Reading Mode

अध्याय 16

इधर किशन अपने किये पर पछता रहा होता है ,उसने कभी किसी से माफ़ी नहीं मांगी थी,पर आज ना जाने उसका दिल ये क्यों कर रहा था की वो जाय और सुमन से माफ़ी माग ले ,लेकिन वो उससे नजरे चुरा रहा था जिसका आभास सुमन को हो चूका था,ऐसे तो किशन आज भी नशे में था,पर उसके तेवर बदले से थे ,निधि और सुमन बैठे इधर उधर की बाते कर रहे थे,तभी निधि ने सुमन से कुछ लाने को कहा ,सुमन उठ कर निधि के रूम की और बढ़ी रास्ते में उसे किशन आता हुआ दिखा,किशन का धयान उसपर नहीं था ,की अचानक उसने सुमन को देखा और नजरे झुकाए थोडा अलग जा कर खड़ा हो गया ,इस बात को सुमन ने नोटिस कर लिया और उसके पास से गुजरती हुई वो रुक गयी ,किशन अपनी नजरे दूसरी तरफ किये हुए था,उसे जैसे ही आभास हुआ की सुमन उसके पीछे ही खड़ी है वो झट से पीछे मुड़ा,
“तुम “किशन की आवाज भी भारी हो चली थी ,वही सुमन उसे घूरे जा रही थी ,
“कुछ कहना है तो कह दीजिये ठाकुर साहब क्यों खुद को जला रहे है ,हम तो गरीब लोग है हमारे इज्जत की कोई कीमत नहीं होती ,फिर आप क्यों यु अपना चहरा उतारे घूम रहे है “सुमन अभी भी उसे घुर रही थी,

“मैं वो मैं “किशन के लिए कहना मुस्किल था क्योकि उसे खुद ही नहीं पता था की उसे क्या कहना है ,उसके शब्द बड़ी मुस्किल से निकल पाए,
“मुझे माफ़ कर दो ,मुझसे गलती हो गयी ,मैंने आज तक कभी भी किसी के साथ यु जबरदस्ती नहीं की है ,पर कल शायद नशे में ….”किशन आगे कुछ नहीं कह पाया उसकी नजरे अभी भी निचे थी ,वही सुमन के चहरे पर एक मुस्कान आ गयी,
“आप एक नौकर से माफ़ी मांग रहे है ठाकुर साहब ये तो आपको शोभा नहीं देता ,आप तो मेरी माँ और मेरे भाई को मरने वाले थे ,आप कल जो भी करते मैं आपको ना नहीं कह पाती पर क्या हुआ की आप मुझ अभागन को बक्स दिए “किशन शर्म से पानी पानी हो रहा था,ना जाने कितनी लडकियों की इज्जत से खेलने वाला शख्स आज खुद शर्मिंदा खड़ा था,

“मुझे अपनी बहने याद आ गयी ,तुम्हारी बाते मुझे दिल से दहला गयी ,मैं तुम्हारी जगह अपनी बहनों को रखा और मेरी रूह काप उठी,मैंने कितनी ही लडकियों के साथ,,,,,,पर आज तक मैंने किसी से जबर्दस्ती नहीं की है ,मुझे माफ़ कर दो और पता नहीं तुममे ऐसा क्या है की मैं अपने को रोक नहीं पाया ,तुम मुझे अच्छी लगती हो पर वो ,,,….ओओह सॉरी मुझे …..यानी मेरा मतलब है की मैं ……मैं जबर्दस्ती नहीं करना चाहता था,लेकिन वो …” किशन को कहने को शब्द नहीं मिल रहे थे वही किशन का मतलब समझ सुमन की दिल की धड़कने बदने लगी उसे समझ नहीं आ रहा था की वो कैसा रियेक्ट करे ,जो आदमी कल उसकी इज्जत लुटने वाला था वो आज उससे डर रहा है यही नहीं वो कह रहा है की वो मुझे पसंद करता है ,सुमन बड़े ही उलझन में फस चुकी थी ,वो ये भी जानती थी की किशन झूट नहीं कह रहा है और ना ही एक्टिंग ही कर रहा है ,उसने छोटी सी उम्र में बहुत दुनिया देखि थी ,उसे अच्छे बुरे का ज्ञान तो था ,ना जाने कितने लोग उसे बुरे नजरो से देखते थे ,और ना जाने कितनो ने उसे खरीदने की और पटाने की कोसिस की थी पर उसने कभी आपने आत्मसम्मान से समझोता नहीं किया था ,लेकिन आज जो शख्श उसके सामने था वो झूट नहीं कह रहा था ,उसे तो पता ही नहीं था की वो कुछ कह गया वो बात उसके दिल के किसी कोने से अनजाने में निकल गयी थी जिसे वो रोकना चाहता था,पर किशन की बातो में कितनी भी सच्चाई क्यों ना हो सुमन को ये पता था की किशन उससे दिल से प्यार नहीं कर सकता ,और कर भी लिया तो कभी उसे अपना नहीं बनाएगा ,कहा किशन कई करोडो का मालिक और कहा वो एक नौकरानी,….उसने अपने होठो में आती मुस्कान को सम्हाला और इस बात के आभास ने उसके होठो में मुस्कान की जगह एक दर्द भरी उदासी ला दि ,वो अपने मुफलिसी के दर्द का अहसास कर मुस्कुरा पड़ी ,
“हम नौकर है साहब ,हमें पसंद कीजिये ,हमारा इस्तमाल कीजिये लेकिन दिल से ना लगाइए,”सुमन के होठो की दर्द भरी मुस्कान ने किशन के दिल को छल्ली छल्ली कर दिया ,सुमन वहा से चली गयी और किशन ……वो बस उसकी बातो की गहराई और दर्द के आभास को महसूस करता खड़ा उसे जाते हुए देखता रहा……..
इधर
अजय और बाली बैठे बाते कर रहे थे की एक नौकर भागता हुआ उनके पास आया ,
“ठाकुर साहब वो कोई मेहमान आये है साथ में कोई मेमसाहब भी है ,”अजय ने बड़े ही आश्चर्य से उसे देखा वो बाली के साथ बहार गया ,एक बड़ी सी कार खड़ी थी और एक औरत काले कलर की साड़ी पहने उस कार के पास खड़ी थी ,उसके गोर रंग और मादक जिस्म पर वो साड़ी कमाल की लग रही थी ,कहा जाय तो जैसे सनी लिओन काले साड़ी पहन कर खड़ी हो ,अजय उसे पहचानने की कोसिस कर ही रहा था की बाली के मुह से निकला ,
“अरे मेरी तुम लोग आ गए ,”अजय को याद आया की ये तो मेडम मेरी है ,डॉ चुतिया की सेकेटरी ,उसने नजरे घुमाई उसे डॉ कार से थोड़ी दूर अजय के गार्डन में एक पौधे को बड़े गौर से देखते हुए दिखाई दिए ,मेरी आगे बढकर बाली के गले लगती है और फिर अजय के इससे अजय थोडा गबरा जाता है जिसे देखकर बाली और मेरी दोनों हस पड़ते है ,
अजय और बाली फिर डॉ के पास जाते है ,

“अरे डॉ साहब क्या देख रहे हो ,”बाली उसके पास जाता है डॉ उठकर उससे गले मिलता है ,और अजय उसके पैर छूता है पर डॉ उसे भी अपने गले लगा लेता है ,
“कुछ नहीं यार बस इस पौधे को देख रहा हु ,ये बूट जोलोकिया है ना ,”सब उन्हें आश्चर्य से देखते है ,
“ये तो मिर्ची का पौधा है डॉ साहब ,अभी इसमें मिर्च नहीं आये है पर हमरे एक दोस्त ने इसे गिफ्ट दिया था ये इसे असम से लाये थे ,बस एक ही पौधा है ,”
“हम्म सायद तुम्हे नहीं पता इसका नाम है बूट जोलोकिया ये विश्व की सबसे तीखी मिर्चियो में एक है ,इसे नागा चिली भी कहते है और बहुत से नाम है इसके ,इसे अलग ही रखना और कभी नग्गे हाथो से नहीं छूना ,अगर इसमें मिर्च लग जाय तो बढ़िया है वरना ऐसे मौसम में ये सायद ही होगा ,”डॉ बड़े गंभीरता से बता रहे थे की मेरी ने कहा ,
“विजय कही दिखाई नहीं दे रहा है “उसकी बातो से जहा अजय घबरा जाता है वही डॉ के चहरे में मुस्कान आ जाती है ,
“आप लोग अंदर आइये ना “अजय बड़े requast के भाव से कहता है ,

Please complete the required fields.