Update 52
श्वेता ने सब सॉफ किया और फिर से नीचे आ गयी…उसने पिज़्ज़ा आर्डर , थोड़ी ही देर मे पिज़्ज़ा आ गया, श्वेता ने नितिन को नीचे बुलाया और सबने मिलकर पिज़्ज़ा खाया..और थोड़ी देर बाद केतन अपने घर चला गया, क्योंकि श्वेता के मम्मी-पापा के आने का टाइम हो रहा था..दोनो भाई बहन अकेले रह गये
श्वेता : “थॅंक्स भाई….हम दोनो को प्राइवेसी देने के लिए…”वो बस मुस्कुरा दिया, कुछ बोला नही..
श्वेता : “कल तुम्हे अच्छी तरह से नहलाऊंगी मैं…ये है तुम्हारा बोनस…”
उसकी बात सुनकर नितिन का चेहरा एक दम से खिल उठा…पर सिर्फ़ श्वेता ही जानती थी की उसके दिमाग़ मे क्या चल रहा है..
अगले दिन नितिन बड़ी बेसब्री से अपनी बहन का वेट कर रहा था, पर वो थी की अपने कमरे मे बंद होकर अपनी अभी तक की कहानी काव्या को सुनाने मे लगी थी..काव्या को जैसे ही पता चला की वो चुद चुकी है तो उसकी हैरानी की सीमा ही नही रही..और ना चाहते हुए भी वो अपनी सहेली के बाय्फ्रेंड नितिन के लंबे लॅंड के बारे मे सोचने लगी, की कैसे उसने श्वेता की चूत मे अपना लॅंड पेला होगा, कैसे झटके दिए होंगे, और कैसे अपना रस उसके चेहरे और मुँह के अंदर निकाला होगा…और साथ ही साथ वो श्वेता को गालियाँ भी देती जा रही थी की कैसे वो चूत मरवाने मे उससे आगे निकल गयी..
काव्या : “साली, तू तो एक नंबर की कुतिया निकली, इतने सालो तक अपना कुँवारापन बचा कर रखा और एक झटके मे लूटा बैठी ….यू बिच…”
श्वेता (हंसते हुए) : “यार, तुझे क्या बताऊ …पिछले दो दिनों से मेरे साथ क्या-2 हो रहा है…उन सबकी वजह से ही मुझसे रहा नही गया और मैने केतन को रोका नही वो सब करने से…”
काव्या : “ऐसा क्या हो गया जो तेरे अंदर ऐसी आग लग गयी….चल जल्दी से बता मुझे …”
श्वेता : “नही यार….वो ..वो …बताने वाली बात नही है …”पर काव्या भी कहा मानने वाली थी, उसने अपनी कसम देकर उसे बोलने पर मजबूर कर ही दिया और जब श्वेता ने अपने और नितिन के बारे मे वो सब उसे बताया तो काव्या के हाथ अपने आप अपनी चूत के उपर चले गये …और जब तक उसकी बात ख़त्म हुई, वो उसकी पेंटी के अंदर तक घुसकर अपनी नर्म चूत को सहला रहे थे…
काव्या : “ओह यू बिच …..तेरे तो घर मे इतना बढिया जुगाड़ है, और तू है की बाहर अपना हलवा बाँटती फिर रही है…मुझे तो बेचारे नितिन पर तरस आ रहा है, एक तो उसके हाथ टूटे पड़े हैं और बेचारा अपनी सेक्सी बहन को अपने बाय्फ्रेंड के साथ देखकर कुछ कर भी नही पाता होगा हा हा …बेचारा ..मैं होती ना …”उसने अपनी बात बीच मे ही छोड़ दी …श्वेता समझ गयी की वो क्या कहना चाहती है …आख़िर उसके भाई के बारे मे पहले भी एक-दो बार काव्या बोल चुकी थी की वो कितना हॉट लगता है …
काव्या : “चल जो हुआ, उसको भूल जा, और आगे क्या करना है वो देख ले तू …मेरे साथ भी आजकल कुछ अजीब सा हो रहा है यहाँ, कल मेरे घर आ जा, सब डीटेल मे बताउंगी …चल बाय , अभी मम्मी बुला रही है मुझे ..”इतना कहकर उसने फोन रख दिया.श्वेता खोई-2 सी नीचे पहुँची, जहाँ नितिन टेबल पर उसका वेट कर रहा था..
दोनो ने बिना कुछ बोले नाश्ता खाया, इस बीच श्वेता ना जाने क्या-2 सोचती रही और अचानक वो नितिन से बोली : “तुम्हे नहाना नही है क्या…”
नितिन : “हाँ …हाँ हन …मैं तो कब से तुम्हारा वेट कर रहा था, पर तुम ही …”
श्वेता : “ओके …चलो जल्दी, अंदर, मैं करती हू तुम्हारा …”उसने ”करती हू तुम्हारा” तो ऐसे बोला था जिसका कुछ और ही मतलब निकाल कर उसके लॅंड महाराज ने वहीं के वहीं नाचना शुरू कर दिया..वो अपने कपड़े बदलने के लिए अपने कमरे मे चली गयी और नितिन भागकर बाथरूम मे.श्वेता अपने आप को टवल से ढक कर बाथरूम मे पहुँची तो उसने देखा की नितिन सिर्फ़ अपने अंडरवीयर मे खड़ा हुआ उसका वेट कर रहा है, और उसके लॅंड ने अपना विकराल रूप लेकर वहाँ तंबू बना दिया है ..और उसके खड़े हुए डंडे को देखकर उसकी हँसी निकल गयी और बोली : “ये कभी बैठता भी है या नही …”
श्वेता ने पहली बार उसके लॅंड के बारे मे बात की थी आज ..
नितिन : “दरअसल …जो आटेंशन इसको मिलनी चाहिए, पिछले कुछ दीनो से मिल नही रही, इसलिए ये अपनी नाराज़गी दिखा रहा है ऐसे ….”दोनो हंस दिए …
श्वेता ने अपना बँधा हुआ टावल निकाल दिया ..और नीचे उसके हुस्न को देखकर नितिन के लॅंड ने एक-दो झटके और मारे और पहले से ज़्यादा गुस्से मे आकर श्वेता को देखने लगा..उसने आज हॉल्टर ब्रा पहनी थी ..और सामने की तरफ तिकोना सा कपड़ा था जो उसके मोटे मुम्मों को आधे से ज़्यादा दिखा रहा था और सिर्फ़ कुछ हिस्सा ही छुपा पा रहा था ..और नीचे की तरफ उतनी ही सेक्सी वी शेप की पेंटी …दोनो अंदर शावर मे चले गये.
आज श्वेता कुछ ज़्यादा ही रगड़ रही थी नितिन की बॉडी को …अपने हाथ मे झाग बनाकर वो हर हिस्सा साफ़ कर रही थी ..उसके सामने खड़ी हुई जब वो उसकी चेस्ट को मल रही थी तो नितिन की नज़रें उसकी भारी भरकम ब्रेस्ट पर ही थी…उसका मन तो कर रहा था की एक झटके मे फाड़ डाले उसकी ब्रा को और देख ले की अंदर क्या छुपा कर रखा है उसने, गौर से देखने पर उसे श्वेता के खड़े हुए निप्पल भी सॉफ-2 नज़र आने लगे ..और निप्पल के चारों और उगे हुए छोटे-2 दाने भी …पानी ने उसकी ब्रा को पूरा ट्रांसपरेंट कर दिया था …अचानक श्वेता बोली : “उम्म …नितिन …क्या ..क्या ..तुम चाहते हो …की …उफ़फ्फ़ …कैसे बोलू … ..की मैं …कोई मदद करू तुम्हारे कम को निकालने में … .. आई मीन मास्टरबेट करने मे ….”नितिन को तो विश्वास ही नही हुआ …वो हैरानी से बोला : ” रियली .?? क्या तुम ….. सच मे ….. ऐसा कर सकती हो ….मतलब ..करना चाहती हो …”
श्वेता उससे नज़रें नही मिला रही थी .. वो बोली : “हाँ …मीन्स …तुमने भी तो मेरी हेल्प की थी कल …. वो मुझे और नितिन को स्पेस देकर …”वो आगे बोली : “और तुम्हारी हालत मुझसे देखी नही जा रही ….तुमने ही कहा था ना की …इसको जो अटेंशन मिलनी चाहिए वो मिल नही रही ..तो मैं, वो अटेंशन इसको दे सकती हू …तुम थोड़ा रिलीव महसूस करोगे …हैं ना ..”नितिन स्पीचलेस हो गया ….उसने सिर्फ़ अपना सिर हिला दिया और अपनी स्वीकृति दे डाली श्वेता ने धड़कते दिल से उसके अंडरवीयर को नीचे किया और एक ही झटके मे उसका लॅंड लहराकर उसकी आँखो के सामने आ गया…ओह्ह्ह माय गॉड , इतना लंबा …..उम्म्म्ममममम, श्वेता ने ढेर सारा साबुन लिया और उसके लंबे लॅंड के उपर लगाकर उसे हिलाने लगी…पहले धीरे-2 फिर थोड़ी तेज़ी से …”अहह….एस श्वेता …. अssssss …..उम्म्म्ममममम”
नितिन ने अपनी आँखे बंद कर ली ….पर जब उसकी सपनो की रानी उसके सामने बैठकर उसके लॅंड का मर्दन कर रही है तो वो आँखे क्यो बंद करे…उसने झट से अपनी आँखे खोल दी और प्यासी नज़रों से अपनी बहन को देखने लगा, उसके हिलते हुए मुम्मों को अपनी नज़रों से चोदने लगा, उसके लरजते हुए होंठों का रस अपने प्यासी आँखों से पीने लगा …श्वेता अपने दोनो हाथों का प्रयोग कर रही थी …एक हाथ से वो उसके लॅंड को उपर नीचे कर रही थी और दूसरे से उसकी गोटियों को सहला रही थी …इतना प्यार भरा ट्रीटमेंट जब मिले तो रुकना मुश्किल हो जाता है, नितिन ने भी सिसकना शुरू कर दिया….श्वेता उसकी तेज चल रही सांसो को देखकर समझ गयी की वो झड़ने वाला है, पर उसकी समझ मे नही आ रहा था की वो उसके रस को कहाँ गिराए, जैसे ही नितिन ने एक-दो जोरदार झटके दिए अपनी कमर को तो वो समझ गयी की अब किसी भी वक़्त उसका रस निकल सकता है, वो उठ खड़ी हुई और अपने पेट का निशाना बना कर उसकी पिचकारी से निकले पानी को वहाँ गिरा लिया …
नितिन अपने पंजों पर खड़ा होकर गोलियां चलाने लगा
नितिन : “अहह उम्म्म्मममममममम …अहह”उसकी हर पिचकारी एक गर्म एहसास छोड़ रही थी श्वेता पर, इतना माल इकट्ठा कर रखा था नितिन ने की श्वेता के पेट पर सफेद रंग की परत सी बिछ गयी…पूरा कवर कर लिया उसके कम ने उसकी नाभि को…वो दिखाई भी नही दे रही थी …उपर से चल रहे शावर ने धीरे-2 उसके गाड़े रस को पानी मे मिला कर वहाँ से गायब कर दिया ….
श्वेता : “वाव …..इतना स्टॉक इकट्ठा कर रखा था तुमने तो …मैने आज से पहले ऐसा कुछ देखा ही नही था …”
नितिन : “मैने बोला था ना, अपने हाथों की वजा से इसको सही से ट्रीट नही कर पा रहा था…थैंक्स ….तुम्हारी वजह से ही मैं आज रिलिव हो पाया हू ….”वो मुस्कुरा दी..
श्वेता : “अछा मुझे एक बात बताओ ….तुम कितने दीनो के बाद मास्टरबेट करते हो …”
नितिन : “रोजाना …मीन्स, एक्सीडेंट से पहले तो अब तक रोज ही करता था …”
श्वेता : “तब तो वो रुटीन बनाकर रखना पड़ेगा …मैं अब तुम्हे रोज ही ऐसे हेल्प किया करूँगी ..ओके ..”नितिन की खुशी का ठिकाना ही नही रहा ..
श्वेता उसके बदन को टावल से पोंछने लगी ..नितिन अब पूरा नंगा खड़ा था उसके सामने, वो बदन सॉफ करती हुई अपने घुटनों पर बैठकर उसकी टांगे सॉफ कर रही थी, और फिर उसने उसके लॅंड को आराम-2 से सॉफ करना शुरू किया, उसने देखा की वो फिर से अकड़ रहा है ..और कुछ ही सेकेंड मे वो फिर से खड़ा होकर उसके सामने हुंकार रहा था …पहले से ज़्यादा ..पहले से लंबा होकर…अगले दो-तीन दिनों तक श्वेता ने हर रोज अपने भाई के लंड की मालिश करके उसका तेल निकाला…नितिन को तो अपनी किस्मत पर विश्वास ही नही हो रहा था की उसकी हॉट सिस्टर रोजाना उसे नहलाते हुए मास्टरबेट भी करवाती है …और दूसरी तरफ श्वेता ने भी अपने भाई के लंड को एक खिलोने की तरह देखना शुरू कर दिया था जिसके साथ वो रोजाना खेलती थी..
चोथे दिन, जब श्वेता नितिन को नहला रही थी तो नितिन ने झिझकते हुए अपने दिल की बात बोल ही दी…
नितिन : “श्वेता, मुझे कुछ कहना है…पर पता नही तुम क्या सोचोगी इसके बारे मे…” उसने अपनी नज़रें चुराते हुए कहा..
श्वेता : “अब मैं तुम्हारे पेनिस को हाथ मे लेकर रोज तुम्हारा मास्टरबेट करती हू, इसके मद्देनजर तो तुम मुझसे कुछ भी पूछ या बोल सकते हो …बताओ क्या बात है …”उसने अपनी लंबी और पतली उंगलियाँ से नितिन की बॉल्स को सहलाते हुए कहा..
नितिन : ” देखो..मुझे भी बात को घुमा फिराकार बोलना अच्छा नहीँ लगता…”उसने एक लंबी साँस ली और एक ही झटके मे बोला : “क्या तुम अपनी ब्रा उतार सकती हो मुझे मास्टरबेट करवाते हुए …”एक ही साँस मे अपने दिल की बात बोलकर वो साँसे रोककर उसके उत्तर की प्रतीक्षा करने लगा …श्वेता का दिमाग़ भी एकदम से चकरा गया…दोनो के मन मे काफ़ी आगे निकलने की चाह थी, पर इतना जल्दी भी नही..वो धीरे से बोली : “मुझे पता है…जो हम दोनो कर रहे है ये भी काफ़ी ज़्यादा है हमारे रिश्ते के हिसाब से…पर जो तुम चाहते हो उसके लिए मुझे सोचने का समय चाहिए …”नितिन खुश था की उसने उस हिसाब से रियेक्ट नही किया जैसा उसने सोचा था..वो सोचेगी, यही बहुत था उसके लिए…
नितिन : “ओके , नो प्राब्लम, तुम सोच लो …कोई प्रेशर नही है की तुम मेरी ये बात मान ही लो, तुम्हे सही लगे तभी करना…दरअसल.. मैं रोज सोते हुए बस यही सोचता हू की तुम्हारी ब्रेस्ट कैसी लगती होगी..कैसी दिखती होगी..इन्हे फील करने मे कैसा एहसास होगा…”श्वेता भी सोचने लगी…वो आख़िर क्या करेगा मेरी ब्रेस्ट को देखकर…शायद उसे ज़्यादा उत्तेजना मिलेगी..क्या वो उन्हे टच भी करेगा..और ब्रेस्ट को नंगा करने के बाद क्या वो मेरी चूत को भी देखेगा..वो भी तो उसे पूरा नंगा देख पा रही है..और जब वो अपनी चुचिया दिखा सकती है तो चूत को दिखाने मे क्या प्राब्लम है….और नितिन ने कहा की वो उसकी ब्रेस्ट के बारे मे रोज सोते हुए सोचता है…क्या सोचता होगा…उन्हे टच करने के बारे मे ..उन्हे चूसने के बारे मे…
और ये सब बाते सोचते-2 उसकी चूत इतनी बुरी तरह से गीली हो रही थी की उपर से बहता हुआ पानी भी उसकी चूत का गाडापन हल्का नही कर पा रहा था.आख़िर मे उसने सोचा की इसमे कोई बुराई नही है…जो होगा, देखा जाएगा…और बिना कुछ बोले, उसने अपने हाथ पीछे किए और अपनी ब्रा के क्लिप्स खोल दिए..और अपनी ब्रा को निकालकर साईड मे रख दिया.नितिन की आँखे चुधिया गयी उसकी गोलाइयाँ देखकर …उसपर लगे हुए निप्पल्स को देखकर..नितिन :”ओह्ह्ह्ह्ह ….वाव ….ये बिल्कुल पर्फेक्ट है ….जैसा मैने सोचा था ….ठीक वैसे ही …”
श्वेता (शरमाते हुए) : “तुम ये इसलिए कह रहे हो ना की मैं कही इन्हे फिर से ना छुपा लू …”
नितिन : “अरे नही …मेरा विश्वास करो ..ऐसी ब्रेस्ट मैने कभी नही देखी, मैने नेट पर भी काफ़ी ब्रेस्ट देखी है …पर इतनी पर्फेक्ट नही…ज़्यादातर लड़कियों की लटकी हुई होती है, किसी के छोटे या फिर किसी के काफ़ी बड़े..जो देखने मे भी अच्छे नही लगते …और तुम्हारे निप्पल्स …वाव ..छोटे-2 और गुलाबी रंग के उभरे हुए निप्पल ऐसे लग रहा है जैसे दो हीरे लगा रखे है तुम्हारी ब्रेस्ट पर …”अपनी ब्रेस्ट के बारे मे इतनी सारी बाते सुनकर वो शर्म से गड़ी जा रही थी …और साथ ही साथ खुश भी हो रही थी , वो हंसते हुए बोली : “हा हा , लगता है तुमने काफ़ी सोच रखा था मेरी ब्रेस्ट के बारे मे , तभी इन्हे देखकर तुम्हारे मुँह से ये सब निकलता जा रहा है …”
नितिन : “हाँ , ये बात तो है …काश मेरे हाथों मे ये पट्टियां नही होती, तो मैं इन्हे छूकर भी देख सकता ..”
श्वेता : “अगर तुम्हारे हाथो मे ये पट्टियां नही होती तो शायद ये सब हो ही नही रहा होता …”उसकी बात भी सही थी ..फिर तो वो शायद खुद ही नहा रहा होता और खुद ही अपने हाथों से अपने लंड का पानी भी निकाल रहा होता.उसके बाद श्वेता ने उसके लंड को अपने हाथों मे लिया और उसे हिलाने लगी..नितिन की नज़रें उसके हिचकोले खा रहे मुम्मों पर ही थी..उसके खड़े हुए निप्पल्स मे एक अलग तरह की लाली आ चुकी थी …उसकी गोरी चुचियों पर हल्के हरे रंग की नसें चमकने लगी थी…यानी वो भी पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी ऐसा करते हुए.
नितिन : “अहह…..आज तो बहुत मज़ा आ रहा है …”श्वेता के मन मे अचानक एक शरारत आई…वो बोली : “थोड़ा और मज़ा लेना चाहोगे…?”नितिन के लिए तो ये भी बहुत था आज के लिए, और अगर उसकी बहन कुछ और भी देना चाहती है तो वो क्यो मना करेगा…उसने झट से हाँ बोल दिया..श्वेता ने उसकी आँखों मे देखते हुए अपनी दोनो ब्रेस्ट को पकड़ा और नितिन के लंड को उन दोनो के बीच मे फँसा कर उसे टिट फक करने लगी..अपने लंड को मिल रही मुलायम मसाज और श्वेता के मुँह से निकल रही तेज साँसों को अपने पेट पर महसूस करते ही नितिन की हालत खराब होने लगी..उसके लंड पर काफ़ी साबुन लगा हुआ था, इसलिए वो उसके मुम्मों के बीच काफ़ी आसानी से उपर नीचे फिसल रहा था…अपने दोनो निप्पल्स को अपनी उंगलियों से दबाती हुई वो नितिन के लंड को अपनी गहरी घाटियों के बीच फँसा कर उसे उसके जीवन की पहली टिट फकिंग करवा रही थी..अचानक उसने कुछ ऐसा किया जिसकी नितिन को उम्मीद भी नही थी..उसने अपना मुँह थोड़ा सा नीचे किया और नितिन के सुपाड़े को अपने लरजते हुए होंठों के बीच लेजाकर एक जोरदार चुप्पा मारा…और उसके लंड के उपर आ रहा प्रीकम उसने एक ही झटके मे चाट डाला…
नितिन : “अहह…….उफफफफफफ्फ़ ”श्वेता अपने आपको किसी रिमोट से कम नही समझ रही थी..वो अपनी एक-2 हरकत से नितिन के पूरे शरीर को झटके मारने पर मजबूर जो कर रही थी..अब श्वेता ने अपने मुम्मे सिर्फ़ ज़ोर से दबा कर पकड़े हुए थे…बाकी का काम नितिन कर रहा था…अपने लंड से तेज झटके मारकर वो उसके मुम्मे चोदने मे लगा हुआ था.ये सब करते हुए श्वेता सोच रही थी की उसके भाई का लंड कैसा लगेगा जब वो उसकी पुसी को चीरता हुआ अंदर तक जाएगा..उसका मोटा लंड उसकी चूत को चीरता हुआ जब अपनी जगह बनाएगा तो कैसा महसूस होगा उसको…वो ये सब सोच ही रही थी की नितिन के लंड से पिचकारियाँ निकलनी शुरू हो गयी…हर एक बूँद को श्वेता ने अपने सीने पर झेल लिया..उसके दोनो पर्वत नितिन की बर्फ से ढक कर सफेदी मे नहा गये..
और अपने सीने पर नितिन के अंगारों को महसूस करते ही वो एकदम से होश मे आई…एक टावाल लेकर वो अपने कमरे की तरफ भागती चली गयी…सिर्फ़ अपनी कच्छी मे.अपने रूम मे पहुँचकर उसने अपनी पेंटी उतार फेंकी, दरवाजा बंद करके वो बिस्तर पर लेट गयी और ज़ोर-2 से अपनी गीली चूत का पानी निकालने लगी…उसकी नज़र अपने ड्रेसिंग टेबल पर पड़े ब्रश पर गयी…जिसका पिछला हिस्सा काफ़ी स्मूथ और गोल सा था, वो उसने उठाया और नितिन के लंड के बारे मे सोचते हुए उसे अंदर बाहर करने लगी…और ऐसा करते हुए वो बस यही सोच रही थी की वो हेयर ब्रश नही , नितिन के लंड को अंदर ले रही है…और अपने भाई के बारे मे सोचते हुए जब वो झड़ी तो ऐसा ऑर्गॅज़म महसूस किया उसने जो आज तक कभी नही किया था…उसने उठ कर देखा तो उसकी पूरी चादर गीली हो चुकी थी..जिसे देखकर उसके होंठों पर एक मीठी मुस्कान तैर गयी.तभी उसका फोन बजने लगा..उसने उठा कर देखा तो केतन था .उसने मुस्कुराते हुए फोन उठाया..
केतन : “डार्लिंग..क्या कर रही हो…”वो भी मस्ती के मूड मे थी, वो बोली : “बस ….अपनी नन्ही दुल्हनिया को अभी-2 शांत किया है…”
केतन : “वाव ….. यार मुझे बुला लिया होता…हमारे हिस्से के काम तुम अपनी उंगलियों से क्यो करवाते हो..”
श्वेता : “उसके लिए टाइम निकालना पड़ता है..समझे …”
केतन : “उसके लिए ही तो फोन किया है…एक नयी मूवी आई है ..बड़े सेक्सी सीन है उसमे …चलो ना देखने चलते है, शाम को..”
श्वेता : “आज शाम को तो मुझे अपनी फ्रेंड काव्या से मिलना है, काफ़ी दिन हो गये हैं हम दोनो कही घूमने नही गये..उसके साथ पहले से प्रोग्राम फिक्स है मेरा…”
केतन : “अरे कोई बात नही, उसको भी साथ ले चलते हैं, मैं 3 टिकेट्स बुक करवा लेता हू ..”वो किसी भी तरह अपनी हॉर्नी गर्लफ्रेंड से मिलना चाहता था आज ..श्वेता के सामने कोई और चारा नही था ..उसने हाँ कर दी .और उसके बाद उसने काव्या को फोन करके सब बताया …
काव्या भी केतन से मिलना चाहती थी ,क्योंकि जब से श्वेता ने अपनी चुदाई के बारे मे उसे बताया था, वो कई बार केतन के नाम की मूठ मार चुकी थी ..मिलने का टाइम फिक्स हो गया और शाम को तीनो एक मल्टिपलेक्स के सामने मिले और अंदर चल दिए..केतन ने टिकट ले ली , मूवी स्टार्ट होने मे अभी थोड़ा टाइम था, इसलिए तीनो एक रेस्टोरेंट मे जाकर बैठ गये..केतन ने सबके लिए बियर ऑर्डर कर दी, श्वेता और केतन तो काफ़ी बार बियर पी चुके थे पर काव्या ने आज तक नही पी थी, पर केतन के सामने वो मना करके कोई सीन नही बनाना चाहती थी, इसलिए जब बियर आई तो उसने भी ग्लास उठा लिया और पी ली, शुरू मे थोड़ी कड़वी लगी पर ठंडी बियर का सरूर जब चड़ने लगा तो उसे भी मज़ा आने लगा, पूरा ग्लास पीने के बाद वो अपने आपको काफ़ी हल्का महसूस कर रही थी..

