मेरे गाँव की नदी – Update 62 | Incest Sex Story

मेरे गाँव की नदी – Incest Sex Story
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कल्लू अब गुड़िया की कमर पकड़ कर चोदने लगा.. उसके हाथ गुड़िया की मुलायम गाण्ड को भी सहला रहे थे। बीच-बीच में वो गुड़िया की गाण्ड के छेद में उंगली भी घुमा रहा था।
थोड़ी देर की मस्ती के बाद गुड़िया फिर से गरम हो गई और गाण्ड को पीछे धकेल कर कल्लू के मज़े को दुगुना बनाने लगी।
गुड़िया- आह.. आह.. पेलो भाई.. आह्ह.. आज के दिन हर तरीके से मुझे चोदो.. आह.. आह.. जोर से पेलो.. और तेज भाई आह्ह.. मज़ा आ रहा है।

कल्लू अब तेज़ी से चोदने लगा। उसका लौड़ा अब फूलने लगा था। चूत की गर्मी से पिघल कर आख़िर कर कल्लू के लौड़े ने रस की धारा चूत में मारनी शुरू कर दी। उसका अहसास पाकर गुड़िया की चूत भी झड़ गई। दो नदियों के मिलन के जैसे उनके कामरस का मिलन हो गया।

अब दोनों ही शान्त पड़ गए.. गुड़िया की कमर में दर्द होने लगा था। जैसे ही कल्लू ने लौड़ा बाहर निकाला.. वो बिस्तर पर कमर के बल लेट गई और लंबी साँसें लेने लगी। कल्लू भी उसके पास ही लेट गया।
गुड़िया- उफ़फ्फ़ भाई.. इस बार तो आपने बहुत लंबी चुदाई की.. आह्ह.. आपने तो मेरी चूत की हालत बिगाड़ दी।

कल्लू- तुम्हें ही चुदवाने का चस्का लगा था.. अब लौड़े के लिए तड़फी हो.. तो पूरा मज़ा लो।
गुड़िया- मज़ा ही तो ले रही हूँ..आज तो चुदवाने ने बहुत मज़ा आया। मगर आप ये मेरी गाण्ड में उंगली क्यों डाल रहे थे?

कल्लू- गुड़िया सच कहूँ.. तेरी गाण्ड देख कर मन बेचैन हो गया है.. ऐसी मटकती गाण्ड.. उफ़फ्फ़ इसमें लौड़ा जाएगा.. तो मज़ा आ जाएगा.. बस यही देख रहा था कि अबकी बार मैं तेरी गाण्ड ही मारूँगा.
गुड़िया-नहीं भइया.. आज शुरूआत में ही सारे मज़े लूट लोगे क्या..अभी का मेरा हो गया.. अब बाद में देखते हैं.. आप चूत मारते हो या गाण्ड..

कल्लू- अरे अभी कहाँ थक गई यार.. अभी तो बहुत पोज़ बाकी हैं.. तुम्हें आज अलग-अलग तरीके से चोदूँगा और प्लीज़ गुड़िया तुम्हारी मुलायम गाण्ड मारने दो ना.. प्लीज़..
गुड़िया- नो नो भाई.बहुत दर्द होगा।तुमने पहले बताया नहीं ।नहीं तो मैं तेल लेकर आती।
कल्लू-अरे गुड़िया।मेरे पास सारा इंतज़ाम है।मैंने तेल की शीशी भी रखी है।
गुड़िया-ठीक है भइया ।गांड बाद में मार लेना।

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