“आआह्ह्ह्ह………..उन्न्नन्न्गग्ग्गह्ह्ह्हह …” सलोनी का बदन तेज़ झटका खाता है | जिस तरह उसकी खुरदरी जीभ ने राहुल को सिसकने पर मजबूर कर दिया था उसी तरह अब अपने बेटे की जीभ के प्रहार से वो खुद सिसकने पर मजबूर थी | राहुल निप्पल को चाटता जा रहा था | निप्पल चाटते हुए वो उसके निप्पल को अपने होंठो में दबोच लेता है और उसे बच्चे की तरह चुसना शुरु कर देता है |
सलोनी अपना सीना ऊपर उठाकर बेटे के मुंह में मुम्मा धकेल रही थी | उसके मुंह से फूटने वाली सिसकियाँ और भी तेज़ और गहरी हो गई जब राहुल ने एक मुम्मे को चूसते हुए, दुसरे पर अपना हाथ रख दिया और उसे हल्के हल्के दबाने लगा, सहलाने लगा, उसके निप्पल को अंगूठे और ऊँगली के बीच लेकर मसलने लगा |
निप्पल चूसते चूसते वो उसे धीरे धीरे दांतों से हल्का हल्का सा काट भी रहा था |
जब भी उसके दांत निप्पल को भींचते, सलोनी सर को जोर से झटकती | वो अपने बेटे के सर पर हाथ रख देती है
और उससे अपने मुम्मे चुसवाते हुए उसके बालों में उँगलियाँ फेरने लगती है |
राहुल उत्साहित होकर और भी जोर जोर से मुम्मे को चूसता है |
कभी कभी वो पूरे मुम्मे को मुंह में भरने की कोशिश कर रहा था जिसमे स्पष्ट तौर पर वो सफल नहीं हो सकता था क्योंकि उसकी माँ के मोटे मुम्मे उसके मुंह में पूरे समाने से तो रहे |
“दुसरे को भी…दुसरे को भी चुसो बेटा….” सलोनी राहुल का मुंह अपने एक मुम्मे से हटाकर दुसरे की तरफ ले जाती है
और राहुल झट से उसके निप्पल को होंठो में भरकर चुसना शुरु कर देता है | उसका हाथ दुसरे मुम्मे को सहलाने, दबाने लगता है |
“उन्न्नन्न्गग्ग्गह्ह्ह्हह … आआह्ह्ह्ह………..” सलोनी की सिसकियाँ कुछ ज्यादा ही ऊँची हो जा रही थी | राहुल कुछ ज्यादा ही जोर से निप्पल को चूस रहा था | सलोनी राहुल के सर को अपन मुम्मे पर दबा रही थी | राहुल अपनी माँ के मुम्मे से मुंह हटाता है और दोनों मुम्मो को उनकी जड़ से दोनों हाथों में भर लेता है | इससे उसके निप्पल और मुम्मो का ऊपरी हिस्सा उभर कर सामने आ जाता है | राहुल फिर से मुंह नीचे करके अपनी माँ के मुम्मे को चूसने लगता है | मगर इस बार थोडा सा चूसने के बाद वो अपना मुंह उठाकर दुसरे मुम्मे पर ले जाता है | हाथ से मुम्मो को दबाता राहुल बदल बदल कर मुम्मो को चूसने लगता है |
“राहुल….बेटा….ऊऊफ़्फ़्फ़….” सलोनी कामौंध में पूरी तरह डूब चुकी थी |
राहुल पर सर पर उत्तेजना का भूत सवार था | वो दोनों मुम्मो को बारी बारी से चूस रहा था, चाट रहा था, अपनी जीभ की नोंक से चुभला रहा था | उसका मुंह अब दोनों मुम्मो के बीच की घाटी में घूमने लगा | वो मुम्मो के बीच की घाटी को चूमता, चाटता, अपना मुंह धीरे धीरे नीचे ले जाने लगता है | मुम्मो से होकर नीचे की और जाता उसका मुख उसके गोरे पेट पर घुमने लगा | राहुल की जिव्हा सलोनी के पूरे पेट पर घुमती उसे चाट रही थी | उसके होंठ अपनी माँ के दुधिया पेट के हर हिस्से को चूम रहे थी | हर बीतते लम्हे के साथ सलोनी की आहें ऊँची होती जा रही थीं | चूत की आग उसे जला रही थी और उसका बेटा था जो उस आग को बुझाने की बजाए उसमें तेल डालकर उसे और तेज़ भड़का रहा था |
राहुल की जिव्हा अब सलोनी की नाभि तक पहुँच गई थी | वो जिव्हा को नाभि के आखरी छल्ले पर घुमाता है | नाभि के दस बारह चक्कर काटने के बाद राहुल अपनी जिव्हा नाभि में घुसा देता है और उसके होंठ नाभि के ऊपर जम जाते हैं | राहुल नाभि में जीभ घुमाता उसे चाटता और चूसता है | सलोनी कमर को कमान की तरह तान रही थी | कमरे में बस उसकी सिसकियों और राहुल की भारी साँसों की आवाज़ आ रही थी | राहुल पेट पर होंठ सटाए अपना मुंह नाभि से नीचे, और नीचे, और नीचे लाता है और उसका मुंह सलोनी की लाल कच्छी की इलास्टिक को छूता है | सलोनी का बदन कांपने लगता है | उसके बेटे के होंठ उसकी चूत से मात्र कुछ इंच की दूरी पर थे | राहुल पहले अपनी जिव्हा कच्छी की इलास्टिक में घुसाता है और उसे सलोनी की कमर पर एक सीरे से दुसरे तक इलास्टिक में घुसाए रगड़ता है | फिर वो अपना चेहरा हटा लेता है और सलोनी के मुम्मो पर से भी हाथ हटा लेता है | सलोनी के मुम्मो की दुधिया रंगत उसके बेटे ने मुम्मो को चूस, चुम्म, चाट, मसलकर गहरे लाल रंग में तब्दील कर दी थी | मगर राहुल का ध्यान अब अपनी माँ के मुम्मो की और नहीं था | उसकी नज़र सलोनी की भीगी लाल कच्छी में से झांकती उसकी चूत पर था | राहुल की हरकतों से सलोनी इतनी गर्म हो चुकी थी कि उसकी चूत ने पानी बहा बहाकर सामने से पूरी कच्छी गीली कर दी थी | राहुल को अपनी चूत घूरते पाकर सलोनी की बैचेनी और भी बढ़ गई थी | राहुल की नज़र कच्छी में से झांकती अपनी माँ की चूत के होंठो पर ज़मी हुई थी | जिनसे भीगी कच्छी इस प्रकार चिपक गई थी कि सलोनी की चूत के होंठो के साथ साथ उनके बीच की हल्की सी दरार भी साफ़ नज़र आ रही थी | सलोनी बहुत बेताबी से राहुल के आगे बढ़ने का इंतज़ार कर रही थी | उस पर एक एक पल अब भारी गुज़र रहा था |
शायद राहुल अपनी माँ के बदन में छाये तनाव से उसकी बेताबी को भांप लेता है | वो अपना चेहरा नीचे लाता है | सलोनी गहरी और तीखी सांस लेती है | राहुल तब तक चेहरा नीचे करता है जब तक उसका चेहरा लगभग अपनी माँ की चूत को छूने नहीं लग जाता | राहुल अपनी माँ की चूत से आती खुशबू को सूंघ सकता था | वो चूत से नाक सटाकर गहरी सांस अन्दर खींचता है जैसे चूत को सूंघ रहा हो |
“उन्न्न्नग्ग्गह्ह्ह्हह्ह …..” सलोनी कराह उठती है | चूत की खुशबू में बसी मादकता और कामुकता से राहुल का अंग अंग उत्तेजना से भर उठता है और वो अपना चेहरा झुकाकर अपने होंठ अपनी माँ की चूत पर लगा देता है |
“हाएएएएएएएएएएह्ह्ह्ह …ओह्ह्ह्हह्ह…….” सलोनी के पूरे बदन में झुरझुरी दौड़ जाती है |
“आअह्ह्ह्ह……….” सलोनी नंगी चूत पर बेटे की जीभ से सिहर उठती है | राहुल कई बार जिव्हा को लकीर पर ऊपर से निचे सौर निचे से ऊपर फेरता है और फिर अपनी जिव्हा दरार में घुसा देता है और घुसाए हुए उसे फिर से ऊपर से निचे और निचे से ऊपर फेरने लगता है |
“राह्ह्ह्हूहूलल्ल …. ररररआह्ह्ह्हूहूलल्ल…..” सलोनी से बर्दाश्त नहीं हुआ और वो चीकने लग जाती है | सलोनी अपने सर पर हाथों का दवाब देकर खुद को कण्ट्रोल करने की कोशिश करती है |
राहुल अपनी माँ की प्रतिकिर्या से खुश और उत्साहित होकर अपना मुंह अपनी मम्मी की चूत पर दबा देता है | उसके होंठ चूत के होंठो पर दब जाते हैं और वो चूत के अन्दर गहराई तक जीभ घुमाने लगता है |
“आआअह्ह्ह्हहए ……बेटाआआअह्ह्ह्ह….” सलोनी ने ऐसा एहसास ज़िन्दगी में पहले कभी नहीं किया था | राहुल जितनी गहराई तक जीभ घुसा सकता था, घुसा रहा था और चूत को जीभ से चाट रहा था | अपने होंठो से वो चूत से बहकर आने वाले रस को लगातार चाटता जा रहा था | उधर सलोनी से चूत की नर्म और कोमल त्वचा पर राहुल की जीभ की रगड़ बर्दाश्त नहीं हो रही थी | चूत को जीभ से चाटते चाटते राहुल अपनी माँ के घुटने पकड़ उसकी टांगें पूरी चौड़ी कर देता है | अब चूत थोड़ी खुल गई थी | राहुल के सामने चूत का दाना थरथरा रहा था | राहुल अपने होंठ चूत के अन्दर तक घुसाते हुए चूत को चूसने चाटने की कोशिश कर रहा था |
“बेटा….उन्घ्ह्हह्ह…बे…टा…” सलोनी बेड की चादर को मुट्ठियों में भर चीख चिल्ला रही थी |
चूत को अन्दर तक जिव्हा से चूस चूस कर, चाट चाटकर राहुल अपना ध्यान सामने छोटे से चूत के दाने की और करता है और झट से उसे अपने होंठो में दबोच लेता है | उस पर अपनी जीभ रगड़ने लगता है |
“राहूल्ल्ल्ल….नहीईई..नहीईईईईईईईईईईईईईईइ…बेटाआआअह्ह्ह्ह…..उफफ्फ्फ्फ़…बेटा….आआआअह्हह्हह्ह…” सलोनी का पूरा बदन कांपने लगा | उसका पूरा बदन
झटके मार रहा था | राहुल अपनी मम्मी की हालत देखकर और जोश में आ गया था | उसने दाने को अपने होंठो में दबा जोर जोर से चुसना शुरु कर दिया |
“बेटाआआअह्ह्ह्ह….. नहीईईईईईईईईईईईईईईइ…प्ली…..ज….उफ्फ्फ्फ़…राहुल….” सलोनी दायें बाएं जोरो से सर पटकने लगी | उसके बदन में तेज़ कम्कम्पी होने लगी | वो अपनी गांड हवा में उठाकर अपनी चूत अपने बेटे के होंठो पर दबा देती है और अपने हाथ अपने मुम्मो पर रखकर खुद ही अपने मुम्मे मसलने लगती है |
राहुल को नहीं मालूम था उसकी माँ को क्या हो रहा था मगर वो इतना ज़रूर जानता था कि उसकी इस हालत का दोषी वो खुद था और वो यह भी जान चूका था कि उसकी माँ के जिस्म का सबसे संवेदनशील बिंदु जो उसे तडपने पर मजबूर कर सकता था वही चूत के ऊपर की और वो दाना था जिसे वो अपनी जिव्हा से सहला रहा था | जब भी उसकी जिव्हा दाने से टकराती थी उसकी मम्मी खुद पर पूरा नियंत्रण खो देती थी | इसीलिए उसने पूरे मुंह का दवाब उसकी चूत के दाने पर केन्द्रित कर दिया | उसे जीभ से सहलाते, दबाते, रगड़ते वो उसे होंठो में भरकर चूसता रहा | अचानक सलोनी के बदन में तनाव भरने लगा | वो अपनी कमर को कमान की तरह तान लेती है और अपनी टांगें राहुल की गर्दन पर लपेट देती है | वो जोर जोर से सर पटक रही थी | राहुल अपनी मम्मी की चूत में संकुचन को देख रहा था | राहुल एक पल के लिए भी नहीं रुका और ना ही उसने अपने होंठो और जीभ का दवाब कम किया |
“राहुल ….बेटा…उन्न्ग्गग्घ्ह …बेटाआ…..ऊह्ह्हह्ह….” अचानक सलोनी की चूत रस उगलने लगती है | सलोनी की देह और भी तेज़ झटके खाने लगती है | राहुल चूत से बाहर आ रहे रस को चुसना चालू कर देता है | वो पूरी चूत को अपने मुंह में भर लेता है और उसे चूसता है | अब जाकर उसे समझ आई थी कि उसकी माँ झड रही थी | उसने अपनी माँ की चूत को चाट चाट कर झाड दिया था |
“राहूल्लल्ल्ल ……बे..एएएएए…टा……हाएएएए….भगवान……आअह्ह्ह्ह….” सलोनी की चूत लगातार रस बहाए जा रही थी और राहुल उसे पीता जा रहा था |
वो एक बूँद भी जाया नहीं होने देना चाहता था | सलोनी के बदन के झटके अब कम होते जा रहे थे | उसके मुख से निकलने वाली सिसकियों की तीव्रता अब कम पड़ने लगी थी | उसके जिस्म की ऐंठन कम होने लगी थी और उसकी कमर वापिस बेड पर लौट आई थी | सलोनी के हाथ अपने मुम्मो पर ढीले पड चुके थे और उसकी जांघें अपने बेटे की गर्दन पर ढीली हो चुकी थी |
“बेटा….बेटा…बेटा…बेटा….” सलोनी के मुख से धीमी धीमी सिसकियाँ अभी भी फूट रही थी | एक बार जब सलोनी शान्त पड गई और उसने अपना जिस्म पूरी तरह ढीला छोड़ दिया तो राहुल ने अपनी माँ की गांड के निचे हाथ डालकर उसे ऊपर को उठाया ताकि उसकी चूत उभरकर उसके सामने आ जाये और वो उसे अच्छी तरह चाट चाट कर साफ़ करने लगता है | चूत के अंदरूनी हिस्से को साफ करके वो उसके बाहर चाटने चूसने लगता है | अपनी माँ की चूत को अच्छी तरह चाट चाट कर साफ़ करने के बाद वो उसकी गोरी जांघें चूमने लगता है |
“बेटा….बेटा….ओह्ह्ह्हह…बेटा….” सलोनी के होंठ धीरे धीरे बुदबुदा रहे थे | जाँघों को अच्छी तरह चूमने के पश्चात वो सलोनी की कमर को चुमते ऊपर को जाने लगता है | जिस तरह वो उसके पेट को चुमते हुए निचे आया था | अब ठीक बिलकुल वैसे ही वापिस ऊपर की तरफ जा रहा था | नाभि से सीधा ऊपर की और जाता वो जल्द ही वापिस अपनी माँ के मुम्मो पर पहुँच जाता है | यहाँ पर अभी भी उसकी माँ के हाथ थे | राहुल का चेहरा जैसे ही सलोनी के मुम्मो पर के ऊपर रखे हाथों से टकराता है तो वो अपने हाथ हटा लेती है और राहुल को अपने मुम्मे चूमने देती है | राहुल फिर से सलोनी के निप्पल बदल बदल कर चूस रहा था |
सलोनी अपने बेटे के बालों में उँगलियाँ घुमा रही थी | उस जबरदस्त सख्लन के पश्चात बिलकुल सुस्त पड चुकी सलोनी अब अपने जिस्म में कुछ हरकत महसूस कर रही थी |

