सौतेला बाप – Update 70 | Incest Sex Story

सौतेला बाप - Incest Sex Story
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Update 70

विक्की का एक-2 शब्द उसके बदन के हर हिस्से मे करंट भर रहा था…इतनी गंदी तरह से उसने सब बोला था…पर पता नही क्यो काव्या को सब अच्छा लग रहा था..ऐसा गली का लोंडा , जो उसके शरीर से रॅफ तरीके से खेलकर उसकी हवस को शांत करे,उसे वो सब बोलता हुआ सुनकर ही वो बुरी तरह से गीली हो चुकी थी…और अपनी आँखे बंद करके वो सब इमेजिन भी करने लगी…उसने अपने अकड़ते हुए शरीर को विक्की की बाहों मे छोड़ दिया और उसका सहारा लेती हुई पीछे की तरफ झुक गयी..
विक्की समझ गया की मछली जाल मे फँस गयी है…उसने अपने दहकते हुए होंठ गोल किए और काव्या का पूरा कान अपने मुँह मे भर लिया …और उसको चाशनी से भरे रसगुल्ले की तरह चूसने लगा…
काव्या तो तड़प ही उठी..
”अहह ……. सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स …… ऐसा मत करो प्लीईईईस….”
और अगले ही पल विक्की के चुंगल से आज़ाद होकर वो बाथरूम की तरफ भाग गयी और अंदर से दरवाजा बंद करके तेज साँसे लेने लगी..
विक्की भी दरवाजे के बाहर पहुँचा और धीरे से बोला : “देखो काव्या…ऐसे नाटक मत करो…मैं भी जानता हूँ की तुम्हे ये सब पसंद आ रहा है…फिर क्यो ऐसे नाटक कर रही है…चल जल्दी से बाहर निकल…तुझे तो अपनी माँ से डरने की भी कोई ज़रूरत नही है…उसने तो खुद ही मुझे तेरे कमरे मे भेजा है…ताकि मैं तेरी चूत मार सकूँ …”
आवेश मे आकर एकदम से विक्की ने सब उगल दिया…और विक्की के मुँह से ये सुनकर की उसकी माँ ने ही ये सब किया है, वो सकते मे आ गयी…और एक ही पल मे उसका दिमाग़ पूरी तरह से घूम गया…उसका सारा ध्यान विक्की से हट कर अपनी माँ की तरफ चला गया..और उसने हैरान होते हुए दरवाजा खोल दिया.
काव्या : “क्या कहा तुमने ….मेरी माँ ने भेजा है तुम्हे मेरे पास…यानी माँ खुद चाहती है की तुम मेरे साथ ये सब करो…यानी सेक्स करो…मेरी माँ ने कहा ये सब तुमसे …”
विक्की समझ गया की अब झूट बोलने का कोई फायदा नहीं है …और वैसे भी लड़कियो को सफाई देना तो उसने आज तक नही सीखा था..
विक्की : “हाँ ..हाँ ..तेरी माँ ने ही बोला था मुझे …”
काव्या : “पर क्यो…उन्हे भला क्या मिलेगा अपनी ही बेटी को ऐसे …तुमसे सेक्स करवा कर …”
विक्की (मुस्कुराते हुए) : “वही …जो मैं तुझे दूँगा…मेरा लंड ..”
इतना कहकर उसने बड़ी ही बेशर्मी से अपनी पेंट खोलकर नीचे खिसका दी और उसका लंड खड़ा होकर उसकी आँखो के सामने लहराने लगा..
और एक बार फिर से , काव्या का ध्यान अपनी माँ से हटकर वापिस विक्की की तरफ आ गया…वो तो उसके मोटे और लंबे लॅंड को देखकर हैरान ही रह गयी…ऐसा मस्त लंड तो सिर्फ़ मूवीस मे ही देखा था उसने…समीर और दत्त अंकल के तो बूढ़े थे…पर ये तो नितिन के लंड से भी बड़ा था …उसको अंदर लेने की कल्पना मात्र से ही उसकी चूत के पसीने छूटने लगे..
पर फिर से उसने अपनी भावनाओ पर नियंत्रण किया और कहा : “पर वो ऐसा क्यों चाहेगी …उनकी तो अभी-2 शादी हुई है मेरे पापा से…उन्हे भला क्या दिलचस्पी हो सकती है तुम्हारे इसमे ..”
उसने विक्की के लंड की तरफ इशारा करते हुए कहा..
विक्की अपने लॅंड को अपने हाथ से पूचकारता हुआ उसके सामने आकर खड़ा हो गया…बिल्कुल पास … और बोला : “ये तो मुझे भी पता है की उनकी अभी-2 शादी हुई है..पर एक बार औरत को चुदवाने की लत्त लग जाए तो वो हर उस लंड को लेना चाहती है, जो उसको अच्छा लगे…और जब से तेरी माँ ने मेरे इस पालतू लंड को देखा है, वो तो इसकी दीवानी हुई बैठी है…तभी तो वो ऐसे जतन कर रही है जिसमे वो पहले मुझे खुश करेगी…यानी तुझे चुदवाकर…और फिर खुद भी ऐश करेगी…मेरे लंड को अपने अंदर लेकर..”
विक्की के मुँह से अपनी माँ की साजिश का परदा फ़ाश होते देखकर एक पल के लिए तो काव्या को भी विश्वास नही हुआ की उसकी माँ ऐसा भी कर सकती है…पर फिर उसने खुद को अपनी माँ की जगह पर रखकर देखा..शायद वो सही भी थी…इतने सालो तक बिना पति के रहने के बाद जब उन्हे एक पति मिला तो उनके अंदर की औरत जाग उठी..और उसने जब विक्की के लंड को अपने आस पास देखा तो उससे भी चुदवाने की तैयारी कर बैठी..
”पर उन्होने देखा कैसे ? ” काव्या ने जब ये प्रश्न विक्की से पूछा तो वो बोला : “तुम्हे ये सब अभी बता दिया तो मेरा तो काफ़ी नुकसान हो जाएगा मेरी जान….”
काव्या समझ गयी की वो अड़ियल कुत्ता और कुछ बताने से तो रहा…काव्या के दिल मे अभी भी ये बात चल रही थी की शायद विक्की झूट बोल रहा है…उसकी माँ उसके साथ ऐसा कर ही नही सकती..
पर अगर वो ऐसा कर रही है तो ये उसके लिए फायदे का सौदा हो सकता है..क्योंकि फिर वो खुद उसके पति, यानी समीर से खुल कर चुद सकती है…एक बार अगर वो विक्की और अपनी माँ की चुदाई का सबूत, यानी कोई पिक्चर या मूवी बना ले तो उसकी माँ भी उसको समीर से खुलकर चुदाई करवाने से नही रोक सकती…
और ये विचार आते ही एक ही पल मे उसके चेहरे पर खुशी आ गयी..
वो सोचने लग गयी की अब विक्की को कैसे तैयार किया जाए की वो उसकी बात मानकर उसका इस योजना मे साथ दे..
काव्या को गहरी सोच मे डूबा देखकर विक्की बोला : “इतना सोचोगी तो मेरा पप्पू बूड़ा हो जाएगा तेरे इंतजार मे…”
और इतना कहते हुए उसने अपने खड़े हुए लंड को आगे बढ़कर उसके हाथ से छुआ दिया..और इतना काफ़ी था काव्या की तंद्रा भंग करने के लिए..उसे तो ऐसे लगा की किसी ने कोई गर्म चीज़ छुआ दी है…उसके हाथ की उंगलियाँ सुलग उठी..और उन पर लगा हुआ विक्की के लंड का प्रीकम किसी तेज़ाब की तरह जलाता हुआ महसूस हुआ ..
और जैसे बचपन से उसने सीखा था, हल्की जलन होने पर उस हिस्से को मुँह मे डालकर चूस लो , वही उसने उस वक़्त भी किया, बिना सोचे समझे उसने अपने हाथ की दोनो उंगलियाँ अपने रसीले होंठों के बीच खिसका दी और उन्हे ज़ोर से चूसने लगी..
विक्की तो हैरानी से उसे देखता ही रह गया…और तब काव्या को एहसास हुआ की उसने क्या किया..क्योंकि विक्की के हैरानी भरे चेहरे के साथ -2 उसको उसके प्रीकम का भी स्वाद अपनी जीभ पर महसूस हुआ..पर अब वो कर भी क्या सकती थी…जब तक वो अपनी उंगलियाँ वापिस बाहर निकालती, उसके स्वाद का असर अंदर तक हो चुका था ..
हल्का खट्टा सा पानी था ..भले ही सिर्फ़ दो बूँद थी वो पर वो उसको अंदर तक झुलसा गयी..
उसके होंठ काँपने लगे…उसकी चूत से पानी की बारिश सी होने लगी पेंटी के अंदर…और उसको विक्की उस समय इतना सेक्सी लगा की उसका मन किया की अभी के अभी उसके लंड को अंदर ले कर जी भर कर चुदवाए..
पर पता नही क्या सोचकर उसने खुद को रोक लिया..चुदना तो वो कब से चाहती थी..पर ऐसे नही…एकदम से विक्की के सामने आत्मसमर्पण करने का मतलब वो पता नही क्या लगाएगा…
और अपनी सेल्फ़ रिस्पेक्ट वो नही खोना चाहती थी…अभी थोड़ी देर पहले जिस एहंकार को उसने फील किया था, उसने फिर से उसके बारे मे सोचा…और खुद को ये एहसास दिलाया की वो ऐसे लंड की भूखी नही है…बल्कि ऐसे लंड उसकी चूत के भूखे हैं..
उसने एकदम से विक्की को धक्का देकर पीछे किया और अपना मुँह घुमा कर दूसरी तरफ कर लिया
काव्या : “ये सब बंद करो….मुझे इसमे अभी कोई इंटेरेस्ट नही है…”
काव्या को ऐसे एकदम से पलटी मारते देखकर विक्की भी मायूस हो गया, उसके एक्सपीरियेन्स के हिसाब से तो ऐसी हालत मे आकर अच्छी से अच्छी लड़की भी सेक्स की आग मे पिघल कर अपना शरीर सौंप देती है…ये पता नही किस मिट्टी की बनी है..
पर विक्की भी जानता था की उसका पलड़ा भारी है…और वो जल्द ही उसके सामने घुटने टेक देगी..
पर अभी के लिए उसने अपने लंड को वापिस उसकी मांद मे धकेल कर जीप लगा ली..और आराम से उसके गद्दे पर पसर गया…जैसे वहीं सोने का प्लान हो उसका..
काव्या अभी तक काँप रही थी…ऐसी हालत तो तब भी नही हुई थी जब उसने अपनी लाइफ का पहला लंड देखा था..यानी दत्त अंकल का..विक्की के जवान लंड ने एकदम से पता नही क्या जादू कर दिया है उसपर की वो अपनी मंज़िल, यानी पहली बार अपने समीर पापा से चुदवाने से भी भटकने लगी है..
अगर विक्की ने अभी उसकी माँ वाली बात नही बताई होती तो शायद उसका ध्यान सिर्फ़ अभी उसके लंड तक ही रहता..पर अब वो ज़्यादा उस बारे मे ही सोच रही थी..उसके मन मे इसी बात की बहस चल रही थी की क्या वो सही कर रही है..
अब जो भी हो, काव्या ने सोच लिया था की अब वो सबूत इकट्ठा करके रहेगी, ताकि वो भी खुलकर समीर के साथ मज़े ले सके..और बाद मे विक्की के साथ भी..और फिर नितिन के साथ…और फिर दत्त अंकल के साथ…और फिर…और फिर…
ना जाने वो किस-किसके बारे मे सोचती रही.. पर पहले उसकी चूत का उद्घाटन होना भी तो ज़रूरी था..उसके बाद ही तो वो सब होता..
विक्की : “तुम्हारे मन मे जो चल रहा है, मुझे पता है..जैसे तुम्हारी माँ खुलकर मज़े लेना चाहती है, तुम भी लो ना…तुम्हे कौन रोक रहा है…”
काव्या ने अचानक अपना रुख़ बदला , और थोड़े नरम स्वर मे बोली : “देखो…मुझे थोड़ा वक़्त दो..ऐसे…इतनी जल्दी…एकदम से….मुझसे नही होगा…समझो ज़रा…”
उसने इस अदा से ये बात बोली थी की विक्की का दिल घायल सा हो उठा…अभी एक मिनट पहले जहाँ उसके दिल मे सिर्फ़ सेक्स करने की बातें घूम रही थी, एकदम से उसकी जगह वो सब आ गया जब वो स्कूल टाइम मे काव्या के रूप के पीछे पागल सा होकर उसके आस पास फिरता रहता था..उसके दोस्त तो उसे काव्या का मजनूँ कहते थे…फिर उसकी संगत बिगड़ने लगी..वो आवारा लड़को के साथ घूम-घूमकर उनकी तरह ही हो गया..और फिर उसने ना जाने कितनी ही लड़कियो की चूत अलग-2 तरीकों से बजाई थी, इसका अंदाज़ा उसे भी नहीं था..पर काव्या को वो कभी अपने दिल से नही निकाल पाया था..
इसलिए अभी भी जब उसको मौका मिला तो उसकी चूत मारने के लिए किसी कुत्ते की तरह भागा चला आया..चाहे बाद मे उसे उसकी माँ की सेवा भी करनी पड़ेगी..पर अपनी काव्या के लिए वो कुछ भी करने के लिए तैयार था..
पर अचानक काव्या का ये प्यार वाला रूप देखकर वो सेक्स-वेक्स सब भूल सा गया…और उसके मन मे वही 3 साल पहले वाली प्यार भरी गुदगुदी होने लगी..
वो भी बड़े ही प्यार भरे लहजे मे बोला : “कोई बात नही काव्या…तुम जब चाहो…”
काव्या भी एकदम से उसके बदले हुए व्यवहार को देखकर हैरान हुई..पर फिर ये सोचकर की शायद उसके भोलेपन का जादू चल रहा है उसके उपर, उसने अपनी आगे की योजना उसके सामने रखी
काव्या : “अच्छा सुनो..तुम मेरे साथ एक़्वा वॉटर पार्क चलोगे क्या…”
एक़्वा वॉटर पार्क की बात सुनते ही विक्की एकदम से चौंक गया…क्योंकि उस वॉटर पार्क मे वो अक्सर जाता था…कई बार उसने पानी मे खड़े होकर भी कई लड़कियो की चूत मारी थी…एक तो वो शहर से काफ़ी दूर था और वहाँ की टिकेट भी काफ़ी महँगी थी..इसलिए ज़्यादातर युगल जोड़े ही वहाँ जाकर मज़े लेते थे..क्योंकि इतनी महँगी टिकेट लेकर फेमिली वाले कम ही जाते थे वहाँ..पर काव्या उसके साथ वहाँ क्यो जाना चाहती है…
वो ये पूछने ही वाला था की वो आगे बोली : “और साथ मे मम्मी को भी ले चलेंगे..”
विक्की : “पर मम्मी को क्यो ?”
उसकी समझ मे नही आ रहा था की काव्या के दिमाग़ मे क्या चल रहा है…ये जानते हुए भी की उसकी माँ की नज़र विक्की के उपर है, वो फिर भी उसे साथ मे ले जाना चाहती है…ऐसे में वो तो कुछ कर भी नही पाएगा …क्योंकि माँ के होते हुए वो कैसे उसकी बेटी से मज़े लेगा…
काव्या : “वो मैं अभी नही बता सकती…अगर तुम चलना चाहते हो तो बताओ…वरना रहने दो…”
ऐसे मौके को वो कभी छोड़ना नही चाहता था…उसने झट से कहा : “अरे नही….ऐसा कुछ नही है…तुम्हारी मर्ज़ी..अगर अपनी माँ को लेकर चलना है तो चलो…”
काव्या मन ही मन मुस्कुरा उठी…अभी वो ज़्यादा बताकर विक्की के दिमाग़ का हलवा नही करना चाहती थी…क्योंकि आख़िर मे जाकर जब विक्की को ये बताना पड़ता की वो अपनी माँ के खिलाफ सबूत इकट्ठा करके उसे डराएगी, और अपने बाप से चुदवायेगी , तो शायद वो उसका साथ नही दे…क्योंकि वो तो खुद ही काव्या पर अपना पहला हक़ समझ रहा था…इसलिए उसको काफ़ी सोच समझकर ये सब करना था..

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