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Update 63

विक्की बाहर खड़ा होकर ज़ोर-2 से दरवाजा पीट रहा था.
देवी लाल ने घबराकर रश्मि की तरफ देखा..वो नशे की हालत मे जाकर बेहोश हो चुकी थी..
ये देखकर देवी लाल की फट कर हाथ मे आ गयी..उसकी समझ मे नही आ रहा था की क्या करे और क्या नही. बाहर खड़ा विक्की लगातार दरवाजा पीट रहा था..देवी लाल की हालत खराब थी, उसका सारा नशा उतर चुका था, उसकी अपने बेटे से काफ़ी फटती थी, क्योंकि वही उसके लिए पैसों का इंतज़ाम करता था,खाने पीने का,दारू का..
अचानक देवी लाल को पिछले दरवाजे की याद आई,जो पीछे वाली तंग गली मे खुलता था..उसने जल्दी -2 रश्मि के सारे कपड़े ठीक किए और अपनी सारी शक्ति समेत कर किसी तरह से रश्मि को उठाया और पिछले दरवाजे से लेजाकर एक खड़ी हुई रेहड़ी के उपर लिटा दिया
फिर दरवाजा बंद करके वापिस अंदर आया और भागकर बाहर का दरवाजा खोला.
विक्की दनदनाता हुआ सा अंदर आ घुसा : “इतनी देर से बाहर खड़ा हू,क्या कर रहे थे आप,कितनी बार बोला है की दिन के समय ना तो पिया करो और ना ही सोया करो…”
फिर वो पैर पटकता हुआ अंदर आ गया, वो पूरी तरहासे भीग गया था..
देवी लाल ने बाहर निकल कर देखा तो काफ़ी तेज बारिश शुरू हो गयी थी..उसने तो ये देखा भी नही और रश्मि को उठा कर बाहर छोड़ आया था वो..पता नही क्या हाल हो रहा होगा उसका..
अगर वो होश मे आ गयी तो वापिस अंदर आ जाएगी..और फिर उसका क्या हश्र होगा ये तो वही जानता था..
उसने जल्दी से बहाना बनाया की अपने दोस्त के घर कुछ काम है और वो बाहर निकल आया..और अपने एक दोस्त के घर की तरफ निकल गया,जो वहाँ से काफ़ी दूर था.
दूसरी तरफ, अपने चेहरे पर गिरते पानी से एकदम से रश्मि को होश आ गया, उसने आस पास देखा और सोचने लगी की वो वहाँ कैसे आ गयी..उसके दिमाग़ मे एक पल मे ही सारा वाक़या गुजर गया, पर शराब पीने से वो कब लुड़क गयी ये उसको याद नही था..वो पूरी भीग चुकी थी…और सोचने लगी की वो वहाँ कैसे आई..
उसने गली से बाहर निकल कर देखा तो उसकी समझ मे आया की वो कहाँ है…आख़िर वो भी तो उसी मोहल्ले मे रही थी..
वो मुड़ कर वापिस विक्की के घर तक पहुँची,नशे की वजह से वो अभी भी लड़खड़ा रही थी पर आज वो किसी भी हालत मे विक्की से मिलना चाहती थी, चाहे उसके लिए उसके बाप से ही क्यो ना चूदना पड़े
उसने फिर से दरवाजा खड़काया…विक्की बाथरूम मे था और अपने गीले कपड़े उतार कर नहा रहा था..
वो झल्लाता हुआ सा टावल लपेट कर बाहर निकला और दरवाजा खोल दिया, उसने तो सोचा था की उसका बाप वापिस आ गया होगा..पर बाहर रश्मि को भीगा हुआ खड़ा देखकर उसकी आँखे आश्चर्य से फैल गयी..
रश्मि को भी समझ नही आया की इतनी जल्दी विक्की कैसे वापिस आ गया..और फिर उसकी समझ मे आया की वो क्यो पिछली गली मे पहुचा दी गयी थी..उसकी नज़रें देवी लाल को ढूढ़ने लगी..
विक्की : “अरे आंटी आप….इस समय…और वो भी मेरे घर…”
रश्मि (इधर उधर देखते हुए ) : “वो तुम्हारे पापा नही है क्या …”
विक्की : “जी …वो तो अभी शायद अपने दोस्त के घर गये हैं…दो घंटे मे ही आएँगे वहाँ से…..”
उसकी बात सुनकर जैसे उसने राहत की साँस ली और जल्दी से अंदर आ गयी..
विक्की हैरान सा खड़ा होकर उसे अंदर आते हुए देखता रहा…फिर उसने जल्दी से दरवाजा बंद कर लिया..टावल मे उसके लंड ने खड़े होकर बवाल मचाना शुरु कर दिया था ..रश्मि के मोटे-2 मुम्मे पानी मे भीगकर पानी भरे गुब्बारों की तरहा थिरक रहे थे..उसके दिमाग़ मे तो कल की बातें ही घूम रही थी..वो समझ गया था की वो वहाँ किसलिए आई है…उसके लंड से चुदने के लिए..पर वो भी पूरा कमीना था, वो जानता था की ये मछली तो उसके जाल मे पूरी फँस ही चुकी है, उसका असली निशाना तो उसके बेटी काव्या थी, जिसने उसकी कई बार बेइजत्ती की थी..वो चाहता तो रश्मि को अभी के अभी चोद कर मज़े ले सकता था, पर वो उसको अच्छी तरह तड़पाना चाहता था, ताकि वो खुद उसकी मदद करे काव्या को चोदने मे..पर वो बिदक ना जाए इसके लिए उसको ललचाना भी ज़रूरी था..और सही मौके पर ही उसे अपनी योजना को अंजाम देना था.
विक्की : “अरे आंटी, आप तो पूरी भीग गयी हैं….आप अंदर जाओ उस कमरे मे, वहाँ मेरी मों के कपड़े पड़े हैं कुछ, वो पहन लो..”
एक तो शराब का नशा, उपर से आधी चुदकर उसकी बुर भी जल रही थी…वो किसी भी तरह से आज विक्की का लंड लेना चाहती थी..वैसे भी चुदाई के लिए उसको कपड़े उतारने ही थे, वो अंदर गयी और अलमारी खोलकर देखने लगी..काफ़ी पुराने कपड़े थे वो, और छोटे भी थे..शायद उसकी माँ थोड़ी दुबली पतली सी थी..उसने एक पेटीकोट उठाया और अपने पूरे कपड़े उतारकर सिर्फ़ वही पहन लिया, उसने अपने मोटे-2 मुम्मे उस पेटीकोट के नीचे छुपा लिए ,नीचे से वो पेटीकोट उसकी जाँघो तक ही आ रहा था..और उसमे वो काफ़ी सेक्सी लग रही थी..वो जानती थी की उसको ऐसी हालत मे देखकर विक्की सब समझ जाएगा और उसपर टूट पड़ेगा..
एक भले घर की औरत एक रंडी जैसा बिहेव कर रही थी..पर इस वक़्त उसके दिमाग़ मे ये सब बाते नही आ रही थी, उसे तो बस चिंता थी अपनी दोनो टाँगो के बीच हो रही खुजली की.
वो धीरे-2 चलती हुई बाहर आई..विक्की वहीं खड़ा था अपने टॉवल मे..एक पल के लिए तो उसका भी ईमान डोल गया रश्मि को ऐसी हालत मे देखकर..उसके बदन से टपक रही पानी की बूंदे देखकर उसके मुँह मे भी पानी आ गया..वो जानता था की रश्मि उसको ललचा रही है..पर आज उसकी परीक्षा की घड़ी थी..उसे किसी भी तरह से अपने आप पर कंट्रोल रखना था..
रश्मि : “वो सब कपड़े तो छोटे लग रहे थे…इसलिए यही पहन लिया बस…”
विक्की : “अच्छी …लग रही हो आप इसमे भी…”
उसकी नज़रें रश्मि के मुम्मों के उपर लगे किशमिश के दानों पर टिकी थी, जो गीले कपड़े से झाँककर चमक रहे थे.
फिर रश्मि बोली : “मैं तो तुम्हारा थेंक्स करने के लिए आई थी….कल तो सही से बोल भी सकी,तुमने जिस तरह से कल मेरी इज़्ज़त बचाई…..मैं तुम्हारी काफ़ी एहसानमंद हू….थेंक्स ..”
विक्की कुछ नही बोला, वो सुनता रहा..
कुछ देर बाद रश्मि बोली : “तुमने तो बोला था की मुझे फोन करोगे…पर तुम्हारा फोन आया ही नही, इसलिए मैं खुद आ गयी..”
वो बचकानी सी बातें कर रही थी, जिसका विक्की पूरी तरह से स्वाद ले रहा था..वो मुस्कुरा रहा था.
विक्की : “मैं घर आकर आप ही को फोन करने वाला था…अच्छा हुआ आप आ ही गयी यहाँ..लेकिन थेंक्स बोलने का आपका तरीका कल तो कुछ और था..आज इतनी दूर से खड़े होकर क्यो थेंक्स बोल रही है..”
उसकी बात सुनते ही रश्मि के पूरे शरीर मे झुरजुरी फैल गयी…वो समझ गयी की विक्की क्या कहना चाहता है..और वैसे भी, वो खुद भी तो यही चाहती थी..
वो धड़कते दिल के साथ आगे आई और विक्की के बिल्कुल करीब पहुँचकर उसने उसकी तरफ देखा..और फिर एकदम से उसपर झपटकर उसके चेहरे को अपने हाथों मे दबोच कर उसके होंठों को किसी पिशाचिनी की तरह चूसने लगी..उसकी फुटबॉल जैसी छातियाँ विक्की के चौड़े सीने से पीसकर पिचक कर रह गयी..विक्की ने भी अपने दाँतों और होंठों को काम पर लगा दिया और रश्मि के योवन से भरे होंठों का शहद इकट्ठा करने लगा.
उसके मुँह से आ रही शराब की महक सूँघकर विक्की समझ गया की वो पीकर आई है…पर ये सोचकर वो कुछ नही बोला की शायद ये उसका रोज का काम होगा…उँचे लोगो की उँची बातें….
दोनो एक दूसरे को ऐसे चूम चाट रहे थे जैसे आजकल के प्रेमी प्रेमिका हो..हालाँकि दोनो की उम्र मे काफ़ी अंतर था, पर विक्की को उसको चूमते हुए एक पल के लिए भी ऐसा नही लगा की वो किसी आंटी को चूम रहा है, इतना जोश और उत्तेजना तो आजकल की लड़कियों मे होती ही नही है…उसकी चुदाई करने मे सच मे उसको बहुत मज़ा आने वाला था.
रश्मि के हाथ सीधा उसके टावल पर जा पहुँचे और उसने एक ही झटके मे उसे उतार फेंका और अब विक्की उसकी नज़रों के सामने पूरा नंगा खड़ा था..अपने खड़े हुए लंड को लिए…जो उसकी उम्मीदों के अनुसार काफ़ी लंबा और मोटा था..
रश्मि एक दम से उसके सामने बैठ गयी और उसके भुट्टे जैसे लंड को पकड़ कर प्यासी नज़रों से देखने लगी…और जैसे ही वो अपना मुँह खोलकर उसको निगलने लगी, विक्की ने कुछ ऐसा बोल दिया की उसकी झाँटे सुलग उठी..
विक्की : “आंटी….काव्या कैसी है….मुझे याद करती है या नही..”
उसकी ये बात सुनकर रश्मि यथार्थ के धरातल पर आ गिरी…उसे तो याद भी नही रहा था की वो उसकी बेटी का बॉयफ्रेंड है…और उसको अपनी बेटी से दूर रहने की हिदायत देने के लिए ही वो उसके पास आई थी कल…पर कल और आज के बीच जो कुछ भी हुआ था, उसके बाद तो रश्मि के दिमाग़ से ये बात निकल ही चुकी थी की विक्की तो उसकी बेटी के पीछे पड़ा है….कब और कैसे वो खुद विक्की के जाल मे फँस कर उसके लंड की दीवानी हो गयी थी ये वो खुद भी नही जानती थी..
उसके हाथ मे विक्की का लंड था…पूरा खड़ा हुआ…और उसकी चूत बुरी तरह से गीली होकर बह रही थी…ऐसी हालत मे विक्की ने ये बात बोलकर उसको एहसास करवाया था की वो असल मे है कौन…और किसलिए वहाँ आई है…
पर अपनी चूत की हालत वो अच्छी तरह से जानती थी..उसके अंदर उठ रही खुजली के आगे उसको अपनी बेटी और उसका बॉयफ्रेंड नही बल्कि अपनी चूत की खुजली मिटाने वाला एक मोटा लंड ही दिखाई दे रहा था…उसने बिना कुछ कहे उसके लंड को एक ही झटके मे अपने मुँह के अंदर डाल लिया…और ज़ोर-2 से चूसने लगी..
विक्की को मज़ा तो बहुत आया, पर उससे भी ज़्यादा मज़ा वो रश्मि को लज्जित करके लेना चाहता था..वो फिर से बोला : “काव्या भी ऐसे ही चूसती है मेरा लंड …..”
उसकी ये बात तो रश्मि को दिल के अंदर तक चुभ गयी…
पर उसको ये बात एक माँ की तरह नही बल्कि एक प्रेमिका की तरह चुबी….एक ही दिन मे वो तो विक्की पर खुद का कब्जा समझ बैठी थी…पर ऐसी हालत मे आकर भी विक्की उसके सामने उसकी बेटी का नाम ले रहा है, उसकी तारीफ कर रहा है, ये उसको बिल्कुल भी पसंद नही आया..वो जलन के मारे गुस्से मे भर गयी और एकदम से उठकर उसने अपने शरीर पर पहने पेटीकोत को उतार फेंका और विक्की के सामने पूरी नंगी होकर खड़ी हो गयी..
और पूरे गुस्से मे भरकर वो विक्की से बोली : “तू अपने आप को ज़्यादा चालू समझ रहा है…मैं अपनी जवानी खुद तेरे सामने लेकर खड़ी हू और तू काव्या को बीच मे ला रहा है…वो तो बच्ची है अभी…देख, इसे कहते हैं असली जवानी…ये देख, मेरी ब्रेस्ट, कभी देखी है तूने इतनी बड़ी छातियाँ,कभी चूसा है तूने ऐसे बूब्स को…और ये देख..मेरी चूत ….अभी भी दो उंगलियाँ एक साथ अंदर जाने मे दर्द होता है…तेरा लंड जब इसमे जाएगा तो सोच कितना मज़ा मिलेगा तुझे, और तू है की काव्या की बातें कर रहा है अभी तक…”
रश्मि तो शराब और ईर्ष्या के नशे मे आकर अपने आप को पूरी तरह से खोलकर खड़ी हो गयी थी विक्की के सामने, और अपने शरीर के हर अंग की तारीफ खुद ही करके वो अपनी बेटी के मुक़ाबले ज़्यादा अंक लेने की कोशिश कर रही थी विक्की से..
और वो ठीक भी था, वो जो कुछ भी कह रही थी,विक्की उसकी बात से पूरी तरह से सहमत भी था..काव्या तो उसके भरे शरीर के सामने आधी भी नही थी…उसके छोटे-2 नींबू और रश्मि के मोटे-2 रसीले खरबूजे, काव्या का पतला सा पेट और रश्मि का गूदे से भरा हुआ , काव्या की पतली सी कमर, और रश्मि की कमर पर जो कटाव था उसका तो कोई मुकाबला ही नही था, और तो और काव्या की चौड़ी गांद भी उसकी माँ की गुदाज गांद के सामने कुछ भी नही थी…
विक्की से भी रहा नही गया, उसने अपने हाथ आगे किए और रश्मि के मोटे-2 मुम्मे अपनी उंगलियों से दबाने लगा…वो सच ही कह रही थी, ऐसी छातियाँ तो उसने आज तक नही पकड़ी थी.
पर एक बात थी जो रश्मि को काव्या से अलग करती थी…वो थी काव्या की कुँवारी चूत …
चूत एक ऐसी चीज़ होती है जो एक बार चुद जाए तो उसमे वो बात नही रहती जो कुँवारी मे होती है…दुनिया की कोई भी ताक़त उसको पहले जैसा नही कर सकती..
पर इस वक़्त तो रश्मि को अपना ही पलड़ा भारी लग रहा था…क्योंकि उसकी बात सुनकर विक्की का लंड बुरी तरह से फुफ्कार रहा था…कारण था उसका उफान मार रहा यौवन जो अब विक्की की भूखी नज़रों के सामने पूरा नंगा था.

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