Update 67
वो दोनो के बालों को पकड़कर ज़ोर-2 से अपने लंड पर दबाने लगा…जैसे अपना लंड उन्हे खिला देना चाहता हो पूरा का पूरा..
”अहहहहहहहहहहहहहह ……. ओह माय गोड ………. एसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स …..ऐसे ही करती रहो ……. ओह …..”
वो कभी काव्या के मुम्मे मसलता और कभी श्वेता के….कभी एक के बाल सहलाता और कभी दूसरी के…और वो दोनो भी प्यासी बिल्लियों की तरह उसके लंड और टट्टों के पीछे पड़ गयी थी…दोनो उसे ऐसे नोच रही थी मानो उसको खा ही जाएँगी…दोनो के नर्म होंठ और तेज दाँत उसको अलग ही दुनिया मे पहुँचा रहे थे..
अब नितिन से सब्र नही हुआ, उसने काव्या के बाल पकड़कर अपनी तरफ खींचा और अगले ही पल दोनो की छातियाँ एक दूसरे से मिल कर रग़ड़ खाने लगी और नितिन ने उसके गीले होंठों को अपने कब्ज़े मे लेकर ज़ोर-2 से चूसना शुरू कर दिया…
जैसा सोचा था ठीक वैसे ही थे उसके होंठ…नर्म और मीठे…वो उन्हे बब्बल गम की तरह चबाता रहा, उसके अंदर का रस पीता रहा, उसकी जीभ को चूसकर सुखाने की कोशिश करता रहा…और फिर कुछ देर मे जब उसे साँस लेने की ज़रूरत पड़ी तो ही उसने काव्या को अपने से अलग किया…
वो उसको प्यासी नज़रों से देखने लगा…उसने शरमाते हुए अपना चेहरा नीचे झुका लिया…उसके चेहरे के नीचे नज़र जाते ही नितिन ने उसके नन्हे आम देखे,जिन्हे चूसने के लिए वो कब से मरा जा रहा था..वो नीचे झुका और अपनी बाहें उसके चारों तरफ लपेटकर उसे अपनी तरफ खींचा और एक ही बार मे उसके पूरे स्तन को अपने मुँह मे भरकर निगल गया और उसे चूसने लगा..
नितिन के बालों को सहलाती हुई वो उसकी पकड़ मे आकर बिलख उठी…और अपने पूरे मुम्मे को उसके मुँह के अंदर जाता देखकर ज़ोर से चिल्लाई : “अहह ……. ओफफफफफफफफफफफ्फ़ ….. नहियीईईईईईईईईई ………बस करो …………….. अहह …. सहन नही होता ……………. अहह ”
पर उसको रुकने के लिए कहने के बावजूद वो अपनी ब्रेस्ट को उसके मुँह के और अंदर धकेलने मे लगी हुई थी…ऐसा एहसास तो उसने आज तक नही लिया था…नितिन की जीभ उसके निप्पल को सहला रही थी अंदर और उसके दाँत उसकी ब्रेस्ट को काट रहे थे…नितिन के दूसरे हाथ ने दूसरी ब्रेस्ट को पकड़कर उसके निप्पल खींचने शुरू कर दिए…वो तो पागल ही हो उठी…
और नीचे की तरफ उसकी बहन श्वेता आराम से उसके लंड को चूसती हुई अपनी चूत को मसल रही थी..
नितिन के हाथ काव्या की चूत की तरफ बड़े…और उसी वक़्त काव्या को एक झटका सा लगा…वो एकदम से नितिन से अलग होकर खड़ी हो गयी..
नितिन : “क्या हुआ …मैने कुछ ग़लत किया …”
काव्या (धीरे से) : “नही नितिन …..पर …मैं अभी इसके लिए तैयार नही हूँ ….”
नितिन की समझ मे कुछ नही आया…इतने करीब पहुँचकर वो कैसे मना कर सकती है चुदाई के लिए…वो तो कब से इस पल के लिए तड़प रहा था..पर वो उसपर ज़ोर डालकर कुछ नही करना चाहता था…अभी के लिए भी जो मिला था, वही काफ़ी था..और वो भी जानता था की अब वो ज़्यादा देर तक अपनी चूत को उससे बचा नही पाएगी..
श्वेता ने भी अपनी सहेली का साथ दिया : “हाँ नितिन, अभी वो सब रहने दो…बस उपर-2 से मज़ा लो…चुदाई के लिए तुम्हारी बहन हाजिर है….उसकी करो ..”
और इतना कहकर वो मुस्कुराती हुई उपर की तरफ आई और उसके होंठों को चूमती हुई सीधा उसके लंड पर बैठ गयी…
”अहह ………. येस्ससस्स ……………. अंदर तक डालो ….”
नितिन ने उसके कूल्हे पकड़ कर अपना लंड उसकी चूत के अंदर तक एडजस्ट किया….और नीचे से धक्के मारने लगा..
काव्या को उनकी चुदाई देखकर ना जाने क्या हुआ की वो एकदम से नीचे झुकी और उसने नितिन की बॉल्स को अपने मुँह मे लेकर चूसना शुरू कर दिया…
एक नया एहसास फिर से पाकर नितिन तो बावला सा हो गया…और दुगनी तेज़ी से अपनी बहन को चोदने लगा..
और ऐसे ही झटके खाती हुई श्वेता जल्द ही झड़ने लगी…उसकी चूत का पानी फिसलकर बाहर तक आया जिसको काव्या ने अपनी जीभ से साफ़ कर दिया…और फिर नितिन के लंड ने भी जवाब दे दिया..और उसने अपने लंड बाहर खींचकर अपने हाथ से मसलना शुरू कर दिया..और फिर उसने अपने लंड से पानी की बौछारें निकालकर दोनो के चेहरे को भिगोना शुरू कर दिया…
ये पल वो कभी भी नही भूल सकता था..दोनो के सेक्सी चेहरे उसके गाड़े सफेद रस से भीगकर तर हो गये.
फिर काव्या ने अपनी सहेली की गीली चूत को भी अपनी लम्बी जीभ से चाटकर साफ़ किया
नितिन फिर से धम्म से अपने बिस्तर पर गिर गया..और काव्या का हाथ पकड़कर श्वेता अपने कमरे मे ले गयी…वो जानती थी की अब काव्या की परेशानी सुनने का वक़्त आ गया है..क्योंकि वो अपनी सहेली को ज़्यादा देर तक परेशान नही देख सकती थी. श्वेता : “अब बोल, क्या प्राब्लम है, जिसकी वजह से तू सेक्स को भी सही से एंजाय नही कर पा रही थी…और इतना अच्छा मौका खो दिया आज मेरे भाई से चुदने का …”
काव्या : “यार, तुझे सेक्स की पड़ी है, मेरी तो लग गयी है…”
और इतना कहकर उसने शुरू से आख़िर तक सब बता दिया श्वेता को…श्वेता ने सारी बात आराम से सुनी और आख़िर मे बोली : “यार…मुझे एक बात समझ नही आ रही है, ये तेरी मम्मी इतना क्यो कॉपरेट कर रही है तेरे साथ…मतलब तेरे बाय्फ्रेंड के लिए, जहाँ तक आंटी को मैं जानती हू, वो पहले तो ऐसी नही थी…अब ये उन्हे अचानक क्या हो गया है..”
काव्या (मुँह बिचका कर बोली ) : “शादी के बाद उनका ना दिमाग़ खराब हो गया है…पापा के साथ भी ऐसे सेक्स करती है जैसे मेरी उम्र की हो वो…इतनी तेज आवाज़ें निकलती है की अपने कमरे मे मुझे सब सुनाई देता है…तूने भी देखा था ना उस दिन, जब उनके कमरे मे झाँककर हमने देखा था, कैसे करवा रही थी वो पापा से…लगता है बुडापे मे आकर उनमे फिर से जवानी लौट आई है..”
श्वेता : “हा हा…वो तो दिख ही रहा है, पर मुझे तो वो कही से भी बुडी नही लगती…और ना ही तेरे ये समीर पापा..”
समीर का नाम सुनते ही काव्या का चेहरा लाल हो उठा, वो बोली : “उनकी तो बात ही कुछ और है…सच मे यार, ऐसा मर्द अगर मिल जाए तो दिन रात सेक्स करने का मज़ा कुछ और ही होगा…”
श्वेता : “यही तो तेरी मोम भी कर रही है, उन्हे ऐसा सेक्स करने वाला पति मिल गया है तो वो इसका पूरा लाभ उठा रही है…तुझे क्यो जलन हो रही है…”
वो जानबूझ कर बोली, क्योंकि वो अच्छी तरह से जानती थी की वो कब से समीर से चुदवाना चाहती है…पर अभी तक कोई मौका ही नही मिल पाया था उनको..
काव्या : “यार, तू तो सब जानती है मेरे दिल की बाते…फिर भी ऐसे बोल रही है…और उपर से मम्मी ने ये विक्की नाम की मुसीबत मेरे गले मे बांध दी है..परसो आएगा वो मेरे घर पर…मुझे तो बड़ा डर लग रहा है, पता नही वो क्या बोलेगा..क्या करेगा…मेरी पोल खुल गयी तो मेरी क्या हालत होगी, ये तुम नही समझ सकती..”
श्वेता : “क्या मैं आ जाऊ उस दिन तेरे घर…दोनो मिलकर संभाल लेंगे इस विक्की के बच्चे को..”
उसके तो मन प्लान बनने शुरू हो गए थे एक और नए लंड को लेने के ……।
काव्या : “नही यार…मम्मी ने तो मेरी डेट फिक्स कर दी है उस के साथ…और मुझे नही लगता वो तुझे मेरे साथ रहने देंगी…”
श्वेता समझ गयी की मामला सच मे काफ़ी पेचीदा है…पर हर मुसीबत का हल निकालना उसकी फ़ितरत मे था…उसने काव्या को कुछ समझाया..और अगले दिन उसके घर आने के लिए भी बोली..एक दिन पहले मिलकर वो सारी तैयारी कर लेना चाहती थी अच्छी तरह से..
आख़िर मे जब काव्या जाने लगी तो निकलते हुए नितिन उसके सामने आ गया…दोनो की नज़रें एक दूसरे से मिली तो काव्या ने शर्माकर अपनी नज़रें झुका ली..और आगे निकल गयी…
श्वेता ने पीछे से आकर अपने भाई से कहा : “तू फिकर मत कर भाई, एक दिन ये ज़रूर आएगी तेरे नीचे …ये मेरा वादा है..”
और उसके खड़े हुए लंड को अपने हाथ से सहलाकर वो काव्या को छोड़ने के लिए बाहर तक निकल आई.
उस रात काव्या सही से सो भी नही सकी…वो जल्द से जल्द इस मुसीबत से निकलना चाहती थी..
और अचानक उसके दिमाग़ मे श्वेता की बाते गूंजने लगी की उसकी मम्मी को ऐसी क्या दिलचस्पी हो रही है जो वो विक्की के घर तक पहुँच गयी और उससे बात भी कर ली की आओ बेटा मेरे ही घर पर आकर मेरी बेटी से मिलो…नैन मटक्का करो..
वो तो विक्की को अच्छी तरह से जानती है, की कैसे वो आवारा लड़को के साथ घूमता रहता है…हर लड़की को छेड़ता रहता है…देखने मे भी कुछ ख़ास नही है..फिर मम्मी क्यो इतनी दिलचस्पी ले रही है उसमे.. कही मम्मी उसको मिलवाने की आड़ मे अपना कोई स्वार्थ तो नही देख रही…कही वो इस तरह से मेरा मुँह बंद करके अपना कोई काम तो नही निकलवाना चाहती मुझसे…
ऐसी ना जाने कितनी बातें उसके दिमाग़ मे गूँज रही थी…जिनको सोचते-2 उसको कब नींद आ गयी, उसको भी पता नही चला..
और दूसरी तरफ समीर की लाइफ मे भी एक ट्विस्ट आ गया…
अगले दिन वो जब ऑफीस पहुँचा तो उसने देखा की उसका दोस्त लोकेश ऑफीस मे बैठकर उसका इंतजार कर रहा है..
समीर : “अरे यार, इतने दिनों से कहाँ पर थे …दिखते ही नही हो आजकल ..”
लोकेश : “वो बस एक केस के सिलसिले मे बिजी था …अच्छा सुन…मैने वो तुझसे एक लड़की के बारे मे बात की थी ना. …रोज़ी …वो आई है मेरे साथ …बाहर बैठी है रिसेप्शन पर …मैने सोचा की मैं खुद ही तुझसे मिलवा देता हू ..”
समीर : “हां ….हन …याद है ….जल्दी बुलवाओ उसको अंदर …वैसे भी बिना सेक्रेटरी के मैं काफ़ी परेशान हूँ ..”
लोकेश ने रोज़ी को अंदर बुलवा लिया ..
जब वो सेबिन मे आई तो समीर उसे देखता ही रह गया… रेड टी शर्ट और ब्लेक स्कर्ट मे वो कोई एयर होस्टेस्स की तरह लग रही थी … बड़े-2 मुम्मे थे उसके …लंबी टांगे…हाइ हील की सेंडिल…गोरा रंग….और चेहरा बिल्कुल नेहा धूपिया के जैसा …कटाव लिए हुए था उसका चेहरा..
उसने आकर मॉर्निंग विश किया ….पर समीर तो उसकी सुंदरता मे खोया हुआ था…लोकेश ने उसे हिलाकर जैसे नींद से जगाया ..समीर ने एकदम से उठकर अपना हाथ आगे किया और रोज़ी से हाथ मिलाया ..वो बेचारी भी शर्म से पानी-2 हो गयी जब समीर ने काफ़ी देर तक उसका हाथ नही छोड़ा ..
लोकेश ने धीरे से कहा : “अब छोड़ भी दे मेरे यार…ये अब यहीं काम करेगी … कहीं भागी नही जा रही ..”

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