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Update 81

विक्की ने काव्या के दाँये कान को पूरा का पूरा अपने मुँह मे डाल लिया, उसे अच्छी तरह से चूसा, काव्या तो तड़प उठी उसके इस प्रहार से, और फिर विक्की ने उसके गीले कान को अपने मुँह से बाहर निकाला और धीरे से उसमे बोला : “तेरी चूत चूसनी है मुझे…. अपनी गरमा गरम जीभ से….”
काव्या एक बार फिर से बिफर उठी ये सुनकर, और पागलों की तरह अपने गीले मुँह से उसे बेतहाशा चूमने लगी और बोली : “ओहsssssssssssssssssssssssssssss विक्की …..तुम मेरी जान लेकर रहोगे आज तो ………..अहह ….. ओहssssssssssssssssssssssssssssssssss …..”
और वो अपनी चूत वाले हिस्से को ज़ोर-2 से आगे पीछे करते हुए कभी उसके लंड और कभी उसके पेट पर मारने लगी..
विक्की ने उसकी कमर से पकड़ कर उसे उपर उठा लिया और काव्या ने अपनी टांगे उसकी कमर से लपेट दी और उपर चढ़ गयी…दोनो पागलों की तरह एक दूसरे को चूसने मे लगे थे…और ऐसे ही चूमते-2 विक्की ने उसे अपने बेड पर ले जाकर पटक दिया…
काव्या की आँखो मे खुमारी चढ़ चुकी थी…और उसकी नशीली आँखो मे देखते-2 विक्की ने एक-2 करते हुए उसके दोनो मुम्मो को बुरी तरह से चूमा, चूसा और उनपर टैटू भी बनाए अपने दांतो से…
और फिर उसके दोनो हाथों को उपर रखकर उसे ना हिलने की हिदायत देकर वो उसके नंगे बदन को चाटता हुआ धीरे-2 नीचे आने लगा..
काव्या ऐसे तड़प रही थी जैसे उसे कोई सज़ा मिली हो…विक्की की गीली जीभ ने उसके बदन को पूरा नहला सा दिया था..उसके होंठों की चिपचिपाहट वो अपने पूरे जिस्म पर महसूस कर पा रही थी..
और फिर विक्की के होंठ सीधा उसकी जीन्स के बटन पर जाकर रुके..और उसने बड़ी ही कुशलता से, बिना अपने हाथों का इस्तेमाल किए, उसके जीन्स के बटन अपने मुँह से ही खोल दिए…और जिप भी दाँतों से पकड़ कर नीचे खिसका दी….फिर जीन्स की दोनो साइड्स को हाथों से पकड़ कर नीचे खिसका लिया…चूत के रस की तेज महक उसके नथुनों से टकरा गयी…. विक्की समझ गया की वो अंदर से बुरी तरह से बह रही है इस वक़्त…काव्या की छातियाँ उपर नीचे हो रही थी..शायद वो जानती थी की विक्की का अगला कदम क्या होगा…वो अपनी कोहनियो के बल उपर उठ गयी… और विक्की को निहारने लगी…जो उसकी पेंटी के उपर अपनी नाक रगड़कर उसके रस को किसी कुत्ते की तरह सूंघ रहा था… और फिर उसने अपनी जीभ निकाली और गाड़े रस मे सनी हुई पेंटी को चाटने लगा..
काव्या : “आआआआआआहह ……. ओह येस्स्स्स्स्स्स्ससस्स्स्स्स्स्स्सस्स ……..”
पर उसने अपने हाथ उसके सिर के उपर नही रखे, क्योंकि विक्की ने मना किया हुआ था..ऐसी हालत मे लड़की अगर दासी की तरह हर बात माने तो उसका पार्टनर अपने आप को किसी राजा से कम नही समझता…और यही हाल इस वक़्त विक्की का था…वो अपनी दासी बनी काव्या की चूत को बुरी तरह से उसकी पेंटी के उपर से ही चूस चूस्कर उसे उत्तेजना के एक दूसरे ही शिखर पर ले जेया रहा था…
काव्या चिल्ला पड़ी : “आआआआआआहह सेयेल …….पेंटी तो उतार ……….आआआहह ….अंदर से चूस मुझे …….. अंदर से………”
उसकी चाशनी से भरी रिक़वेस्ट को वो भला कैसे मना कर सकता था…उसने अपने दांतो से उसकी पेंटी का उपरी सिरा पकड़ा और धीरे-2 उसे नीचे खिसकाना शुरू कर दिया..
और जैसे-2 उसकी पेंटी नीचे उतर रही थी…अंदर से बह रहा गरमा गरम रस विक्की की नाक पर लगता जा रहा था…और अंत में उसने अपने दांतो से खींचकर काव्या की गीली पेंटी पूरी नीचे खिसका दी..
और अब वो उसकी आँखो के सामने पूरी की पूरी नंगी लेटी हुई थी…कमरे मे घुपप अंधेरा था… सिर्फ़ दरवाजे के साइड मे बनी खिड़की से एक रोशनी की लाइन ही अंदर आ पा रही थी..काव्या की तो आँखे बंद थी पर विक्की उस हल्की सी रोशनी मे उसके नशीले बदन को पूरी तरह से देख पा रहा था… ये पहला मौका था जब वो उसके सामने पूरी की पूरी नंगी थी…और वो भी इसनी पास…
आज वो उसकी चूत को बुरी तरह से चूसना चाहता था….चाटना चाहता था…ऐसी कुँवारी चूत रोज-2 तो नही मिलती ना…
और बाहर की दुनिया से बेख़बर ये दोनो नही जानते थे की उनकी हर हरकत को कोई देख रहा है…और वो था विक्की का ठरकी बाप देवीलाल, जो उस वक़्त भी घर पर ही था जब दोनो अंदर आए थे, बाथरूम में मुठ मार रहा था वो… और अपनी भूलने की आदत की वजह से बाहर का दरवाजा बंद करना भूल गया था.. और विक्की ने समझा की उसका बाप कहीं बाहर गया है इसलिए वो खुलकर काव्या के साथ ऐसे मज़े ले रहा था, जैसे पूरा घर खाली है …वैसे तो वो अपने बाप का भी लिहाज नही करता था ऐसे कामों में ..पर एक शर्म का परदा होता है जिसकी वजह से विक्की अपने बाप के सामने खुलकर ऐसे काम नही करता था जो बच्चो को माँ -बाप के सामने नही करने चाहिए… पर शायद आज वो परदा भी गिरने वाला था..
जब देवीलाल मूठ मार कर बाहर निकला तो उसने देखा की विक्की के रूम का दरवाजा बंद है, और तभी उसको अंदर से लड़की की सिसकारी सुनाई दी…. और वो समझ गया की आज फिर से उसका बेटा किसी को घर लेकर आया है…
पिछली बार की बात उसके जहन में एकदम से आ गयी जब रश्मि उनके घर आई थी….पर विक्की के घर पर ना होने का फायदा उठाकर उसने रश्मि के साथ मज़े लिए थे… उसको चूमा था..चूसा था..शराब भी पिलाई थी उसको अपने होंठों से..और उसकी चूत में अपना लंड भी डाला था, पर पूरी चुदाई से पहले ही वो नशे के कारण बेहोश हो गयी थी और विक्की भी आ गया था… और आज फिर से अपने बेटे के कमरे से लड़की की आवाज़ सुनकर वो कान लगाकर अंदर से आ रही आवाज़ें सुनने की कोशिश करने लगा..ये सोचकर की शायद आज भी कुछ खाने को मिल जाए..
पर सिर्फ़ आवाज़ें सुनकर वो काम नही चलाना चाहता था…वो कमरे के पीछे की तरफ गया, जहाँ पर गैलरी की खिड़की बंद थी..पर हल्की सी झिर्री से अंदर देखा जा सकता था…और उसकी बगल की दूसरी खिड़की उपर से टूटी हुई थी, जिसकी रोशनी अंदर तक जा रही थी और विक्की उसी हल्की रोशनी की वजह से सब देख पा रहा था..
अंदर झाँककर जब देवी लाल ने देखा की विक्की के साथ कौन है तो उसके मुँह से पानी टपक गया…ये तो काव्या थी…उसी रश्मि की बेटी जिसके साथ उसने पिछली बार मज़े लिए थे….उनके मोहल्ले में रहकर जा चुकी थी, इसलिए उसको झट से पहचान लिया, काव्या को तो उसने अपनी आँखो के सामने जवान होते देखा था…जवान तो क्या सिर्फ़ कली बनते देखा था…पर आज उसके लगभग नंगे शरीर को देखकर लग रहा था की वो कली भी फूल बनने लायक हो चुकी है…इतना नशीला बदन उसने तो सपने में भी नही देखा था..
विक्की ने काव्या की जीन्स उतार दी..और फिर अपने दांतो से खींचकर उसकी पेंटी भी…
उसकी पेंटी को नीचे करते ही उसकी चूत का रसीलापन उसे नज़र आ गया…जिसने पेंटी के अंदर अपना रस छोड़ा हुआ था…
विक्की ने अपना मुँह नीचे किया और और उसकी पेंटी के अंदर जमा हुआ मीठा और गाड़ा रस चूस लिया… और उसी लपलपाती जीभ को उसने धीरे-2 काव्या की कसी हुई चूत के अंदर धकेलना शुरू कर दिया..
”अहह …. ओफफफफफफफ्फ़ विक्की …………. धीरे ………..”
उसने विक्की के सिर को पकड़कर पीछे धकेलने की कोशिश की पर साथ ही साथ उसके बालो को पकड़कर वापिस अंदर भी घुसा लिया…
विक्की की जीभ बाहर निकली और दुगनी तेज़ी से एक ही बार मे अंदर घुस गयी..
विक्की की गर्म जीभ उसकी छूट मे गर्म छुरी की तरह घुस गयी…और काव्या का मुँह गोल होकर रह गया और अंदर से एक लंबी किल्कारी निकल गयी..
”ऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊओह विक्की…………….. ओह एसस्सस्स”
विक्की ने अपने दोनो हाथ उसके मुम्मों पर रखे और उसकी जांघे अपने कंधे पर…और जीभ से उसकी चूत की चुदाई करनी शुरू कर दी..
कभी ज़ोर से अंदर डालता और कभी धीरे से…कभी दाँत से उसकी चूत के होंठ पकड़ता और कभी होंठों से…जीभ से उसकी क्लिट को उभारता और होंठों से उसकी नमी चूस लेता..
उसका हर वार काव्या को उत्तेजना के शिखर पर ले जा रहा था… वो बस अपनी छातियाँ उभारकर उसकी गर्म जीभ का मजा लेती रही
पर जैसे ही वो झड़ने के करीब पहुँची, विक्की रुक गया और उठ खड़ा हुआ..
काव्या : “नोssssss विक्की ….. रूको मत प्लीज़….. पूरा करो ..और करो….मुझे मज़ा आ रहा था ….करो ना प्लीज़ssssssssssssssssssssssssssssss …..”
पर विक्की खड़ा होकर मुस्कुराता रहा उसके सामने… और अपने खड़े हुए लंड को मसलने लगा…
काव्या समझ गयी की विक्की क्या चाहता है… पहले वो उसकी सेवा करे फिर वो उसको इस कसमसाहट से मुक्ति देगा..
वो झटके से उठी और झपट कर उसने विक्की के लंड को पकड़ लिया…
और उसकी आँखो मे देखती हुई काव्या ने अपना मुँह खोला और अपनी गुलाबी जीभ निकाल कर उसके काले लंड को चाटने लगी.. अपनी जीभ के गर्म लावे से उसको चमकाने लगी.. उसकी सजावट करने लगी..
और फिर किसी भूखी कुतिया की तरह उसने उस माँस के खड़े हुए टुकड़े को एक ही झटके में अपने खुले हुए मुँह के अंदर ले लिया…और अपने होंठों का फाटक बंद करके उसे ज़ोर-2 से सक्क करने लगी..
विक्की की आँखे बंद हो गयी और वो अपने पंजों पर खड़ा होकर सिसकार उठा..
”अहहह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ….. ओह ..काव्याssssssssssssssssssss ………….. मज़ा आ गया…. ”
काव्या ने उसके लंड को बाहर निकाला, अपनी जीभ से चाटा और बोली : “मज़ा तो अब आएगा…”
और फिर उसने उसकी बॉल्स को चाटना शुरू कर दिया..
ये ऐसी हरकत थी उसकी, जिसे महसूस करके विक्की तो साँतवे आसमान पर पहुँच गया और उसे देखकर खिड़की के पीछे छुपे हुए देवीलाल को हार्ट अटैक आते-2 बचा..

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