Update 48
दोनो अब पेंटी और ब्रा मे थी बस..
श्वेता : “साली, तूने तो इतने मज़े ले लिए, अब तो मेरे से भी आगे निकल गयी है तू”.
और इतना कहकर उसने काव्या की ब्रा और पेंटी नोचकर फेंक दी, और उसके छोटे-2 मुम्मों को ज़ोर से मसल दिया ..
दोनो जब भी उत्तेजित होती थी तो एक दूसरे को गालियाँ देकर बाते करती थी.
काव्या : “अहह, यु बिच …धीरे कर ना, दर्द होता है…..और मैं तेरे से आगे नही निकली हू, मेरी चूत की पेकिंग अभी तक सलामत है”
उसने अपनी डबलरोटी जैसी चूत के उपर अपनी उंगलियों को नचाते हुए कहा
उसकी गुलाबी चूत देखकर श्वेता के मुँह मे पानी भर आया, वो झपटकर उसके पास पहुँची और उसे बेड पर लिटा कर उसकी चूत के अंदर अपनी दो उंगलिया घुसेड़ डाली और झुककर उसके निप्पल को मुंह में डालकर चूसने लगी
और फिर वो खिसककर नीचे की तरफ जा पहुंची और उसकी नमकीन चूत के ऊपर अपनी जीभ रख कर अंदर घुसेड़ डाली
”अहह एसस्स्स्स्स्सस्स ऐसे ही चूसा था लोकेश अंकल ने भी …..अहह और अंदर डाल ना अपनी जीभ कुतिया …….एसस्स्सस्स अहह ऐसे ही ….उम्म्म्ममममममम ”
उसकी जीभ के साथ – 2 ढेर सारी लार भी उसकी गुल्लक के अंदर जाकर उसे और गीला कर रही थी
बेडशीट पूरी तरहा से भीग चुकी थी
अचानक काव्या को महसूस हुआ की वो झड़ने वाली है, उसने तुरंत श्वेता को उपर की तरफ खींच लिया और अपने ऑर्गॅज़म को थोड़ी देर के लिए टाल दिया, क्योंकि वो इतनी जल्दी नही झड़ना चाहती थी, उपर खींचने के बाद वो उसके फूल जैसे होंठों पर लेगे अपनी चूत के शहद को चाटने लगी
दोनो की चूतें एक दूसरे से रगड़ खा रही थी
अपने ओर्गास्म को थोड़ा शांत करने के बाद काव्या ने घूमकर श्वेता को 69 की पोज़िशन मे जकड़ लिया और दोनो ने एक दूसरे की दहक रही भट्टी पर अपने-2 होंठ रख दिए और एकसाथ दोनो सिसक भी उठी
”उम्म्म्ममममम…….सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स
ऐसी मक्खन जैसी चिकनी चूत जब किसी के मुँह से लगती है तो ऐसी ही आवाज़ें आती है
श्वेता बुदबुदाई : “ज़रा चूस कर बता, कैसे चूसा था तूने अपने लोकेश अंकल का लॅंड….”
इतना सुनते ही जैसे काव्या के अंदर किसी उर्जा का संचार हो गया, उसने अपने दोनो हाथों से उसकी चूत के होंठों को पकड़ा और जैसे ही माँस इकट्ठा होकर उभरा, उसने उस उभरे हुए भाग को अपने मुँह मे लेकर किसी लॅंड की तरहा चूसना शुरू कर दिया,
और इस समय काव्या को ऐसा लग रहा था की 69 की पोज़िशन मे वो श्वेता के साथ नही बल्कि लोकेश अंकल के साथ ही है, उनका मोटा ताज़ा लॅंड निगल रही है और वो उसकी चूत को चूस कर उसकी मलाई चाट रहे है
श्वेता की तितली के पंख जैसी छूट जब काव्या के मुँह मे गयी तो वो तड़प उठी, उसे लगा की शायद उसने लोकेश के बारे मे पूछकर और काव्या को उसके लॅंड चूसने के बारे मे याद दिलाकर कोई ग़लती की है, पर जब उसकी चूत के बीच फँसा हुआ मोती काव्या के मुंह के अंदर उभरा और उसने उसे चुभलाया और हल्का सा काटा तो उसकी चिंताए दूर हो गयी और वो आनंद सागर मे गौते खाकर भरभरा कर झड़ने लगी
”अहह …..उफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ ….काव्य्ाआआआआआआ …..उम्म्म्मममममममम ….एसस्स्सस्स”
और काव्या के मुँह मे जब मीठे शहद की नदी ने प्रवेश किया तो उसकी खुद की झील का झरना श्वेता के मुँह मे गिरकर उसकी प्यास बुझाने लगा..
”उम्म्म्मममममम….अहह”
दोनो के चेहरे ऐसे लग रहे थे जैसे उनपर आमरस मल दिया हो बहुत सारा.
दोनो ने एक दूसरे के आमरस को चाटकार सॉफ किया और फिर एक दूसरे के गले से मिलकर अठखेलिया करने लगे
और जब वो ये सब कर रहे थे तो वो ये नही जानते थे की उन्हे कोई देख रहा है दरवाजे की औट से …
और वो था श्वेता का भाई नितिन

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