Update 60
दोनो की आँखो मे एक दूसरे के लिए उत्तेजना का ज्वार भाटा उमड़ पड़ा था, जिसे शायद समीर नही देख पा रहा था..पर वो दोनो महसूस कर पा रही थी..
कुसुम : “मेम , आप कहें तो कुछ और भी पहन कर दिखाऊ आपको …या ये फाइनल है …”
काव्या : “मुझे कम से कम 5-6 सेट लेने है…इसको तो मैं एक बार खुद पहन कर देखना चाहूँगी…”
कुसुम : “ठीक है , आप मेरे साथ चलिए…”
इतना कहकर वो काव्या को लेकर अपने साथ चेंजिंग रूम मे आ गयी…जो एक छोटा सा केबिन था..और उसमे हर तरफ शीशे लगे थे..
एक खूंटी पर कुसुम की ड्रेस और उसकी ब्रा -पेंटी टंगी हुई थी..
कुसुम : “में, आप अपने कपड़े उतार कर यहाँ टाँग दीजिए..मैं आपको ये उतार कर देती हू..”
इतना कहकर कुसुम बिना किसी शरम के अपनी ब्रा खोलने लगी..
काव्या : “रूको, मैं हेल्प करती हू तुम्हारी …”
इतना कहकर वो कुसुम के पीछे गयी और उसकी ब्रा के हुक खोल दिए…और नीचे सरकती हुई ब्रा के कप्स को उसने आगे हाथ करते हुए अपनी हथेलियो मे थाम लिया…और फिर उन्हे धीरे-2 उजागर कर दिया..
और जैसे ही कुसुम की नंगी चुचियाँ काव्या को सामने लगे शीशे मे दिखी , काव्या के शरीर का तापमान बड़ सा गया, उसकी गोल-2 चुचियाँ और लंबे निप्पल्स कमाल के थे…उसने इतने लंबे निप्पल्स आज तक नही देखे थे..और उसकी मोटी-2 ब्रेस्ट की जानलेवा शेप…उफ़फ्फ़ …शायद इसलिए वो वहाँ की सेल्सगर्ल थी..
काव्या उसके कान मे फुसफुसाई : “यू आर ब्यूटिफुल ….”
उसकी साँसे तेज हो चुकी थी…
कुसुम भी उत्तेजना के शिखर पर थी,क्योंकि उसके लगभग एक इंच लंबे निप्पल फटने को हो रहे थे……वो धीरे से बोली : “थेंक्स मेम …”
सामने के शीचे मे काव्या उसके टॉपलेस हिस्से को देख पा रही थी..
फिर उसने उसकी पेंटी को भी नीचे खिसका दिया…कुसुम की चूत से जैसे चाशनी बह रही थी…जो उस छोटे से कपड़े से चिपक कर एक रेशम के धागे का निर्माण कर रही थी..
कपड़ा तो अलग हो गया पर उस चाशनी से बना धागा टूटने का नाम ही नही ले रहा था…आलम ये था की पेंटी घुटने से नीचे तक आ गयी पर एक गोल्डन से धागे ने उसकी चूत और पेंटी को अभी तक आपस मे जोड़ रखा था..इतना सेक्सी सीन काव्या ने अपनी पूरी लाइफ मे आज तक नही देखा था…
उसने अपना हाथ आगे किया और अपनी उंगली में उस रेशमी और गीले धागे को लपेट कर उसे तोड़ दिया….और अपना पंजा एकदम से कुसुम की चूत पर रखकर ज़ोर से दबा दिया…
बस इतना काफ़ी था उस मासूम सी दिखने वाली लड़की के अंदर का जानवर जगाने के लिए…वो एकदम से पलटी और काव्या के चेहरे को पकड़ कर उसके होंठों पर जोरदार हमला कर दिया….उसके रेशमी होंठों का रस ऐसे चूसने लगी मानो उसके अंदर कोई सकिंग मशीन लगी हो…वो तो पूरी नंगी थी…और आनन फानन मे उसके हाथ चलने लगे और एक मिनट के अंदर ही उसने काव्या को भी अपनी तरह नंगा कर दिया..और दोनो जवान जिस्म एक दूसरे को रोंदने लगे…
उस छोटे से केबिन में मानो एक तूफान सा आ गया..आज काव्या को पहली बार कोई अपनी टक्कर का मिला था..जो उससे ज़्यादा उत्तेजना मे भरकर अपना उतावलापन दिखा रहा था..ठीक ऐसी ही बनना चाहती थी वो भी, ताकि वो जिसके साथ भी सेक्स करे,वो उसके जंगलीपन का दीवाना बन जाए..वो कुसुम को ओब्सर्व करने लगी, अपने आप को उसके हवाले कर दिया और उसकी हरकतों को नोट करने लगी, ताकि कुछ सीख पाए..
कुसुम तो जैसे पागल हो चुकी थी, इतनी देर तक अपने आप पर कंट्रोल करने के बाद वो जैसे फट सी पड़ी थी, काव्या को खा जाने वाली हरकतें कर रही थी वो..उसके होंठ, गर्दन, और गालों को आम की तरह चूस रही थी..और अपनी चूत को उसकी चूत पर रगड़कर मज़ा ले रही थी..
वो पहले से ही उत्तेजित थी, इसलिए लगभग 8-10 घिस्से लगाने के बाद ही वो छूट गयी और उसके अंदर का लावा बहकर उसकी जांघों से नीचे सरकने लगा..
बाहर बैठा हुआ समीर व्याकुल सा हो रहा था…वो उठकर केबिन तक गया और उसने धीरे से दरवाजा खड़काया…
समीर : “काव्या….काव्या…बड़ी देर लगा दी…तुम ठीक तो हो ना…”

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