मेरे गाँव की नदी – Update 4 | Incest Sex Story

मेरे गाँव की नदी – Incest Sex Story
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गीतिका : मुस्कुराते हुये, अब कैसी लग रही हु भैया,
कालू : अच्छी लग रही हो।
गीतिका : अच्छा भैया मै आपको पहले ज्यादा अच्छी लग रही थी या अब।
कालू : मुस्कुराते हुए सच कहु तो तू जीन्स और टॉप में मुझे ज्यादा सुन्दर लग रही थी।
गीतिका : मै जानती हु भैया और गीतिका फिर मुस्कुराने लगी, कुछ भी कहो गीतिका इस बार और बार की अपेक्षा कुछ बदली हुई लग रही थी।
गीतिका : भैया अब तो यह खटारा साइकिल बेच दो और कोई बाइक का जुगाड़ करो।

कल्लु : अरे वह तो ठीक है पर यहाँ गाड़ी चलाना आती किसे है।
गीतिका : वह तो मै आपको सीखा दूंगी।

मैने साईकल के पीछे गुड़िया का बैग बांध दिया और फिर साईकल पर चढ़ कर उसे साईकल का डंडा दिखाते हुए कहा, आजा गुड़िया डण्डे पर बैठ जा
गीतिका मेरी बात सुन कर खिलखिला कर हँस पड़ी इस बार तो मै भी उसकी हँसी का मतलब समझ गया था, गीतिका का चेहरा कुछ लाल हो रहा था और वह साईकल के आंगे के डण्डे पर बैठ गई जब वह बेठी तो उसके मोटे मोटे चूतडो से मेरा लंड जो की खड़ा हो गया था टकराने लगा और मै एक दम से सिहर गया,
उपर से गीतिका के बदन से बहुत ही मस्त खुशबु आ रही थी, मै धीरे धीरे साइकिल चलाने लगा और गुड़िया से बात करने लगा।

कल्लु : गुड़िया इस बार कितने दिनों की छुट्टी पर आई है
गीतिका : भैया ८-१० दिन तो रहुँगी।
कालू : तेरी पढाई का क्या पुछु वह तो अच्छी ही चल रही होगी, आखिर तू इतनी होशियार तो है।
गीतिका : आखिर बहन किसकी हूँ।
कालू : अरे इसमें तेरे भैया का क्या बड़प्पन हुआ यह तो सब तेरी मेहनत का नतीजा है, पर यह तो मर्दो जैसे कपडे कब से पहनने लगी, क्या वह सब ऐसे ही कपडे
पहनती है।
गीतिका : भैया आज कल ऐसा ही जमाना है, सब या तो मिनी स्कर्ट या फिर जीन्स पहनती है।
कालू : मिनी स्कर्ट मतलब।
गीतिका : भैया जो स्कर्ट घटनो से भी ऊपर रहती है। उसे मिनी स्कर्ट कहते है।
कालू : तो क्या बड़ी उम्र की औरते भी जीन्स या वह मिनी स्कर्ट पहनती है।
गीतिका : हाँ भैया तुम देख लो तो कहोगे की कैसे यह औरते अपने भारी शरीर पर जीन्स पहन कर निकलती है।

कल्लु : क्या हमारी माँ जैसी औरते भी जीन्स या स्कर्ट पहनती है।
गीतिका : हाँ भइया, आज कल सब औरते ऐसे ही कपडे पहनती है।
कालू : तो गुड़िया उन्हें शर्म नहीं आती होगी, ऐसे कपडो में तो बड़ी उम्र की औरते न जाने कैसी दिखती होगी।
गीतिका : क्यों मै जीन्स में आपको अच्छी नहीं लग रही थी।
कालू : नहीं तू तो बहुत अच्छी लग रही थी।
गीतिका : तो फिर अब यह बताओ अगर वह जीन्स माँ पहनेगी तो क्या अच्छी नहीं लगेगी।

कल्लु : पता नही।
गीतिका : पता नहीं क्या अगर तुम माँ को जीन्स और टीशर्ट में देख लो तो तुम तो उन पर मर मिटोगे।
कालू : मतलब।
गीतिका : ओह भैया आप भी न बहुत भोले हो यही नुकसान है गांव में रहने के, अरे बाबा माँ जब यह कपडे पहनेगी तो बहुत सेक्सी नजर आएगी।
अच्छे अच्छे पागल हो जाएगे उन्हें देख कर।
कालू : ये सेक्सी का क्या मतलब होता है गुडिया, मै जानता था लेकिन गीतिका मुझे कुछ ज्यादा ही भोला समझती थी लेकिन वह यह नहीं जानती थी की मेरा भी
एक दोस्त है गोपी जो शहर में रहता था और
वह मुझे नई नई बाते बताता रहता था, सेक्स की बाते भी उसने मुझे बताइ थी इसलिए मुझे उसका मतलब पता था, मै यह तो समझ गया था की गीतिका
जितनी दिखाई दे रही है वह उससे कही ज्यादा सेक्सी है पर इस बार उसमे कुछ ज्यादा ही बदलाव दिखाई दे रहा था।

गीतिका : मुस्कुराते हुये, भैया अब मै आपको सेक्स का मतलब कैसे बताऊ।
कालू : अरे बोलने वाली चीज न हो तो कर के दिखा दे मै समझ जाऊँगा
मेरी बात सुन कर गीतिका ठहाके लगा कर हॅसने लगी और कहने लगी भैया आप बहुत बुद्दू हो, आपको तो सच में कुछ भी नहीं पता, अगर यह बात
आप शहर में मेरे दोस्तों के सामने बोलते तो लोग आपका मजाक उड़ा उड़ा कर इतना हँसते की उनका पेट् दुखने लगता।
कालू : अरे हमने ऐसा क्या कह दिया, हमको अब उसका मतलब पता नहीं है तो हम क्या करे।

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