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मैं अपने रूम में ध्यान में बैठा था आज पहली बार मैं ध्यान करने बैठा था जैसा की डॉ ने मुझे बताया था,मुझे पहले पहल बड़ी बेचैनी का अहसास हुआ वही थोड़ी देर बाद मैंने पाया की मेरे विचार मेरे सामने चल रहे है जैसा की कोई टीवी की स्क्रीन है ,मैंने एक घंटे का अलार्म दे रखा था इसलिए निश्चिंत हो मैं बैठा था,मेरा शारीर धीरे धीरे शांत होने लगा,लगातार विचारो का ये प्रवाह मेरे मन को कभी बेचैन करने लगा था पर मुझे डॉ की बाते याद आ गयी की बैठे रहो देखो की क्या हो रहा है,देखो अपने विचारो को ,मैं बैठा ही रहा की मेरे सामने एक घना जंगल आया वह कई लोगो की भीड़ थी ,जंगल में लोगो की भीड़ बात कुछ समझ नहीं आती वो भी बिलकुल शहर के से लोग,पर विचार अगर सब्कोन्सिअस(अवचेतन ) से आये तो उसमे लोगिक नहीं होता,किन्तु सत्य की परछाई होती है,मैंने देखा बड़ी दौड़ भाग चल रही है ,कई नेता भाषण दे रहे है ,कई अजीब चहरो को हस्ते पाया…मैं देखता रहा कुछ देर में सभी लगभग खली हो गए फिर मैंने एक कमरे को देखा देखा की एक कमरा है वह एक आदमी को मारा जबरदस्ती फांसी में चढ़ाया जा रहा है ,मैंने उसका छटपटाना देखा ,थोडी देर में ही वो विचार भी ख़तम हो गया ,मैंने फिर एक विचारो की भीड़ का सामना किया और एक भोर से धुंधले कमरे में एक स्त्री को नग्न होते देखा देखा की वो मचलती हुई एक लड़के के पास जा रही है और वो लड़का बड़े ही इत्मीनान से उसका मटकना देख रहा है,लड़की धीरे धीरे उसके पास जाती है उस लड़के के साथ सो जाती है और अचानक दोनों मुझे देखते है और जोरो से हस्ते है वो चहरे मेरे जेहन हो कापा का रखा देते है ,वो चहरे थे दीदी और राहुल के ,मैं डर से कापने लगा और बहुत ही जल्दी अपनी आँखे खोली मैं उस समय हाफ रहा था ,सामने दीदी बैठी मुस्कुरा रही थी पर मेरे डरने से वो भी डर गयी और हडबडाते हुए मेरे पास आई,दीदी को देखते ही मेरी रूह तक काप गयी मैं सपने और हकीकत में फर्क नहीं कर पा रहा था,की दीदी ने मुझे झकझोर दिया ,

‘भाई भाई क्या हुआ क्या हुआ,’मैं भी अपने को सम्हाला मुझे समझ आया की ये महज विचार ही थे ,मैंने दीदी को सम्हालते हुए उन्हें अपने ठीक होने का दिलासा दिलाया ,थोड़ी देर में हम दोनों नार्मल हो गए ,

‘अरे ये क्या कर रहा था तू और क्या हुआ था तुझे ,’अब मैं दीदी के गोद में सोया हुआ था और वो मेरे बालो को सहला रही थी ,

‘कुछ नहीं दीदी ध्यान कर रहा था,’

‘अरे ध्यान में लोग शांत होते है और तू डर रहा था ,और तुझे क्या जरुरत है इन सबकी ,किसने कहा है ये सब करने के लिए ,’मैंने थोड़ी देर सोच पर मैंने कुछ सच और कुछ झूट का कोम्बिनेसन परोसना ही सही समझा,

‘दीदी वो मैं आज डॉ चुतिया के पास गया था,वो क्या है ना की मुझे बहुत डर लग रहा था आयशा के पास जाने में और वापस आता तो राहुल मजाक उडाता इसलिए मैं घुमाता डॉ के पास चला गया उन्होंने कहा की तू मैडिटेशन कर तुझे शांति मिलेगी,तो मैंने आज try किया पर कुछ आजिबो गरीब चीजे दिखने लगी और मैं डर गया और आँखे खोल दि डॉ ने कहा था की एक घंटे बैठना और मैं (मैंने अपना मोबाईल देखा )हम्म्म 45 मिनट तक बैठ गया ,पता ही नहीं लगा,’दीदी को डॉ की उर्जा और योगियों वाली बाते याद आई ,उनके चहरे में एक मुस्कान आ गयी ,

‘कोई बात नहीं भाई डॉ ने कहा है तो किया कर और तुझे कुछ प्रोब्लम होगा तो उनसे बात भी कर लेना ‘दीदी मेरे बालो को सहलाती रही और मेरे आँखों में वो मंजर बार बार घुमने लगा मैंने कुछ गहरी सांसे ली और ना जाने कब मेरी आँखे बंद हो गयी मेरी नाक में एक अजीब सी पसीने की बदबू या खुसबू आई मैंने आँखे खोली तो मैं दीदी की कमर को पकडे सोया था और ये खुसबू उनके योनी की थी मेरा नाक अभी दीदी के योनी के ऊपर ही था और दीदी अब भी मेरे बालो को सहला रही थी ,उनकी झीनी सी निकर से मुझे उनके योनी की खूसबू साफ साफ आने लगी ,मैंने आगे बढ़ कर अपनी नाक दीदी की योनी में रगड़ दि मुझे कुछ घुंघराले बालो का आभास हुआ जिसपर नाक को रगड़ना बहुत ही सुखद प्रतीति थी,लेकिन इससे दीदी ने मेरे सर को पकड़ लिया और हसने लगी ,

‘भाई मत ना रे क्या कर रहा है,गुदगुदी होती है ,’मैं जानता था की दीदी ने अंदर कुछ भी नहीं पहना है इसलिए मैंने जान बुझ के फिर से नाक को रगडा इस बार थोड़े जोर से दीदी खिलखिला के हसने लगी और नहीं नहीं बोलने लगी ,वो उठाने को हुई पर मैंने अपना हाथ नहीं हटाया और उन्हें फिर से बिठा लिया ,मैं उन्हें देखने लगा उनका गोरा मुखड़ा प्यारी बड़ी बड़ी आँखे छोटी सी बिंदिया जो चहरे की शोभा बड़ा रही थी ,उन्हें चमकीले दांत और गुलाबी होठ जिसे देखते ही मैंने दीदी के सर को पकड़ कर निचे कर दिया और अपने पर झुका के उनके होठो को चूमने लगा दीदी ने भी अपने भाई पर प्यार की बारिश कर दि ,दीदी और मैं प्यार की गहराई में डूबकिया लगाने लगे और मैं उन्हें लिटा कर उनके ऊपर लेट गया और दीदी के चहरे को प्यार भरी निगाहों से देखने लगा ,की मुझे फिर से वो दृश्य दिखाई दीया जिसमे दीदी और राहुल को देखा था मेरे पुरे शारीर में एक झुनझुनी भर गयी और मैं मचलता हुआ बिस्तर पर बैठ गया मेरे शारीर पर पसीना था जो बंद ही नहीं हो रहा था ,मेरी इस स्तिथि को देख कर दीदी फिर डर गयी और मुझे फिर से अपनी बांहों में ले लिया…

‘क्या हुआ भाई बता ना क्या हुआ ,क्या देख रहा है तू की तू इतना डर रहा है या तू बेचैन हो रहा है ,’मुझे चुप देख दीदी ने मेरा हाथ अपने सर पर रख दिया

‘तुझे मेरी कसम है भाई बता…’मैं दीदी की कसम तो नहीं तोड़ सकता था पर बता भी तो नहीं सकता था ,मेरा दोस्त जिसे मैं और जो मुझे अपनी जान से जादा चाहता था और मेरी दीदी जिसे वो अपनी दीदी मानता है ,जिसके लिए वो कुछ भी कर सकता है ,….वो तो मैं भी दीदी से प्यार करता हु पर मैं भी तो ,नहीं मैं दीदी के साथ ऐसा नहीं कर सकता मैं तो बस इन्हें प्यार करता हु ,,,पर क्या प्यार में लिंग ऐसा खड़ा होता है क्या तू अपनी बहन के चुद को नहीं रगड़ रहा था तो अगर राहुल दीदी के साथ वो कर ले अगर वो दीदी की चूत में ….नहीं नहीं मैं ये क्या सोच रहा हु ,दीदी की चूत छि मैं इतना गन्दा कैसे सोच सकता हु ,,,लेकिन दीदी की चूत …मेरा मन बहुत ही जादा बेचैन होने लगा पर दीदी की चूत सोचते ही मेरा लिंग अकड़ने लगा मुझे क्या हो रहा था इसका मुझे कोई इल्म नहीं था ये तो महज एक शब्द था चुद लेकिन इसका प्रभाव मेरे शारीर के अंगो पर पड़ रहा था और मेरे जेहन में एक की शब्द गूंजने लगा दीदी की चुद ,दीदी की चुद ,दीदी की चुद ….मेरी आँखों से आंसू आने लगे लगे मेरा लिंग इस दुखद घडी में भी पूरा तन गया था,मेरे अन्तः वस्त्र ना पहने होने की वजह से दीदी को इसका पूरा भान हो गया की ये किसी बहुत बड़े दुविधा में है ,उन्होंने अपनी पूरी ताकत से मुझे अपने सीने से लगा लिया उनकी उन्नत वक्ष मेरे सर से टकरा गए और मेरे मन की आवाजे बदल गयी ”ये रही दीदी की बोबस दीदी के बोबस बड़े बड़े बोबस दबा ले इसे चूस ले इसे अब चुतड को भी चाट ले हहहाहा ” जैसे कोई और मुझे चिढ़ा रहा हो मैं जोर जोर से रोने लगा दीदी के दिल की धड़कन मुझे जोर जोर से सुनाई देने लगी थी वो डर से काप रही थी मेरी दशा का ख्याल उनके जेहन को भेद रहा था,,दीदी मुझसे पूछ रही थी क्या हुआ क्या हुआ …अचानक दीदी को डॉ की बाते याद आ गयी की तुम्हारा प्यार ही इसे बचा सकता है ,और आकाश अपनी उर्जा को दबा रहा है ,दीदी को समझ आ चूका था मैं बहुत बड़े अंतर्दव्न्द में फसा था जहा एक तरफ प्यार था तो दूसरी तरफ वासना,,दीदी ने मेरा हाथ अपने वक्षो पर रख दिए और मेरे होठो को चूमने लगी मेरे हाथ रुके हुए थे वो मुझे ग्लानी का आभास करा रहे थे ,राहुल के सपने ने मुझे अपनी दीदी के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया की अगर राहुल ये कर के गलत है तो मैं भी तो ये करके गलत हुआ ना ….लेकिन दीदी के लगातार मेरे होठो को चूमने पर मैं थोडा शांत हुआ और दीदी से सीधे बात करने की ठान ली ,मैं दीदी से अलग हुआ ..

‘क्या हुआ भाई तुझे ,मेरे जिगर के टुकडे ‘दीदी की आँखे भरी हुई थी ,मेरे लिए प्यार देख मेरा मन अब थोडा शांत हुआ पर मन के किसी कोने में अब भी (दीदी की चूत )कोई कह रहा था …

‘दीदी की चूत ‘मैंने दीदी को कह कर मुस्कुरा दिया फिर अपनी गलती का आभास होने पर अपनी नजरे झुका ली ..दीदी ने अपने हाथो से मेरा सर उठाया उनके चहरे पर एक मुस्कराहट आ गयी थी ..

‘क्या कहा तूने ‘

‘सॉरी दीदी वो …’

‘बोल दे अब समझा तेरे मेरे बीच कुछ भी गलत नहीं है ,बोला था मैंने कभी सॉरी मत कहना ,तेरी दीदी तो तेरी है रे पागल ‘दीदी ने एक हलकी चपत मेरे गालो में मार दि ,’अब बोल ‘

‘दीदी वो मेरे दिमाग में एक गलत चीज चल रही थी ,मैंने उसे दबाने की कोशिस की तो वो और भी बढ़ गयी ,’

‘क्या चीज ‘

‘दीदी रहने दो ना मैं नहीं बोल सकता,’दीदी ने फिर मेरी ओर देखा और मेरा सर ऊपर किया

‘दिमाग में कुछ भी चले वो गलत और सही नहीं होता ,उसे दबाना नहीं चाहिए निकल देना चाहिए या धयन कर ले देख ले अब बोल ,कुछ सही गलत नहीं …अब बोलेगा की लगाऊ झापड़ ‘दीदी के चहरे में हल्का गुस्सा आ गया था मैं अपनी दीदी को अपने लिए ना जाने कितने दिन बाद यु गुस्से में देखा था ,

‘दीदी मेरे दिमाग में चल रहा था की दीदी की चुद ,बस यही बात बार बार अभी भी वही चल रही है ,हलके हलके ,सॉरी दी दी ‘मैंने सॉरी कहा ही था की दीदी ने मेरे होठो पर अपने हाथ रख दिया

‘बोला ना कोई सॉरी नहीं ,और चल रहा था तो उसे हटाने की क्या जरुरत है ,तेरी दीदी एक लड़की है और हर लड़की की चूत होती है ,तो इसमें क्या है चल बोल दीदी की चुद ,मेरे साथ बोल ‘दीदी ने मेरा हाथ पकड़ा और अपने योनी में रख दिया मैं घबरा ही रहा था …

‘मेरी प्यारी दीदी की चूत ,ये है ,चल बोल ‘दीदी ने ये कहकर मेरे हाथो को अपनी योनी में रगड़ दिया जिससे मेरे लिंग ने एक भरपूर झटका मारा और दीदी ने मुझे अपने पास खीच कर मेरे लिंग को अपने हाथो में भर लिया और मेरे कानो के पास अपना मुह कर कहा

‘और ये है मेरे प्यारे भाई का बड़ा सा लवड़ा “दीदी हसने लगी पर मेरी हालत ख़राब हो चुकी थी ,दीदी ने फिर से मुझे बोलने कहा मैंने हिम्मत करके कहा

‘ये है ,मेरे प्यारी दीदी की चूत ,’मेरे हाथ अभी स्थिर ही थे ,

‘मसलेगा कौन ,मसल के बोल ‘और दीदी ने मेरा हाथ मसल दिया और मेरे गालो को काट लिया ,उनकी स्वछन्द हसी ने मेरे रूह तक को शांत कर दिया अब मैं होसले से भर गया था मैंने अपने हाथ को पूरी ताकत से रगडा ,

‘ये है मेरी प्यारी दीदी की चुद ,और इसकी खुसबू मस्त है ,’दूसरा लाइन मेरे मुह से अनायास ही निकल गया ,दीदी ने पहले तो अपनी आँखे बड़ी की पर फिर खिलखिलाकर हसने लगी …

‘अब भी आ रहा है दिमाग में ,’

‘नहीं दीदी अब तो बस मजा आ रहा है,खासकर आपके ये बाल बड़े अच्छे लग रहे है ,’दीदी ने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी निकर के अंदर ले जाने को खीचा पर मैंने अपने हाथ पीछे कर लिए …

‘नहीं दीदी आज बस इतना ही आज मैंने आपकी चुद को चुद कह पाया मेरे लिए काफी है ,’दीदी के चहरे पर प्यार के भाव उभार गए उन्होंने मेरे माथे पर किस किया और मुझे प्यार से अपनी गोदी में सुलाकर तब तक थपकती रही जब तक की मुझे नींद ना आ गयी

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