Update 65
काव्या ने जल्दी से जाकर अपनी सहेली को फोन किया और उससे विक्की का नंबर निकलवाया और एक मिनट मे ही सीधा उसे फोन मिला दिया.
दो बेल के बाद विक्की ने फोन उठाया
विक्की : “हेलो….कौन…”
काव्या ने धड़कते दिल से कह : “मैं काव्या बोल रही हू…”
विक्की : “ओहो….काव्या मेरी जान…..क्या बात है…आज मेरी याद कैसे आ गयी..”
काव्या (गुस्से मे) : “तुम अच्छी तरह से जानते हो की मैने किसलिए फोन किया है…”
विक्की : “नही मुझे नही पता, तू बोल ना मेरी चंपा,किसलिए फोन किया है….”
वो मज़े लेने के मूड मे आ चुका था..
उसकी बात सुनकर काव्या झल्ला गयी : “सुन विक्की….तू किसी ग़लतफहमी मे मत रहना…मेरी माँ ने चाहे कुछ भी कहा हो तुझसे. मुझ पर तेरी किसी बात का कोई फ़र्क नही पड़ता..”
विक्की : “मैं भी कौन सा तेरे लिए मरा जा रहा हू, तेरी माँ खुद ही आई थी मेरे पास… सोच, मैं अगर सच बोल देता तो तेरी क्या हालत होती तेरे घर मे…तेरे नये बाप के सामने क्या इज़्ज़त रह जाती तेरी…”
विक्की ने उसकी दुखती रग पर हाथ रख दिया था…वो समझ गयी की जिस बात से वो डर रही थी, विक्की भी उसी बात का फायदा उठाना चाहता है…
वो थोड़ा नर्म होती हुई बोली : “तुम आख़िर चाहते क्या हो…”
विक्की के कान तो जैसे ये शब्द सुनने के लिए तरस रहे थे..
वो बोला : “ये तो मैं तुम्हे सेटरडे आ कर ही बताऊंगा …”
और इतना कहते हुए उसने फोन रख दिया.
काव्या का मन किया की वो रो पड़े. ये सारी मुसीबत उसने खुद ही खड़ी की थी.
और अब इसका समाधान भी उसको खुद ही ढूँढना पड़ेगा.
वो जल्दी से तैयार होकर श्वेता के घर की तरफ चल दी क्योंकि ऐसी मुसीबत मे वही उसकी कोई मदद कर सकती थी. ”आहहssssssssssssss … चोदो मुझे … येस्स्स्स्स्स्स … ऐसे ही … फाड़ दो मेरी चूत …”
श्वेता के घर के अंदर घुसते ही काव्या को ये सब सुनाई दिया… उसने तो ये सोचा भी नही था की श्वेता ऐसे दरवाजा खुला छोड़कर चुदाई करवा रही होगी.. ऐसी लापरवाही की उम्मीद नही थी उसको.
पर श्वेता की लगातार चीखों ने उसके दिल की धड़कनो को ज़रूर तेज कर दिया था..
उसने दरवाजा धीरे से बंद किया और अपने पंजो पर चलती हुई उपर की तरफ चल दी, श्वेता के बेडरूम की तरफ, जहाँ से आवाज़ें आ रही थी.
और उसकी लापरवाही की और भी हद देखी उपर जाकर उसने, वो और उसका भाई नितिन पूरा दरवाजा खोल कर चुदाई कर रहे थे..
चुदाई का ऐसा सीन काव्या ने ब्लू फ़िल्मो मे भी नही देखा था.
नितिन और श्वेता बुरी तरह से बेड पर लगे हुए थे…श्वेता ने तो अपने कपड़े भी नहीं उतारे थे पूरी तरह से, उसकी शमीज़ अभी तक उसके जिस्म पर थी, और नितिन ने उसको घोड़ी बनाकर उसकी चूत मे पीछे से लंड पेला हुआ था, और उसकी कमर पकड़कर ज़ोर से धक्के मार रहा था.
दरवाजा पूरा खुला हुआ था, पर दोनों का चेहरा दूसरी तरफ था, पर वो लोग थोड़ा भी पलट कर देखते तो उन्हे काव्या साफ़ दिख जाती, काव्या भी उनकी चुदाई पूरी देखना चाहती थी, इसलिए उसने छुपकर वो सब देखने का विचार बनाया..क्योंकि उन्हे देखकर वो गर्म तो हो ही चुकी थी, ऐसे मे उन्हे डिस्टर्ब करके वो उनका और अपना मज़ा खराब नही करना चाहती थी.
वो जल्दी से सामने बने नितिन के बेडरूम के अंदर घुस गयी और उसने थोड़ा सा दरवाजा खुला रहने दिया, जिसमे से वो सामने के कमरे मे चल रही चुदाई का पूरा आनंद उठा सकती थी.
और ये सब करते हुए वो ये भी भूल चुकी थी की वो वहाँ करने क्या आई है, अपनी मुसीबत का समाधान करने के बजाए वो श्वेता और उसके भाई नितिन की चुदाई मे मगन हो गयी..
दोस्तो, तभी तो कहते है की सेक्स सभी दिमागी परेशानियो को दूर करने का सबसे उत्तम उपाय है…सेक्स करते हुए इंसान कुछ देर के लिए बाहरी दुनिया को भूल जाता है..और इस वक़्त श्वेता और नितिन बाहरी दुनिया को भूलकर जंगलियो वाली चुदाई कर रहे थे,जिन्हे शायद ये भी पता नही था की उन्होने नीचे का मेन गेट खुला छोड़ दिया है, जिसमे से काव्या अंदर आकर उनका सारा कार्यकर्म देख रही है…और वो भी अपनी परेशानियो से कुछ पल के लिए दूर होकर और उत्तेजित होकर उनकी लाईव ब्लू फिल्म देख रही थी.
काव्या ने गौर किया की श्वेता और नितिन एंगल बदल -2 कर सेक्स कर रहे हैं…कुछ देर तक अपने भाई की घोड़ी बने रहने के बाद वो जल्दी से नीचे उतरी और उसने नितिन को ज़मीन पर लिटा दिया…और उसके पैरों की दिशा मे मुँह करके उसके लंड को चूत के ज़रिए अंदर निगल गयी..
नितिन भी पागलो की तरह नीचे से धक्के मारता हुआ उसके मुम्मे मसल रहा था…उसने उसकी शमीज़ फाड़ डाली,जिसकी वजह से श्वेता के दोनो कबूतर आज़ाद होकर हवा मे उछलते हुए फड़फड़ाने लगे…ऐसा लग रहा था की दोनो मुम्मे आपस मे टकराकर चूर-2 हो जाएँगे..पर श्वेता की लचीली छातियाँ बड़ी ही नज़ाकत के साथ एक दूसरे से टकराती और फिर अलग हो जाती …फिर नितिन उन्हे पकड़कर मसलता और नीचे से अपने लंड से उसकी चूत मे हवा भरता…
”ओह नितिन ………………. मेरे भाई ………………… उम्म्म्ममममममममम …कितना अंदर तक जा रहा है तेरा पेनिस इस एंगल मे…..अहह …ऐसे ही करते रहो …… ज़ोर से चोदो मुझे …..मारो अपनी श्वेता की चूत ….अहह …चोदो अपनी बहन को …..”
वो अभी भी ऐसे चिल्ला रही थी मानो पूरे मोहल्ले को दावत पर बुलाकर वो सीन दिखाना चाहती हो ….श्वेता को ऐसे चिल्लाते देखकर नितिन ने फिर से एंगल बदला और उसने श्वेता को अपने लंड की बाल्कनी से नीचे उतारा और अपनी बहन की चूत से निकले रसीले लंड को सीधा उसने श्वेता के ही मुँह मे ठूस कर उसके रस का स्वाद चखाने लगा..
”उम्म्म्ममममममममम ……. कितना टेस्टी लग रहा है ये इस वक़्त……”
वो लंबा और काला लंड जूस लगने की वजह से किसी साउथ अफ़्रीकन राजा की तरह चमक रहा था…जिसकी चमक दूसरे कमरे मे छुपी काव्या साफ देख पा रही थी…उसके हाथ सीधा अपनी ब्रेस्ट पर चले गये और बड़े ही जंगली तरीके से उसने अपने टॉप को उपर उठाकर, अपनी ब्रा को नीचे खिसका कर अपनी लेफ्ट ब्रेस्ट निकाली और उसके निप्पल को बाहर की तरफ खींचकर उसे उभारने लगी…उसके निप्पल काफ़ी लंबे थे, और ऐसा सीन देखकर तो वो भी लड़कों के लंड की तरह खड़े हो चुके थे…दूसरे हाथ को अपनी पेंट मे खिसका कर अपनी चूत के मुहाने पर ले आई और अपनी बीच की उंगली सीधा गर्म कड़ाई मे डालकर उबल रही कड़ी को उंगली की कड़छी से पकाने लगी..
थोड़ी देर तक और चूसने के बाद श्वेता उछलकर अपने गद्देदार चूतड़ो के बल नितिन की छाती पर आ गयी , अब उसकी गुलाबी चूत ठीक नितिन की आँखों के सामने थी, उसने अपनी 2 उँगलियाँ सीधा उसकी गीली चूत के अंदर पेल दी , श्वेता ने भी सिसक कर अपने भाई के लंड को कार के गियर की तरह पकड़कर आगे पीछे करना शुरू कर दिया और दोनो की गाड़ी फूल स्पीड से भागने लगी..
श्वेता की रेशमी गांड की थिरकन को नितिन अपने दिल के इतने करीब महसूस करते हुए उसके रंग बदलते चेहरे को देखे जा रहा था…और अपनी पूरी ताक़त से अपने हाथ की उंगलियो को अंदर बाहर पेल रहा था.
दो उंगलियाँ वहाँ चल रही थी और टीन उंगलियाँ अब तक काव्या ले चुकी थी अपनी ही चूत मे…अपने ही पंजो पर खड़े होकर वो अपने लरज रहे होंठों से निकल रही हल्की-2 सिसकारीयाँ सुनकर और सामने चल रहे वासना के नंगे नाच को देखकर पागल हुई जा रही थी…उसकी आँखे उपर चड चुकी थी..उसकी चूत का सेलाब कभी भी आ सकता था.
नितिन को श्वेता की चूत की महक अपने इतने करीब महसूस हुई और एकदम से उसके अंदर उसे चूसने की त्रिव इच्छा जागृत हो गयी, और अगले ही पल उसने वो आसान भी तोड़ दिया और श्वेता को उठाकर खड़ा किया और नीचे बैठे-2 ही उसकी चूत के उपर मुँह लगाकर उसका अमृत चूसने लगा…नितिन की गर्म जीभ अपनी चूत पर और उसके ताकतवर हाथ अपनी गांड पर महसूस करते हुए श्वेता भी मचल-2 कर उसके मुँह पर घिस्से लगाने लगी और ज़ोर से तड़प कर फिर से चीख पड़ी..
”अहह नितिन …… यू आर अमेजिंग …….. वाआआआआव …….उम्म्म्ममममममम … खा जाओ ……..अंदर तक चाटो मुझे ………………. उम्म्म्ममममममममममम …..”
उन दोनो भाई बहन के प्यार को देखकर ना जाने क्यो एकदम से काव्या के मन मे भी वही सेक्शी सीन आ गया, जिसमे वो भी नंगी होकर खड़ी है…पर नीचे बैठकर उसकी चूत चाटने वाला उसका सोतेला बाप समीर या श्वेता का भाई नितिन नही, बल्कि वो आवारा कुत्ता विक्की था…
विक्की का ख़याल आते ही उसका मन घृणा से भर गया, पर वो सीन उसकी आँखो के सामने से जा ही नही रहा था जिसमे वो उसकी चूत को ठीक वैसे ही चूस रहा था, जैसा इस वक़्त नितिन श्वेता की चूसने मे लगा हुआ था..
मन मे घृणा के भाव आने के बावजूद उसकी उत्तेजना और भी बढ़ती जा रही थी…और वो अपनी आँखो के सामने दिख रहे अक्स,यानी विक्की के मुँह पर अपनी चिकनी चूत को बुरी तरह से रग़ड़ कर अपनी खुंदक निकाल रही थी…जैसे उसकी सांसो को अपनी चूत के ज़रिए बंद करके मार ही देना चाहती हो..
वो अपने ही ख़यालो मे खोई हुई थी की श्वेता की जोरदार गुहार उसके कानो मे पड़ी, वो अब पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी और उसे अब फिर से नितिन का लंड अपनी चूत मे चाहिए था..
”अहह …… भाई ……. अब बस करो …..और मत तड़पाओ …………… डाल दो अपना …….. लंड …………. मेरे अंदर ….”
अपनी प्यारी बहन की रीक़ुएस्ट भला नितिन कैसे ठुकरा सकता था, उसने अगले ही पल अपनी शक्तिशाली बाजुओ का उपयोग करते हुए श्वेता को उपर उठाया और सीधा बिस्तर पर ले जाकर लिटा दिया, और उसकी नशीली आँखों मे देखते हुए अपना लौड़ा उसकी बुण्ड मे पेल दिया…
”अहह …… ओफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ ..भाई …………… ये तो पहले से भी ज़्यादा बड़ा लग रहा है अब….. ”
नितिन और काव्या उसकी बात सुनकर मुस्कुरा दिए….
अगले पाँच मिनट मे दोनो के मुँह से सिर्फ़ सिसकारियों के सिवा कुछ और नही निकला, दोनो अपनी साँस रोके एक दूसरे का मज़ा लेने मे लगे रहे…हर धक्के के साथ काव्या भी झड़ने के करीब पहुँच रही थी….और अंत मे जैसे ही नितिन झड़ने लगा, उसने अपना लंड बाहर खींच लिया और सामने की तरफ करते हुए श्वेता के चेहरे को पूरा रंग दिया…
बाकी का काम श्वेता ने कर दिया, उसके लंड को चूस्कर, वो अंदर से आ रही एक-2 बूँद को चूस गयी, अपने भाई के माल को वो ऐसे नष्ट करना नही चाहती थी, वो सारा का सारा रस पी गयी..
उसके बाद नितिन गहरी साँसे लेता हुआ वहीं बेड पर गिर गया..
काव्या ने भी दबी हुई सिसकारियों के बीच अपनी चूत का सारा रस वहीं ज़मीन पर टपका दिया…
श्वेता ने नितिन के कान के पास आकर कहा : “आज तो सच मे मज़ा आ गया…”
और फिर दोनो ने एक दूसरे को फ्रेंच किस किया..
श्वेता : “तुम यही रूको, मैं अभी आई …”
और इतना कहकर वो कमरे से बाहर निकल गयी…और जाते-2 उसने कमरे का दरवाजा भी बंद कर दिया..
फिर वो हुआ, जिसकी काव्या ने कल्पना भी नही की थी..

