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Update 66

श्वेता ऐसे ही नंगी चलती हुई एकदम से सामने वाला दरवाजा खोलकर काव्या के सामने पहुँच गयी..और अपनी कमर पर हाथ रखकर उसके सामने खड़ी हो गयी, और बोली : “कैसा लगा हमारा शो ….”
उसकी बात सुनकर काव्या पल भर मे समझ गयी की उसकी सहेली ने जान बूझकर बाहर का दरवाजा खुला छोड़ा था और उसी वक़्त चुदाई करनी भी शुरू की थी जब काव्या को वहाँ पहुँचना था, क्योंकि काव्या ने ही चलने से पहले उसको फोन करके बोल दिया था की वो वहाँ आ रही है..
काव्या : “साली ….तो ये सब तूने जान बूझ कर किया…ताकि मैं तुझे और नितिन को सेक्स करते हुए देख सकू …..यू आर सच अ बिच ….”
वो अपने कपड़े ठीक करती हुई अपनी सहेली के कमीनेपन पर हंस रही थी..
श्वेता : “यस ….और मुझे पता भी चल गया था की कब तू बाहर आई,क्योंकि मैने तुझे छुपकर इस कमरे मे आते हुए देख लिया था…”
उसके चेहरे पर शरारत भरी मुस्कान थी, आख़िर वो अपनी योजना मे कामयाब जो हो चुकी थी..
पर काव्या के उतरे हुए चेहरे को देखकर वो बोली : “पर तूने ये क्या हाल बना रखा है…मैने तो सोचा था की मुझे ये सब करते हुए देखकर तू भी मेरे भाई के लंड को लेने की ज़िद करेगी…ऐसे मुँह लटका कर क्यो खड़ी है अब….अगर तू चाहती है तो एक बार बोल दे, अभी के अभी तेरी चूत का उद्घाटन करवा देती हू अपने भाई के लंड से ….”
उसकी बात सुनकर एक पल के लिए तो काव्या के मुँह मे भी पानी आ गया, वो तो कब से चुदने के लिए बेताब थी…पर अभी वो चुदाई के लिए बिल्कुल भी तैयार नही थी…
काव्या : “नही यार…अभी नही, फिर कभी, अभी तो मुझ पर एक मुसीबत आ गयी है …”
श्वेता भी समझ गयी की एक बार अगर उसने किसी काम के लिए मना कर दिया तो वो कभी भी अपना विचार नही बदलेगी…पर फिर भी उसने हिम्मत नही हारी, वो बोली : “तेरी प्राब्लम से भी निपट लेंगे…और तू बाद मे ही करवा लेना अपना उद्घाटन, पर अभी के लिए कुछ तो कर ले …चल मेरे साथ..”
काव्या : “पर कहाँ ….”
श्वेता : “चल तो सही ….पूरे ना सही, आधे मज़े तो दिलवा ही सकती हू अभी तुझे, ताकि तेरा मूड ठीक हो जाए… एक बार जब मूड फ्रेश हो जाता है तो परेशानियों से निपटने में आसानी रहती है ..”
और इतना कहकर उसने काव्या का हाथ पकड़ा और ज़बरदस्ती खींचकर उसको सामने वाले कमरे मे ले गयी, जहाँ नितिन पूरा नंगा होकर आराम फ़र्मा रहा था. “भाई… देखो तो ज़रा यहाँ…..” श्वेता ने अपनी हँसी और उतावलापन दबाते हुए नितिन से कहा…
नितिन अपने सिर के पीछे हाथ रखकर अपने दोनो पैर पसारे नंगा लेटा हुआ था..और उसकी दोनो आँखे बंद थी..
इतनी जबरदस्त चुदाई के बाद जो आलस आता है,वो उसी मे डूबा हुआ था.
उसने आँखे बंद करे -2 ही कहा : “क्या है श्वेता….बोल ना…”
उधर काव्या की हालत खराब हो रही थी…अपनी आँखो के सामने एक और नंगे शरीर को लेते देखकर…ये शायद उसकी जिंदगी का तीसरा मर्द था, जिसे वो आज नंगा देख रही थी..इससे पहले सिर्फ़ उसने सिर्फ दत्त अंकल और समीर को ही नंगा देखा था..
पर उनकी और नितिन की उम्र मे काफ़ी अंतर था…ऐसे गबरू जवान को देखने का ये पहला अवसर था..रोमांच और शर्म एक साथ उसके चेहरे से झलक रही थी..उसकी चूत की फेक्टरी मे ताज़ा रस बनना शुरू हो गया था..जो कभी भी प्रोडक्शन हाउस यानी चूत के अंदर से निकल कर बाहर रिस सकता था…
श्वेता को भी एक और शरारत सूझी..उसने काव्या का हाथ पकड़ कर उसे नितिन की बगल मे बिठा दिया..और फिर अपनी ब्रा उठाकर उसने नितिन की आँखो पर बाँध दी..और बोली : “अभी कुछ देर तक इसको मत खोलना..”
नितिन तो पहले से ही नशे जैसी हालत मे था..उसने मुस्कुराते हुए अपना सिर हाँ में हिला दिया. ब्रा का नर्म मुलायम कपड़ा उसकी आँखो को काफ़ी ठंडक भी पहुँचा रहा था..
श्वेता ने काव्या को आँख मारकर चुप रहने को कहा और फिर उसने काव्या का हाथ पकड़कर नितिन के लंड के उपर रख दिया..
लंड मरियल सा हो चुका था…अभी कुछ देर पहले की चुदाई के कारण, पर काव्या की हालत खराब होने लगी..उसकी साँसों मे तेज़ी आ गयी..भले ही ये सांप अभी मरा हुआ लग रहा था, पर उसमें कभी भी जान आ सकती थी..उसकी कांपती हुई उंगलियों ने नितिन के लंड को सहलाना शुरू कर दिया..
नितिन : “ये क्या श्वेता…अभी भी मन नही भरा….ये दिखाना चाहती थी तुम की फिर से मन कर रहा है तुम्हारा…पर मैं इंसान हू बहन, कोई जादूगर नही, जो सिर्फ़ 10 मिनट मे ही दोबारा तैयार हो जाऊंगा .ऐसे करने से नही जागने वाला मेरा दोस्त..”
श्वेता ने काव्या के कंधे पर सिर रखा और नितिन से कहा : “यही तो मैं देखना चाहती हूँ की ये मेरी बात मानता है या तुम्हारी…”
और उसने इशारा करते हुए काव्या को ज़ोर से लंड हिलाने को कहा..
काव्या को लग रहा था की उसने किसी रबड़ के लंबे टुकड़े को पकड़ा हुआ है…वो लचीला सा होकर इधर उधर लहरा रहा था..पर गर्म था अभी तक..शायद इतनी लंबी रेस लगाने के बाद वो घोड़ा अंदर से तप चुका था..और आराम करके अपनी गर्मी निकाल रहा था.
काव्या बड़े ही गौर से नितिन के सुडोल शरीर को देख रही थी..कपड़े मे तो पतला सा लगता था, पर इस वक़्त वो देख पा रही थी उसके 6 पैक्स एब्स ..जो काफ़ी आकर्षक लग रहे थे..उसका मन कर रहा था की अपनी जीभ निकाल कर उसके एब्स को चाट ले..पर बड़ी मुश्किल से उसने खुद को रोका हुआ था..वो इस वक़्त सिर्फ़ श्वेता के निर्देशो के अनुसार ही चलना चाहती थी.
और श्वेता ने ही उसके मन की इच्छा पूरी कर दी, क्योंकि वो चाहती थी की वो थोड़ा आगे बड़े…उसने जीभ का इशारा करते हुए उसके बदन को चाटने को कहा..
पर उसने टी शर्ट पहनी हुई थी और श्वेता तो अभी तक नंगी होकर चुद रही थी, अगर वो नितिन पर झुकती तो उसके कपड़े नितिन को महसूस हो जाते और वो झट से अपनी आँखो पर पड़ी ब्रा को खोल देता..और श्वेता अभी के लिए ये नही चाहती थी की नितिन अपनी आँखे खोले, इसलिए वो भागकर काव्या के पीछे आई और उसकी टी शर्ट को पकड़कर उपर से उतारने लगी…काव्या ने भी कोई विरोध नही किया, फिर श्वेता ने उसकी ब्रा भी खोल दी और अब काव्या नितिन और श्वेता के सामने टॉपलेस होकर बैठी थी..पर ये बात अभी तक नितिन नही जानता था..उसके अनुसार तो अभी तक सिर्फ़ श्वेता ही थी उस कमरे मे जो दोबारा से उसके लंड को खड़ा करने की कोशिश कर रही थी..और वो खुद भी आँखे बंद करके इसका आनंद उठा रहा था.
अब काव्या आज़ाद थी, अपने कपड़ो से, वो नीचे झुकी और उसने नितिन के निप्पल को अपनी जीभ से कुरेदा …उसको चाटा और फिर बड़े ही रफ़ से तरीके से उसको अपने होंठों के बीच लेकर चूसने लगी…
नितिन : “अहहsssssssssssssss …….. धीरे ……..श्वेता …….. धीरे ….मर्द को भी दर्द होता है…”
उसकी बात सुनकर दोनो सहेलियाँ मुस्कुरा उठी..पर काव्या ने उसको चूसना नही छोड़ा..बड़ी ही कठोर छातियाँ थी नितिन की, जिम जाने की वजह से, और उसके नन्हे-2 निप्पल बड़े ही आकर्षक लग रहे थे, इसलिए वो उन्हे चूसने का लालच नही छोड़ पाई..
फिर उसने दूसरे निप्पल को भी वैसे ही चूसा, चाटा और चबाया ..नितिन को भी मज़ा मिल रहा था, क्योंकि श्वेता (काव्या) ये सब पहली बार कर रही थी उसके साथ …
अब काव्या ने धीरे -2 नीचे की तरफ सरकना शुरू कर दिया…नितिन का शरीर काँपने लगा..उसे हल्की-2 गुदगुदी भी हो रही थी…काव्या के पीछे खड़ी श्वेता फिर से बोली : “भाई, अपनी आँखे मत खोलना अभी…”
नितिन : “इतना मज़ा अगर तुम आँखे बंद करके दे सकती हो तो मैं क्यो खोलूँगा भला ….”
वो मस्ती के सागर मे लेटा हुआ गोते लगा रहा था.
और फिर काव्या के सामने रोड ब्रेकर की तरह उसका एब्स वाला पेट आया, जिसकी उँची नीची घाटियों मे जीभ चला कर उसने वहाँ का सारा नमक अपनी जीभ पर इकट्ठा कर लिया….और अपने होंठों से उसे बेतहाशा चूमने भी लगी..
अब तो नितिन की गांड हवा मे उठ गयी…ऐसा एहसास उसने आज तक नही लिया था.
और उपर उठने के साथ ही उसका लंड अपने पूरे साइज़ मे उभरकर काव्या के गालों से आ टकराया…काव्या के पूरे शरीर मे एक झटका सा लगा..उसकी सहेली के भाई का लंड उसके चेहरे पर दस्तक दे रहा था..उसने पहले भी कई बार नितिन को अपनी तरफ दूसरी नज़रों से घूरते हुए देखा था, और नितिन के लिए उसके दिल मे भी कुछ-2 होता था, पर आज वो सब सोचने का वक़्त नही था, नितिन बेचारे को पता भी नही था की वो जिसको अपनी आँखो ही आँखो से चोद देता था वो ही उसके शरीर को चूस रही है..
काव्या के चेहरे पर जैसे ही नितिन के लंड ने किस्स किया, वो उसके लंड की तरफ पलटी और अगले ही पल उसके प्यासे होंठों ने उसके लंड को पकड़कर ज़ोर-2 से चूसना शुरू कर दिया..ऐसा लग रहा था जैसे किसी प्यासे को ऐसी चीज़ मिल गयी है, जिसमे से चूसने के बाद पानी निकलता है..वो पागल सी होकर हुंकारने लगी और नितिन के लंड को ज़ोर-2 से चूसने लगी..
और उसके चूसने के अंदाज और हुंकार सुनकर नितिन को एक ही पल मे पता चल गया की उसके साथ क्या हो रहा है…और उसने अपनी आँखो पर बँधी अपनी बहन की ब्रा खोल दी..
और सामने उसको अपनी बहन बैठी हुई दिखी, जो अपनी चूत के अंदर उंगलियाँ डालकर बड़े ही हिंसक तरीके से अपनी सहेली को अपने ही भाई का लंड चूसते हुए देख रही थी..और जब नितिन ने अपनी टाँगो के बीच लेटी हुई काव्या के चेहरे को देखा तो उसे अपनी आँखो और किस्मत पर यकीन ही नही हुआ..वो काव्या थी…उसके सपनो की रानी, जिसके बारे मे सोच-सोचकर उसने ना जाने कितनी बार मूठ मारी थी और अब भी अपनी बहन को चोदते हुए वो आँखे बंद करके उसके बारे मे ही सोचता था..
वही काव्या अब उसके पैरों के बीच आधी नंगी होकर लेटी हुई थी और बड़े ही मज़े से आँखे बंद करके उसके लंड को आइस्क्रीम की तरहा चूस रही थी..उसकी मुम्मे नोकें देखकर उसके लंड ने जोरदार तरीके से सांस ली और वो और भी बड़ा हो गया
नितिन : “क्क्क कककक ..काव्या ……तुम ……ये सब कैसे …..”
उसकी आवाज़ सुनते ही काव्या ने आँखे खोल दी…वो जहाँ की तहाँ जम कर रह गयी….उसकी आँखे गोल होकर श्वेता की तरफ घूम गयी….पर उसने लंड नही निकाला अपने मुँह से…
श्वेता के मुँह से हँसी निकल गयी..
“हा हा हा ….. कैसा लगा मेरा सरप्राइज …..यही तो मैं दिखाने के लिए लाई थी, पर तुमने आँखे ही नही खोली…और थोड़े और मज़े लेने के लिए मैने ये आँखो पर बाँधने का नाटक किया, ताकि इसकी शरम कुछ कम हो जाए…और देख ज़रा इसको…कैसे मज़े ले-लेकर तुझे सक्क कर रही है…”
काव्या का चेहरा शर्म से लाल हो उठा…वो सोचने लगी की ना जाने नितिन उसके बारे मे क्या सोचेगा अब..
श्वेता आगे बोली : “मैं जानती हू,तुम दोनो मन ही मन एक दूसरे को लाइक करते हो….और आज मौका मिलते ही मैने सोचा की क्यो ना तुम्हे मज़े लेने का मौका दिया जाए…”
फिर वो नितिन से बोली : “ये मेरे और तुम्हारे बारे मे सब कुछ जानती है…इन्फेक्ट इसने ही मुझे कई बार ऐसे आइडियास दिए जिसकी वजह से हम यहा तक पहुँचे है..”
उसने अपनी चूत और नितिन के लंड की तरफ इशारा करते हुए कहा.
नितिन की समझ मे सब आ चुका था…और इतनी देर से काव्या ही उसके लंड को चूस रही थी, ये जानकार अब तो उसके अंदर का खून और भी तेज़ी से दौड़ने लगा…उसे पक्का विश्वास हो गया की अब तो काव्या की चूत मिलकर ही रहेगी..
उसने काव्या से कहा : “रुक क्यो गयी अब….चालू रखो…जैसा तुम कर रही हो, मुझे काफ़ी अच्छा लग रहा है…”
अपनी कला की तारीफ सुनना सभी लड़कियो को पसंद आता है, काव्या ने भी शरमाते हुए अपने होंठ खोले और फिर से नितिन के बाहुबली को मुँह मे लेकर चूसने लगी..
”अहहsssssss …….. येस्स्स्स्स्स्स्स्सस्स काव्य्आअ ….. सकककककक मीssssssssssss ….”
नितिन के मुँह से अपना नाम सुनकर काव्या की चूत पूरी तरह से पनिया गयी…और अगले ही पल नितिन का हाथ सरक कर उसके छोटे-2 मुम्मो पर आया और उन्हे उसने ज़ोर से मसल दिया…
”उम्म्म्मममममममममम …….. सस्स्स्स्स्सस्स ….धीरे नितिन ….”
और इस बार काव्या के मुँह से अपना नाम सुनकर, और वो भी इतने सेक्सी तरीके से, नितिन भी उत्तेजना के पूरे शिखर पर पहुँच गया..
दोनो को ऐसे एक दूसरे से मज़े लेता देखकर श्वेता भी बीच मे कूद पड़ी…वो भी पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी…और उसने सीधा नितिन के लंड को अपने मुँह मे दबोचा और चूसने लगी…काव्या ने अपना चेहरा नीचे किया और उसकी बॉल्स को चूमने चाटने लगी…ऐसे एहसास की तो नितिन ने आज तक कल्पना भी नही की थी की एक साथ उसके लंड को दो-2 सेक्सी लड़कियाँ चूसेगी

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