हवेली – Update 17
हवेली की ख़ामोशी बता रही थी की बहुत कुछ है इसके पास सुनाने को पर क्या मैं वो सही आदमी था, शायद ये भी ऐसा ही सोच रही होगी. कुलदीप रसिया टाइप था ये तो कन्फर्म हो चूका था पर वो हवेली में किसे पेल रहा था ये जानना न जाने क्यों जरूरी सा लगा. भूसन जो जानकारी दे सकता था उसे पहले ही निपटा दिया गया था . मैंने अगले कमरे के ताले को भी तोड़ दिया.
ये कमरा सबसे अलग था, सबसे जुदा. इसे देख कर इसमें रहने वाले की सकशियत का अंदाजा लगाना मुश्किल था कमरे में बड़ी सी टेबल पर बहुत सारी शराब की बोतले सजी थी . एक भी अलमारी नहीं थी कुछ जोड़ी कपडे जो खूँटी पर ही टाँगे गए थे. ऐसा भी भला क्या नशा जिसमे ठाकुर तेज ने खुद को डुबो दिया था. मैंने कमरे को खूब छाना पर यहाँ तो कुछ भी नहीं था . सोचते सोचते मेरा दिमाग ख़राब होने लगा था , मैंने एक बोतल खोली और दो पेग लगाये, इतनी बढ़िया शराब मैंने कभी भी नहीं पी थी तो उसका असर बढ़िया से हुआ.
नींद टूटी तो मैं बहुत ही घबरा गया , चारो तरफ गहरा अंधेरा पसरा हुआ था , कुछ समय लगा खुद को ये याद दिलाने में की मैं कहाँ पर हूँ . जी बहुत घबरा गया था दिन की बात अलग थी पर बरसों से वीरान पड़ी ईमारत में रात के न जाने कितने बजे मैं अकेला था ये ख्याल ही मूत निकालने को काफी था . दिल जोरो से धड़क रहा था , ऐसा लगने लगा था की अभी कोई मुझे पकड़ लेगा.
कमरे से निकल कर मैं लोब्बी में आया सीढियों की तरफ पैर रखे ही थे की अचानक से हुई जोर की आवाज ने मेरी आत्मा तक को कांपने पर मजबूर कर दिया.
“tannnnnnnnnnnnn ” कुछ इतनी जोर से गिरा था की उसकी आवाज ने हवेली की नींव तक को हिला कर रख दिया होगा. मैं बता नहीं सकता की कैसे मैंने अपने दिल को दौरा पड़ने से रोका होगा पर साथ ही इस शोर ने मुझे ये भी बता दिया था की मैं अकेला नहीं हूँ इस हवेली में. कौन होगा इस खयाल ने ही मुझे रोमांचित कर दिया था . आँखों को मसला और अँधेरे में देखने का अभ्यस्त होते ही मैं दबे पाँव निचे की तरफ आया.
मैंने हर तरफ तलाश की पर जिसने शोर के साथ अपनी आमद मह्सुश करवाई थी वो ख़ामोशी में खो चूका था . दबे पाँव किसी का हवेली में आना वो भी इतनी रात किसलिए. बाकी की रात मुझे एक पल के लिए भी नींद नहीं आई. सुबह जैसे ही रौशनी हुई मैंने तहकीकात की , जो भी था पैसो के लिए तो बिलकुल नहीं आया था हवेली में. क्योंकि कमरों में जो भी पैसे थी उनको छुआ भी नहीं गया था . तो फिर किस चीज की तलाश थी उसे.
मुझे चांदनी से इस बारे में बात करने की जरुरत महसूस हुई और जब हम लाल मंदिर पर मिले तो इस से पहले की मैं उसे कुछ कह पाता उसने मुझे अपनी बात से उलझन में डाल दिया.
चांदनी- अर्जुन, पता नहीं ये बात कैसी है पर अजीब जरुर है पिछली कुछ रातो से लगभग आधी रात को हमारे फ़ोन पर घंटी आती है
मैं- हाँ तो फ़ोन पर घंटी ही आएगी न
चांदनी- तू समझ नहीं रहा है , अर्जुन आधी रात को कोई क्यों किसी के घर पर फोन करेगा जबकि उसे बात ही न करनी हो
मैं- मतलब
चांदनी- रिंग आती है कट जाती है , फ़ोन उठाओ तो कोई बोलता नहीं .
मै- हो सकता है की तेरे भाई को करता हो कोई फ़ोन
चांदनी- पर रात को ही क्यों
मैं- क्योंकि कुछ बाते रात को ही हो सकती है लाडली
चांदनी- मुझे नहीं लगता क्योंकि कभी कभी भैया रात को नहीं होते तब भी ऐसा होता है .
मैं- तूने गौर किया कब से हो रहा है ऐसा
चांदनी- कुछ दिनों से .
मैं- तू सुन , अबकी बार तू फ़ोन उठाने बिलकुल मत जाना तू बस देखना की फ़ोन आने के बाद क्या होता है . दूसरी बात इस गाँव के लोगो को तू ज्यादा जानती है कोशिश कर की गाँव में कुछ भी अजीब हो रहा है क्या और हो सके तो चंदा को नौकरानी रख ले तेरे पास .
चांदनी- क्यों
मैं- कर तो सही ऐसा तू खुद समझ जाएगी.
चांदनी- तुझे लगता है ऐसा करना सही होगा .
मैं- मुझ पर भरोसा कर सकती है तू वैसे तुझे बता दू लाडली की कोई तो है की जो नहीं चाहता की हवेली की ख़ामोशी टूटे.
चांदनी ने अपने मुह पर हाथ रख लिया. मैंने उसके माथे को चूमा और बोला- हम दोनों की मंजिल एक ही है और हम दोनों इस सफ़र को साथ पूरा करेंगे.
न जाने क्यों मुझे चांदनी का साथ इतना अजीज लगने लगा था . उसका होना मुझे बहुत राहत देता था . शाम को मैं चंदा की झोपडी पर पहुंचा वो मोजूद नहीं थी हाथ पाँव धोने एक बाद मैं अन्दर गया और न जाने क्यों मेरा मन हुआ की उसके सामान की तलाशी ली जाये. पलंग के निचे एक संदूक पड़ी थी जिस पर ताला नहीं था ये जानते हुए भी की वो कभी भी आ सकती थी मैंने संदूक को खोल कर देखने का निर्णय लिया
संदूक में काफी चीजे थी ,एक तस्वीर थी जिसमे चंदा एक लड़की के साथ थी , एक जवान लड़की के साथ . चांदी के चार कड़े थे, एक गले में पहनने का कुछ था . हवेली की नौकरानी थी मालिको की बक्सिश रही होगी . पर जिस चीज ने मेरा ध्यान खींचा वो मुझे हैरान कर रही थी , चुदाई की तस्वीरों वाली एक पूरी किताब जिसके पन्ने बता रहे थे की ये भी पुराणी ही है . नौकरानी के सामान में वो किताब होना सवाल बन गया था ………………….

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