Update 97
रश्मि ने कई बार फोन किया पर उसने उठाया ही नही… उठाती भी कैसे वो… फोन को साइलेंट मोड पर करके वो अपनी चुदाई चीख-2 कर जो करवा रही थी.
रश्मि: “लगता है वो ड्राइव कर रही है….आ ही जाएगी अभी…”
उसका ध्यान अभी तक विक्की के लंबे लंड के उपर था जो अब धीरे-2 फिर से अपने असली आकार में आने लगा था..
रश्मि की मोटी छातियों की तरफ देखता हुआ विक्की बोला: “अब तो वो आने ही वाली है … तो इसको तैयार करना अब आपकी ज़िम्मेदारी है…”
रश्मि को तो मौका चाहिए था फिर से उसके लंड को पकड़ने का. उसने विक्की को पकड़ कर अपनी जगह पर बिठाया और खुद उसके सामने आकर खड़ी हो गयी…. और उसके लंड को लेकर धीरे-2 मसलने लगी..
और ऐसा करते हुए वो बड़े ही सेक्सी तरीके से उसे देख रही थी.
और एक ही मिनट के अंदर विक्की का लंबा लौड़ा फिर से अपने 8 इंची आकार में आ गया.
और रश्मि उसे अपनी दोनो छातियों के बीच में लेकर धीरे-2 उसे बूब मसाज भी दे रही थी.
एक तो उसके मोटे-2 मम्मे और उपर से उसका सेक्सी लुक, विक्की के लंड का पारा जल्द ही फिर से बढ़ने लगा और उसने झटक कर अपने लंड को उसकी गिरफ़्त से छुड़वाया.
”आप तो मुझे एक मिनट मे फिर से झाड़ कर रख देंगी… कुछ तो काव्या के लिए रहने दो…”
वो भी मुस्कुरा उठी.
और तभी रश्मि के फोन की घंटी बज उठी, काव्या का फोन आया था… वो रोहित के साथ चुदाई करवा कर फ्री हो चुकी थी अब तक.
उसने फोन उठा कर उसे जल्द घर आने को कहा..
और फोन रखने के बाद वो विक्की के लंड को पकड़ कर उसे अपने बेडरूम के अंदर बने बाथरूम की तरफ ले गयी ताकि काव्या के आने तक वो फ्रेश हो जाए..
काव्या के आने की बात सुन कर उसके लंड में जलतरंग सी बजने लगी और वो रश्मि के पीछे-2 चलता हुआ बाथरूम में पहुँच गया.
रश्मि ने उसको शावर के नीचे ले जा कर खड़ा कर दिया और फिर दोनो ने एक दूसरे को साबुन लगा कर नहलाया.
साथ ही साथ, बीच-2 में वो दोनो एक दूसरे को चूम भी रहे थे और एक दूसरे के अंगो को सहला भी रहे थे.
ऐसा करीब 10 मिनट तक चलता रहा.
और तभी बाहर के गेट की बेल बजी, काव्या आ गयी थी.
रश्मि और विक्की जल्दी से बाहर निकले. रश्मि ने जल्द से एक चादर ओढ़ ली और भाग कर बाहर की तरफ चल दी… विक्की वहीं बेड पर नंगा होकर बैठ गया… काव्या का इंतजार करने के लिए..
रश्मि ने दरवाजा खोला तो उसके चेहरे पर आई रंगत सॉफ बता रही थी की वो अंदर क्या कर रही थी…. उसने एक चादर पहनी हुई थी बस… और पूरा चेहरा लाल सुर्ख हुआ पड़ा था, और होंठ गीले…
अब वैसे भी उन माँ बेटी के बीच कोई परदा तो रहा नही था.. काव्य समझ गयी की वो चुदाई में लगी थी और शायद बीच मे से उठ कर आ गयी थी…
पर तभी काव्या को ध्यान आया की आज पापा तो घर पर है ही नही, उनके ऑफीस मे होली की पार्टी थी और वो सुबह से ही वहां गये हुए हैं, तो इस वक़्त माँ किसके साथ मज़े ले रही है..
काव्या के चेहरे पर शरारत दौड़ गयी और बोली: “माँ … ये क्या चल रहा है सब…”
रश्मि का चेहरा और भी लाल हो उठा और वो बोली: “तू खुद देख ले अंदर आ कर… मेरे बेडरूम में … चल..”
काव्या के दिल में तो गुदगुदी सी होने लगी तभी से… वो भागती हुई सी अपनी माँ के बेडरूम में गयी… उसके दिल मे बस लोकेश अंकल की तस्वीर चल रही थी… क्योंकि उसके पापा के अलावा सिर्फ़ लोकेश अंकल ही उसकी माँ की मार सकते थे… पर अंदर पहुँचकर वो अश्चर्यचकित रह गयी और लगभग चिल्लाते हुए बोली, ”विक्की !!!!!!!!!!!!!!!!!!! तुम ……”
वहाँ विक्की बैठा था… पूरा नंगा…. अपने हाथ मे वही जादूगरी लॅंड लिए जिसको दिखा कर उसने काव्या को कितना तरसाया था अभी तक…
पर वो कर क्या रहा था आज उसके घर. वो पूछने ही वाली थी की विक्की बोल पड़ा, ”आओ डार्लिंग… तुम तो आई नही, मैने सोचा की मैं खुद ही आ जाऊ तुम्हारे साथ होली खेलने…”
तब तक रश्मि भी अंदर आ चुकी थी… और अंदर आते ही उसने बड़ी बेशर्मी से अपने उपर ओढ़ी हुई चादर फिर से उतार फेंकी और पूरी नंगी होकर अपनी गांड मटकाती हुई काव्या के करीब आई और बोली, ”विक्की बस अभी आया था, एक घंटा पहले. मैने सोचा की जब तक तुम आओ, मैं ही थोड़ा बहुत…”
और इतना कह कर वो शरमा सी गयी… भले ही वो खुल चुकी थी अपनी बेटी के सामने… पर किसी दूसरे के सामने भला कैसे बोलती की विक्की से मज़े ले रही थी..
काव्या अच्छी तरह से जानती थी की विक्की ने जो कसम ले रखी है की पहले वो उसकी चुदाई करेगा और उसके बाद उसकी माँ की, उस पर वो अभी तक अडिग ही होगा… रश्मि सिर्फ़ उसके लंड को चूस्कर उसे मज़ा दे रही थी… और शायद अपनी चूत को चुसवा कर खुद भी मज़े ले रही थी…
पर अब तो काव्या आ चुकी थी… भले ही वो पहले नितिन से और बाद में राह चलते एक अंजान शख्स से चुदवा कर आई थी पर चुदाई की जो खुराक उसे चढ़ चुकी थी वो एक बार फिर से उसके लंड को देख कर होने लगी..
और धीरे-2 उसका जिस्म फिर से गर्म होने लगा… और चूत भी.
काव्या ने अपनी माँ की तरफ देखा जो बड़ी आशा भरी नज़रों से उसकी तरफ देख रही थी , ताकि वो चुदाई के लिए बिना कोई नखरा किए तैयार हो जाए बस… उसके बाद उसका भी नंबर लग ही जाएगा..
अपनी माँ की याचना भरी नज़रों से ज़्यादा तो उसे अपनी चूत से निकल रहे पानी की चिंता थी,जो उसे बह-बह कर चुदवाने के लिए उकसा रहा था. पर फिर भी अपनी माँ पर एहसान जताने के लिए वो बड़े ही सेक्सी तरीके से चलती हुई अपनी माँ तक आई और उसके नंगे जिस्म पर हाथ फेरती हुई बोली : “माँ, क्या तुम चाहती हो की आज मैं विक्की के साथ करू…???”
रश्मि (धीरे से) : “उम्म्म्म … हाँ … मेरी बच्ची … कर ले ना… प्लीज़, कर ले….”
वो परमिशन से ज़्यादा रिक्वेस्ट लग रही थी..
वैसे भी काव्या ने पिछले कुछ समय से जो रूप देखा था अपनी माँ का, उसके बाद ऐसा बचकाना सवाल पूछना सही नही था… पर ऐसा बोलते हुए जो उत्तेजना से भरी तपिश रश्मि के बदन से निकल रही थी, वो उसके खुद के जज्बातों को सुलगा कर उन्हे आग के शोले में बदल रही थी… जिसमे आज वो विक्की को भून कर खा लेना चाहती थी.
काव्या (अपनी माँ की आँखो में देखते हुए) : “तो चलो … उतारो मेरे कपड़े… और कर दो मुझे भी नंगा… अपनी तरह… फिर मैं दिखाती हूँ आपको कैसे इस विक्की के लंड से असली मज़ा लेती हूँ मैं …”
अपनी बेटी के भावना से भरे शब्दों को सुनकर रश्मि के हाथ बिजली की तेज़ी से चलने लगे और पलक झपकते ही उसने अपनी फूल सी बेटी को उसी हालत में खड़ा कर दिया जैसी वो पैदा हुई थी… एकदम नंगी.
और उसके नशीले बदन की जवानी को देखकर एक पल के लिए तो रश्मि के मुँह से भी आह निकल गयी. और उसे अपनी जवानी के दिन याद आ गये जब उसके जिस्म से भी जवानी ऐसे ही फुट-फूट कर निकला करती थी…
और उसने भावावेश में आकर अपनी बेटी को बाहों मे भर लिया और उसके लरज रहे होंठों को ज़ोर-2 से चूसने लगी..
काव्या को वैसे तो ये सब अच्छा लगा पर उसे उम्मीद नही थी की उसकी माँ ये हरकत विक्की के सामने करेगी… और जब काव्या ने विक्की की तरफ देखा तो उसकी हँसी निकल गयी, वो अवाक सा होकर, अपना मुँह खोले हुए उन दोनो माँ-बेटी की इस हरकत को देख रहा था.
कुछ देर तक चूमने के बाद रश्मि ने काव्या को छोड़ दिया और बोली : “चलो… जल्दी जाओ वहाँ….”
काव्या भी उसकी अधीरता समझ रही थी, आख़िर उसके बाद वो खुद भी तो चुदने वाली थी विक्की से.
काव्या पलटी और मटकती हुई विक्की की तरफ चल दी, जो अपने लंड को जोरों से मसल कर अपनी तरफ आ रही हुस्न की मल्लिका के स्वागत के लिए तैयार बैठा था.
काव्या ने उसकी आँखों में देखते-2 उसके लंड पर अपनी उंगलियाँ जमाई और उसे मसलना शुरू कर दिया… और साथ ही साथ उसने झुक कर अपने होंठों से उसके लंड को चूम लिया…
और फिर धीरे-२ उसकी आँखों में देखते हुए वो उसे किसी अजगर की तरह निगल गयी.
और कुछ देर तक चुभलाने के बाद जोर-२ से सक्क करने लगी.
विक्की के हाथ भी हरकत में आ गये और उसने नीचे हाथ करते हुए काव्या के लटक रहे अमरूद अपने सख़्त हाथों से मसलने शुरू कर दिए… उसकी उंगलियों की मसलन से जल्द ही वो हरे अमरूद लाल हो गये… और फिर काव्या ने उसके लंड को छोड़ते हुए उसके गीले होंठों को अपनी ब्रेस्ट पर लगा दिया और उपर मुँह करके किसी सियार की भाँति ज़ोर से चीख पड़ी…
”आआआअहह … चूsssssस!”
विक्की तो उसके निप्पल की किसी च्यूइंग गम की तरह चबा रहा था… उसके भरे हुए स्तन को पूरा मुँह में भर कर वो उसका पूरा रस निचोड़ रहा था.
रश्मि भी बेड पर आ कर बैठ गयी और विक्की के हाथों अपनी फूल सी बच्ची का मर्दन देखते हुए अपनी चूत मसलने लगी.

