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हलाला बेटे के साथ – Update 6

सब टेंशन में थे की अब क्या करे

बुआ और फूफा अपने कमरे मे

बुआ- यह भाई जान ने क्या कर दिया इतना बडा गुनाह अपने परिवार का भी नहो सोचा

फूफा- गुस्सा होता ही ऐसा है की अच्छा खासा इंसान भी आपा खो देता है और  अगर यह अकेले में होता या मौलवी सुना नही होता तो कुछ नही होता मगर अब तो समाज में सबको खबर है

बुआ- पता नही अब कौन सा रास्ता निकालेगा हमारे घर मे तो कोई ऐसा है भी नही जिससे भाभी की शादी कराकर हलाला मुक्कमल करा दे

फूफा- हा आखिर कौन होगा जो यह करेगा कोई जवान लडके  के मा बाप तो मानेगे नही और  कोई उम्र वाला हमारे खानदान मे है नही जो अकेला हो

उतने मे दादी बुआ के कमरे में आई

बुआ- अम्मी आप आइए अंदर

दादी- बेटी मै तुम दोनों से एक बात करने आई हू

बुआ- हा बोलिए न

दादी- देखो बेटी तुम तो जानती हो क्या हुआ है और  कोई घर मे है भी नही जिससे मुस्कान का हलाला मुक्कमल करा दे तो मेरी नजरें एक विश्वास विला इंसान है मगर

बुआ- कौन है

दादी- तुम्हारा बेटा विहान अगर तुम दोनों राजी हो तो वो 18 का भी है

बुआ- यह क्या बोल रही है आप आपका दिमाग तो सही है विहान वो अभी बच्चा है और मे उसकी जिंदगी नही खराब कर सकती और  अगर गलती से उससे कोई गलती हो गई तो फिर तो बापस भी नही हो सकता कुछ भी मै बिल्कुल भी राजी नही हू

आप भी बोलिए न कुछ

फूफा- बिलकुल मै अपने बेटे चीख जिंदगी खराब नही होने दूंगा वो अभी छोटा है और स्कूल मे ही तो है और  मुस्कान जी की उम्र भी तो है

दादी- मगर जिंदगी भर थोड़ी न रहना है कुछ दिन की बात है उसके बाद तो फिर सब ठीक हो जाएगा

फूफा- आप क्या हमे बेबकूफ समझती है हमे पता नही है हलाला क्या होता है हलाला तो बाद मे होता असल मे तो यह दूसरी शादी होती है और  पूरी तरह से शादी को निभाना पडता है और अगर इसमे हमारे बेटे को उनसे लगाव हो गया तो इस उम्र में यह आम बात है फिर तो उसकी जिंदगी तो खराब हो जाएगी न और जब सबको पता चलेगा तो उसकी दोबारा शादी होना मुश्किल हो जाएगा

दादी- मगर मै तो बस यह कह रही थी की तुम्हारा बेटा अकेला मर्द है जो खानदान मे है जो अकेला है

फूफा- क्या अकेला है हृदय न एक और और  वो तो विहान से बडा भी है

दादी- कौन है

फूफा- फरहान और  मुस्कान का बेटा शाहिद करा दो उसकी शादी अपने घर और  मा बाप के लिए  इतना तो कर सकता है और घर की इज्जत घर मे रहेगी

दादी- पर वो उसका बेटा है

फूफा- इसलिए तो वो ही सबसे भरोसेमंद है और  कोई कल को बाहर वाला मुस्कान जी पर ऊँगली नही उठा पाएगा

बुआ- ये ठीक कह रहे है अम्मी स

शाहिद ही सही रहेगा

दादी सोच मे पड गई और अपने कमरे मे चली गई और सोचने लगी की कह तो सही रहे है दामाद जी पर बो बेटा है उनका पर और  कोई रास्ता भी तो नही है पर एक काम करती हू फरहान से बात करती हू और  डेड के कमरे की ओर जाने लगी  डेड अपने कमरे मे सोच मे पडे थे तो दादी उनके बगल मे जाकर बैठ गई

दादी- कुछ सोचा तूने बेटा

डेड- नही अम्मी मेरा तो दिमाग ही काम नही कर रहा है पता नही क्या करू कैसे करू

दादी- मैने एक रास्ता निकाला तो है मगर बहुत कठिन है मगर गर के लिए बिल्कुल सही है

डेड- क्या

दादी- बेटा मैंने बहुत सोचा फिर मेरे दिमाग मे एक हो नाम आया जो भरोसेमंद भी है और हमारे घर की इज्जत को कोई बाहर वाला कभी भी उछाल नही पाएगा

डेड- कौन है वो

दादी- लंबी सास लेकर बेटा वो है शाहिद

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डेड- क्या आपका मतलब है मेरा बेटा शाहिद

दादी- हा

डेड- आप पागल हो गए हो क्या वो हमारा बेटा है और उसकी शादी उसकी अम्मी के साथ

दादी- थोडा ठंडे दिमाग से सोच और  कोई है और  हमारे पास सिर्फ  आज का वक्त है फिर तो कल मुस्कान को यहा से जाना पडेगा और  हलाला भी नही होगा कभी पूरा परिवार टूट जाएगा बच्चो की जिंदगी भी खराब हो जाएगी

डेड- अम्मी  यह है मगर वो हमारा बेटा है और  मुस्कान भी कभी राजी न।ई होगी और मै जानता हूँ शाहिद भी कभी नही मानेगा वो अपनी अम्मी की बहुत इज्जत करता है

दादी- देख तू मुस्कान से बात कर और  मै भी समझाऊगी मुझे यकीन है भारी मन से ही  सही मगर अपने परिवार को बचाने के लिए वो मान जाएगी और शाहिद भी तुम दोनों के समझाने पर मान ही जाएगा

डेड- पर अम्मी यह सही रहेगा क्या

दादी- मन तो मेरा बी नही है मगर और  कोई रास्ता भी नही है

डेड- ठीक है चलो पहले मुस्कान की अम्मी अब्बा को राजी कर लो फिर शायद मुस्कान को भी वो समझा दे

फिर दादी और डेड नानी नाना के पास गए और उन्हें सब कुछ समझाया बहुत सोचने समझने के बाद वो भी मान गए और  फिर वो अम्मी के कमरे मे गए जहा अम्मी उदास बैठी थी

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नानी- बेटी क्या कर रही है

अम्मी- उदासी से क्या करूंगी अपनी सजा का इंतजार

डेड- ऐसा क्यों कह रही ।ओ मुस्कान मुझे माफ कर दो

नाना- देखो जो होना था हो गया अब आगे का सोचना है हमने बहुत सोचने के बाद एक रास्ता निकाला है

अम्मी,- कैसा रास्ता

नानी- बेटी देख एक ही इंसान  है जिसपर हम भरोसा कर सकते है और जिससे हमारा परिवार भी सुरक्षित रहेगा और इज्जत भी घर मे रहेगी

अम्मी  – कौन है वो

दादी- देखो बेटी तुम पहले आराम से सुनना और ठंडे दिमाग से सोच-समझ कर फैसला लेना क्यू की रह हमारे परिवार के अस्तित्व का मामला है

अम्मी- पर ऐसा क्या है 

नानी- पहले तू वादा कर की तू शांती से सोच समझकर परिवार के बारे मे सोचकर फैसला लेगी और गुस्सा नही होगी

अम्मी- ठीक है

नाना- तो हमने सोचा है की हमारे घरेलू एक हक मर्द है जो शादी लायक है और  कुंवारा है और  सबसे ज्यादा भरोसेमंद है वो है शाहिद

अम्मी चौकते हुई- क्या  क्या कह रहे है आप आप लोगों का दिमाग तो सही जगह है न शाहिद आप लोगों ने ऐसा सोचा भी कैसे वो मेरा बेटा है और आप चाहते हो मे उससे शादी छी

दादी- देख बेटी हमे पता है यह गलत है मगर कोई रास्ता भी तो नही है और  कोई ऐसा भरोसेमंद इंसान है भी तो नही और  शाहिद से ज्यादा भरोसेमंद इतनी जल्दी मिल भी नही सकता

नानी- हा बेटी बुरा तो मुझे भी लग रहा है मगर क्या कर सकते है

अम्मी- फरहान आप क्यू चुप हो कुछ बोलों ये लोग क्या बोल रहे है

दादी- मैने इसे भी समझा दिया हैऔर ये राजी है

अम्मी- क्या आप भी कैसे वो हमारा बेटा है

डेड- क्या करू मुस्कान कोई और रास्ता भी तो नही है अगर कल सुबह हमने कुछ फैसला मौलवी को नही बताया तो तुम इस घर से चली जाओगी और  फिर हमारा हलाला भी नही होगा

अम्मी- पर मै अपने बेटे की बीबी कैसे

नाना- तो एक काम कर अपने परिवार को टूटने दे और  चल हमारे साथ अब यही रास्ता बचा है

अम्मी- नही मै अपने बच्चों और  इनको छोड़ कर नही रह सकती

नाना- तो यह जो फैसला है उसे मान ले और  शाहिद से शादी कर ले

अम्मी रोने लगी और कहने लगी ये क्या दिन दिखा रहा है उपर वाला क्या करू मै

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दादी- बच्ची चुप हो जाओ और  सोच की यह तू अपने परिवार के लिए कर रही है और  शाहिद तो तेरी कितना इज्जत करता है हमारी बात मान  जा

नानी- हा बेटी मान जा अपने गर को बचाने के लिए

अम्मी – ठीक है अगर मै मान भी गई तो क्या  शाहिद मानेगा कभी नही और  फिजा और  जन्नत भी नही मानेगी और  दुनिया क्या बोलेंगी

नानी- वो तुम दोनों को और  परिवार को बहुत प्यार करता है तुम दोनों समझाओगे तो मान ही जाएगा और वो दोनो भी मान जाएगी और  दुनिया तो कुछ दिन कुछ कहेगी फिर चुप हो जाएगी

अम्मी- ठीक है पर फरहान इससे हमारे बेटे की जिंदगी खराब नही होगी कल को कौन लडकी शादी करेगी उससे

दादी- उसकी फिक्र तुम दोनों मत करो मे अपने पोतों की शादी करवा दूंगी

डेड- मुस्कान तुम  सचमुच महान हो जो गलती मैने की है और सजा तुम भुगतान रही हो

अम्मी- गलती हम दोनों की है और सजा आपको भी तो मिल रही है की मेरी शादी हमारे ही बेटे से

फिर सबने फैसला किया कि अम्मी की शादी मेरे साथ होगी

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