मैं अपने रूम में बहुत ही टेन्स होकर लेटा था ,और पार्टी में हुए हादसे के बारे में सोच रहा था,की मेरे मोबाईल पर एक मैसेज आया
‘हाय ‘मैंने unkonwn नंबर देख थोडा ठिठका
‘हाय आप कौन ‘
‘हह्म्म्म मुझे तो लगा की जिसे देखकर आप बेहोश हो गए उसका नंबर तो अभी तक निकल ही लिया होगा ,पर आप तो लगता है बहुत सुस्त आदमी है,मिलकर भी बात नहीं किये कोसिस भी नहीं की ,ओके अगर आपको कोई इंटरेस्ट नहीं है तो सॉरी ,’आयशा ओ माय #$@$% आयशा ने मुझे मेसेज किया मेरी तो पूरी चिंता फिकर तन्हाई ,जुदाई ,हवाई सब ही उड़ गयी ,
‘नहीं वो मैं ,आपको नंबर किसने दिया ‘मैं गलत जा रहा था या सही ?????
‘राहुल ने कहा था की आपसे बात कर लू ,आप बात करना चाहते है ,कहिये क्या कहना था आपको ,उस दिन के लिए सॉरी बोलना चाहते हो तो कोई बात नहीं इट्स ओके ‘अब इससे क्या बात करू ,साला किसी तो try कर ही लेना था काश ……
लेकिन बात याद आई दिल से करो ,मैंने दो तीन गहरी सांसे ली और
‘कुछ नहीं आपको देखा तो मैं खो ही गया आप बहुत सुन्दर हो ,’
‘अच्छा हर लड़की सुन्दर होती है ,कोई नयी बात ,’
‘आप मेरे लिए बहुत मायने रखती हो जीतनी कोई और नहीं रखती ,’थोडा देर का सन्नाटा
‘क्यों मैं आपकी कोण हु ..’मेरी सांसे रुक गयी मैं सोचने लगा वो मेरी कौन है और एक मेसेज मेरे हाथो से लिखता चला गया ..
”कैसे बताऊँ मैं तुम्हें….
मेरे लिये तुम कौन हो……
कैसे बताऊँ !!!
कैसे बताऊँ मैं तुम्हें
तुम धड्कनॊं का गीत हो,
जीवन का संगीत हो!
तुम जिन्दगी, तुम बन्दगी !
तुम रोशनी, तुम ताजगी!
तुम हर खुशी, तुम प्यार हो !
तुम प्रीत हो, मनमीत हो !
आँखों में तुम, यादों में तुम !
साँसों में तुम, आहों में तुम !
नींदों में तुम, ख्वाबों में तुम !
तुम हो मेरी हर बात में…
तुम हो मेरे दिन रात में !
तुम सुबह में तुम शाम में !
तुम सोच में तुम काम में !
मेरे लिये पाना भी तुम !
मेरे लिये खोना भी तुम !
मेरे लिये हँसना भी तुम !
मेरे लिये रोना भी तुम !……… और जागना सोना भी तुम !!!
जाऊँ कहीं देखूँ कहीं…
तुम हो वहाँ…तुम हो वहीं !
कैसे बताऊँ मैं तुम्हें…….. तुम बिन तो मैं कुछ भी नहीं !!!
कैसे बताऊँ मैं तुम्हें….मेरे लिये तुम कौन हो !!!
ये जो तुम्हारा रूप है…ये जिन्दगी की धूप है !
चन्दन से तरसा है ये बदन …बहती है ईसमें एक अगन !
ये शोखियाँ ये मस्तियाँ …. तुमको हवाओं से मिली !
जुल्फ़ें घटाओं से मिली !
होठों में कलियाँ खिल गयीं….. आखों को झीलें मिल गयीं !
चेहरे में सिमटी चाँदनी….. आवाज में है रागिनी !
शीशे के जैसा अंग है…फ़ूलों के जैसा रंग है !
नदियों के जैसी चाल है… क्या हुस्न है ..क्या हाल है !!!
ये जिस्म की रंगीनियाँ…… जैसे हजारों तितलियाँ !
बाहों की ये गोलाईयाँ…. आँचल में ये परछाईयाँ !!!
ये नगरियाँ हैं ख्वाब की…..कैसे बताऊँ मैं तुम्हें..हालत दिल – ऎ – बेताब की !!!
कैसे बताऊँ मैं तुम्हें….मेरे लिये तुम कौन हो !!!
कैसे बताऊँ….कैसे बताऊँ….
कैसे बताऊँ मैं तुम्हें….मेरे लिये तुम धरम हो !!!
मेरे लिये ईमान हो !
तुम ही ईबादत हो मेरी…… तुम ही तो चाहत हो मेरी !
तुम ही अरमान हो मेरा !
तकता हूँ मैं हर पल जिसे.. वही तो तस्वीर हो तुम.
तुम ही मेरी तकदीर हो.
तुम ही सितारा हो मेरा…. तुम ही नजारा हो मेरा.
यूँ ध्यान में मेरे हो तुम..जैसे मुझे घेरे हो तुम.
पूरब में तुम, पश्चिम में तुम!!!….उत्तर में तुम, दक्षिण में तुम !!!
सारे मेरे जीवन में तुम.
हर पल में तुम…हर छिन में तुम !!!
मेरे लिये रस्ता भी तुम…. मेरे लिये मन्जिल भी तुम.
मेरे लिये सागर भी तुम..मेरे लिये साहिल भी तुम.
मैं देखता बस तुमको हूँ….मैं सोचता बस तुमको हूँ.
मैं जानता बस तुमको हूँ… मैं मानता बस तुमको हूँ.
तुम ही मेरी पहचान हो…!!!
कैसे बताऊँ मैं तुम्हें…. देवी हो तुम मेरे लिये.
मेरे लिये भगवान हो !!!
कैसे बताऊँ मैं तुम्हें….मेरे लिये तुम कौन हो !!!
कैसे……….. ????” (नोट ==> ये ओरिजनल जावेद अख्तर साहब की लिखी रचना है )
मैंने मेसेज सेंड किया ,और फिर थोड़ी देर तक एक खामोशी मुझे अपने दिल की बात कहने का सुख मिल गया था ,पर ना जाने आयश की हालत क्या थी ,लेकिन थोड़ी देर में ही ,
‘हम्म्म ओके सब लड़के ऐसे ही होते है ,मैं सो रही हु बाय गुड नाईट ‘मेरे चहरे पर उसके atitude को देख एक मुस्कान आ गयी ,
‘ओके बाय गुड नाईट ,और बाकियों का नहीं परा मैं तो तुम्हारे लिए यही सोचता हु ,’मेरा दिल हल्का हो गया था ,और मुझे सच में कोई फर्क नहीं पड़ रहा था की वो क्या सोच रही होगी ,

