हलाला बेटे के साथ – Update 11
फिर हम जब घर आए तो सब अपने शादी की तैयारी में बिजी थे मै अपने कमरे मे चला गया और मम्मी अपने कमरे में
दादी- और रुखसार आ गयी खरीदारी करके
बुआ – हा अम्मी आ गए
दादी- और सब खरीदारी हो गई और सब समान ले लिया न और उन दोनों ने भी सब ले लिया न
बुआ- हा अम्मी उन्होंने ने भी ले लिया मगर अम्मी एक प्रोब्लम है की वो दोनो खुले नही है तो फिर कैसे वो सब करेंगे जो जरूरी है
दादी- हा वो तो जरूरी है बरना ये सब बेकार होजाएगा और फिर बाद मे और मुसीबत होगी
बुआ – तो क्या करे
नानी- उन्हें एक दूसरे के प्रति आकर्षण जगाना होगा और हमे बी उनसे बात करनी होगी तुम लोगों ने दुकान मे कुछ किया नही
मामी- किया था दोनो को अकेले खरीदारी करने के लिए भेजा था और उन्होंने साथ मे ही ब्रा और पैंटी खरीदी है
दादी- अकेले मे खरीदारी करने से कुछ नही होगा वो तो पहले भी करते थे हमे उनमे उत्तेजना जगानी होगी या समझाना होगा की यह कितना जरूरी है
बुआ- शाहिद तो शायद उत्तेजित हो जाए पर भाभी नही लगता उत्तेजित होगी उन्हें तो समझाना ही पडेगा
दादी- हा वो तो पहले से शादीशुदा जिंदगी जी रही थी और उसका शौहर भी अच्छा खासा मर्द है उसे तो समझाना ही पडेगा हा शाहिद को उत्तेजित और समझाना दीनों पडेगा क्यू की वो जवान जरूर है मगर समझदार भी है तो वो भी कुछ ऐसा नही करेगा जो उसे गलत लगे
नानी- सही कह रही है आप
फिर उन लोगो ने तय किया की वो हमसे बात करके हमे समझाएगे ताकी हम यह कर सके
इधर मै अपने कमरे मे बैड पर लेटे हुए सोच रहा था की यार मैंने आज अम्मी के साथ मेरी और उनकी शादी की शापिंग की और उनके साथ उनके ब्रा भी खरीदे फिर मुझे उनका साइज यादों आ गया 38 यार अम्मी का साइज इतना है यह तो बहुत बडा है फिर मेरे दिमाग मे सुबह के सपने का द्रश्य आ गया जब अम्मी मेरे साथ एकदम नंगी लेटी थी यह सोचकर पता नही कैसे मेरे पेंट के अंदर मेरे लंड मे हलचल होने लगी और वो खडा होने लगा

फिर मैंने सोचा यार परसो मेरी और अम्मी की शादी हो जाएगी तो अम्मी मेरी बीबी हो जाएगी फिर मै अम्मी के साथ एक कमरे में कैसे सुहागरात यह सोचकर मेरा लंड पूरी तरह से खडा हो गया और मै उसे पेंट के ऊपर से सहलाने लगा

फिर अचानक आवाज आई शाहिद बेटा यह दादी की आवाज थी और वो कमरे में आ गई उन्हें देखकर मैंने अपने हाथ को हटा लिया और अपने खडे लंड को छुपाने की कोशिश करने लगा मगर दादी की नजर पड ही गयी और वो मुस्कुरा दी
मै- जी दादी क्या हुआ
दादी- बेटा मुझे तुझसे बात करनी थी
मै – हा दादी
दादी- देखो शाहिद बेटा जो तुम अपने अम्मी अब्बा के लिए कर रहे हो वो काबिले तारीफ है मगर तुम्हे यह पूरी तरह से करना होगा
मै- मतलब दादी
दादी- मतलब तुम्हें अपनी अम्मी के साथ पूरी तरह से शौहर वाला रिश्ता मुक्कमल करना होगा मतलब की शारीरिक तौर पर भी तुम्हें उसे अपनाना होगा बरना निकाह मुक्कमल नही होगा
मै- पर दादी वो अम्मी है मेरी मै कैसे उनके साथ
दादी- जानती हू बेटा यह बहुत मुश्किल है मगर निकाह के बाद वो तुम्हारी बीबी हो जाएगी तो जो तुम करोगे वो जायज होगा
मै – पर इससे यह तो नही बीरबल जाएगा न की मै उनका हक बेटा सू और तलाक के बाद तो फिर से पूरी तरह से वो मेरी अम्मी हो जाएगी तब मै कैसे उनसे नजरें मिला पाऊगा
दादी- हा यह तो मगर बेटा यह जरूरी है बरना तुम्हारा यह सब करना बेकार हो जाएगा सोचो और तुम समझदार हो
फिर दादी चली गई और मै सोचने लगा की यार मै क्या सोच रहा हू मानता हूँ अम्मी बला की खूबसूरत है मगर है औचित्य मेरी अम्मी और यह जो मेरा खडा हुआ है यह तो होगा ही आखिर मै मर्द हू और औरत के बारे मे सोचकर यह तो होगा ही मगर यह भी सच है की अब यह होना ही है और ना चाहते हुए बी मुझे यह करना ही पडेगा
इस तरह मै यह सोचता रहा और सो गया
वहा दूसरी तरफ अम्मी अपने कमरे में बैठी हुई सोच रही थी की आज मैंने अपने बेटे के साथ शादी की शापिंग की और अपनी ब्रा और पैंटी खरीदी है वो क्या सोच रहा होगा मेरे बारे में और परसो जब मेरी उससे शादी हो जाएगी तो मै कैसे उसके साथ सुहागरात पता नही क्या होगा आखिर है तो वो मेरा बेटा और जवान भी है बाद मे जब तलाक होगा उसके दिमाग में इसका क्या असर पडेगा और उसके एक्जाम भी है अगले महिने उसकी पढाई पर भी असर न पडे उसके करियर को भी देखना ।
है ताकि वो भी मेरे और उसके डेड की तरह एक कामयाब और बडा डाक्टर बन पाए मगर ये परिस्थितियां आ गई कैसे भी मुझे यह सब सम्भालना होगा ताकी उसकी पढाई पर भी असर न पडे और उसे एक्साम मे कोई टेंशन न हो इसके लिए मुझे ही कुछ करना होगा फिर अम्मी भी सो गई

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