हलाला बेटे के साथ – Update 9
मैं अपने कमरे मे आकर सोचने लगा कि क्या हो रहा है मेरी अम्मी से मेरी शादी मै ठीक तो कर रहा हूँ न पर है तो यह गलत पर क्या करू कोई और रास्ता भी तो नही है मुझे कसम भी तो दे दी है पर शादी के बाद अम्मी के साथ बीबी की तरह सब करना होगा मै कैसे अपनी अम्मी के साथ और तो और सब के सामने शादी होगी धूमधाम से क्या सोचेगे लोग मेरे वाले मे मेरे दोस्त मेरे कालेज मे पेपर भी स्टार्ट होने वाले है प्रक्टिकल तो चल ही रहे है उसका क्या और अम्मी के साथ बिस्तर पर और सोचने लगा
नही नही मै कैसे करूगा यह सब समझ नही आ रहा फिर मै सो गया और बाहर सब तैयारी मे लग गए मामी- अम्मी जान वो कपडे का क्या करना है दोनों दूल्हे दुल्हन के कपडे तो ना आए होते है और भी शापिंग करनी है
नानी- तो तुम लोग उन दोनो के साथ जाकर खरीदारी कर आओ
मामी – ठीक है
दादी- फरहान तू बेटा एक काम कर हाल बुक करा ले और हलवाई भी बोल दे और देखना खाना अच्छा हो
डेड- जी अम्मी पर मै सोच रहा था की मेहमान थोडे कम बुलाए जो खास है वही रहे
दादी- बेटा मै जानती हू की तू क्यू कह रहा है पर अगर नही बुलाऊंगा तो बुरा मान जाएंगे लोग समझा कर
डेड ठीक है
फूफा – अम्मीजान मैने लाइट और घोडी वाले को बोल दिया है
दादी- अच्छा किया दामाद जी और हा शाहिद की मामी तुम लोग अगर बाजार जा रहे हो तो जेवरात भी लेती आना और जन्नत और फिजा तुम दोनों भी जाना साथ मे
फिजा – जी दादी
दादी- तेरी अम्मी कहा है दिख नही रही है
फिजा- पता नही
डेड – हॉस्पिटल में एक इमरजेन्सी थी तो गई है आती होगी थोड़ी देर में
दादी- अभी उससे कहना की कुछ दिन वो छुट्टी ले ले और तू सम्भाल ले हॉस्पिटल
डेड- ठीक है
फिर बुआ और मामी किचिन मे खाना बनाने लगी
बुआ- देखो क्या हो गया है अब मा बेटे को शादी करनी पड़ेगी
मामी- हा रुखसार जी पता नही कैसे पूरी करेंगे वो लोग यह हलाला की रस्म
बुआ- अरे वैसे भाभी है अभी भी बहुत खूबसूरत अगर थोडा टाइम होता तो कोई भी तैयार हो जाता उनसे शादी के लिए मुझे यह सोचकर उत्सुकता हो रही की सुहागरात मे क्या होगा
मामी- हा वो तो है और वो करना भी जरूरी बरना निकाह मुक्कमल नही होगा
बुआ- पता नही शाहिद अपनी अम्मी के साथ कैसे करेगा और भाई जान के दिल मे क्या बीतेगी
मामी,- अरे शाहिद तो मर्द है उसे सिर्फ शुरू करने मे दिक्कत होगी एक बार जब शुरू हो गया तो देखना रूकने वाला नही है और रही बात जीजू की वो अब क्या कर सकते है उन्हें भी तो पता ही है क्या होना है
ऐसे ही दोनों बात कर रहे थे तो उतने अम्मी भी आ गई
नानी- तुझे इतनी टेंशन मे भी काम की पडी है छुट्टी नही ले सकती
अम्मी- डाक्टर हू और मुझे खुद से पहले मरीजो की सोचनी पडती है मै उन्हें ऐसे नही छोड़ सकती और उनके लिए कुछ दिन के लिए बेकअप का इंतजाम करके आई हू मगर सिर्फ एक हफ्ते के लिए
नानी – हा जानती हंसने डाक्टर है पर यहा भी तो जरूरी है
दादी- अरे छोडो न अब आ तो गई है चलो मुस्कान फिजा जन्नत शाहिद और अपनी भाभी के साथ जाकर शादी की खरीदारी कर आओ
अम्मी- जरूरी ये लोग ले आएंगे न
नानी- जरूरी है दूल्हा दुल्हन को एक दूसरे की पसंद के कपडे खरीदने पडते है
दादी- हा मुस्कान जाओ तैयार हो जाओ
अम्मी- ठीक है वैसे शाहिद कहा है
फिजा – भाई कमरे मे है
अम्मी- एक काम कर तैयार हो जाओ तू और जन्नत भी और मामी को भी बोल दे अपनी
फिर अम्मी और सब तैयार होकर आ गए बाहर
अम्मी- चले
मामी- क्या चले शाहिद कहा है
अम्मी- फिजा बुलाया नही उसे
फिजा- आवाज तो लगाई था पर कुछ रिस्पांस नही आया
अम्मी- तुम लोग रूको मै बुलाकर लाती हू
फिर अम्मी मेरे कमरे में आने लगी और मै सो रहा था और मुझे अचानक सपने मे देखा की मै और अम्मी पलंग पर नंगे सो रहे है

और र उतने मै अम्मी मुझे उठाने लगी
अम्मी- शाहिद उठ क्या सो रहा है जल्दी उठ चलना है
अचानक मेरी नींद खुल गई और देखा तो अम्मी मेरे सामने खडी थी वो बहुत सुन्दर लग रही थी

अम्मी- उठ चल शापिंग करने चलना है
मै – ठीक है वैसे आप बहुत खूबसूरतलग रही हो
अम्मी- थैंक्स अब उठ और चल फिर मै जल्दी से बाल ठीक करके बाहर आ गया और हम शापिंग के लिए निकल गए

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