Update 83
खिड़की मे बैठे विक्की ने अपना मोबाइल बंद किया, उसके पास अब काव्या की चूत चुसाई का 10 मिनट का एम एम एस था…जिसके ज़रिए वो उसे बाद में ब्लेकमैइल कर सकता था..
उसने अपने बाप को बाहर आने का इशारा किया..ना चाहते हुए भी देवीलाल भारी कदमों से बाहर चल दिया..
दरवाजा कब खुला, कब देवीलाल बाहर गया और विक्की अंदर आया, काव्या को कुछ पता नही था..
वो तो अपनी ही दुनिया मे खोई हुई सी अपनी चूत से निकल रहे पानी पर उंगलियाँ चला रही थी..
बेचारी को ये भी पता नही चल पाया की उसकी चूत को वो बूढ़ा कुत्ता चूस कर चला गया..
देवीलाल अंदर वाले कमरे में जाकर छिप गया… ताकि जब काव्या बाहर जाए तो वो उसे देख ना सके..
थोड़ी देर ऐसे ही पड़े रहने के बाद काव्या उठ खड़ी हुई, उसने टाइम देखा, 7 बजने वाले थे …. उसने जल्दी से कपड़े पहनने शुरू किए… विक्की सामने की चेयर पर बैठा हुआ उसे कपड़े पहनते हुए देख रहा था… और सिगरेट के कश खींच रहा था…
काव्या ने जल्दी-2 कपड़े पहने और विक्की को बाय बोलकर बाहर निकल गयी…. और बाहर जाकर अपनी गाड़ी में बैठी और सरपट घर की तरफ गाड़ी दौड़ा दी…
आज वो काफ़ी खुश थी… क्योंकि उसके मोबाइल में कुछ ऐसा था जिसका फयदा उठाकर वो अपनी माँ को डरा धमका कर दूर रख सकती थी… ताकि वो खुद अपने बाप के साथ खुल कर मज़े ले सके..
और कुछ ऐसा ही समीर के पास भी था जिसे दिखा कर वो काव्या के साथ मज़े ले सकने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र था..
अब देखना ये था की क्या ये सब इतना आसान था जितना की ये दोनो सोच रहे थे..
क्योंकि रश्मि एक पत्नी और माँ दोनो थी..
और कोई भी पत्नी ऐसा कभी नही चाहती की उसके पति पर किसी और का हक़ हो… और ना ही कोई माँ ये चाहेगी की उसकी बेटी अपनी जिंदगी अपने से दुगनी उम्र के मर्द के लिए बर्बाद कर दे..
रश्मि अपने हिस्से के तो हर मज़े ले चुकी थी पर दूसरों को उतनी ही आसानी से मज़े लेने देगी, ये तो आने वाला वक़्त ही बताएगा.
काव्या जब घर पहुँची तो 9 बजने वाले थे… वो काफ़ी थक चुकी थी…सुबह से 4-5 बार झड़ने के बाद और स्वीमिंग पूल में रहने से उसके बदन का पोर-2 दुख रहा था…
दरवाजा समीर ने खोला.. वो तो कब से उसके वापिस आने का वेट कर रहा था.. .रश्मि तो कब की सो चुकी थी, वो भी काफ़ी थक कर आई थी.. इसलिए अपने कमरे मे जाकर घोड़े बेच कर सो गयी..
पर समीर को चैन नही था..वो तो बस काव्या के घर आने का वेट कर रहा था.. और जैसे ही उसने दरवाजा खोलकर काव्या को देखा, वो आगे बढ़कर उसके गले से लग गया..
काव्या का नर्म जिस्म उसकी बलशाली भुजाओं मे आकर पिस सा गया…और वो कसमसा उठी..
काव्या : “उम्म्म्ममममम पापा …….. मन तो कर रहा है ती आप मुझे निचोड़ डालो अभी …. पर पूरी बॉडी टूट सी रही है मेरी…. आई एम फीलिंग टायर्ड ….”
वैसे तो समीर के शरीर की सुगंध काव्या को उत्तेजित कर रही थी… पर काफ़ी थकी होने की वजह से वो उस मूमेंट को एंजाय नही कर पा रही थी…
समीर : “ओल्ले मेरा बेबी …..थक गयी है…. कोई बात नही … पापा के पास इसका भी इलाज है…. चलो आओ मेरे साथ….”
समीर ने काव्या का हाथ पकड़ा और उसे लेकर उपर की तरफ चल दिया..
सेकेंड फ्लोर पर उनका एक गेस्ट रूम था… समीर काव्या को लेकर वहीं आ गया..
वहां तो काव्या भी सिर्फ़ एक-दो बार ही आई थी… वहां एक टेबल था, जहाँ अक्सर समीर अपने नौकर से बॉडी मसाज करवाता था
अंदर आते ही समीर ने पीछे से काव्या की कमर मे हाथ डाल कर उसे पकड़ लिया और गर्दन पर एक गीली सी पप्पी दे डाली..
”उम्म्म्मममममममममम पापा ……….. …… मन तो मेरा भी आज बहुत था ….. पर मै थकी हूँ आज ….”
समीर : “तुम्हारी थकान उतारने के लिए ही तो मैं तुम्हे यहाँ लाया हू ….चलो अपने कपड़े उतारो सारे …”
काव्या उसकी बात सुनकर चोंक गयी …और अपनी आँखे गोल-2 घुमाते हुए बोली : “यू नॉटी पापा …. बोला ना मैने… आज कुछ नही ….कल पक्का ….”
समीर हंसते हुए : “कल की कल देखेंगे… आज तो मैं सिर्फ़ तुम्हारी बॉडी मसाज कर रहा हू …ताकि तुम्हारी थकान उतर जाए… और कल तुम फ्रेश होकर मेरे पास आओ….”
”नोओओओओओओओओओओओओओओओ …. मैं नहीं ……. ”
समीर : “कम ओंन …………. इट विल बी फन ………. तुम्हे अच्छा लगेगा ……….. एक बार मसाज करवा कर तो देखो मुझसे ……”
काव्या की आँखे लाल होने लगी थी, ये सोच-सोचकर की मसाज करते हुए क्या-2 होगा…
मन तो उसका भी करने लग गया था वो एहसास लेने का…पर फिर भी उसने एक आख़िरी कोशिश की : “पर ….वो …. मम्मी …..”
समीर : “उसकी फ़िक्र मत करो…. वो नीचे गहरी नींद मे सो रही है…. और अगर वो उपर की तरफ आएगी तो मुझे पहले ही पता चल जाएगा… ”
और उसने अपने मोबाइल पर ड्रॉयिंग रूम के कैमरे का सीन चला कर ऑन कर दिया और उसे सामने रख दिया..
पर काव्या अभी भी सकुचा रही थी…ऐसे कैसे एक दम से समीर के कहने पर वो नंगी हो जाए…
समीर : “क्या सोचने लगी तुम….. पहली बार तो नही हो रही मेरे सामने नंगी…. चलो , जल्दी करो… वरना तुम्हारी मम्मी उठ जाएगी तो बेकार के ड्रामे होंगे यहा …”
ड्रामों से उसका मतलब था की वो चीखेगी, हंगामा करेगी की उसकी बेटी के साथ ये सब क्या कर रहे हो और मजबूरन समीर को वो वीडियो उसे दिखना पड़ेगा जिसमे वो उसके दोस्त लोकेश से चुदवा रही थी अभी कुछ देर पहले…
काव्या : “तो आप नही मनोगे…. ह्म्*म्म्ममम”
ये उसका भी समर्पण था समीर के लिए के लिए
समीर ने हँसते हुए ना में सिर हिला दिया…
काव्या : “ओके ….. बट बी इन युअर लिमिट ….आज मै काफ़ी थकी हुई हूँ … और आज सिर्फ़ आपको मेरी थकान उतारनी है, और कुछ नही …”
वो ये इसलिए कह रही थी क्योंकि वो चाहती थी की जब वो पहली बार चुदे तो उसके अंदर पूरी तरह से एनर्जी भरी हुई हो… एक साथ 3-4 बार चुदवाना चाहती थी वो लगातार पहली ही बार में …और आज तो उसके अंदर शायद एक-दो बूंदे ही बची थी उसके रस की, बाकी तो सारी निकाल चुकी थी वो सुबह से विक्की के जरिये ….
उसने अपनी टी शर्ट को पकड़ा और धीरे-2 उपर करते हुए उतारना शुरू कर दिया…
ब्रा तो उसने पहनी ही नही थी…इसलिए ब्लू कलर की टी शर्ट को उतारते ही उसके भरे हुए से स्तन उछलते हुए से बाहर निकल आए…
ना चाहते हुए भी समीर के मुँह से एक आह निकल गयी…उन्हे कैसे चूसेगा..कैसे मसलेगा..कैसे खाएगा, वो बस यही सोचने लगा..
समीर का मन तो हुआ की आगे जाए और उसके मुम्मों को पकड़ कर निचोड़ डाले…और अभी के लिए जितना भी पानी निकले उसे पीकर अपनी प्यास बुझा ले…पर बड़ी ही मुश्किल से उसने अपने आप पर कंट्रोल किया हुआ था..
काव्या ने अपनी जीन्स भी उतार दी…उसकी सुडोल टांगे और भरी हुई गांड देखकर उसके दाँत आपस मे कटकटाने लगे…मन तो उसका कर रहा था की अपने दांतो से उसके कसे हुए माँस को चबा कर उनपर लव बाइट्स बना दे…पर इसके लिए अभी काफ़ी टाइम था उसके पास…
वो उसके पूरे नंगे होने का वेट करने लगा…
अब तो काव्या को भी शरम आ रही थी..एक ही दिन में तीसरी बार वो अपने कपड़े उतार रही थी…
पहले उसने रिसोर्ट में उतारे….उसके बाद विक्की के घर पर नंगी हुई…और अब यहाँ…अपने ही घर मे…अपने सौतेले बाप के सामने..
उसने दूसरी तरफ मुँह कर लिया और शरमाते हुए अपनी वाइट कलर की पेंटी को नीचे खिसकाने लगी..
वो जब पेंटी उतारने के लिए नीचे झुकी तो उसकी उभर का पीछे आई गांड का मांसलपन देखकर समीर का दिल तो धड़कना ही भूल गया…
यार…ये जवान लड़कियों की गांड इतनी कसावट वाली कैसे होती है….ऐसी गांद का तकिया रोज रात को मिल जाए तो क्या बात है..
वो जल्दी से जाकर उस मसाज बेड पर उल्टी होकर लेट गयी…
और अपनी आँखे बंद कर ली..
कुछ ही देर में उसके शरीर पर समीर के हाथ आकर टकराए..
उसके तो सारे रोँये खड़े हो गये…मस्ती के मारे उसकी आँखे और भींच गयी और चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान आ गयी..
समीर ने अपने हाथों की उंगलियों से उसकी भरी हुई गांड के उपर अपनी उंगलियाँ घोंपनी शुरू की…वो उन्हे अंदर घुसाकर देखना चाहता था की वो कितनी अंदर तक जाती हैं…
ऐसी गद्देदार गांड रोज-2 थोड़े ही मिलती है…
समीर ने ओलिव आयल की शीशी उठाई और धार बनाकर उसने काव्या की गांड की सिंचाई कर दी..
फिर उसके गुम्बदों को दोनो हाथों में समेटा और उन्हे भींचना शुरू कर दिया..पूरी गांड पर तेल लगाकर उसने चमका दिया उसे..ऐसा लग रहा था जैसे सोने से बनी हुई है गांड उसकी, इतने लश्कारे मार रही थी वो …
और फिर उसने अपनी मजबूत उंगलियों से उसके पिछवाड़े की मसाज करनी शुरू कर दी..
”उम्म्म्मममममममममम ……. मज़ा आ रहा है पापा ……………….. ”
समीर : “मैने तो पहले ही कहा था…मज़ा मिलेगा… ”
इतना कहकर उसने और तेल लिया और उसकी पीठ को भी रंग डाला…और फिर उसने उपर से नीचे तक घूम-घूमकर उसकी पूरी बेक को मसल डाला…ऐसा एहसास काव्या को आज तक नही मिला था…किसी मजबूत हाथों से अपने जिस्म को रोंदवाने का क्या मज़ा होता है आज वो समझ रही थी..
समीर : “चलो, पलट जाओ अब…”
काव्या का दिल धड़क उठा…ये सोचते हुए की अब उसके बूब्स और चूत की बारी है…
वो धीरे से पलट कर पीठ के बल लेट गयी…पर उसने अपनी आँखे नही खोली….अब इतनी शरम तो उसको दिखानी ही थी ना…
समीर ने उसके नंगे बदन को उपर से नीचे तक नज़र भर कर देखा…और फिर तेल की शीशी उठा कर उसके उपर गिराने लगा..
ठंडे-2 तेल की बूंदे उसको झुलसा रही थी…उसने सिसकारियाँ मारते हुए अपना हाथ इधर-उधर चलाया तो अचानक उसके हाथ में समीर का लंड आ गया…

