Update 78
पीछे से रोज़ी की चूत में अपनी जीभ को गाड़ कर उसकी खुदाई कर रहे समीर के मन मे इस वक़्त सिर्फ़ काव्या ही घूम रही थी…कुँवारी चूत के रस की खुश्बू इतनी मादक थी की वो बस यही सोच रहा था की कुछ ऐसी ही महक होगी उसकी काव्या की भी…जब वो उसे चूसेगा…उसका रस निकालेगा…उसे पीएगा…आआआआआहह काश इस वक़्त काव्या होती उसके सामने…
पर रोज़ी भी कम नही थी….थी तो वो भी कुँवारी ही…और रस उसका भी मीठा ही था…वो चपर -2 करता हुआ उसकी चूत की फांको के बीच अपनी खुरदूरी जीभ फिरा कर सारा रस बटोर कर अंदर निगल रहा था…
ऐसा सुखद एहसास पाकर भला कौन सी लड़की ना बहक जाए…रोज़ी ने अपनी आँखे बंद कर ली…और उन्माद में आकर आख़िरकार उसके मुँह से एक जोरदार किलकारी निकल ही गयी…
”आआआआयययययययययययीीईईईईईईईईईईईईईईईईईई …… उम्म्म्मममममममममममम …..सिर्ररर…….. एसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स ………”
उसका खुला हुआ मुँह लोकेश के इतने करीब था की लोकेश से भी सब्र नही हुआ और उसने अपने होंठ आगे करते हुए उसके खुले हुए मुँह मे डाल दिए…और अगले ही पल रोज़ी के ठंडे -2 होंठो ने उसके सख़्त होंठों को दबोच कर इतनी ज़ोर से चूसना शुरू कर दिया की लोकेश को भी दर्द होने लगा…दोनों बुरी तरह से लिपट कर एक दूसरे को चूस रहे थे
वो लोकेश को उतनी ही ज़ोर से चूस रही थी, जितनी ज़ोर से उसकी चूत को समीर द्वारा चूसा जा रहा था…लोकेश ने भी उसके चेहरे को पकड़कर अपनी तरफ से प्रहार करना शुरू कर दिया..
और देखते ही देखते लोकेश और रोज़ी ऐसी गहरी स्मूच मे डूब गये की उन्हे समीर का ध्यान भी नहीं रहा…लोकेश के हाथ भी फिसलकर उसकी छातियों पर आए और उसके दोनो मुम्मे उसने बेदर्दी से दबाने शुरू कर दिए..
रोज़ी ने भी लोकेश के दोनो हाथो पर अपने हाथ रखकर उन्हे ज़ोर से दबा दिया..और चिल्लाई : “और ज़ोर से……………..आआआआआहह”
रोज़ी को अपनी चूत पर मिल रही गर्म जीभ की सिकाई से ऐसा एहसास हो रहा था की वो हवा मे उड़ती चली जा रही थी…हालाँकि आज से पहले उसने कई बार अपनी उंगलियों से भी चूत को रगड़कर मज़े लिए थे…पर ये एहसास अलग ही था…अब वो शायद समझ पा रही थी की लोग सेक्स मे इतने मज़े क्यो करते हैं..
लोकेश ने उसकी टी शर्ट को उपर खिसकाना शुरू कर दिया….और रोज़ी को पता भी नही चला की कब उसकी टी शर्ट भी उतर गयी…और वो सिर्फ़ ब्रा में खड़ी रह गयी…नीचे से तो वो पहले से ही नंगी थी…उपर भी सिर्फ़ नाम मात्र का परदा रह गया…लोकेश ने उसके मुम्मे मसलते हुए उसकी ब्रा के स्ट्रेप उसके कंधे से नीचे गिरा दिए..और ऐसा करते ही उसके दोनो मुम्मे उछल कर बाहर आ गये..
और तब जाकर रोज़ी ने अपनी आँखे खोली…और नीचे गर्दन करके जब उसने देखा की उसकी दोनो छातियाँ नंगी होकर लोकेश के हाथों का खिलोना बन चुकी है तो वो बुरी तरह से शरमा गयी ..पर अगले ही पल उसकी आँखे फिर से गोल होती चली गयी…क्योंकि नीचे जो उसने देखा वो उसकी जिंदगी का पहला लंड दर्शन था..
और वो भी इतने करीब से….
”ऊऊऊऊऊऊऊऊओ ………….. ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह गॉड …………… ओह ….. हूऊऊऊऊऊ…”
अजीब-2 सी आवाज़ें निकालते हुए वो अपना नंगापन भूलकर लोकेश के लंड को देखे जा रही थी….और लोकेश ने उसके एक हाथ को पकड़कर जब अपने लंड पर रखा तो वो काँपने लगी….समीर को तो ऐसा लगा की वो झड़ने वाली है…पर वो तो अपने पहले लंड स्पर्श का आनंद ले रही थी..
और फिर लोकेश ने उसके सिर पर दबाव डालते हुए धीरे-2 उसे नीचे करना शुरू कर दिया…और वो खड़ी होकर घोड़ी बनती चली गयी…उसकी गांड और भी बाहर निकल आई…जिसे अब समीर और भी ज़्यादा आराम से चूस सकता था…और लोकेश के लंड के बिल्कुल उपर आकर उसने उसके 8 इंची लंड को बड़े प्यार से देखा…और फिर अपनी गर्म जीभ फिरा कर उसकी कठोरता को परखा…
और फिर अचानक उसमे जैसे कोई चुड़ैल घुस गयी….वो पागल सी हो गयी और लोकेश के लंड को अपने मुँह में लेकर ज़ोर-2 से सक्क करने लगी..
लोकेश बेचारा अपने पंजों पर खड़ा होकर उसके हर प्रहार पर चीखे मार रहा था..पर मज़ा भी बड़ा आ रहा था उसको…रोज़ी की ये पहली लंड चुसाई थी…और वो भी इतने वाइल्ड तरीके से…वो शायद ये तो जानती थी की लंड चूस कर मज़े दिए जाते हैं पर कैसे चूसा जाता है ये सीखना बाकी था अभी..पर अभी के लिए उसे बीच मे टोकना सही नही था…क्योंकि वो पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी…उसकी पीठ पर हाथ फेरकर लोकेश ने उसकी ब्रा कब उतार दी, उसे भी पता नही चला..
अब वो झुक कर लोकेश का लंड चूस रही थी और अपनी चूत को समीर से चुसवा रही थी…समीर पीछे से उसके लटके हुए थन भी मसल रहा था
लोकेश ने समीर को इशारा किया आगे बढ़ने का… समीर झट से खड़ा हुआ और उसने अपने सारे कपड़े उतार फेंके…और वापिस आकर रोज़ी के पीछे खड़ा हो गया..
अपने लंड पर उसने थूक लगाई…और रोज़ी की कुँवारी चूत पर लंड का सिरा लगा दिया..वो पिछले 15 मिनट से उसकी चूत चाट रहा था..इसलिए वो काफ़ी चिकनी हो चुकी थी…समीर ने हल्का सा झटका दिया और उसका लंड अंदर घुस कर अटक गया..
अब रोज़ी को एहसास हुआ की उसके साथ हो क्या रहा है…वैसे वो अब तक ये तो जान ही चुकी थी की आज उसका कुँवारापन जाकर रहेगा..पर ऐसे इतनी जल्दी, उसके लिए वो शायद तैयार नही थी…
और वो कुछ बोल पाती, एक जोरदार झटका मारकर एक ही झटके मे समीर ने उसके कुंवारेपन को हर लिया… और उसका लिंग सुरर्र की आवाज़ के साथ अंदर तक घुसता चला गया…
”अहहsssssssssssssssssssssssssssss ………….. उम्म्म्मममममममममममम ”
और सबसे मज़े की बात ये की रोज़ी को बिल्कुल भी दर्द नही हुआ… ऐसा ज़रूर लगा की उसके अंदर कुछ फँसा है.. पर दर्द जैसा एहसास नही हुआ.. और उस फंसी हुई चीज़ से उसकी चूत में जो खुजली हो रही थी, समीर के हिलने से वो भी जाती रही.. इसलिए वो खुद ही आगे-पीछे होकर अपनी खुजली मिटाने की गरज से झटके मारने लगी..
”अहह…… ओह समीर सर ……………. उम्म्म्ममममममममममममममम ….. ऐसे ही …………….. ज़ोर से ………. करो ना …………… अहह …… एसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स सर ….येस सर ………….. ओह येस सर ……येस सर येस सर येस सर येस सर ”
वो साली ऐसे सिसकारियाँ मारकर येस सर, येस सर बोल रही थी जैसे अपने बॉस से किसी लैटर की डिकटेशन ले रही हो….
समीर ने भी उसकी गोल मटोल गांड को पकड़ कर उसकी रेल बना दी….और झटके दे देकर उसकी चूत मारने लगा…
झटके इतनी तेज थे की लोकेश का लंड भी वो ढंग से चूस नही पा रही थी…बस अपने हाथ मे पकड़कर उसका सहारा लिया हुआ था, ताकि समीर के तेज झटकों से वो नीचे ना गिर पड़े..
और फिर अचानक वो झटके काफ़ी तेज हो गये..और फिर एक जोरदार भूचाल के साथ समीर ने अपने लंड से पानी निकाल कर उसकी गांड के केनवास पर चित्र बनाने शुरू कर दिए…
और समीर निढाल सा होकर सोफे पर गिर गया…
रोज़ी शायद अभी तक झड़ी नही थी…पर वो एक बार झड़ने का मज़ा ज़रूर लेना चाहती थी… जो उसकी प्यासी नज़रों में लोकेश ने देख ही लिया था..
वो उसे लेकर सोफे की तरफ जाने ही वाला था की एकदम से बाहर की बेल बाजी..
दीवार पर लगे वीडियो डोर कैमरा डिवाइस पर एंट्री गेट पर आने वाले की तस्वीर उभर आई… वो रश्मि थी जो 4 बजे ही घर पहुँच गयी थी.
उसे देखते ही समीर की सिट्टी पिट्टी गुम हो गयी…वो पूरी तरहा से नंगा था..और रोज़ी भी उसी हालत मे थी..चारों तरफ उनके कपड़े फेले पड़े थे..
रश्मि लगातार घंटी बजा रही थी…ये सोचकर की कहीं समीर सो ना गया हो ..
लोकेश ने सिचुएशन संभाली और बोला : “समीर, तुम इसको लेकर उपर वाले कमरे में जाओ…मैं भाभी को संभालता हूँ …”
क्योंकि लोकेश ही था जिसने पूरे कपड़े पहने हुए थे…उसने अपने लंड को अंदर ठूसा और बाहर चल दिया, दरवाजा खोलने…और समीर और रोज़ी ने अपने-2 कपड़े समेटे और नंगे ही उपर भागते चले गये..
लोकेश ने दरवाजा खोला और उसे देखते ही रश्मि समझ गयी की आज उसके पीछे उन दोनो ने बियर पीने का प्रोग्राम बनाया होगा..
लोकेश : “अरे भाभी… आप तो 5-6 बजे आने वाली थी… इतनी जल्दी कैसे आ गयी… और काव्या कहाँ है…?”
रश्मि (अंदर आते हुए) : “वो बस थोड़ा जल्दी फ्री हो गये थे इसलिए ….और काव्या अपने दोस्त को उसके घर तक ड्रॉप करने गयी है…आ ही जाएगी आधे-एक घंटे तक..”
और फिर अंदर आकर उसने देखा की टेबल पर बियर केन और खाने पीने की चीज़े बिखरी पड़ी है
रश्मि : “आप लोगो ने भी काफ़ी एंजाय किया है …कहाँ है समीर, दिखाई नही दे रहे…”
लोकेश : “वो …. वो अपने रूम मे गया है…शायद थोड़ी ज़्यादा पी ली थी…सो गया होगा..”
और फिर बात बदलते हुए लोकेश ने कहा : “भाभी ….आज तो आप कमाल की लग रही हो…सच मे…बड़ी ही सेक्सी ड्रेस पहनी हुई है आपने आज…एकदम फिल्मी हेरोइन लग रही हो आप…”
ये तारीफ एक ऐसी चीज़ है जो हर औरत और लड़की को पसंद आती है…वो सब कुछ भूलकर बस उन बातों मे खो सी जाती है जिसमे उसकी तारीफ की जा रही हो..
रश्मि ने एक टाइट सी टी शर्ट और जीन्स पहनी हुई थी…इसलिए उसका हर एक अंग उभर -2 कर बाहर आ रहा था..
वो मंद-2 मुस्कुराते हुए बोली : “अब ऐसा भी कुछ नही है…आप तो हमेशा मेरी झूटी तारीफ करते हो…”
ये तरीका होता है लॅडीस का अपनी और तारीफ सुनने का…और ये लोकेश समझ गया था..
लोकेश : “अरे नही भाभी…आपकी कसम..आज तो आप सच मे काफ़ी कमाल की लग रही हो…आपका फिगर ऐसा लगता है जैसे साँचे मे ढाला हुआ हो…हर चीज़ एकदम परफ़ेक्ट है…जैसी मर्दों को पसंद आती है..”
दोनो बात करते -2 सोफे तक आ चुके थे..
रश्मि : “ऐसा क्या पर्फेक्ट देख लिया आपने मेरे अंदर…”
लोकेश : “हर चीज़ पर्फेक्ट है भाभी …अपना चेहरा देखो ज़रा..लगता ही नही है की आपकी एक जवान बेटी है…आप तो खुद अभी तक कुँवारी लगती हो…इतना भोला-भाला सा चेहरा..”
ये कहकर लोकेश रुक गया..
रश्मि ने उसे आगे बढ़ने के लिए कहा और बोली : “और…चेहरे के अलावा…और क्या…”
लोकेश : “बस भाभी….आज तो आप मुझे फसवाने वाले काम करवा रही हो…कहना तो बहुत कुछ चाहता हू आपके बारे मे…पर डर लगता है की कहीं आप नाराज़ ना हो जाओ..”
रश्मि भी समझ चुकी थी की लोकेश क्या कहना चाहता है…वैसे लोकेश ने उसे और समीर को उसके रिसोर्ट पर चुदाई करते हुए नंगा तो देख ही लिया था..और हमेशा से ही उसकी भूखी आँखो को अपने उपर पड़ते देखकर वो ये भी समझ ही चुकी थी की वो चाहता क्या है…और वैसे भी आज वो जो काम विक्की के साथ करके आई थी, उसके बाद तो उसके अंदर का वो डर भी ख़त्म हो चुका था जो अंदर से उसकी मर्यादा की याद दिलाता था…जब उसने अपनी बेटी के बाय्फ्रेंड से ही चुदाई करवा ली तो अपने हसबेंड के दोस्त से मज़े लेने मे क्या प्राब्लम है..उसका हक़ तो ज़्यादा बनता है …. वैसे भी लोकेश उसे काफ़ी पसंद था..और उपर से इस वक़्त वो उत्तेजित भी थी, क्योंकि रिज़ॉर्ट से निकलते वक़्त विक्की से वो एक बार और चुदना चाहती थी..पर काव्या के सामने वो इतनी भी बेशर्म नही बनना चाहती थी …
और इसलिए लोकेश से तारीफ सुनकर..और उसके साथ ऐसी बाते करके उसके निप्पल फिर से एक बार खड़े हो चुके थे…और वो ये भी शायद भूल चुकी थी की उसका पति भी इस वक़्त घर पर ही है..
रश्मि : “इसमे नाराज़ होने वाली क्या बात है…देवर भाभी मे इतना तो चलता ही है…”

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