो तुझसे क्या शरमाना. लेकिन तू क्यो टेन्षन ले रहा है, तूने तो प्रॉमिस कर ही लिया है कि अगर मे कुच्छ कहूँगी भी तो तू कुच्छ नही करेगा”.
कुशल -” मेने कहा गेट खोल, मुझे पता है कि तू भी चाहती है मेरे लंड को लेना. नखरे मत दिखा नही तो ज़बरदस्ती चोद दूँगा तुझे”. कुशल का गुस्सा बढ़ता जा रहा था
प्रीति -” ये गंदी लॅंग्वेज और ये धमकियाँ अपनी बीवी को दियो. ये मेरी लाइफ है और मे अपनी मर्ज़ी से जीना चाहती हू”. इतने मे ऐसी आहट होती है जैसे को नीचे से उपर आ रहा हो, और कुशल की हालत खराब हो जाती है.
” क्या हुआ गॅलरी मे क्यू घूम रहा है”. ये पंकज की आवाज़ थी जो स्टेर्स से उपर आ रहा था
“वो… वो डॅडी…. मुझे टाय्लेट जाना है लेकिन इसमे वो प्रीति घुस गयी है” कुशल ने अपने आप को बचाते हुए कहा.
पंकज-” तो बेटा अगर ज़्यादा परेशानी है तो नीचे के टाय्लेट मे चला जा”. कुशल को उसकी बात मान नी पड़ती है क्यूंकी वो नही चाहता था कि उसे शक हो जाए और मरे मन से नीचे जाने लगता है.
” आज साली किस्मत ही खराब है नही तो डॅडी तो उपर आते भी नही है”. कुशल अपने मन मे कहता है नीचे जाते हुए.
कुशल नीचे की ओर जाता है और पंकज आराधना के रूम मे एंटर करता है. कुशल जैसे ही नीचे पहुँचता है उसे फर्स्ट फ्लोर टाय्लेट के गेट खुलने की आवाज़ आती है ” ऑश शिट” उसके मूँह से खुद ब खुद ये बात निकल जाती है. प्रीति टाय्लेट का गेट खोल कर बाहर देखती है और मैदान सॉफ देख कर अपने रूम मे भाग जाती है.
पंकज आराधना के रूम मे एंटर होता है. आराधना चादर ओढ़े सो रही है. पंकज उसके बेड के कॉर्नर मे जाकर बैठ जाता है और प्यार से उसके सर मे हाथ फिराने लगता है. आराधना की आँखे खुलती है और वो चोंक कर एक दम बैठ जाती है. ” डॅडी, आआप”. आराधना चोंक कर पूछती है.
पंकज -” आरू, नीचे बोर हो रहा था तो सोचा कि क्यू ना आज उपर घूम आउ और अपने बच्चो के देख आउ. अक्सर मे उपर आता नही हू ना, वैसे भी कल सनडे है तो सोचा की घूम आउ”.
आराधना -” ये तो आपने बहुत अच्छा किया डॅडी”. आराधना अपने आप को और जगाती हुई बोलती है और उठ कर वॉश रूम की ओर जाने लगती है अपना चेहरा वॉश करने के लिए. उसने ट्राउज़र और टी-शर्ट पहनी हुई है.
पंकज -” रूम को काफ़ी क्लीन रखती हो तुम”. पंकज रूम के चारो ओर देखते हुए बोलता है. इतने मे आराधना वॉशरूम मे घुस चुकी थी और बिना गेट बंद किए अपना फेस वॉश करने लगती है. उसके बाद फेस को टवल से क्लीन करते करते वो बाहर आती है
आराधना -” पापा, लड़किया हमेशा सफाई पसंद करती है और बाय्स..पूछो मत बस, एक बार कुशल का रूम देखोगे तो हैरान हो जाओगे”
पंकज -” हा हा हा हा. तो कुशल का रूम डर्टी है. क्या करे लड़को के पास टाइम ही नही होता”. पंकज ने स्माइल करते हुए कहा
आराधना -” क्या? लड़को के पास टाइम नही होता और गर्ल्स फ्री रहती है. कमाल है डॅडी आप भी. मेरी तारीफ करने की बजाय कुशल को फेवर कर रहे हो”. आराधना ने बनावटी गुस्से मे कहा
पंकज -” तारीफ तो आज मे तुम्हारी बहुत कर चुका हू”. पंकज का इशारा साड़ी वाले इन्सिडेंट की तरफ था. ये सुनकर सिमरन शरमा जाती है.
आराधना -” मोम सो गयी क्या?” आराधना बात टालते हुए बोलती है
पंकज -” आज कल तुम्हारी मोम के पास टाइम ही कहाँ है मेरे लिए. उसके पास जाता हू तो पता नही क्यू दूर भाग जाती है”. पंकज ने स्माइल करते हुए कहा. अब आराधना बेड के सामने चेर पर, टाँग पर टाँग रख कर बैठ जाती है.
आराधना -” तो आप ही मम्मी को परेशान करते होंगे तभी तो आपके पास से भागती है”. आराधना ने हंसते हुए कहा
पंकज -” शादी के बाद तो पति का फ़र्ज़ है परेशान करना”. पंकज ने बहुत लो वाय्स मे कहा
आराधना -” क्या कहा”.
पंकज -” कुच्छ नही, मे तो बस ये कह रहा था कि तुम अपनी मम्मी का फेवर क्यू कर रही हो. तुम्हारी फ्रेंड सिमरन ही अच्छी है जो मेरा फेवर करती है. वो तो मज़ाक मे कह भी रही थी अंकल कहीं आंटी को कोई और तो नही मिल गया”. पंकज ने ऐसे ही कह दिया
आराधना -” आप सिमरन की बात ना सुना करे. उसके विचार हमारे घर से नही मिलते हाँ लेकिन दिल की अच्छी लड़की है”
पंकज -” हाँ उसके दो बड़े बड़े दिल बहुत अच्छे है.” पंकज ने फिर से साइड मे मूँह करके बहुत लो वाय्स मे कहा
आराधना -” क्या कहा आपने अभी “
पंकज -” कुच्छ नही, मे तो बस ये कह रहा था कि वाकई मे अच्छी लड़की है तुम्हारी फ्रेंड.”
आराधना -” ज़्यादा अच्छी भी नही है डॅडी. पता है उसका एक बॉय फ्रेंड भी है”. आराधना ने उसे ऐसे बताया जैसे कोई सीक्रेट बता रही हो
पंकज -” सच मे”. पंकज ने ऐसे रिक्ट किया जैसे कुच्छ जानता ही नही
आराधना -” हाँ डॅडी, और पता है वो उससे अकेले मे भी मिलती है”. आराधना की आँखे बड़ी बड़ी हो रही थी ये बताते हुए. वो ऐसे बता रही है जैसे पता नही कितना बड़ा सीक्रेट बता रही है
पंकज -” अकेले मे यानी कहाँ”. पंकज ऐसा रिक्ट कर रहा है जैसे कुच्छ समझ ही नही पा रहा
आराधना -” पता है डॅडी, वो ऐसी जगह मिलती है बॉय फ्रेंड से जैसे किसी के घर या फ्लॅट मे”. आराधना उसे बहुत सीरीयस होते हुए बताती है लेकिन ये नही बताती कि कल सिमरन उनके ही घर पर अपने बॉय फ्रेंड को लाने वाली है.
पंकज -” अच्छा, ऐसा करती है वो. वो तो बहुत खराब लड़की है”. पंकज ने भी उसकी बात का समर्थन करते हुए कहा
आराधना -” वो तो डॅडी स्मोकिंग, ड्रिंकिंग सब करती है. लड़कियो वाली कोई बात नही है उसमे.” आराधना ने कॅरी ऑन रहते हुए कहा
पंकज -” लेकिन उसके लिप्स को देख कर नही लगता कि वो स्मोकिंग करती है. एक दम पिंक लिप्स है उसके.” पंकज आराधना का रिक्षन देखना चाहता था
आराधना -” ढेर सारी लिपस्टिक पोत के रखती है अपने होंठो पे. तभी तो पिंक लगते है”. आराधना ने भी थोड़ा और ज़ोर देते हुए कहा
पंकज -” लेकिन कहीं तुझे मे भी तो बुरा नही लगता क्यूंकी स्मोकिंग तो मे भी करता हू”. पंकज ने फिर से उसका रिक्षन जान ने के लिए ये बात कही
आराधना -” डॅडी स्मोकिंग करना तो बना ही मर्दो के लिए है. आप तो डॅशिंग लगते हो लेकिन सिमरन पे मुझे बहुत गुस्सा आता है जब वो स्मोकिंग करती है लेकिन वो अपने आप को फिल्मी हेरोयिन से कम नही समझती”.
पंकज -” आज कल तो बेटी हर दूसरी लड़की स्मोकिंग करती नज़र आती है लेकिन शुक्र है कि हमारी बेटी इन सब चीज़ो से दूर है”. ये बात कहते हुए पंकज उठता है और जाकर आराधना के प्यार से गाल खींच देता है
आराधना -” डॅडी मे हमेशा घर का ख्याल रखूँगी और कोई ऐसा काम नही करूँगी जो मेरे मा बाप को अच्छा ना लगे”. पंकज उसकी इस बात से बहुत इंप्रेस हुआ और उसकी सर पर हाथ फिराता हुआ बाहर जाने लगता है.
आराधना -” अरे डॅडी, कहाँ चले. बैठो ना थोड़ी देर और.” आराधना चेर से खड़े होते पंकज से बोलती है
पंकज -“नही बेटा अब रात बहुत हो गयी है, अब मुझे चलना चाहिए”. ये कहते हुए पंकज बाहर जाने लगता है. बाहर जाते हुए पंकज ये सोचता है कि क्यू ना प्रीति और कुशल से भी मिलता चलु और उन्हे अच्छा लगेगा. और वो बाहर निकलते हुए आराधना को इशारे मे बताता है कि वो प्रीति के रूम की तरफ जा रहा है.
पंकज प्रीति के रूम की तरफ चल देता है. प्रीति के रूम के बाहर आकर वो गेट को नॉक करता है.
” तू आ गया फिर, चाहे तू कितनी भी ट्राइ कर ले मे नही दूँगी तुझे”. प्रीति का गेट अंदर से बंद था और उसे ये लगा कि शायद कुशल गेट नॉक कर रहा है इसलिए उसने ऐसा बोला.
” क्या नही देगी बेटा क्या हो गया”. पंकज गेट के बाहर से ही बोलता है और गेट को फिर आए नॉक करता है.
ऊऊहह, फक्क्क डॅडी… प्रीति अपने मन मे बोलती है. दर असल वो बहुत घबरा गयी थी.
” वो…वो डॅडी कुशल बहुत परेशान करता रहता है. ज़रा रुकिये मे चेंज कर रही हू और अभी गेट खोलती हू.” प्रीति की स्पीड ऐसे हो गयी थी जैसे कोई एलेक्ट्रिक मशीन. वो तुरंत पूरे कपड़े पहनती और गेट खोलती है. गेट खोलते ही वो पंकज को हेलो डॅडी बोल कर ग्रीट करती है. पंकज उसके रूम मे अंदर की ओर जाते हुए बोलता है –
पंकज -” कैसे परेशान कर रहा है ये नालयक कुशल. क्या माँग रहा है तुझसे”.
प्रीति – वो वो डॅडी….. मेरा वीडियो गेम.” प्रीति को कुच्छ समझ नही आता तो वो ऐसे ही बोल देती है
पंकज -” बेहद नालयक हो गया है ये कुशल. वो तेरा वीडियो गेम क्यू माँग रहा है जब उसको भी मेने दिलाया हुआ है. कुशल कुशल” वो दो तेज आवाज़ लगाता है कुशल को बुलाने के लिए. कुशल जैसे ही ये आवाज़ नीचे सुनता है उसे तो ऐसे लगता है जैसे भूचाल आ गया हो.
” कहीं प्रीति ने मेरी शिकायत डॅडी से तो नही कर दी”. कुशल अपने मन मे सोचता हुआ उपर भागता है. उसे आशा थी कि डॅडी आराधना दीदी के रूम मे होंगे लेकिन जैसे ही वो उधर आता है तो देखता है आराधना दीदी तो अपने रूम मे अकेली है. उसके पाँव तले से ज़मीन खिसक जाती है. उसको कदम रुक जाते है, उसको ऐसा लगा जैसे किस्मत ने क्या खेल खेल दिया उसके साथ. ” हे उपरवाले आज बचा ले, अपनी बीवी की भी चूत नही मारूँगा मे”. कुशल उपरवाले से हाथ जोड़ कर प्राथना करता है. इतने मे एक बार फिर से आवाज़ आती है कुशल. ये आवाज़ उसके डॅडी की ही थी जो प्रीति के रूम से आ रही थी.
कुशल धीरे धीरे कदम बढ़ाता हुआ आगे पहुँचता है. उसके चेहरे पे पसीने आ चुके थे. और प्रीति के रूम के बाहर जाकर खड़ा हो जाता है, अंदर उसके डॅडी और प्रीति थे. डॅडी आगे के साइड खड़े थे और प्रीति उनके पीछे यानी कि पंकज की पीठ थी प्रीति की तरफ.
” जी डॅडी”. कुशल मरी हुई आवाज़ मे बोलता है.
पंकज -” क्यू परेशान कर रखा है तूने प्रीति को”. पंकज की ये बात सुनते ही तो कुशल का तो जैसे किसी लड़की ने रेप कर दिया हो ऐसी सिचुयेशन हो जाती है. प्रीति की भी हालत खराब थी कि कहीं कुशल कुच्छ और समझ के कुच्छ बोल ना दे
कुशल -” मेने… मेने क्या किया”.
पंकज -” तो जब प्रीति अपनी कोई चीज़ नही देना चाहती तो तू क्यू ज़बरदस्ती माँगता रहता है”. ये बात सुन कर कुशल का चेहरा शरम से गढ़ जाता है. उसको ऐसा लगा कि जैसे जिंदगी मे कोई भूचाल आ गया हो.
” और डॅडी मेने कई बार मना किया है कि मे अपना वीडियो गेम नही दूँगी”. कुशल इससे पहले कुच्छ बोले, प्रीति ने हिंट दे दिया कि वीडियो गेम की बात चल रही है. ” वीडियो गेम???” कुशल सोचने पे मजबूर हो जाता है और जैसे कि उसे सब समझ आता है वो खुशी से पागल हो जाता है.
” डॅडी, वीडियो गेम, ऑश वीडियो गेम. हाँ मे इसके पीछे पड़ा रहता हू कि दे मुझे क्यूंकी प्रीति का वीडियो गेम मुझे सबसे अच्छा लगता है”. कुशल प्रीति की तरफ देखते हुए बोलता है. वो सारी सिचुयेशन समझ चुका था. जब वो ये बात बोलता है कि उसे प्रीति का वीडियो गेम सबसे अच्छा लगता है तो ये सुनकर प्रीति को ऐसे लगा जैसे वो ही मिस वर्ल्ड है.
पंकज -” लेकिन तुझे भी तो दिलाया है ना मेने वीडियो गेम”.
कुशल -” पता नही क्यू मुझे डॅडी प्रीति का ही अच्छा लगता है. बस एक बार लूँगा फिर दोबारा ज़िद नही करूँगा डॅडी”. कुशल ने बनावटी अंदाज़ मे प्रीति की तरफ देखते हुए कहा
पंकज -” ठीक है तो, प्रीति एक बार दे देने मे कोई बुराई नही है”. पंकज प्रीति की तरफ देखते हुए बोलता है. इस बात का मतलब समझ कर
प्रीति -” डॅडी मुझे पूरा यकीन है कि एक बार अगर इसे अपना वीडियो गेम दिया तो मेरा गेम दोबारा खेलने के लायक नही रहेगा.” प्रीति ने नॉटी स्टाइल मे कुशल की ओर देखते हुए कहा. इससे पहले कि पंकज कुच्छ बोलता, कुशल ही बोल पड़ता है
कुशल -” डॅडी मे प्रॉमिस करता हू कि बहुत प्यार से खेलूँगा. इसके वीडियो गेम पे खरॉच तक नही आने दूँगा. बिल्कुल अपना गेम समझ कर ही खेलूँगा”.
पंकज -” ठीक है, ठीक है. अब बहुत हुआ, प्रीति जब तेरा दिल करे एक बार अपना वीडियो गेम कुशल को दे दियो”. पंकज प्रीति को ऑर्डर देता हुआ बोलता है.
प्रीति कुशल की तरफ शार्प आइज़ से देखती है और पूछती है ” बस एक बार हाँ???” ये बात सुनकर को तो जैसे कुशल की लॉटरी लग गयी हो. वो अपने डॅडी के फ़ैसले से बहुत हॅपी था और आइ लव यू डॅडी कह कर अपने डॅडी से चिपक जाता है.
पंकज -” और दोनो लड़ा कम करो, अब बड़े हो गये हो, ठीक है”. कुशल और प्रीति दोनो जी डॅडी कह कर बात मान लेते है. अब पंकज बाहर जाने लगता है, लेकिन कुशल का बाहर जाने का इरादा नही था. प्रीति मौके का फ़ायदा उठाते हुए बोलती है कि चल कुशल अब तू भी सोने जा क्यूंकी मुझे भी नींद आ रही है. पंकज भी जाते जाते कुशल से बोलता है कि जाकर सो जा अब कल सनडे है शॉपिंग करने चलेंगे.[/b]

Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.