मेरे गाँव की नदी – Update 48 | Incest Sex Story

मेरे गाँव की नदी – Incest Sex Story
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वह पानी में हाथ चला कर आगे बढ़ने की कोशिश करने लगी और कल्लु उसकी गाण्ड में लंड लगाए हुए उसे ताकत से आगे की ओर दबाने लगा, कल्लु का हाथ बार बार अपनी माँ के मोटे मोटे रसीले आमो को छु रहा था और फिर कल्लु ने अपनी माँ के पके आमो को एक बारगी तो अपने हांथो में भर कर थाम लिया और निर्मला की चुत से पानी बह निकला, कुछ देर तक कल्लु अपने लंड को अपनी माँ की गुदाज गाण्ड में दबाये हुए उसके मोटे मोटे दूध को सहलाता हुआ उसे दबाता रहा फिर उसने अपनी माँ से कहा माँ मै तेरी कमर पकड़ लेता हु तू तैरने की कोशिश कर और अपने हाथ पैर चला और फिर कल्लु ने अपनी माँ के मोटे मोटे गुदाज चूतडो को जब अपने हांथो में भर कर दबाया तो उसके आनंद की सीमा न रही उसने पहली बार इतने मुलायम भरे भरे चूतडो को दबोचा था उसका लंड तो ऐसा लग रहा था जैसे पानी छोड़ देगा उसे आज पहली बार एह्सास हुआ था की उसकी माँ के चूतडो को मसलने में कितना मजा आ रहा था।

वाह पागलो की तरह अपनी माँ के चूतडो को दबा दबा कर सहला रहा था तभी उसकी माँ का घाघरा थोड़ा ऊपर हो गया और कल्लु के हाथ में अपनी माँ की मस्त मोटी मोटी तन्दुरुस्त जाँघे आ गई और वह अपनी माँ की जांघो की चिकनाहट और मोटाई को महसूस करके मस्त हो रहा था, कल्लु से रहा नहीं गया और उसने अपने हाथो से अपनी माँ के नंगे चूतडो को थाम लिया और इस बार कल्लु का लंड अपनी माँ की नंगे चूतडो की गहरी दरार में जाकर धंस गया और निर्मला के मुह से आह निकल गई।

कल्लु : क्या हुआ माँ तुझसे तैरते बन रहा है ना।
निर्मला आह हाँ बेटे बन रहा है पर तू मेरी कमर को और कस के थाम ले कही मै डूब न जाउ, निर्मला का इतना कहना था की कल्लु ने अपनी माँ के गुदाज पेट को दोनों हाथो में भर कर अपने लंड को और ज्यादा ताकत से अपनी माँ की मोटी गाण्ड की दरारो में पेल दिया और निर्मला सिहर उठी।
कालू : अब ठीक है माँ मैंने तुझे अच्छे से जकड लिया है।

 

निर्मला: सीसियते हुये, हाँ कल्लु जरा और कस के मुझे पकड़ ले कही मै डूब न जाऊ इस बार कल्लु ने अपने हांथो में अपनी माँ के रसीले पके हुए आमो को थाम लिया और अपने लंड को खूब कस कर अपनी माँ की गाण्ड में दबा दिया जिससे उसका लंड गाण्ड के छेद से रगड़ता हुआ निर्मला की चुत की फांको के बीच जाकर फंस गया। ठन्डे पानी में भी कल्लु को अपनी माँ की गरम चुत का एह्सास हो रहा था और वह अपनी माँ के मोटे मोटे दूध को मसलता हुआ अपने लंड को बराबर अपनी माँ की गाण्ड की दरार में दबाये जा रहा था। निर्मला पागलो की तरह पानी में हाथ चला रही थी तभी कल्लु ने अपनी माँ की कमर को थाम लिया और अपने पैरो को और पीछे गहराई में ले जाने लाग, उसके ऐसा करने से निर्मला घबराने लगी और कहने लगी बेटा ज्यादा बीच में न जा कही मै डूब न जाऊँ।

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