बाप खिलाड़ी बेटी महाखिलाडीन – Update 15 | Incest Sex Story

बाप खिलाड़ी बेटी महाखिलाडीन - Erotic Incest Story
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रेहाना की गांड रमेश के सामने थी. रमेश ने अब रेहाना की गांड पर अपना मुंह लगा दिया और उसकी गांड के छेद पर अपनी जीभ को गोल-गोल घुमा कर चाटता हुआ उसकी Xxx बूर को भी चाटने लगा.

चूसने चाटने की आवाजें होने लगीं- ऊम्म … हम्म … ऊउहह … याल्ला … चाटो अंकल, आह्ह मजा आ रहा है. हाह … और चाटो अंकल … आई लव यू अंकल … मेरी चूत आह्ह … चूस लो इसे.

रेहाना बेकाबू हो चली थी. फिर रमेश उठा और अपने कपड़े उतार कर नंगा हो गया.
रमेश के लंड को देख कर रेहाना हैरानी से बोली- बाप रे! इतना बड़ा और मोटा! इस उम्र में भी इतना टाइट खड़ा है?

रमेश- रंडी तू भी पड़ गयी न हैरत में? अरे मैं तो अभी भी तेरी जैसी रंडियों को पानी पिला दूं।
रेहाना- क्यों और कौन हैरत में पड़ गयी आपके करारे लंड को देख कर?
रमेश- थी एक तेरी ही जैसी रंडी … साली कुतिया। चल यह सब छोड़ और इसे चूसना शुरू कर!

रेहाना रमेश को देख कर मुस्कराई और सोफे से नीचे आकर अपने घुटनों पर बैठ गयी. रमेश का लंड हाथ में लेकर उसने मुंह में भर लिया और उसको जोर जोर से चूसने लगी.

कुछ देर लंड चुसवाने के बाद रमेश ने उसे गोद में उठाया और बेड पर ले जाकर पटक दिया. उसकी दोनों टांगों के बीच में बैठ कर उसने अपने लंड को रेहाना की Xxx बूर पर लगा दिया और धीरे धीरे घुसाते हुए पूरा लंड उसकी चूत उतार कर धक्के मारने लगा.

रेहाना मजे में सिसकारियां लेने लगी- आह्ह अंकल … ऊउउ … आह्ह … हम्म … फक मी … आह्ह … चोद दो अंकल।
कई मिनट तक वो रेहाना की चूत में धक्के लगाता रहा और फिर उसने लंड निकाल लिया. लंड को उसने रेहाना के मुंह के सामने कर दिया और रेहाना उसको मुंह में लेकर चूसने लगी.

फिर रमेश ने रेहाना को लिटा कर उसके दोनों पैरों को हवा में उठा कर उसके सिर के ऊपर मोड़ दिया और रेहाना की गांड अपने आप हवा में उठ गयी. अब रमेश खड़ा हो गया और अपना लंड रेहाना की गांड के छेद पर लगा कर पूरा उसकी गांड में उतार दिया. वो बिना देर किये धक्के मारने लगा.

रेहाना अब मजे से रमेश के लंड से अपनी गांड चुदाई का मजा लेने लगी. रमेश रगड़ रगड़ कर रेहाना की गांड मारता रहा और रेहाना चिल्ला चिल्ला कर मजा लेती रही.

वो इतनी चुदासी हो गयी कि उसने रमेश को नीचे पटक लिया और खुद ही उसके लंड के ऊपर बैठ कर उसके लंड पर कूद कूद कर चुदने लगी- आह्ह … ओह्ह यस बेबी … आह्ह फक मी … आह्ह उम्म … आह्ह … मर जाऊंगी मैं … हह याल्ला।

उसका ऐसा रूप देख कर रमेश भी अपने वीर्य वेग को नहीं रोक सका और उसने पांच मिनट में ही अपना सारा वीर्य रेहाना की गांड में खाली कर दिया. रेहाना अपनी उंगली से रमेश के वीर्य को गांड से निकाल निकाल कर चाटने लगी.

रेहाना- उम्म … बहुत टेस्टी है अंकल.
रमेश- और पीना चाहोगी?
रेहाना- बेशक।
रमेश- उसके लिए तुम्हें मुझसे दोबारा चुदने के लिए आना होगा।

वो बोली- अंकल मैं तो आपकी दीवानी बन गयी हूँ. जब बुलाओगे चली आऊँगी।
रमेश- अच्छा इतना पसंद आया मेरा लंड तुम्हें?
रेहाना- बिल्कुल।

उस रात रमेश ने रेहाना को किसी गली की कुतिया की तरह रात 3 बजे तक चोदा और अलग अलग पोजीशन में उसकी गांड मारी. उसके बाद वो दोनों एक दूसरे से लिपट कर सो गये.

सुबह ही दोनों की आंख खुली. रेहाना बाथरूम से फ्रेश होकर आयी और अपने कपड़े पहनने लगी.
रमेश- अपनी ब्रा और पैंटी रहने देना यहीं पर।
रेहाना- मतलब?

रमेश- मुझे चुदाई के बाद तुम जैसी रंडियों की ब्रा और पेंटी कलेक्ट करने की आदत है. एक बार मेरे सामने अगर किसी औरत की ब्रा और पैंटी खुल गयी तो खुल गयी। फिर वो मेरी हो जाती है.

रेहाना- अच्छा तो यह बात है, मगर मैं घर कैसे जाऊँगी?
रमेश- घर क्या तुम ब्रा और पेंटी में जाओगी? चुपचाप अपने ऊपर के कपड़े पहनो और चली जाओ।

वो मुस्करा कर उसके पास आई और उसका फोन उठा कर नम्बर लगाने लगी.

रमेश- किसको फोन लगा रही हो?
रेहाना केवल मुस्करा दी.

तभी रेहाना के फोन पर रिंग बजी और रमेश से बोली- यह मेरा नम्बर है. जब भी आप मुझे बुलाना चाहो, मुझे डायरेक्ट फोन कॉल कर देना. मैं चली आऊंगी.

रमेश भी मुस्करा दिया.
फिर रेहाना ने रमेश को उसका फोन वापस किया और कपड़े पहन कर जाने लगी और जाते हुए बोली- ये बात किसी को बताना नहीं.
फिर वो रूम से निकल गयी.

फिर रमेश भी कपड़े पहन कर वहां से निकल गया और घर पहुंचा.
दरवाजा रिया ने ही खोला.

रमेश ने रिया को देख कर एक शैतानी मुस्कान दी और उसके गले लगाते हुए बोला- गुड मॉर्निंग डार्लिंग!
रिया- गुड मॉर्निंग।

रमेश- पता है आज मैं बहुत खुश हूँ. मुझे कुछ नया मिला है।
रिया रमेश की बात सुनकर उलझन में पड़ गयी और बोली- क्या?
रमेश- यह तो सरप्राइज है. मैं आकर बताऊंगा. तब तक इंतज़ार करो।
रमेश मुस्कराते हुए अपने कमरे में चला गया.

रिया रमेश की बातें सुन कर सोच में पड़ गयी.

तभी उसका फ़ोन बजा.
रिया- हाँ बोल रेहाना, इतनी सुबह-सुबह कैसे याद किया?
रेहाना- मुझे तुझसे मिलना है।
रिया- ठीक है 1 घंटे में आती हूँ तेरे घर पर!

रेहाना- मुझे तुझसे अभी मिलना है।
रिया- अभी?
रेहाना- हाँ अभी, बहुत ही अर्जेंट काम है।
रिया- अब इतना भी अर्जेंट क्या है, तू मुझे फ़ोन पर ही बता दे।
रेहाना- अरे यार, यह फ़ोन पर बताने वाली बात नहीं है।

रिया- ऐसा भी क्या है जो तू मुझे फ़ोन पर नहीं बता सकती. जब हम फ़ोन पर अपने बिज़नेस की बातें कर सकते हैं तो फिर उससे बड़ी और क्या बात हो सकती है?
रेहाना- उससे भी बड़ी बात है।
रिया- अच्छा तब तो मुझे अभी जानना है कि ऐसा क्या है?

रेहाना- नहीं, तू मुझसे मिल पहले, तभी बताऊंगी।
रिया- नहीं, तू अभी बता।
रेहाना- नहीं, तू मिल तो सही।
रिया- रेहाना, तुझे तेरी बिज़नेस की कसम तू अभी बता।

खीझकर रेहाना बोली- साली तू बहुत ज़िद्दी है. ऐसे नहीं मानेगी. ठीक है अभी तू कहाँ है?
रिया- घर में।
रेहाना- पहले तू घर से कहीं बाहर निकल तब बताऊँगी।
रिया- ओहो! यार क्या ड्रामा है ये, लोचा क्या है बताएगी मुझे? चल ठीक है आती हूं. रुक।

रति को आवाज देते हुए रिया बोली- मां, मैं गार्डन में हूं.
रति- ठीक है बेटा।
रिया गार्डन में गयी और फिर से रेहाना से बात करने लगी.
रिया- हां अब बोल, क्या बात है?

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