#36
चंदा के शब्दों ने मुझे हिला कर रख दिया, बहनचोद शौर्य सिंह के परिवार में चुदाई के आलावा और कुछ भी होता था क्या जिसे देखो कहीं न कहीं लगा हुआ था . पर यदि कामिनी भी चुदाई के खेल में शामिल थी तो मेरे लिए अजीब सी दुविधा हो गयी थी क्योंकि फिर मेरे नाजायज संतान होने की प्रबलता और बढ़ जाती. कहीं मैं कामिनी और इन्दर सिंह की संतान तो नहीं. और ऐसा हो भी सकता था क्योंकि बापू भला ऐसे ही तो नहीं पालेगा मुझे.
“कमरे में कामिनी चुदने आती थी मेरे आदमी को ये बात मालूम हो गयी थी , अक्सर मेरे साथ सोते हुए वो मुझे बताता था और यही मेरी चिंता का कारण था. तेज ठाकुर की वजह से हवेली में उसका इतना आना-जाना था की वो अंदरूनी बाते भी जानने लगा था और शायद इसीलिए पुरुषोत्तम को वो नहीं सुहाता था . ” चंदा ने कहा
मैं- तेज भी शायद जानता था की कमरे में कौन चुदने जाती थी
चंदा- तेज चूतिये का बच्चा था उसको होश ही कहा रहता था उसकी जिन्दगी में बस दो ही बाते थी एक तो दारू और दूसरा अपने बाप से लड़ाई करते रहना
चंदा के बात सही थी तेज के कमरे में सैकड़ो बोतले पड़ी थी शराब की .
मैं- अपने बाप से लड़ाई
चंदा- हाँ, तेज और उसके बाप की तल्खी किसी से भी नहीं छिपी थी .
मैं- पर मंदिर में चोरी और तेरे पति की फांसी इसका क्या झोल था
चंदा- मंदिर में चोरी मेरे पति ने नहीं बल्कि तेज ने की थी मेरा आदमी तो बस उसकी गाडी चला रहा था . तेज जुए में बहुत बड़ी रकम हार गया था उसे अपना कर्जा चुकाना था . उसने चोरी की और जब वो गाडी के पास आया तो उसकी हालत बहुत ज्यादा गंभीर थी बदन पर बहुत घाव थे , मेरे आदमी ने उस से ये पाप नहीं करने को कहा उसे समझाया, तेज मान गया , चूँकि उसकी हालत बहुत गंभीर थी तो मेरे आदमी ने सोचा की मंदिर का सामान जल्दी से वापिस रख देता हु और फिर तेज को डाक्टर के पास ले जाऊंगा पर जब वो मंदिर का सामान वापिस रख रहा था तो तभी वहां पर पुरुषोत्तम आ गया और उसे चोर समझ लिया . मेरे आदमी ने लाख दुहाई दी पर किसी ने उसकी बात नहीं सुनी .
मैं- पर मंदिर का सामान कभी भी वापिस नहीं पहुंचा
चंदा- हाँ क्योंकि पुरुषोत्तम चुरा ले गया था उसको
मैं- मान लेता हूँ पर फिर पुरुषोत्तम को किसने मार दिया उसे ही नहीं बल्कि उसके दो भाइयो को भी और सिर्फ तुम ही हो जिसके पास पर्याप्त कारण था ठाकुरों के घर के दिए बुझाने का .
चंदा-कहना बहुत आसान है और करना उतना ही मुश्किल . तुमने वो दौर नहीं देखा हर तरफ शौर्य सिंह और उसके बेटो का ही राज था, मैं फरियाद लेकर जाती भी कहाँ, हवेली में बस रुपाली ही थी जो मेरे पास आई.
मैं- तेज तो गवाही दे सकता था न पुरुषोत्तम उसकी बात मान जाता
चंदा-वो खुद घायल पड़ा था , सबने तो यही समझा की मेरे आदमी ने ही उसे जखम दिए.
मैं- क्या तेरे पति ने कामिनी को चोद दिया था
चंदा- उसकी हसियत इतनी भी नहीं थी .
मैं- और डाकू मंगल उसका क्या रोल हुआ इस कहानी में
चंदा- ये कोई नहीं जानता, हाँ इतना जरुर है की एक ज़माने में ठाकुर और डाकू की उठा-बैठ थी , ठाकुर अक्सर डेरे में जाता था .
मैं- अजीब है न
चंदा- उस से भी अजीब तुम हो जो अतीत को वर्तमान से मिलाने पर तुले हुए हो .
चंदा अकेली तो नहीं मार सकती थी सबको , उसे कोई दमदार साथी चाहिए था और वो साथी कोई हो सकता था तो ठाकुर का भतीजा जिसकी गांड पर ठाकुर ने लात मार दी थी . पर क्यों ये भी एक सवाल था जिसका जवाब मुझे चाहिए था . ठाकुर के भतीजे का ख्याल मुझे इसलिए आया की उस समय वो ही एक ऐसा किरदार था जो चंदा जितना बेताब रहा होगा.
पर ऐसी कैसी साजिशे जिसमे सबको छिप का रहना पड़े, कामिनी, रुपाली और चांदनी का बाप . मैंने पक्का निर्णय कर लिया था की सबसे पहले ठाकुर के भतीजे वाले एंगल ही पकड़ना है . रात बहुत हो गयी थी मैंने चंदा की झोपडी में ही सोने का निर्णय लिया पर बिस्तर पर पड़े भी चैन कहा दिमाग में ये बात ही घूम रही थी की आखिर तेज अपनी ही बहन की जासूसी क्यों कर रहा था जब उसे मालूम था की कामिनी किसी से चुदती है तो क्यों उसने ये सबूत जुटाने शुरू किये
मेरी नजर चंदा पर पड़ी जिसने अपने नंगे जिस्म को ढकने की जरा भी जरुरत नहीं समझी थी उसकी गांड पर मेरी नजर ठहर सी गयी थी . जवानी में तो आग ही लगा दी होगी न जाने क्यों मैं चंदा की कहानी पर यकीं नहीं कर पा रहा था क्योंकि वो खुद ठाकुरों का बिस्तर गर्म करती थी तो उस से इमानदारी की अपेक्षा कैसे की जाये.
तभी मेरे दिमाग में वो ख़याल आया जिसने अब तक के मेरे अनुमान को गलत साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, तेज , तेज वो तो ज्यादातर हवेली से बाहर ही रहता था , और जो इन्सान घर में इतना कम समय बिताये उसको क्या ख़ाक घर की बातो की जानकारी होगी . पुरुषोत्तम या कुलदीप इन दोनों में से कोई एक रहा होगा पर कुलदीप के होने की सम्भावना जायदा थी क्योंकि उसके कमरे से मुझे जो ब्रा मिली थी वैसी ही ब्रा कामिनी के कमरे में मोजूद थी और दूसरी बात की वो बाहर से पढ़ कर आया था उसके पास ये टेप जैसी चीजे हो सकती थी और तेज के कमरे से जायदा सुरक्षित भला कौन सी चीज हो सकती थी ऐसे सामान को छिपाने के लिए. पर क्या एक भाई अपनी ही बहन को चोदना चाहता था या फिर कुलदीप की कोई और मंशा थी सोचते सोचते न जाने कब मेरी आँख लग गयी .
सुबह उठा तो चंदा चाय बना रही थी , उसने मुझे चाय का कप दिया और अपने काम में लग गयी .
“कुछ मजदुर लेकर आउंगी हवेली में . ” उसने कहा
मैं- साफ़ सफाई जितना जल्दी हो जाये उतना अच्छा
चंदा- एक बार फिर सोच लो , हवेली की आग को जो सुलगा रहे हो कहीं जल न जाओ
मैं- किसे परवाह है .
वहां से मैं निकला ही था की मुझे पद्मिनी मिल गयी . मैं दौड़ कर उसके पास गया .
मैं- कैसी है तू, और हॉस्पिटल से कहाँ गायब हो गयी थी
पद्मिनी- ठीक हूँ
मैं- तो तुझे भी सोने का नशा हो गया जान जा सकती थी तेरी
पद्मिनी- डेरे की बेटी हूँ ये सब तो सामान्य है मेरे लिए दूसरी बात सोने की चाह नहीं मुझे
मैं- तो किस चीज की चाहत है तुझे
पद्मिनी- जान जायेगा तू मान जायेगा तू

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