Update 61
अंदर दोनो नंगी खड़ी होकर एक दूसरे को चूम रही थी..कुसुम तो एकदम से घबरा गयी और अपने कपड़े पहन लिए..अब वो डर रही थी की शायद उसे अपने कस्टमर के साथ ऐसा नही करना चाहिए था..
काव्या ने उसे शांत किया और बाहर खड़े समीर से बोली : “जी पापा, मैं ठीक हू…बस फिटिंग चेक कर रही थी…”
समीर वापिस जाकर सोफे पर बैठ गया.
काव्या के मुँह से पहली बार समीर के लिए पापा निकलता देखकर कुसुम के तो होश उड़ गये, वो तो इतनी देर से उसे उसकी गर्लफ्रेंड या नाजायज़ संबंध का नतीजा समझ रही थी..पर ये तो उसका बाप निकला..
पर वो कैसा बाप था वो ये नही जानती थी..
पर अपने बाप के साथ ऐसी शॉपिंग के लिए वो आई थी, ये सोचकर एक बार फिर से कुसुम के अंदर चींटियाँ सी रेंगने लगी..उसने आज तक अपने पापा के बारे मे ऐसा नही सोचा था, पर उनके इस तरह के खुले रिश्ते को देखकर एक दम से उसका ध्यान अपने पापा की तरफ चला गया और वो एक गहरी सोच मे डूब गयी..
तब तक काव्या ने भी वो ब्रा और थोंग पहन लिया था और वो ग़ज़ब की लग रही थी…उसकी ब्रेस्ट छोटी थी, पर कपड़ा स्ट्रेचेबल था , इसलिए वो सिकुड कर उसकी ब्रेस्ट को भी सही से कवर कर पा रहा था…और वो थोंग , जिसपर अभी तक कुसुम की चूत का जूस लगा हुआ था, उसे अपनी मुनिया पर महसूस करते ही एक अजीब सा एहसास हुआ उसको…
कुसुम ने कपड़े पहन लिए थे..और वो बाहर जाने लगी..
कुसुम : “ये बिल्कुल फिट है आपके उपर, में….आप अपने पापा को दिखाना चाहोगी इसको…”
उसने शरारत भरे स्वर मे काव्या से पूछा..
क्योंकि वो जानती थी की वो जितनी भी खुल जाए, पर अपने पापा के सामने ऐसी हालत मे हरगिज़ नही जाएगी..
पर उसकी आशा के विपरीत काव्या बोली : “उन्हे एक बार दिखाना तो होगा ही ना…तुम ऐसा करो, उन्हे यहीं अंदर भेज दो..मुझे ऐसे बाहर निकलने मे शर्म आ रही है..”
उसकी बात सुनकर कुसुम के तो होश उड़ गये..उसने तो सोचा भी नही था की काव्या ऐसा कहेगी…बाप बेटी मे ऐसे खुलेपन का रिश्ता उसने आज तक नही देखा था..और ना ही सोचा था..
पर ये कैसी शर्म है, जो उसके पापा बाहर देखेंगे, वही तो अंदर भी होगा, दोनो मे फ़र्क क्या है..
पर ये बात काव्या ने काफ़ी सोच समझ कर कही थी..क्योंकि वो समीर को जानती थी..बाहर आकर वो सिर्फ़ अपने आप को उसे दिखा सकती थी..पर अंदर के छोटे से केबिन मे वो काफ़ी कुछ कर भी सकती थी उसके साथ..
काव्या की बात मानकर कुसुम बाहर गयी और उसने हकलाते हुए से स्वर मे कहा : “सर …वो ..आपकी बेटी…आपको अंदर केबिन मे बुला रही है..”
समीर के दिल की धड़कने एकदम से रेलगाड़ी की तरह चलने लगी…वो सोचने लगा की आख़िर क्या दिखाएगी काव्या उसको..
वो लगभग भागता हुआ सा केबिन की तरफ गया..और धीरे से धक्का देकर अंदर आ गया…केबिन का दरवाजा खुला ही हुआ था..
अंदर पहुचते ही जो उसने देखा उसके बाद उसने अपने आप पर कैसे कंट्रोल किया ये तो वो खुद भी नही जानता था…क्योंकि ऐसी सेक्सी लड़की और वो भी सिर्फ़ एक छोटी सी ब्रा और पेंटी मे…और वो भी उसके इतने पास…उसका लंड तो फटने को हो रहा था..
और काव्या भी बड़ी मुश्किल से अपने आप पर कंट्रोल करती हुई सी,नॉर्मल बिहेव कर रही थी..और घूम-घूमकर शीशे मे अपना फिगर चेक कर रही थी.. काव्या : “पापा…देखो ना…कैसी लग रही है…”
समीर बस यही बोल पाया : “हाँ ……अच्छी …है ..”
उसके मुँह से शब्द ही नही फूटने को हो रहे थे…वो तो अपनी जवान बेटी के सेक्सी फिगर को देखकर पागल हुए जा रहा था…छोटी-2 ब्रेस्ट…पतली कमर…सेक्सी सी नेवल…और फेली हुई गांड के उपर छोटी सी कच्छी …और पीछे से तो ऐसा लगता था की वो पूरी नंगी है…उसके भरंवा चूतड़ देखकर उसका मन कर रहा था की उन्हे दबोच कर उसका रस निकाल दे…
काव्या : “पर ये मेरी ब्रेस्ट के हिसाब से लूस है…देखो…कितना गेप है…”
वो जैसे समीर को उकसा रही थी..की आओ पापा और ब्रा के कपड़े को पकड़ कर देखो..पर समीर तो जैसे लल्लू सा बन गया था..वो अवाक सा होकर बस उसके सेक्सी शरीर को देखे जा रहा था..
काव्या अपनी उंगलियों से ब्रा के कपड़े को खींचकर उपर नीचे कर रही थी..और ऐसा करते हुए अचानक समीर को उसके निप्पल के दर्शन हो गये…
उफफफफफफफ्फ़ इतना गुलाबी भी कोई होता है क्या …ऐसा गुलाबी रंग तो उसने अपनी कल्पना मे भी नही देखा था…बेबी पिंक कलर के निप्पल्स….उम्म्म्मममम….उन्हे चूसने मे और उनका जूस पीने मे कितना मज़ा आएगा…
वो अपने ही ख़यालों मे मगन सा होकर एकटक देखता रहा उसकी ब्रेस्ट को…
काव्या को काफ़ी मज़ा आ रहा था उसको टीस करने मे..
काव्या : “फाइनल बोलो पापा…लू या नही…”
ऐसा करते हुए उसने अपनी नंगी गांड समीर की तरफ कर दी…अब ऐसे सीन को देखकर कोई कैसे मना कर सकता था..वो अगर हीरे से बनी हुई होती तो भी ले देता समीर उस वक़्त ..
समीर :”ले लो…काफ़ी सेक्सी…उम्म…अच्छी लग रही है…”
काव्या : “थॅंक्स पापा….”
इतना कहकर वो बिना किसी वजह के उसके गले से लिपट गयी..और उसके गाल पर एक पप्पी दे डाली..
उसकी छोटी-२ सिप्पियां समीर की छाती से टकराकर टूट सी गयी , समीर के हाथ उसकी नंगी कमर पर लिपट गए
समीर के खड़े हुए लंड का एहसास अपनी चूत पर महसूस करते ही वो भी बहक सी गयी एक पल के लिए…और उसने सोचा की जो करना है आज ही कर लेती हू…पर तभी उसे फिर से अपनी सहेली श्वेता के कहे शब्द याद आ गये की जितना तरसाओगी , उतनी ही बेहतर चुदाई होगी…वैसे भी जगह चुदाई के हिसाब से ठीक नहीं थी
वो एकदम से अलग हुई..और समीर से बोली : “ठीक है पापा….आप बाहर जाओ, मैं चेंज करके आती हू..”
और समीर बेचारा ना चाहते हुए भी बाहर आ गया..काव्या ने जल्दी से अपने कपड़े वापिस पहने और अपने हाथ मे वो ब्रा-पेंटी लेकर बाहर आ गयी..
इतनी देर तक दोनो बाप-बेटी अंदर क्या कर रहे थे, ये सोच-सोचकर कुसुम अपनी छोटी सी स्कर्ट के उपर से ही अपनी चूत को रगड़ रही थी..
काव्या : “मुझे ये पसंद आई…और पापा को भी…ये पॅक कर दो..”
दोनों के चेहरे पर एक शरारत भरी मुस्कान थी
उसके बाद काव्या ने लगभग 5 जोड़े और लिए, पर उन्हे पहना कर या पहन कर नही देखा, क्योंकि उसके हिसाब से आज के लिए इतना ही काफ़ी था..
घर पहुँच कर गाड़ी से निकलकर काव्या समीर के पास आई और उसकी बाहों को अपने हाथ मे फँसा कर अंदर की तरफ चल दी, जैसे वो उसकी गर्लफ्रेंड हो..और बोली : “पापा, बाकी के सेट्स मैं आपको आराम से पहन कर दिखाउंगी …”
और दोनो एक दूसरे की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए अंदर की तरफ चल दिए..
और उपर बालकनी मे खड़ी हुई रश्मि ये सोचकर खुश हो रही थी की बाप-बेटी मे लगाव होना शुरू हो गया है..
पर वो नही जानती थी की ये लगाव किस तरह का है. रश्मि बाथरूम मे चली गयी…उसने कुछ अलग ही सोचा हुआ था आज समीर के लिए.
कुछ ही देर मे समीर भी अपने बेडरूम मे पहुँचा,रश्मि को वहाँ ना पाकर वो बाथरूम के पास गया, दरवाजा अंदर से बंद था, वो समझ गया की रश्मि अंदर ही है..उसके लंड की हालत काफ़ी खराब थी आज, उसने अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए..यहाँ तक की उसने अपना अंडरवीयर भी उतार फेंका, क्योंकि काव्या के साथ खरीदारी करते हुए उसके लंड की अकड़ जिस तरह से उस अंडरवीयर मे सिमटी पड़ी थी, उसे आज़ाद करना ज़रूरी था, खुली हवा मे झटके मारते हुए उसको काफ़ी आराम मिल रहा था..अब वो अपने हाथ मे खड़ा लंड लेकर रश्मि के निकलने का इंतजार करने लगा..आज वो उसकी चूत का कीमा बना देना चाहता था..जैसे उसकी चूत को कूटकर वो उसे इतनी सेक्सी लड़की पैदा करने का इनाम देना चाहता हो.
अब समीर से सहन नही हो रहा था, उसने दरवाजा खड़काया : “रश्मि…क्या कर रही हो…जल्दी बाहर आओ…”
अंदर खड़ी हुई रश्मि अपनी चूत पर एक बार और रेजर फेर रही थी…उसकी चूत भी तो सुबह से इतनी बार गीली हो चुकी थी,विक्की के साथ आज जो कुछ भी हुआ था, उसे सोचकर उसके बदन मे अभी तक रोमांच की ठंडक दौड़ रही थी..
कुछ ही देर मे उसने दरवाजा खोल दिया और बाहर निकल आई..
रश्मि को ऐसी हालत मे देखकर समीर एक पल के लिए तो अपनी सोतेली बेटी को भी भूल गया और उसका लंड रश्मि की लदी हुई जवानी के गुणगान करने लगा..
रश्मि ने आज अपने पति के द्वारा लाई हुई एक सेक्सी ब्रा पेंटी का सेट पहना हुआ था, बाथरूम मे उसने अपना गाउन उतार दिया था और सिर्फ़ अपनी ब्रा पेंटी मे ही बाहर निकल आई..
जितना शॉक समीर को लगा था, उतना ही रश्मि को भी लगा समीर को देख कर, वो सिर्फ़ अपनी सैंडो मे था और अपने लंड को हाथ मे पकड़ कर हिला रहा था..जैसे वो रश्मि का ही इंतजार कर रहा हो की कब बाहर निकले और उसकी चूत मे अपना लंड पेल दे..
दोनो के जिस्म बुरी तरह से सुलग रहे थे…रश्मि का विक्की की वजह से और समीर का काव्या की वजह से..अब समय था दोनो जिस्मों मे लगी हुई आग को बुझाने का..एक दूसरे से रगड़ कर..
दोनो एक दूसरे के गले से ऐसे चिपके जैसे बरसों के बिछुड़े प्रेमी हो..समीर ने अपनी बीबी को बेतहाशा चूमना और मसलना शुरू कर दिया..
रश्मि ने तो सोचा था की बाहर निकल कर समीर को अपने जिस्म के जलवे दिखा कर पहले तो थोड़ा तरसाएगी, फिर धीरे-2 उसके कपड़े उतार कर उसे नंगा करेगी, उसको सीडयूस करेगी , फिर खुद भी नंगी हो जाएगी और आराम से उसका लंड चूसेगी और अपनी चूत भी चुस्वाएगी…पर समीर ने सब गड़बड़ कर दिया था, उसे क्या पता था की वो पहले से नंगा खड़ा होगा और उसपर एकदम से झपटकर सारा प्लान बिगड़ देगा..
कभी-2 इंसान चुदाई के प्लान तो काफ़ी बड़े-2 बनाता है, पर जब करने की बारी आती है तो सब अपने हिसाब से ही होता चला जाता है.
यही हो रहा था आज रश्मि के साथ भी..पलक झपकते ही उसकी ब्रा पेंटी ज़मीन पर थी और वो पूरी नंगी होकर समीर की बाहों मे मचल रही थी..
वो भी पूरा नंगा हो चुका था, उसे रश्मि को धक्का सा देकर अपने पैरों मे बिठा लिया और उसे लंड चूसने के लिए बोला..वो अपने लंबे बालों को संभालती हुई अपने घुटनो के बल बैठकर समीर के लंड को चूसने लगी..
उसके गर्म मुँह मे अपना लंड जाते ही समीर का मुँह उपर की तरफ हो गया और वो उसके रेशमी बालों मे हाथ फेरते हुए अपनी आँखे बंद करके काव्या के बारे मे सोचने लगा..एक पल मे ही उसके दिमाग़ मे शोरुम का सीन आ गया जहाँ काव्या उस छोटे से केबिन मे थी और उसे अंदर बुलाते ही वो पूरी नंगी हो गयी और नीचे बैठकर उसके लंड को चूसने लगी..
रश्मि की चूत मे से पानी रिस रहा था और नीचे ज़मीन पर उसके रस की बूंदे गिरने लगी…वो आज अपनी पसंद का एक काम तो करना ही चाहती थी..उसके लिए समीर के झड़ने से पहले वो उसे बिस्तर पर ले जाना चाहती थी..
रश्मि ने एकदम से समीर का लंड अपने मुँह से निकाला और समीर को पीछे की तरफ धक्का देते हुए बेड पर गिरा दिया..ये समीर पर ज़बरदस्ती करने का उसका पहला मौका था, उसने आज तक समीर के कहे अनुसार ही काम किया था, वो जिस आसन मे उसे चोदना चाहता था, वो उसी आसन मे उसके कहे अनुसार आ जाती थी..वो कहे तो उसकी दासी बनकर उसका लंड चूसती , वो कहता तो कुतिया बनकर अपनी गांड पीछे कर देती..वो कहता तो अपनी टांगे फेला कर उसके सामने लेट जाती और वो कहता तो उछलकर उसके खड़े हुए लंड के उपर बैठकर उछल कूद करती..

