#26
दो पल मैं पद्मिनी को देखता रहा और फिर उसका हाथ पकड़ कर बोला- बस इतनी सी बात , अब जब मुझे मालूम हो ही गया है की मुझे यही आकर मरना है तो फ़िलहाल मैं यही पर जीना चाहूँगा.
पद्मिनी कुछ कहना चाहती थी पर वो ये भी जानती थी की मैंने इस बात को विराम दे दिया है मैं चलते हुए उस खंडित प्रतिमा के सामने आया और बैठ गया . पद्मिनी ने अपनी पीठ मेरी पीठ से जोड़ी और दूसरी तरफ मुह करके बैठ गयी .
पद्मिनी- जय सिंह से सावधान रहना
मैं- हवेली का गुरुर बरसो पहले समाप्त हो चूका , झूठा भरम है जिसे मैं तोड़ दूंगा. वैसे दुश्मनी तो तेरी भी होनी चाहिए जय सिंह से
पद्मिनी- क्यों भला,
मैं- उसके खानदान ने तेरे कुल का नाश जो किया था
पद्मिनी- हाँ तो खानदान बचा ही कहा दुश्मनी निभाने को ठाकुर के तीनो बेटे मारे गए , ठाकुर कोमा में है हवेली तबाह हो गयी
मैं- बात जय सिंह की हो रही है
पद्मिनी- वो ठाकुर कहा है सब जानते है की शौर्य सिंह का और जय सिंह के बाप का छत्तीस का आंकड़ा था , शौर्य सिंह ने कोमा में जाने से पहले तक कभी जय के बाप को हवेली का दरवाजा तक नहीं देखने दिया था . ये तो बाद में उसने सब कब्ज़ा लिया . जमीने तो बहुत पहले ही बिक गयी थी ले देकर हवेली थी जिस पर जय सिंह और उसका बाप कब्ज़ा नहीं कर पाए थे .
मैं- जानता हूँ हवेली रुपाली के नाम थी , तू बता डेरे और ठाकुरों की क्या दुश्मनी थी
पद्मिनी- शौर्य सिंह का गुरुर और उसकी अयाशी, शौर्य सिंह ने गद्दारी की थी डेरे से
मैं- कैसी गद्दारी
पद्मिनी- नहीं जानती पर उसी की वजह से मंगल बाबा और ठाकुर की दुश्मनी बढ़ गयी थी
मैं- कामिनी ठकुराइन के बारे में कुछ जानती है क्या
पद्मिनी- कुछ खास नहीं बस इतना ही की ठाकुर उसको खास पसंद नहीं करता था बाद में वो विदेश चली गयी
मैं- कोई तो ऐसा होगा जो हवेली के अन्दर की बातो को जानता होगा
पद्मिन- भूषण को सब मालूम था पर वो भी मारा गया
मैं- कोई तो है जो परदे के पीछे है उसे सामने लाना होगा मैं कोशिश कर रहा हूँ पता कर सकूँ की लन्दन में रुपाली कहाँ रहती है उस से मिलना बहुत जरुरी है .
मैं- तूने ऐसा क्यों कहाँ की जो तालाब को खोदेगा उसे मरना होगा
पद्मिनी- पता नहीं ,
बहुत देर तक हम बाते करते रहे शाम होने को आई तो वो उठ खड़ी हुई उसके पीछे पीछे मैं भी आया हम लोग निचे आये .
मैं- फिर कब मिलोगी
वो – पता नहीं
मैं मुस्कुरा दिया और बोला- उलझनों को सुलझाने में मेरा साथ दोगी
पद्मिनी- पता नहीं
उसके जाने के बाद मैंने जीप चंदा के घर की तरफ मोड़ दी . जो मुझे घर के आँगन में बैठी ही मिल गयी .
मैं- कैसी हो
चंदा- मेरी छोड़ो कल बड़ा काण्ड कर दिया तुमने गाँव में तुम्हारे ही चर्चे है
मैं- ये सब तो चलता ही रहेगा अब मुझे तुमसे बहुत जरुरी बात करनी है और उम्मीद करूँगा की तुम सच बताओ मुझे तुम्हारे पति और पुरुषोत्तम की लड़ाई का क्या कारन था क्यों पुरुषोत्तम ने उसे मरवा दिया
चंदा-मेरा पति मादरचोद था अपनी गलतियों की वजह से जान गयी उसकी मैंने उसे बहुत समझाया की बड़े लोगो के पचड़े में मत पड़ पर उसकी गांड में कीड़ा था जो मरने के बाद ही शांत हुआ
मैं- क्या हुआ था .
चंदा- मेरा पति ठाकुरों की जमीनों पर खेती करता था पर ना जाने कब तेज ठाकुर से उसकी दोस्ती हो गयी . तेज को रंडियों और शराब का शौक था वो भी तेज के साथ रह कर ये सब करने लगा. वो हवेली भी जाने लगा था धीरे धीरे वो हवेली की गाड़िया चलाने लगा ठाकुर लोग क्या करते थे उसकी खबर रखने लगा. एक रात उसने बताया की उसने जमीनों पर बने पंप हाउस में किसी को चुदते हुए देखा , ये नयी बात तो थी नहीं खेतो को कोई न कोई चुदाई करते रहता था , पर खास बात जिसने मुझे चौंकाया था वो था की कमरे में चुदने वाली औरत हवेली से सम्बंधित थी .
मैं- कौन थी वो औरत
चंदा- ये राज भी मेरे पति के साथ ही चले गया .उसने एक बार नहीं कई बार हवेली की उस औरत की चुदाई देखि थी पर कभी उसका नाम नहीं बताया .
मैं- पुरुषोतम ने ये कहकर मारा था की उसने मंदिर के गहने चुराए थे
चंदा- झूठा था वो मादरचोद , सब जानते है की गहने तो बहाना थे , असली बात थी पुरुषोत्तम का अहंकार , सब जानते थे की पुरुषोत्तम नपुंशक है मेरे पति ने पुरुषोत्तम और रुपाली की बाते सुनी थी जिसमे रुपाली उसे चोद न पाने की वजह से गाली दे रही थी .
मेरे लिए ये नयी बात थी .
चंदा- मेरे पति को मरना पड़ा क्योंकि वो उस रात मंगल सिंह से मिला था और शौर्य सिंह की मंगल से दुश्मनी थी क्योंकि थोड़े दिन पहले ही ………..
चंदा ने गहरी साँस ली और अपनी बात को अधुरा छोड़ दिया

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