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Update 85

पर वो बेचारी अभी जवानी की दहलीज पर पहुँची थी… इसलिए वो नही समझ सकती थी की ये तरीका होता है एक दूसरे को उत्तेजना के उस शिखर पर पहुँचाने का , जहाँ की उँचाई पर पहुँचकर चुदाई करने का मज़ा दुगना हो जाता है..और यही शायद उसकी लाइफ का सबसे बड़ा सबक बन जाएगा आज..
रश्मि को जवाब देने के बदले समीर ने अपना पयज़ामा नीचे खिसका कर अपना लंड रश्मि के हाथ में पकड़ा दिया और बोला : “ये देख…. ये है तेरा पालतू लंड …इसे डालूँगा तेरी चूत में …अंदर तक… और चुदाई करूँगा तेरी ….”
रश्मि : “म्*म्म्ममममममममम ……….. ये तो बहुत लंबा है…….. मुझे दर्द होगा………”
समीर : “धीरे-2 जाएगा ना अंदर… तब नही होगा….. बड़े आराम से डालूँगा….”
रश्मि : “उम्म्म्मममममम……. आराम से तो मज़ा भी नही आता…… ज़ोर से करोगे, तभी मज़ा मिलेगा…”
समीर : “साली…… मज़े भी लेने है…. लंबे लंड के दर्द से भी बचना है….. एक नंबर की चुद्दक्कड़ है तू….”
रश्मि : “चुद्दक्कड़ नही… रंडी हूँ मैं …..आपकी पर्सनल रंडी…..”
काव्या तो अपनी माँ के मुँह से ऐसी गंदी बातें करते देखकर हैरान होती जा रही थी… पर साथ ही साथ उसे अपनी चूत के अंदर भी चिंगारियाँ जलती महसूस हो रही थी… कमाल की बात थी, वो अभी-2 झड़ कर आई थी, फिर भी ऐसी बातें सुनकर ही उसकी फुददी फिर से भड़क उठी थी….उसे भी शायद ऐसी गंदी बातों का होने वाला असर समझ आ रहा था..
समीर ने रश्मि के गाउन को उपर कर दिया और उसके सिर से घुमा कर बाहर निकाल दिया…अब वो पूरी नंगी थी उसकी बाहों में …
समीर ने भी अपनी टी शर्ट और पायजामा बड़ी फुर्ती से निकाल फेंका और नंगा हो गया….उसकी पीठ काव्या की तरफ थी, जो अपनी साँसे रोके अपने सौतेले बाप को नंगा होते देख रही थी…एक पल के लिए तो उसे यही लगा की समीर उसके लिए नंगा हो रहा है…और नंगा होते ही उसके भी कपड़े निकाल फेंकेगा और उसकी जबरदस्त चुदाई करेगा…
काव्या ने अपने हाथ आगे किए और समीर की नंगी पीठ से छुआ दिए…समीर सिहर उठा जब काव्या के हाथ रेंगते हुए उसके चूतड़ों तक आए और वो उन्हे बड़े ही प्यार से सहलाने लगी…
समीर ने रश्मि के शरीर को अपनी बगल में दबा रखा था..उसके दोनो हाथों को भी…ताकि वो उसकी पीठ की तरफ ना चले जाएँ, जहाँ उसकी बेटी काव्या चिपक कर मज़े ले रही थी..
ये तो समीर का सपना था , की एक साथ दोनो माँ बेटियों को एक ही पलंग पर नंगा करके चोदे …
पर आज वो उस मूड में नही था, वो सिर्फ़ काव्या को ये सब दिखाकर उसे पूरी तरह उत्तेजित करना चाहता था, ताकि वो उसकी कलाकारी के जौहर देख कर खुलकर मज़े ले…वैसे भी पहली बार वो उसकी चुदाई आराम से और बिना किसी और की उपस्थिति के करना चाहता था…
समीर ने आगे बढ़कर रश्मि के एक स्तन के उपर अपने दाँत रखे और उन्हे चुभलाने लगा..
”आआआआआआआआआयईयुईीईईईईईई …. ओह मेरे राजा ………….. चूस लो इन्हे …………… उम्म्म्मममममम….”
अपनी माँ की सेक्सी आवाज़ सुनकर काव्या को भी कुछ -2 होने लगा….उसने भी अपने होंठ गीले किए और उन्हे समीर की चिकनी पीठ से चिपका दिया और उसे चूम लिया…
अब सिसकने की बारी समीर की थी…गर्म होंठों से जख्म सा बन गया था उसकी पीठ पर…
और अपना निप्पल चुसवाने के बाद तो रश्मि बावली सी हो गयी…उसने समीर के सिर को पकड़ कर फिर से अपने दूध पर लगाया और उसके मुँह के अंदर ठूस दिया…
”ओह…..डार्लिंग ………………. कितना तड़पाते हो तुम ……………. अब और ना तरसाओ……………डाल दो अपना ये लंबा लंड मेरे अंदर…..”
और रश्मि ने अपने आप को आज़ाद कराया और एक ही झटके मे समीर के उपर सवार हो गयी……और समीर कुछ समझ पता, उससे पहले ही रश्मि ने समीर के लंड को अपने हाथ में पकड़ा और अपनी चूत पर लगाकर उसे अंदर निगल लिया..
और सीटियाँ मारती हुई वो उसके लंड पर फिसलती चली गयी…
”आआआआआआआआआआआआहह ……. उम्म्म्ममममममममममममममम ………”
एक ही पल में ये सब हुआ, ना तो समीर को और ना ही काव्या को संभलने का मौका मिला…पहले तो काव्या सोच रही थी की जब उनकी चुदाई शुरू होगी तो वो चुपके से खिसक कर बेड से नीचे उतर जाएगी…और अंधेरे में छुपकर उनकी चुदाई को देखेगी…पर अपनी माँ की फुर्ती देखकर वो दंग ही रह गयी…उसे कुछ सोचने समझने का मौका ही नही मिला…उसने झट से अपनी आँखे बंद कर ली और दम साधे सोने का नाटक करने लगी…
और समीर के लंड को अंदर निगलने के बाद जैसे ही रश्मि ने उसके उपर छलांगे लगानी शुरू की, तभी उसकी नज़र समीर की बगल में सो रही काव्या पर पड़ी… और वो चिल्लाई : “ये….ये कौन है….”
अंधेरा काफ़ी थी, पर फिर भी कोई वहाँ लेटा हुआ है इसका एहसास तो मिल ही रहा था रश्मि को….
उसने थोड़ा आगे होकर और घूरकर उस सोते हुए सांये के चेहरे को गौर से देखा और दबी हुई आवाज़ में चिल्लाई : “ये….ये तो काव्या है….. हे भगवान….ये यहाँ कैसे आ गयी….”
समीर और काव्या की सिट्टी पिट्टी गम हो गयी , ऐसे रश्मि के हाथों पकडे जाने पर. रश्मि ने घूर कर समीर की तरफ देखा, भले ही अंधेरा काफ़ी था पर फिर भी वो उसकी आँखो में आ रहे गुस्से को देख पा रहा था, वो शायद डर भी गयी थी की उसकी बेटी उसे ऐसे चुदाई करते देखेगी तो क्या सोचेगी…पर उससे भी ज़्यादा वो अभी ये सोच रही थी की ये काव्या वहाँ आई कैसे…
समीर : “तुम जब अंदर आकर सो गयी तो कुछ ही देर में काव्या ने भी कहा की वो भी सोने जा रही है…इसलिए ये भी यहाँ आकर सो गयी …”
रश्मि (थोड़ा गुस्से में) : “तो इसका मतलब तुम जानते थे की ये यहाँ पर सो रही है…उसके बावजूद भी तुम शुरू हो गये…कुछ तो शरम करनी चाहिए थी आपको…”
समीर : “देखो…वैसे तो मेरा कोई इरादा नही था ऐसा कुछ करने का..तुम सो रही थी…और बेड के इस तरफ काव्या भी, मैं तो बस तुम्हारे पास कुछ देर के लिए लेटने के लिए आया था, मुझे क्या पता था की तुम एकदम से चुदाई के लिए तैयार हो जाओगी. और तुम तो जानती हो, मुझसे तो कभी भी करवा लो ये सब, और जब मेरा लंड खड़ा होता है तो मेरे आस पास कौन है ये मुझे याद नही रहता… ग़लती तो तुम्हारी है, जो बिना देखे ही तुम मेरे उपर सवार हो गयी नंगी होकर …”
समीर ने उल्टा रश्मि को ही दोषी करार दे दिया इस सिचुएशन के लिए…
रश्मि के चेहरे पर अनेको भाव आ जा रहे थे…वो समीर की बातें सुनती रही…और उसे कहीं ना कहीं वो सब सही भी लगा, उसने अपना सिर झुका लिया..
पर समीर के लंड के उपर उसका थिरकना बंद नही हुआ….अभी भी वो उसके लंड को अंदर लेकर धीरे-2 आगे-पीछे हो रही थी..
समीर समझ चुका था की उसके उपर चुदासी चढ़ चुकी है, अब वो चाहकर भी रुक नही सकती…भले ही अपनी बेटी को अपने बेडरूम में पाकर थोड़ी देर के लिए वो रुक गयी थी, पर चुदने का ख़याल उसने अपने दिल से नही निकाला था अभी तक..
समीर ने पंगे लेने की सोची, और बोला : “चलो अब उतरो मेरे उपर से…तुम अगर ये समझती हो की काव्या उठ जाएगी और हमे ये सब करते देखेगी तो हमे अब ये सब यहीं रोक देना चाहिए…”
इतना कहकर समीर ने रश्मि की कमर में हाथ रखकर उसे पीछे की तरफ धकेला और रश्मि की चूत के रस से सना हुआ उसका लंड सरसराता हुआ सा बाहर निकल आया…
अपने अंदर एकदम से आए इस ख़ालीपन के अहसास को महसूस करते ही रश्मि तड़प उठी….और सिसकती हुई सी वो समीर की छाती के उपर अपनी ब्रेस्ट रखकर लेट गयी और बोली : “उम्म्म्मममममम ….. अब इतना कुछ हो गया है तो पूरा ही कर लेते है ना…. कोई बात नही, काव्या की फ़िक्र छोड़ो… वैसे भी उसकी नींद काफ़ी पक्की है… इसके सामने तो ढोल-नगाड़े भी बजा दो तब भी नही उठती ये, और आज तो वो सुबह से घूम-फिरकर काफ़ी तक भी गयी है… अब ये कल सुबह ही उठेगी…”
इतना कहते-2 रश्मि ने उसके घीस जैसे लंड को वापिस अपनी चूत के मुँह पर रखा और नीचे की तरफ खिसक कर उसे अंदर ग्रहण कर लिया…
समीर को और कुछ कहने का मौका ही नही मिला…बस वो भी रश्मि के साथ सिसक कर रह गया….
और उन दोनो के बीच जो चल रहा था उसे सुनकर और महसूस करके काव्या का क्या हाल हो रहा था उसकी तो कल्पना भी नही कर सकते थे वो दोनो…काव्या की चूत ने गाड़े रस की धार लगातार बहकर बाहर निकल रही थी…और बिस्तर को तर कर रही थी…
समीर तो ये बात अच्छी तरह से जानता था की सोने का नाटक कर रही काव्या असल में जाग रही है…और उनकी सेक्सी बातें सुनकर मस्त भी हो रही होगी…उसने थोड़ी और मस्ती देने की सोची उसे..
समीर (रश्मि से) : “पर ऐसे तुम कैसे कर सकती हो, तुम उसी बिस्तर पर चुदाई करवा रही हो जहाँ तुम्हारी बेटी भी सो रही है …”
रश्मि : “मैने बोला ना, इसकी नींद नही खुलेगी ऐसे…. और वैसे भी मुझसे अब रहा नही जा रहा बिना काम पूरा करवाए…. अब जो होगा देखा जाएगा…”
और वो फिर से उसके लंड के उपर आगे-पीछे होने लगी…
समीर : “इसका मतलब इस वक़्त अगर काव्या की नींद खुल भी जाए और वो हमे ऐसे नंगे होकर चुदाई करते हुए देख ले तो तुम्हे कोई फ़र्क नही पड़ेगा…”
रश्मि तो चुदाई के पुर मूड में आ चुकी थी…वो बोली : “नही पड़ेगा…. अब तुम ये सब बातें बंद करो और मुझे चोदो ज़ोर से…. आआआआहह”
पर समीर भी बड़ा कंज़र था…वो रुका नही, उसने बेड के साइड में लगे बटन से कमरे में ज़ीरो वॉट का बल्ब जला दिया..पुरे कमरे में उजाला फ़ैल गया
रश्मि : “अब ये किसलिए ….”
समीर : “ताकि तुम्हारे सेक्सी बदन को देख सकूं ….”
उसने अपने हाथ उपर करके रश्मि के मुम्मे ज़ोर से दबा दिए…रश्मि अपना सिर उपर करके चीख पड़ी : “आआआआआहह …. धीरे दबाओ बाबा ………… ये तुम्हारे लिए ही है…..”
और उन्हे दबाते हुए समीर की नज़रें अपनी बगल में लेटी काव्या की तरफ गयी जो सोते हुए गहरी साँसे ले रही थी…और साँसे लेते हुए उसका सीना उपर नीचे हो रहा था…और सिर्फ़ टी शर्ट पहनने की वजह से उसकी छाती पर उसके नन्हे-2 निप्पल सॉफ चमक रहे थे..
समीर का मन तो का रहा था की अपना दूसरा हाथ आगे करे और उसमे काव्या की ब्रेस्ट को दबोच ले…यानी एक हाथ मे माँ की और दूसरे में बेटी की चुचियाँ…

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